आज ही करें यह काम आपका पशु देने लगेगा 10% अधिक दूध

गाय को रहने के लिए साफ-सुथरा स्थान और आराम से बैठने के लिए गद्देदार बिछावन मिलने से वह खुश होती है और दस प्रतिशत अधिक दूध दे सकती है जिससे किसानों की आय काफी बढ़ सकती है।वैज्ञानिक अध्ययनों में पाया गया है कि मनुष्य की तरह दुधारू पशु भी सर्दी-गर्मी एवं सुख-दुख का अनुभव करते हैं।

गाय को गद्देदार बिछावन पर आराम करने की सुविधा मिलने पर उसमें दूध उत्पादन की क्षमता दस प्रतिशत तक बढ़ सकती है। रबड़ की सीट या गद्देदार बिछावन मिलने पर गाय अधिक समय तक आराम करती है जिससे उसके शरीर में खून का संचार 25 से 30 प्रतिशत बढ़ जाता है जिसकी वजह से दूध का उत्पादन बढ़ता है।

एक लीटर दूध पैदा करने के लिए लगभग 500 लीटर खून को अयन की दुग्ध ग्रंथियों से गुजरना पड़ता है। एक गाय एक दिन में अपने आराम के लिए 10 से 15 बार बैठती या खड़ी होती है। यदि गाय गद्देदार बिछावन मिलने पर एक बार में एक मिनट ही अधिक आराम करे तो दिन भर में उसे कम से कम दस मिनट अधिक आराम का समय मिल जाता है।

आराम की अवधि के दौरान उसमें खून का दौरा सवा गुणा बढ़ जाता है। इस प्रकार उसे एक साल में 60 घंटे अधिक आराम मिल सकता है। गाय अधिक समय तक आराम करती है जिससे प्रति घंटे 1.7 किलोग्राम अधिक दूध मिल सकता है अर्थात 60 घंटे में 102 किलोग्राम दूध का उत्पादन बढ़ सकता है।

राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान संस्थान, करनाल के वरिष्ठ वैज्ञानिक अश्विनी कुमार राय ने अपने अध्ययन में कहा है कि गाय कंक्रीट के बने फर्श पर नहीं बैठना चाहती है। इस पर बैठना उसके लिए कष्टदायक है। वह नर्म मुलायम बिस्तर पर बैठना अधिक पसंद करती है। गाय एक दिन में करीब 12 घंटे बैठना पसंद करती है।

आराम की जगह साफ-सुथरी और सूखी हो तो इससे पशुओं में चर्मरोग नहीं होता है। गाय के बैठने के स्थान पर बालू का प्रयोग किया जा सकता है या फिर धान के पुआल से उसका गद्देदार बिछावन तैयार किया जा सकता है। गाय जितना अधिक समय तक आराम में रहती है उसकी मांसपेशियां स्वस्थ रहती है क्योंकि इस दौरान उसे पर्याप्त मात्रा में रक्त और आवश्यक पोषण मिलता है।

वैज्ञानिक दुधारू पशुओं को अधिक आराम देने के लिए ग्रूमिंग ब्रश के प्रयोग की सलाह देते हैं। ऐसे ब्रश के उपयोग से पशुओं को अधिक आराम मिलता है। रक्त का संचार बढ़ता है। इससे उनमें तनाव नहीं होता है और दूध का उत्पादन बढ़ जाता है। गाय को जब एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाया जाता है तो सफर के कारण उसमें तनाव हो जाता है जिससे दूध उत्पादन में कमी आती है। दूध दुहने वाले व्यक्ति के बदलने पर भी दूध उत्पादकता में कमी आ सकती है।

कई बार गाय के बछड़े को उससे अलग करने पर वह तनाव में आ जाती है और इससे दूध उत्पादन कम हो सकता है। अच्छी बात यह कि गाय को चराने से उसका व्यायाम हो जाता है जिससे उसमें रक्त संचार बढ़ जाता है। इस दौरान उसे ताजी हवा और धूप मिलती है जिससे उसकी त्वचा साफ और चमकदार बनी रहती है। त्वचा साफ रहने पर परजीवियों का संक्रमण नहीं होता है और वह खुश रहती है जिससे अधिक दूध का उत्पादन हो सकता है ।

बहुत तेज़ी से खरपतवार निकालने के लिए करें इस यंत्र का इस्तेमाल, सिर्फ 600 है कीमत

फसलों मे नदीनो को निकालना बहुत महत्वपूर्ण होता है, खरपतवारों के कारण फसलों का 50% नुक़्सान हो जाता है। खेत में नदीनो को हटाने के लिए ट्रैक्टर का प्रयोग किया जाता है।

ट्रैक्टर के द्वारा नदीनो  को निकालना महंगा पड़ता है। हम हर जगह ट्रैक्टर का उपयोग नहीं कर सकते हैं, इस वजह से फसलों को बहुत नुकसान होता है।

किसान भाई ने एक उपकरण विकसित किया है। इस दुवारा आसानी से सब्जियों, गन्ना, कपास, और खेतों की मेड़ो पर नदीनो को निकाला जा सकता है।

नदीनो को फावड़े से निकालने के दौरान कई बार फसल का नुकसान हो जाता है लेकिन इस यंत्र से फसल नुकसान के बिना नदीनो को निकाला जा सकता है। फावड़े के साथ जो काम पूरे दिन मे होता है, इस यंत्र के साथ 2 घंटे में हो जाता है। इस यंत्र की कीमत 600 रुपए है।

वीडियो देखें

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कृषि कार्य
ढिल्लों रोड साहनेवाल जिला लुधियाना
सम्पर्क – 9855491616, 9988061616

जाने 17 रुपये किलो में 19:19:19 स्प्रे को घर पर त्यार करने का तरीका

19:19:19 स्प्रे को पौधों के लिए बहुत ही उपयोगी माना जाता है | इसके इस्तेमाल से फसल की ग्रोथ बढ़िया होती है इस लिए बहुत सारी फसलों में इसका प्रयोग होता है | लेकिन यह उपयोगी उर्वरक बहुत ही महंगा पड़ता है |बाजार में इसकी कीमत 150 रुपये किलो के करीब है | लेकिन आप इसको घर पर सिर्फ 17 रुपये किलो के हिसाब से भी त्यार कर सकते है |

बाजार में किसान की इस 19:19:19 स्प्रे से बहुत लूट की जाती है क्योंकि इसको एक किलो बनाने का खर्च सिर्फ 15-17 के करीब होता है |

कैसे त्यार करें 19:19:19 स्प्रे

इस स्प्रे को बनाने के लिए हमे यूरिया,डी.ऐ,पी और पोटाश चाहिए जो हर किसान के पास आसानी से मिल जाती है | 19:19:19 स्प्रे इन तीनो से मिलकर ही बना होता है बस अब यूरिया,डी.ऐ,पी और पोटाश को एक खास अनुपात में मिलाकर पानी में घोलना होता है और हमारी 19:19:19 स्प्रे त्यार

19:19:19 स्प्रे के लिए हमे चाहिए

  • यूरिया =500 ग्राम
  • डी.ऐ,पी = 1 किलो
  • पोटाश =500 ग्राम

इन तीनो में से डी.ऐ,पी एक दिन पहले पानी में घोल ले क्योंकि यह घुलने में ज्यादा समय लेती है साथ ही इसके घोल को एक बार छान ले क्योंकि यह नोज़ल जाम कर देती है | बाकि दोनों का घोल मौके पर त्यार कर सकते है तीनो का घोल त्यार करके तीनो को मिला सकते है और ऐसे आपका 19:19:19 स्प्रे त्यार हो जयेगा |

अधिक जानकारी के लिए विडियो देखे :

आ गया 6750 रूपए कीमत का नैनो बायोगैस प्लांट

यह नैनो बायोगैस प्लांट (nano bio gas plant)बायोटेक इंडिया जो के केरला में है द्वारा त्यार क्या गया है । इसमें आप पशुओं का गोबर ,गली सड़ी सब्जियां ,या फिर कोई भी जैविक कचरा डाल सकते है ।

बायोटेक इंडिया की तरफ से नैनो बायोगैस प्लांट के दो मॉडल त्यार किए गए है । पहला मॉडल 45 लीटर का है और दूसरा मॉडल 160 लीटर का है । छोटा मॉडल 10 -20 लीटर गैस पैदा करता है जब की बड़ा मॉडल 30 – 50 लीटर बायोगैस पैदा करता है ।

दोनों मॉडल के ऊपर एक फ्लोटिंग टैंक है । जिसमे गैस भर जाने पर वो ऊपर आ जाता है । छोटे मॉडल का मूल्य 6750 रु और बड़े मॉडल का मूल्य 9950 रु है ।यह मॉडल इतने छोटे होते है के आप इन्हे अपनी रसोई में भी रख सकते है इसके इलावा आप इसको एक जगह से दूसरी जगह पर आसानी से ले कर जा सकते है ।

फ़िलहाल इन मॉडल को स्कूल,कॉलेज, यूनिवर्सिटी में बच्चों को जैविक ऊर्जा के बारे में जागरूक करने के लिए इस्तेमाल क्या जा रहा है । लेकिन आप इसे घर पर भी इस्तेमाल कर सकते है ।

इस दोनों नैनो मॉडल के इलावा भी बायोटेक कंपनी कुश बड़े मॉडल भी त्यार करती है जो इस से ज्यादा गैस पैदा कर सकते है और आपको किसी भी तरह की एलपीजी गैस की जरूरत नहीं पड़ती ।

बायोटेक इंडिया सारे भारत में होम डिलीवरी भी करती है जिसका कोई अलग से खर्चा नहीं लिया जाता । हर बायोगैस प्लांट के साथ एक चूल्हा और जरूरी सामान दिए जाता है ।

इस मॉडल और दूसरे मॉडल को आप ऑनलाइन इंटरनेट पर पैसे दे कर ले सकते है ।ज्यादा जानकारी के लिए बायोटेक इंडिया के वेबसाइट(biotech-india.org) पर चेक करें जा फोन 91-471-2331909 पर संपर्क करें ।इसके इलावा भी आप ई कॉमर्स वेब्सीटेस जैसे snapdeal ,Amazon India आदि वेब्सीटेस से भी मंगवा सकते है

ध्यान रहे यह सारी जानकारी इंटरनेट से ली गई है इस लिए कोई भी आर्डर करने से पहले अपनी तरफ से पूरी तसल्ली कर ले ।

नैनो बायोगैस कैसे काम  करता है वीडियो भी देखें 

बेकार प्लास्टिक की बोतल से ऐसे बनायें चूहा पकड़ने का ट्रैप

चूहों की संख्या मई-जून माह में कम होती है, यही समय चूहा नियंत्रण अभियान के लिए सही समय होता है, यह अभियान सामूहिक रूप में चलाना चाहिए। चूहे खेत खलिहानो, घरों और गोदामों में अनाज खाने के साथ-साथ ही अपने मलमूत्र से अनाज बर्बाद कर देते हैं।

एक जोड़ी चूहा एक वर्ष में 800-1000 की संख्या में बढ़ जाते हैं,अगर चूहों के संख्या कम हो तो आप प्लास्टिक की बोतल का ट्रैप बना कर भी चूहों को पकड़ सकते है ।इस तरिके से आप को कोई खर्चा भी नहीं होगा और किसी खतरनाक दवाई की भी जरूरत नहीं पड़ेगी ।

इस तरीके से आप घर पर भी आसानी से चूहों को पकड़ सकते हैं। आज हम आपको बताते है कि कैसे आप घर पर चूहे पकड़ने की मशीन बना सकते है।

जरूरत का सामान

  • प्लास्टिक की बोतल
  • कैंची
  • स्टिकस
  • रबड़ बैंड
  • थ्रेड
  • यू क्लिप

बनाने का तरीका

  1. सबसे पहले प्लास्टिक की बोतल का ऊपरी हिस्सा कैंची से काट लें। ध्यान रखें कि उसे सिर्फ एक ही साइड से काटना है।
  2. अब बोतल के दोनों हिस्सों पर दो इंच के गेप से दाए और बाए साइड होल करके दो स्टिक्स आड़ी फंसा दें।
  3. ध्यान रखें कि ये दोनों स्टिक्स पैरेलर हो। अब इन दोनों स्टिक्स पर रबड़ बैंड दोनों ओर फंसा दें।
  4. अब एक मजबूत धागा लें और बोतल के मुंह में लगाकर ढक्कन बंद कर दें। इस बात का ध्यान रखें कि धागे की लंबाई इतनी होनी चाहिए कि उसेे खिंचने पर बोतल का कटा हिस्सा खुल सकें।
  5. अब यू क्लिप का किनारा सीधा करके उसमें खाने की चीज फंसा दें। इसे बोतल के अंदर हाथ डालकर तली से बाहर निकालें।
  6.  धागे के हिस्से पर नॉट बनाकर इस यू क्लिप के बाहर निकले नुकीले हिस्से पर लटका दें।

इस ट्रैप को कैसे बनाते है इसके लिए वीडियो देखें

बासमती की इस किस्म में नहीं लगेगा रोग, होगा अच्छा उत्पादन

दुनिया भर में बासमती चावल उत्पादन में नंबर एक भारत में पिछले कई वर्षों से बासमती चावल में रसायनों की अधिक मात्रा निर्यात में रोड़ा बन रही है, लेकिन बासमती की ये नई किस्म रोग अवरोधी होने के कारण इसमें रसायन का छिड़काव नहीं करना पड़ेगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने पूसा बासमती-1 से नई किस्म पूसा बासमती 1637 विकसित की है। ये किस्म रोग अवरोधी हैं, इनमें गर्दन तोड़ (ब्लास्ट) रोग नहीं लगता है, जिससे इसमें रसायन का स्प्रे नहीं करना पड़ेगा या बहुत कम मात्रा में करना पड़ेगा।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान के वैज्ञानिक डॉ. दीपक सिंह बताते हैं, “इस किस्म को हमने पूसा बासमती-1 से विकसित किया है, जिसमें फंजाई से होने वाला रोग गर्दन तोड़ और ब्लास्ट रोग नहीं लगेगा, जिससे किसानों को फायदा होने वाला है।” वो आगे बताते हैं, “इस किस्म के बीज के लिए किसान पूसा में सम्पर्क कर सकते हैं, जहां से किसानों को सही दाम पर बीज मिल जाएगा।”

किसान व बासमती निर्यातकों को इसका फायदा होने वाला है। दोनों किस्मों के चावल यूरोप में एक्सपोर्ट होते हैं। बीमारी आने पर किसान ज्यादा स्प्रे करते थे, इस कारण जहर की मात्रा चावल में भी बढ़ जाती थी। इससे चावल यूरोप में कई बार रिजेक्ट हो जाता था, लेकिन अब नई किस्म में ऐसा नहीं होगा। इससे किसानों की आय भी बढ़ेगी।

इस किस्म को हमने पूसा बासमती-1 से विकसित किया है, जिसमें फंजाई से होने वाला रोग गर्दन तोड़ और ब्लास्ट रोग नहीं लगेगा, जिससे किसानों को फायदा होने वाला है। डॉ. दीपक सिंह, राष्ट्रीय पादप जैव प्रौद्योगिकी संस्थान ऑल इंडिया चावल एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अनुसार हर वर्ष देश में लगभग 8773.78 हजार टन बासमती चावल का उत्पादन होता है।

भारत बासमती चावल में विश्व बाज़ार का अग्रणी निर्यातक है। देश ने वर्ष 2016-2017 के दौरान विश्व को 21,604.58 करोड़ रुपए (यानि 3,230.24 अमेरिकी मिलियन डॉलर) मूल्य का 40,00,471.56 मीट्रिक टन बासमती चावल निर्यात किया था जिसमें प्रमुख रूप से सउदी अरब, ईरान, संयुक्त अरब अमीरात, इराक और कुवैत में बड़ी मात्रा में बासमती चावल गया था।

ऐसे में इस सला बासमती धान की खेती और पैदावार घटने से चावल के निर्यात पर असर पड़ेगा। ये भी पढ़ें- फेफड़े व स्तन कैंसर के खात्मे में मददगार छत्तीसगढ़ के ये तीन धान पूसा बासमती 1637 पूसा बासमती-1 का सुधरा हुआ रूप है। पूसा बासमती- 1 में ब्लास्ट (झोंका) रोग आने की संभावना ज्यादा रहती थी, लेकिन 1637 में यह बीमारी नहीं आएगी। इस किस्म में रोग रोधी क्षमता हैं, इसका प्रति एकड़ 22 से 25 कुंतल तक हो सकता है।

इन प्रदेशों में होती है बासमती की खेती

देश में पंजाब, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, जम्मू कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में किसान बासमती की खेती करते हैं, जिसमें पंजाब बासमती उत्पादन में अग्रणी राज्य है।

ये हैं बासमती की अन्य किस्में

भारत सरकार के बीज अधिनियम तहत वर्ष 1966 से अभी तक बासमती चावल की 29 किस्में खेती के लिए अधिसूचित की गई हैं, जिनका देश के 7 राज्यों के लगभग 81 जिलों में खेती की जाती है।बासमती चावल की प्रमुख किस्में में बासमती 217, बासमती 370, टाइप 3 (देहरादूनी बासमती) पंजाब बासमती 1 (बउनी बासमती), पूसा बासमती 1, कस्तूरी, हरियाणा बासमती 1, माही सुगंधा, तरोरी बासमती (एच.बी.सी 19/ करनाल लोकल), रणबीर बासमती, बासमती 386,

इम्प्रूव्ड पूसा बासमती 1 (पूसा 1460), पूसा बासमती 1121 (संशोधन के पश्चात्), वल्लभ बासमती 22, पूसा बासमती 6 (पूसा 1401), पंजाब बासमती 2, बासमती सी.एस.आर 30 (संशोधन के पश्चात्), मालविया बासमती धान 10-9 (आई.ई.टी 21669), वल्लभ बासमती 21 (आई.ई.टी 19493), पूसा बासमती 1509 (आई.ई.टी 21960), बासमती 564, वल्लभ बासमती 23, वल्लभ बासमती 24, पूसा बासमती 1609, पंत बासमती 1 (आई.ई.टी 21665), पंत बासमती 2(आई.ई.टी 21953), पंजाब बासमती 3, पूसा बासमती 1637 और पूसा बासमती 1728 जिनकी खेती की जाती है।

इस जुगाड़ से पशुओं को अपने आप खुरली (नांद) पर मिलता है पानी ,जाने पूरी तकनीक

सभी किसान भाईओं को पता है के किसी भी पशु को एक लीटर दूध पैदा करने के लिए कम से कम 3 लीटर पानी की जरूरत पड़ती है।

ज्यादतर किसान पशुओं को 2 से 3 बार पानी पानी पिलाते है लेकिन एक बार में पशु से ज्यादा पानी नहीं पी सकता इस लिए एक दो बार ज्यादा पानी पिलाने से अच्छा है के पशु अपनी जरूरत के हिसाब से पानी पी ले । इसका सीधा संबंध आप को पता चलेगा के पशु दे दूध देने की मात्रा में काफी इज़ाफ़ा होगा ।

लेकिन अब सवाल उठता है के पशु को बार बार पानी कौन पिलायेगा । इसका उतर है पशु खुद क्यूंकि अब एक ऐसा जुगाड़ आ गया है जिस से पशु की खुरली(नांद) के पास में लगा सकते है और जिसमे हमेशा पानी रहता है ।

जब भी पानी कम हो जाए इसमें अपने आप पानी भर जाता है । इसका एक फ़ायदा यह भी है के अगर आप किसी रिश्तेदारी में भी चले जाते है वहां पर पशुओं को पानी पिलाने की चिंता नहीं रहती इनको अपने आप ही पानी मिलता रहता है ।

इस पानी वाली छोटी टंकी को स्टील से बनाया जाता है । इसमें एक नल से पानी डाला जाता है ।इसमें वही सिस्टम लगा होता है जो हमारे पानी वाले कूलर में होता है । जैसे ही पानी कम होता है ये सिस्टम नल को खोल देता है जिस से पानी अपने आप आने लगता है इस सिस्टम को कोई भी बना सकता है यह कोई ज्यादा महंगा जुगाड़ नहीं है । कोई भी किसान इसको अपने घर पर त्यार कर सकता है ।

और ज्यादा जानकारी के लिए निचे दी हुई वीडियो जरूर देखें

अब ऑनलाइन अपने उत्पाद बेच सकेंगे किसान, लॉन्च हुआ ये ऐप

उर्वरक निर्माता कंपनी इंडियन फार्मर्स फर्टिलाइजर्स कोऑपरेटिव (इफ्को) ने किसानों के लिए ई-कॉमर्स प्लेटफार्म की शुरुआत की है. करीब 80 करोड़ की लागत और सिंगापुर बेस्ड कंपनी आईमंडी की साझेदारी से इफ्को ने ये प्लेटफार्म शुरू किया है. इसके लिए IFFCO iMandi नाम से ऐप और वेब पोर्टल शुरू किया गया है.

इफ्को ने एक बयान जारी कर बताया कि तकरीबन साढ़े पांच करोड़ किसान उसके इस नये ऐप इफ्को आईमंडी से फायदा उठा सकेंगे. इसके साथ ही इफ्को ने एक वेब पोर्टल की शुरुआत भी की.

इस सौदे के लिए इफ्को की सहयोगी इकाई इफ्को ई-बाजार लिमिटेड ने सिंगापुर की आईमंडी प्राइवेट लिमिटेड में 26 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है. बाकी 74 फीसदी हिस्सेदारी आई-टेक होल्डिंग्स एवं अन्य निवेशकों के पास है.

इस मौके पर कंपनी के प्रबंध निदेशक यूएस अवस्थी ने कहा कि देश भर में किसानों के बीच ऑनलाइन और डिजिटल लेन-देन के उपयोग का प्रचार-प्रसार करने के बाद इफ्को आईमंडी ऐप की शुरुआत कर रहा है. यह किसानों के लिए कृषि उत्पादों, उपभोक्ता उत्पादों (एफएमसीजी), इलेक्ट्रॉनिक्स, ऋण और बीमा आदि की खरीद के लिए वन स्टॉप शॉप होगा.

आईमंडी प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक वीके अग्रवाल ने इस मौके पर कहा कि इफ्को और आईमंडी इस बात को लेकर काफी आश्वस्त है कि भारतीय सहकारी डिजिटल प्लेटफार्म के माध्यम से हर एक घर और गांव में बड़े पैमाने पर सामाजिक बदलाव लाने में मदद मिलेगी. इसके साथ ही डिजिटल समावेशी तकनीक के चलते एक करोड़ लोग सशक्त हो सकेंगे.

कमाल की है यह दूध दुहने वाली मशीन, एक मिंट में निकलती है 2 लीटर दूध

देश के तमाम ग्रामीण इलाकों में गाय या भैंस का दुध दुहने में हाथों का इस्तेमाल किया जाता है और सदियों से यही पारंपरिक तरीका अपनाया जा रहा है। लेकिन जब से डेयरी फार्मिंग की नई-नई तकनीकें सामने आई हैं पारंपरिक तरीके पीछे छूटते जा रहे हैं। मिल्किंग मशीन यानी दूध दुहने की मशीन ने डेयरी फार्मिंग और पशुपालन की दुनिया में क्रांति ला दी है।

मशीन से दुध निकालना काफी सरल है और इससे दूध का उत्पादन भी 15 फीसदी तक बढ़ जाता है। मशीन से दूध निकालने की शुरुआत डेनमार्क और नीदरलैंड से हुई और आज यह तकनीक दुनिया भर में इस्तेमाल की जा रही है। आजकल डेरी उद्योग से जुड़े अनेक लोग पशुओं से दूध निकालने के लिए मशीन का सहारा ले रहे हैं।

पशुओं का दूध दुहने वाली मशीन को मिल्किंग मशीन के नाम से जानते हैं। इस मशीन से दुधारू पशुओं का दूध बड़ी ही आसानी से निकाला जा सकता है। इससे पशुओं के थनों को कोई नुकसान नहीं होता है। इससे दूध की गुणवत्ता बनी रहती है और उस के उत्पादन में बढ़ोतरी होती है। यह मशीन थनों की मालिश भी करती और दूध निकालती है।

इस मशीन से गाय को वैसा ही महसूस होता है, जैसे वह अपने बच्चे को दूध पिला रही हो। शुरुआत में गाय मशीन को लेकर दिक्कत कर सकती है लेकिन धीरे-धीरे इसे आदत हो जाती है और फिर मशीन से दूध दुहने में कोई दिक्कत नहीं होती।

मशीन से मिलता है स्वच्छ दूध

मिल्किंग मशीन से दूध निकालने से लागत के साथ-साथ समय की भी बचत होती है और दूध में किसी प्रकार की गंदगी नहीं आती। इस से तिनके, बाल, गोबर और पेशाब के छींटों से बचाव होता है। पशुपालक के दूध निकालते समय उन के खांसने व छींकने से भी दूध का बचाव होता है। दूध मशीन के जरीए दूध सीधा थनों से बंद डब्बों में ही इकट्ठा होता है.

मिल्किंग मशीन के बारे में जानकारी

मिल्किंग मशीन कई तरह की होती है। जो डेयरी किसान अपनी डेयरी में पांच लेकर पचास गाय या भैंस पालते हैं उनके लिए ट्रॉली बकेट मिल्किंग मशीन पर्यापप्त है। ये मशीन दो तरह की होती सिंगल बकेट और डबल बकेट। सिंगल बकेट मिल्किंग मशीन से 10 से 15 पशुओं का दूध आसानी से दुहा जा सकता है वहीं डबल बकेट मिल्किंग मशीन से 15 से चालीस पशुओं के लिए पर्याप्त है।

ट्रॉली लगी होने के कारण इस मशीन को फार्म में एक जगह से दूसरी जगह ले जाना सुविधाजनक होता है। दिल्ली-एनसीआर में डेयरी फार्म के उपकरण बनाने वाली कंपनी के सेल्स हेड और आधुनिक डेयरी फार्मिंग के जानकार रोविन कुमार ने बताया कि मशीन से दूध दुहने से पशु और पशुपालक दोनों को ही आराम होता है।

उन्होंने बताया कि मशीन के अंदर लगे सेंसर गाय के थनों में कोई दिक्कत नहीं होने देते और निर्वाध रूप से दूध निकलने देते हैं। उन्होंने बताया कि मशीन से दूध दुहने में 4 से 5 मिनट का वक्त लगता है, जिसमें कुल दूध का साठ फीसदी दूध शुरुआत के दो मिनट में निकल आता है और बाकी का बाद में।

आपको बता मिल्किंग मशीन  की कीमत 26000 रुपए  है । दिल्ली-एनसीआर में इन मशीनों को बनाने वाली कई कंपनियां हैं और पशुपालकों को ये मशीन आसानी से उपलब्ध है। लेकिन घबराने की जरूरत नहीं बगैर ट्राली के भी ये मशीने उपलब्ध हैं और रेट भी काफी कम हैं।

फिक्स टाइप मिल्किंग मशीन

फिक्स टाइप मिल्किंग मशीन को फार्म के एक हिस्से में स्थापित किया जाता है। इसमें जरूरत के हिसाब से एक से लेकर तीन बकेट तक बढ़ाया जा सकता है। इस मशीन के रखरखाव में खर्चा कम आता है और एक-एक कर पशुओं को मशीन के पास दुहने के लिये लाया जाता है। ये मशीन 15 से 40 पशुओँ वाले डेयरी फार्म के लिए पर्याप्त है।

मशीन से भैंस का दूध दुहना भी आसान

रोविन कुमार ने बताया की गाय और भैंस दोनों के थनों में थोड़ा अंतर होता है, मशीन में थोड़ा सा बदलाव कर इससे भैंस का दूध भी आसानी से दुहा जा सकता है। भैंस का दूध निकालने के लिए मशीन के क्लस्टर बदलने होते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, बिहार में मिल्किंग मशीन का प्रचल तेजी से बढ़ता जा रहा है। और लोग पारंकपरिक तरीके के बजाए मशीन के जरिए दूध दुहने को तवज्जो दे रहे हैं।

उत्पादन ज्यादा और लागत कम

एक और अहम बात है मशीन द्वारा दूध दुहने से दूध की मात्रा में 10 से 15 फीसदी बढ़ोतरी हो जाती है। मशीन मिल्किंग द्वारा दूध की उत्पादन लागत में काफी कमी तो आती ही है, साथ-साथ समय की भी बचत होती है। यानी परेशानी भी कम और दूध भी ज्यादा। इसकी सहायता से पूर्ण दुग्ध-दोहन संभव है जबकि परम्परागत दोहन पद्धति में दूध की कुछ मात्रा अधिशेष रह जाती है।

मशीन द्वारा लगभग 1.5 से 2.0 लीटर तक दूध प्रति मिनट दुहा जा सकता है. इसमें न केवल ऊर्जा की बचत होती है बल्कि स्वच्छ दुग्ध दोहन द्वारा उच्च गुणवत्ता का दूध मिलता है। इन मशीनों का रखरखाव भी बेहद सरल है, सालभर के मेंटिनेंस का खर्चा मात्र 300 रुपये आता है।

मिल्किंग मशीनों पर मिलती है सब्सिडी

कई राज्य सरकार मिल्किंग मशीनों की खरीद पर सब्सिडी भी दे रही है और बैंकों से इन्हें खरीदने के लिए लोन भी मिल रहा है। पशुपालकों को इसके लिए अपने जिले के पशुपालन अधिकारी और बैंकों के कृषि और पशुपालन विभाग के अफसरों से संपर्क करना चाहिए।

मशीन से दूध दुहने के दौरान बरतें सावधानी

अगर पशु के पहले ब्यांत से ही मशीन से दूध निकालेंगे तो पशु को मशीन से दूध निकलवाने की आदत हो जाएगी। शुरुआत में मशीन द्वारा दूध दुहते समय पशु को पुचकारते हुए उस के शरीर पर हाथ घुमाते रहना चाहिए, ताकि वह अपनापन महसूस करे। दूध दुहने वाली मशीन को पशुओं के आसपास ही रखना चाहिए ताकि वे उसे देख कर उस के आदी हो जाएं, वरना वे अचानक मशीन देख कर घबरा सकते हैं या उसकी आवाज से बिदक सकते हैं।

ज्यादा जानकारी के लिए आप निचे दिए पते पर संपर्क करें

Address: No.57, 3rd A Cross,
1st Main, Havanoor Extension,
Nagasandra Post, Hesaraghatta Main Road,
Bengaluru, Karnataka 560073

Phone: 094818 65059

अगले 48 घंटे में इन 10 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी, 6 राज्यों में अलर्ट

13 जुलाई यानी शुक्रवार को इंतजार के बाद दिल्ली-एनसीआर और लखनऊ में अच्छी बारिश से मौसम सुहाना हो गया है। IMD की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, अगले 24 घंटों में दिल्ली-एनसीआर सहित उत्तर भारत के कुछ राज्यों में अच्छी बारिश होने के संकेत हैं।

वहीं मौसम विभाग ने अगले 48 घंटों में देशभर के 10 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। वहीं, 6 राज्यों के अलग-अलग इलाकों में अलर्ट भी जारी किया है।

13 से 14 जुलाई को कैसा रहेगा मानसून

  • 13 से 14 जुलाई के दौरान गुजरात, कोंकण और गोवा में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
  • उत्तराखंड, पूर्वी राजस्थान, पूर्वी मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सौराष्‍ट्र, महाराष्‍ट्र, तेलंगाना, कोस्टल कर्नाटक और केरल में भारी से भारी बारिश हो सकती है।
  • हिमांचल, दिल्ली, एनसीआर, चंडीगढ़, पंजरब, हरियाणा और ओडिशा में इन 24 घंटों में अच्छी बारिश होने का अनुमान है।

14 से 15 जुलाई को कैसा रहेगा मानसून

  • 14 से 15 जुलाई के दौरान भी गुजरात, कोंकण और गोवा में भारी से बहुत भारी बारिश का अनुमान है।
  • 14 से 15 जुलाई के दौरान पूर्वी मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, सौराट्र, कच्छ, मध्‍य महाराष्‍ट्र, कोस्टल कनाटक, इंटीरियर कर्नाटक और केरल में भारी से भारी बारिश का अनुमान है।
  • वहीं, उत्तराखंड, ओडिशा, पश्चिमी मध्‍य प्रदेश, विदर्भ और तेलंगाना में भारी बारिश हो सकती है।

इन राज्यों में अलर्ट

मौसम विभाग की वेबसाइट के अनुसार उत्तराखंड, मध्‍य प्रदेश, पूर्वी व उत्तरी गुजरात, केरल, महाराष्‍ट्र, केरल और तेलंगाना में भारी बारिश को लेकर ऑरेंज या रेड अलर्ट जारी किया गया है।