अगर अच्छी फ़सल चाहिए, तो न जोतें खेत

कोई भी जंगल की ज़मीन को नहीं जोतता पर तो भी वहां पेड़-पौधे उगते हैं. संरक्षित खेती के तहत माना जाता है कि खेती के लिए ज़मीन जोतने की ज़रूरत नहीं खेत जोतने से ज़मीन सूख जाती है. कई फ़सलों में उनकी जड़ों को ज़मीन से पोषक तत्व लेने में रोक लगाती है और इससे मिट्टी के माइक्रोबियल गुणों पर भी असर पड़ता है.

इसलिए बोरलॉग इंस्टीट्यूट ऑफ़ साउथ एशिया भारत में कुछ बदलाव के साथ संरक्षित खेती की सलाह देता है.इस इंस्टीट्यूट का नाम नॉरमन बोरलॉग के नाम पर रखा गया है जिन्हें हरित क्रांति का जनक कहा जाता है.

इस इंस्टीट्यूट की शाखाएं लुधियाना, समस्तीपुर और जबलपुर में हैं.यह इंस्टीट्यूट उत्तरी-पश्चिमी भारत में जहां बाढ़ के पानी से सिंचाई होती है, बुआई से पहले लेज़र लेवलिंग की सलाह देता है ताकि थोड़े से पानी से बड़े खेत का काम चल जाए.

मगर मध्य भारत में जहां बड़े पैमाने पर सिंचाई के साधनों का इस्तेमाल होता है और ज़मीन की सतह लहरदार है, वहां लेज़र लेवलिंग की ज़रूरत नहीं है.संरक्षित खेती के तीन नियम हैं. पहला, बिल्कुल भी जुताई न करें या बहुत कम जुताई करें. दूसरा नियम कि पिछली फ़सल के डंठल खेत में ही छोड़ दें ताकि वह खेत की नमी बरकरार रखें और खेत में खरपतवार को दबाकर रखें और मिट्टी के जैविक गुण में इज़ाफ़ा करें.

 

तीसरे नियम के तहत मिट्टी में नाइट्रोज़न की मात्रा बढ़ाने के लिए फल लगने वाले फ़सलों की खेती की जाए. खेती का यह तरीका कम ख़र्चीला है क्योंकि इसमें जुताई की ज़रूरत नहीं पड़ती.मगर इसमें नए ज़माने के खरपतवार नाशकों की ज़रूरत पड़ती है जो अपने प्रभावों में मारक हों और मिट्टी में ज़्यादा दिनों तक जिसका असर न हो.

जिस हवा में हम सांस लेते हैं उसके लिए भी यह अच्छा है. छोटे-छोटे धूल के कण हवा को गंदा करते हैं. ठंड के दिनों में अलाव जलाने से यह प्रदूषण और भी बढ़ता है.

पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के खेतों में धान के पुआल जलाने के कारण इस तरह का प्रदूषण बढ़ता है.धान के पुआल में सिलिका ज़्यादा होता है, जिसे जानवर खाना पसंद नहीं करते. प्रतिबंध के बावजूद पूरे क्षेत्र में खेतों में अलाव जलाए जाते हैं. इसे अमरीकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के नक्शे में रेड स्पॉट के रूप में देखा जा सकता है.

अगर पुआल को खेत में ही छोड़ दें, तो प्रदूषण होने से बचाया जा सकता है.हरित क्रांति के दौरान भारत ने मिट्टी की गुणवत्ता को लेकर लापरवाही बरती क्योंकि उस वक़्त सारा ध्यान खाद्य सुरक्षा को लेकर था. लेकिन ये दोनों एक-दूसरे के विरोधाभासी नहीं हैं.

असल में मिट्टी की गुणवत्ता नज़रअंदाज करने से आगे खेती पर बुरा असर पड़ता है. भारत को बड़े पैमाने पर संरक्षित खेती अपनाने की ज़रूरत है.

समर्थन मूल्य के नीचे कृषि उत्पादों की खरीद मानी जाएगी अपराध

मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसानों के समर्थन में शुरू किया उपवास 28 घंटों बाद खत्म कर दिया। इस दौरान सीएम ने ऐलान किया कि केन्द्र द्वारा घोषित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के नीचे कृषि उत्पादों की खरीद को मध्यप्रदेश में आपराधिक कृत्य माना जाएगा।

इस दौरान सीएम ने यह भी घोषणा की कि खेती जमीन किसान की सहमति के बिना अधिग्रहित नहीं की जाएगी। पिछले कई दिनों से किसानों के आंदोलन का सामना कर रहे शिवराज सिंह चौहान ने 28 घंटे बाद रविवार को नारियल पानी पीकर अपना उपवास खत्म किया। सीएम ने कहा कि उन्होंने 2002 में सब्मिट की गई स्वामीनाथन कमिटी की रिपोर्ट पढ़ी, इसके आधार पर वह कई फैसले लेंगे। राज्य सरकार सभी म्यूनिसिपल इलाकों में ‘किसान बाजार’ खोलेगी। इसके अलावा दूध खरीदने के लिए अमूल डेयरी कॉपरेटिव्स की प्रणाली अपनाएगी।

उन्होंने ऐलान किया कि खसरा की कॉपी किसान को उसके घर पर पहुंचाई जाएगी। सीएम ने कहा, ‘किसानों को अब खसरा की कॉपी के लिए अधिकारियों और दफ्तरों के चक्कर नहीं काटने होंगे।’ अपना उपवास खत्म करने के बाद चौहान ने कहा कि वह एसी कमरों में बैठने वाले सीएम नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘जब-जब किसानों पर संकट आया, मैं मंत्रालय, सीएम हाउस से निकलकर खेतों तक गया।’ सीएम ने अपने संबोधन में भारतीय किसान संघ जैसे संगठनों को साथ देने के लिए शुक्रिया भी कहा। गौरतलब है कि एमपी में किसान आंदोलन के शुरुआती दिनों में सीएम से आश्वासन मिलने के बाद भारतीय किसान यूनियन ने अपना आंदोलन वापस ले लिया था।

मध्यप्रदेश के सीएम ने एक बार फिर मध्य प्रदेश में हिंसक प्रदर्शन करने वालों को अराजक तत्व कहा। शिवराज सिंह ने कहा कि कोई भी किसान दूध नहीं फेंक सकता। दूध फेंकने का काम अराजक तत्वों का है। उन्होंने मंदसौर घटना की उच्चस्तरीय जांच करा दोषियों पर कार्रवाई की बात कही, साथ ही कहा कि निर्दोष किसानों को चिंता करने की जरूरत नहीं है।

किसान आंदोलन रंग लाया, किसानो का कर्जा माफ़

महाराष्‍ट्र सरकार ने सभी किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला किया है. महाराष्ट्र के किसानों और राज्य सरकार के बीच रविवार को चली बैठक खत्म हो गई है.

बैठक के बाद सरकार ने सभी किसानों का कर्ज माफ करने का फैसला किया है. बैठक में तय किया गया है कि कर्ज़ माफ़ी के लिए सरकार और किसानों की कमेटी बनेगी और किसानों पर दर्ज मामले वापस लिए जाएंगे.

सरकार के इस फैसले के बाद किसान संगठनों ने सोमवार को आयोजित किया जाने वाला प्रदर्शन रद्द कर दिया है. उम्‍मीद है कि अब किसानों का आंदोलन समाप्‍त हो जाएगा.

राजस्व मंत्री चन्द्रकांत पाटिल ने कहा, ‘‘सरकार ने किसानों का कर्ज माफ करने का निर्णय किया है. सीमांत किसानों का सारा कर्ज आज से ही माफ किया जाता है.’’ मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति के अध्यक्ष पाटिल किसान नेताओं से चर्चा के बाद संवाददाताओं से बातचीत कर रहे थे.

वार्ता में भाग लेने वाले किसान नेता और लोकसभा सदस्य राजू शेट्टी ने कहा कि वह खुश हैं कि उनकी मांगें मान ली गयी हैं. शेट्टी ने कहा, ‘‘हमारे मुद्दे सुलझ गये हैं. हमने कल और परसों होने वाले धरना प्रदर्शन सहित अपना आंदोलन अस्थाई रूप से वापस लेने का फैसला लिया है. लेकिन, यदि 25 जुलाई तक (कर्ज माफी पर) कोई संतोषजनक फैसला नहीं लिया गया तो हम अपना आंदोलन फिर शुरू करेंगे.’’

अन्य किसान नेता रघुनाथदादा पाटिल ने कहा कि मंत्री ने आश्वासन दिया है कि किसानों का ‘सारा कर्ज’ माफ होगा. उन्होंने कहा, ‘‘फिलहाल दिवाली के त्योहार जैसा माहौल है. हमारी सभी, 100 प्रतिशत, मांगें मान ली गयी हैं.’’ उन्होंने कहा कि मंत्रीसमूह ने किसानों को आज से नये सिरे से कर्ज देना शुरू करने का फैसला लिया है.

वाटर एटीएम से करें हर महीने 25-50 हजार रुपए तक की कमाई

पानी एक ऐसी चीज़ है जिसके बिना दुनिआ का कोई भी इंसान जिन्दा नहीं रह सकता । इस लिए पानी से जुड़ा हुआ कोई भी बिजनेस कभी फेल नहीं हो सकता ।शुद्ध पानी की होती कमी आपके लिए एक बेहतर बिजनेस और पैसा कमाने का मौका दे रही हैं।

क्योंकि अब भारतीय रेलवे, मेट्रो, रोड ट्रांसपोर्ट से लेकर प्राइवेट कंपनियां भी वॉटर एटीएम इन्स्टॉल करा रही है। ऐसे में आप वाटर एटीएम की फ्रेंचाइजी लेने से लेकर एटीएम लगाने के लिए स्पेस देने का बिजनेस कर हर महीने आसानी 25-50 हजार रुपए तक की हर महीने कमाई हो सकती।स्कूलों ,मार्केट, हाईवे पर पेट्रोल पंप्स,अस्पताल,बस स्टॉप,शॉपिंग मॉल,ऑफिस में भी आप वाटर एटीएम इन्स्टालेशन कर सकते हैं।

क्या है वाटर एटीएम

जिस तरह अभी पैसे निकालने के लिए जगह-जगह बैंक एटीएम लगाते हैं। उसी तरह आप वाटर एटीएम लगा सकते हैं। जिसके जरिए यूजर आसानी से शुद्ध पानी ले सकता है। यूजर वाटर एटीएम में क्वॉइन या नोट के जरिए पानी को छोटे गिलास से लेकर 20 लीटर तक तक के जार में ले सकता है। इस तरह के एटीएम में इनबिल्ट आरओ सिस्टम होता है।

सप्लाई का कर सकते है बिजनेस

वाटर एटीएम अभी बहुत कम जगहों पर लगे हैं। ऐसे में आपके लिए मौके काफी है। इसके तहत आप कंपनियों के लिए वाटर सप्लाई का भी बिजनेस कर सकते हैं। जिसके तहत आप सीधे ही वॉटर एटीएम बनाने वाली कंपनियों से खरीद कर सप्लाई कर सकते हैं।

महाराष्ट्र, गुजरात में कई कंपनियां है, जो वॉटर एटीएम बनाती हैं। साइज के आधार पर वाटर एटीएम की कीमत 25 हजार रुपए से लेकर 6 लाख रुपए तक औसतन है। इसके अलावा वाटर एटीएम लगाकर आप शुद्ध पानी की सप्लाई भी घरों और ऑफिस में कर सकते हैं। स्कूलों में भी आप वाटर इन्स्टालेशन कर सकते हैं।

 

फ्रेंचाइजी बिजनेस का भी है मौका

वाटर एटीएम के लिए आप फ्रेंचाइजी भी ले सकते हैं। इसके तहत अब कंपनियां फ्रेंचाइजी का ऑप्शन दे रही हैं। पिरामल सर्वजल कंपनी वाटर एटीएम के लिए अभी फ्रेंचाइजी दे रही हैं। जो कि 12 राज्यों में एक्सपेंशन कर रही है। इसके तहत कंपनी ने करीब 570 इन्स्टॉलेशन किए हैं। कंपनी की वेबसाइट पर जाकर आप फ्रेंचाइजी लेने के लिए संपर्क कर सकते हैं।

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नौकरी छोड़ 60 हज़ार की लागत से शुरू की मोती की खेती अब कमा रहा है लाखों

जब किसी में कुछ करने की चाह होती है तो वह छोटे कामों से भी अपनी पहचान बना लेते हैं। ऐसा ही कुछ गुड़गांव के फरूखनगर तहसील के गांव जमालपुर के रहने वाले विनोद कुमार ने कर दिखाया। विनोद ने इंजीनियर की नौकरी छोड़कर मोती की खेती शुरू की। जिससे वह 5 लाख रुपए सलाना कमा रहा है। इतना ही नहीं वह दूसरे किसानों को भी इस खेती का प्रशिक्षण दे रहा है।

27 वर्षीय विनोद कुमार का कहना है कि उन्होंने वर्ष 2013 में मानेसर पॉलिटेक्निक से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में डिप्लोमा किया। इसके बाद दो साल तक नौकरी की। उनके पिता भी किसान थे। प्राइवेट नौकरी के साथ थोड़ी रूचि खेती में भी थी। इंटरनेट पर खेती की नई-नई तकनीक के बारे में पढ़ते-पढ़ते मोती की खेती के बारे में पढ़ा।

कुछ जानकारी इंटरनेट से जुटाई तो पता चला कि कम पैसे और कम जगह में यह काम किया जा सकता है। मोती की खेती का प्रशिक्षण देने वाला देश का एक मात्र संस्थान सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ फ्रेश वॉटर एक्वाकल्चर (सीफा) भुवनेश्वर से मई 2016 में एक सप्ताह का प्रशिक्षण लिया और 20 गुणा 10 फुट एरिया में 1 हजार सीप के साथ मोती की खेती शुरू कर दी।

विनोद कुमार ने बताया कि यह खेती शुरू करने के लिए पानी के टैंक की जरूरत पड़ती है। मेरठ, अलीगढ़ व साउथ से 5 रुपए से 15 रुपए में सीप खरीदी जा सकती हैं। यह मछुआरों के पास मिलती है। इन सीप को 10 से 12 महीने तक पानी के टैंक में रखा जाता है। जब सीप का कलर सिल्वर हो जाता है तो मानो मोती तैयार हो गया है।

पूरा सैटअप खड़ा करने में लगभग 60 हजार रुपए खर्च आ जाता है। इस खेती में सबसे अहम काम सीप की सर्जरी करना है। इसके लिए ही विशेष प्रशिक्षण लेना पड़ता है। सीप के अंदर दो मोती पैदा हो सकते हैं। जैसी आकृति उसके अंदर रखी जाती है वैसा ही मोती पैदा हो जाता है। वे भगवान गणेश, शिव, 786 आदि के मोती भी पैदा करते हैं।

विनोद ने बताया कि मोती की कीमत उसकी क्वालिटी देकर तय की जाती है। एक मोती की कीमत 300 रुपए से शुरू होकर 1500 रुपए तक है। इसकी मार्केट सूरत, दिल्ली, मुंबई, हैदराबाद और कलकत्ता में है। वे वर्ष 2016 से ही अलग-अलग जगह अपने मोती भेजते हैं। एक बार माल जाने लगे तो खरीदार खुद संपर्क में रहते हैं।

विदेशों में भी खासी मांग है लेकिन उसके लिए आपके पास पैदावार अधिक होनी चाहिए तभी एक्सपोर्ट का काम कर सकते हैं। वे खुद 2000 सीप के व्यवसाय से 5 लाख रुपए से ज्यादा की आमदनी ले रहे हैं। विनोद खुद भी किसानों को प्रशिक्षण देते हैं। किसान उनके पास इस खेती का प्रशिक्षण लेने के लिए आते हैं।

जाने क्या है स्वामीनाथन रिपोर्ट और किसानो को इसका क्या लाभ होगा

किसानों की मांग है कि कृषि पर स्वामीनाथन कमीशन की सिफारिशों को लागू किया जाए। साल 2014 की स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का बीजेपी ने वादा किया था।

लेकिन एक आरटीआई के जवाब में केंद्र ने कहा कि  लागत मूल्य पर 50 फीसदी बढ़ोतरी से मंडी में दिक्कतें आ सकती है। लिहाजा इसे लागू करना अभी संभव नहीं है।

क्यों बना था स्वामीनाथन आयोग ?

अन्न की आपूर्ति को भरोसेमंद बनाने और किसानों की आर्थिक हालत को बेहतर करने, इन दो मकसदों को लेकर 2004 में केंद्र सरकार ने एमएस स्वामीनाथन की अध्यक्षता में नेशनल कमीशन ऑन फार्मर्स का गठन किया। इस आयोग ने अपनी पांच रिपोर्टें सौंपी। अंतिम व पांचवीं रिपोर्ट 4 अक्तूबर, 2006 में सौंपी गयी।

अयोग की सिफारिशों

अयोग की सिफारिशों में किसान आत्महत्या की समस्या के समाधान, राज्य स्तरीय किसान कमीशन बनाने, सेहत सुविधाएं बढ़ाने व वित्त-बीमा की स्थिति पुख्ता बनाने पर भी विशेष जोर दिया गया है। एमएसपी औसत लागत से 50 फीसदी ज्यादा रखने की सिफारिश भी की गई है ताकि छोटे किसान भी मुकाबले में आएं । मतलब की लागत का 50 फीसदी जोड़ कर एमएसपी रखना होगा ।

लागत से 50 फीसदी ज्यादा का मतलब यह होगा जैसे धान का समर्थन मूल्य अभी 1450 रु प्रति क्विंटल है और आपका इस पर लागत आती है 1300 रु तो अगर हम इसका 50 फीसदी जोड़े तो समर्थन मूल्य बनता है 1950 रु जो अब के समर्थन मूल्य से 650 रु ज्यादा होगा ।

इस रिपोर्ट में यह भी कहा गया था कि सस्ती दरों पर क्रॉप लोन मिले यानि ब्याज़ दर सीधे 4 प्रतिशत कम कर दी जाए। कर्ज उगाही में नरमी यानि जब तक किसान कर्ज़ चुकाने की स्थिति में न आ जाए तब तक उससे कर्ज़ न बसूला जाए।

उन्हें प्राकृतिक आपदाओं में बचाने के लिए कृषि राहत फंड बनाया जाए।और किसानो को फसल बीमा भी देना जरूरी होगा साथ ही आयोग ने कहा था कि किसानों के स्वास्थय को लेकर खास ध्यान देने की जरूरत है. इससे उनकी आत्महत्याओं में कमी आएगी.

गुलाब का इत्र बना के यह किसान करता है 6 एकड़ से 8 लाख की कमाई

किसान मेहनत करता है लेकिन उसको सफलता नहीं मिलती लेकिन कुश ऐसे किसान भी है जो अलग ही सोचते है और कुश ऐसा जुगाड़ कर लेते है के थोड़ी ज़मीन से ही वो बहुत सारा पैसा कमा लेते है ।

ऐसे ही हरियणा के बरोला में रहने वाले एक किसान कुशलपाल सिरोही दूसरे किसानों के लिए मिसाल बन गए हैं। आज वे गुलाब की एक किस्म बुल्गारिया की खेती कर प्रति एकड़ 8 लाख रु  कमा रहे हैं। वे पिछले कुछ सालों से इत्र व गुलाब जल बेच रहे हैं। अरब के देशों में बुल्गारिया गुलाब से बनाए इनके इत्र की खूब डिमांड है।

कैसे बनाते हैं गुलाब का इत्र

कुशलपाल सिरोही के अनुसार, तांबे के बड़े बर्तन में पानी और गुलाब के फूल डाल दिए जाते हैं।इसके बाद ऊपर से मिट्टी का लेप कर बर्तनों के नीचे आग जलाई जाती है।उसके बाद भाप के रूप में गुलाब जल व गुलाब इत्र एक बर्तन में एकत्रित हो जाते हैं, जिस बर्तन में भांप बनकर इत्र जाता है, उसे पानी में डाल दिया जाता है।

गुलाब का इत्र केवल तांबे के बर्तन में निकाला जाता है। कई जगह कंडेंसिंग विधि से भी अर्क निकाला जाता है।लेकिन आसवन विधि ज्यादा कारगर है। एक क्विंटल फूलों में मात्र 20 ग्राम इत्र निकलता है।इंटरनेशनल मार्केट में एक किलोग्राम इत्र का मूल्य करीब आठ लाख रुपए है।

सिर्फ छह एकड़ में करते हैं गुलाब की खेती

कुशलपाल ने बताया कि छह एकड़ में वह गुलाब की खेती कर रहे हैं। नवंबर व दिसंबर में इसकी कलम की कटाई होती है, इसी दौरान कलम लगाई जाती है। मार्च व अप्रैल माह मेें इस पर फूल आने शुरू हो जाते हैं।

गुलाब के फूलों की एक हजार किस्में हैं, लेकिन इत्र बुल्गारिया गुलाब में ही निकलता है।अगर फूलों की फसल ठीक-ठाक रहे तो इस किस्म से छह एकड़ पर तीन से आठ लाख रुपए कमा लेते हैं।

गुलाब की खेती पर कितना आता है खर्च

नवंबर व दिसंबर में गुलाब के पौधों की कटाई व छंटाई होती है। इसी दौरान नई कलमें भी लगाई जा सकती हैं। कुशपाल के मुताबिक, एक एकड़ में बुल्गारिया गुलाब लगाने में चार हजार रुपए के करीब खर्च आता है।

एक एकड़ में करीब दो हजार कलमें लगाई जा सकती हैं। यह तीन माह में तैयार हो जाता है। एक बार लगाया गुलाब 15 साल तक फूल देने के काम आता है।

वीडियो देखने के लिए दिए गए लिंक पर क्लिक करे,

Sh. Kushal Pal Sirohi s/o Harender Singh
Village -Barola (Chandana)
Phone -01746-222222

इतने रुपया बढ़ सकता है खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य

केंद्र सरकार जल्द ही खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य का एलान कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक चौदह फसलों का एम.एस.पी. बढ़ाने को लेकर मंजूरी मिल चुकी है।

लेकिन अगर किसानो की मांगो के हिसाब से देखा जाये तो लगता है ये समर्थन मूल्य बहुत कम है । ऐसे में किसानो का गुस्सा और बढ़ सकता है इस लिए  हो सकता है अब तक इस फैंसले को गुप्त रखा गया हो ।

खरीफ फसलों के समर्थन मूल्य का एलान कभी भी हो सकता है जिसमें कपास के एम.एस.पी. में 160 रुपए प्रति क्विंटल की बढ़त हो सकती है।इस बार फिर दालों की एम.एस.पी. में 400 रुपए क्विंटल के भारी बढ़त की संभावना है। साथ ही धान के एम.एस.पी. को 80 रुपए बढ़ाकर 1560-1590 रुपए करने की तैयारी है।

जबकि मध्यप्रदेश में खेती होने वाले सोयाबीन की एम.एस.पी. को करीब 6.5 फीसदी बढ़ाकर 2900 रुपए करने की तैयारी है

गर्मियों में करे Soft Drink का बिज़नस और कमाए 30 से 50 हजार महिना

इस बात से तो आप वाकिफ हैं ही की हमारे भारत में गर्मिओं का मौसम 8 महीने का होता है ऐसे में धुप में आते जाते सबका मन होता है की कुछ ठंडा पीने को मिल जाये तो शरीर को राहत मिल जाएगी ऐसे में उनके काम आता है सोडा मशीन वाली कोल्ड ड्रिंक सस्ता का सस्ता भी और अपनी मनपसंद का भी यही वजह है की गर्मियों के मौसम में इसका बिज़नेस धड़ल्ले से चलता है तो अगर आप भी कम लागत में बिज़नेस शुरू करना चाहते हैं तो सॉफ्ट ड्रिंक यानी शीतल पेय का बिज़नेस अच्छा ऑप्शन है

सोडा मशीन के बारे में

तो इस बिज़नेस को शुरू करने के इए सबसे पहले आपको एक सोडा मशीन लेनी पड़ेगी यह मशीने भी अलग अलग तरह की अलग अलग कीमत पर मार्किट में उपलब्ध हैं इसमें आपको 6+2,  8+2,  10+2, अब आप यहाँ पर confuse हो गए होंगे की यह क्या है तो आपका डाउट यही पर ख़तम कर के आपको बता देते हैं की यह क्या है

6+2- इसका मतलब है की उस से 6 तरह के सोडा फ्लेवर निकलेंगे और 2 तरह के जूस फ्लेवर इसी तरह
8+2- का मतलब है की उस से 8 तरह के सोडा फ्लेवर निकलेंगे और 2 तरह के जूस फ्लेवर
10+2- का मतलब है की उस से 10 तरह के सोडा फ्लेवर निकलेंगे और 2 तरह के जूस फ्लेवर

आप अपने हिसाब से मशीन और बजट का चुनाव कर सकते हैं मशीनों की कीमत 50000 से लेकर 2 लाख तक रखी हुई है मगर इसमें भी डीलर से बात चीत करके मोल भाव उपर नीचे किया जा सकता .planet soda company फ्रैंचाइज़ी भी देती है या आप इस कंपनी की मशीन भी खरीद सकते हैं इनकी वेबसाइट के अनुसार अगर आप इस कंपनी की फ्रैंचाइज़ी लेते हैं तो यह कंपनी आपसे कोई फीस नहीं लेती है आप फ्री में फ्रैंचाइज़ी ले सकते हैं

मशीन खरीदते वक़्त इन बातो का रखें ध्यान और जगह 

उसकी वारंटी या गारंटी कितनी  है , क्या वह उस मशीन को सेट करने में आपकी मदद कर रहे हैं या नहीं , क्या वो शुरू में आपको कच्चे माल की किट आपको दे रहे हैं या नहीं , ये मैं इसलिए बता रहा हूँ क्योंक कई डीलर यह सब मुफ्त में आपको दे देते हैं

इसके लिए मशीन , पानी की टंकी, पानी, छोटा गैस सिलेंडर, शुगर, पेपर कप प्रोडक्ट तैयार करने के लिए आपको इन चीजो की जरूरत पड़ेगी और बाकी जगह आपकी मशीन पर निर्भर करती है यदि आप बड़ी मशीन लेते हैं तो बड़ी जगह की जरूरत पड़ेगी छोटी हो तो छोटी जगह की जरूरत पड़ेगी वैसे 10*10 की दुकान में बड़ी मशीन भी आसानी से आ जाती है

लागत 

मोटे मोटे तौर पर देखे तो 5 रुपये के गिलास की कीमत करीब 2.5 रुपये होगी यानी इसमें आपको 50% का प्रॉफिट होगा यदि आप हर दिन 500 ग्लास भी बेचते हैं तो आप हर दिन 2500 रूपये कमा सकते हैं इसमें से अगर 1250 रुपये की खर्चा निकाल दे तो हर रोज 1250 रुपये की कमाई होगी इस हिसाब से आप महीने में करीब 37500 रूपये कम सकते हैं अगर आप 300 ग्लास भी रोज बेचते है तो आप 20000 से 25000 तक कमा सकते हैं

और ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो भी देखे 

 

पेपर ग्लास बनाने का व्यवसाय शुरू कर 2.5 लाख महीना कमाएं

आजकल हर शहर में अब उपभोक्ता ज्यादा से ज्यादा कागज के कप का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसके चलते शहर में कागज के कप की कमी आ गई। बाहर से सप्लाई भी कम हो रही है। अगर कोई 10 से 12 लाख रुपए में कागज के कप बनाने की फैक्ट्री लगा सकता है।

बस थोड़ी से 200 से 300 गज की जगह चाहिए। कप बना कर बेचने पर प्रति कम से कम कप 25 से 30 पैसे की बचत है।जिस से हर महीने आप 2.5 लाख महीना तक कमा सकते है ।

शहर के होलसेल विक्रेताओं के अनुसार इस समय शहर में रोजाना जहां चार लाख कप बिकते हैं। उनमें से 75 प्रतिशत कागज के कप बिक रहे हैं। बाकी 25 प्रतिशत ही प्लास्टिक के डिस्पोजेबल कप बिक रहे हैं।

कैसे लगाएं कागज का कप बनाने का उद्योग: इंटरनेट पर कागज का कप बनाने की मशीन निर्माताओं की जानकारी मिल जाएगी। जिस तरह की मशीन आपको लगानी है, उसकी डिटेल एवं विक्रेता के कॉन्टैक्ट नंबर और मशीन का आकार, उत्पादन क्षमता आदि सब लिखी होती है।

उद्योग लगाने के लिए प्रोजेक्ट रिपोर्ट बना लें। अगर आपको अपने उद्योग के लिए बैंक से फाइनेंस कराना है तो एमएसएमई (माइक्रो स्माल मीडियम एंटरप्राइजेज) की वेबसाइट पर अपने उद्योग का रजिस्ट्रेशन करा लें। इसके बाद बैंक में फाइनेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं। इससे लोन मिलने में आसानी होगी।

कहां मिलती है मशीन

कागज के कप बनाने की मशीन दिल्ली, हैदराबाद, आगरा एवं अहमदाबाद समेत कई शहरों में मिलती है। आप कितने कप बनाने की क्षमता की मशीन चाहते हैं। उसी हिसाब से मशीन मंगाएं। अगर फाइनेंस कराया है तो बैंक के जरिए ही मशीन आएगी, उसका पेमेंट भी बैंक के माध्यम से होगा।

कितनी लागत

दिल्ली में कागज के कप बनाने की मशीन के निर्माता ए खलील रहमान ने बताया कि सामान्यतया मशीन की कीमत 7.25 लाख रुपए की है। जो प्रति घंटे छोटी साइज के तीन हजार कप बनाती है। साथ ही पांच लाख रुपए की कार्यशील पूंजी की जरूरत है। एक छोटी साइज के कप बनाने की लागत 35 पैसे आती है। जिसे आप 50 पैसे से लेकर 60 पैसे तक बेच सकते हैं।

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