जाने कैसे सरकार की यूरिया सबसिडी बचाने की योजना से किसानो को होगा नुकसान

सरकार ने यूरिया की खपत में कटौती का एक नया रास्ता ढूंढा है, जो वार्षिक 6000-7000 करोड़ रुपए की सबसिडी को बचाने में मदद कर सकता है। अगले 6 महीनों में सभी यूरिया बैग 50 की बजाय 45 किलो में उपलब्ध होंगे।

उर्वरक मंत्रालय का मानना है कि इसके परिणामस्वरूप किसान अगर 2 बैग यूरिया जिसका वजन 90 किलो होगा, का प्रयोग करेंगे। इससे उपभोग के पैटर्न में एक महत्वपूर्ण बदलाव आएगा और महंगी यूरिया आयात में तेज गिरावट आएगी। सरकार ने 2017-18 में यूरिया आयात के लिए 14,000 करोड़ रुपए अलग रखे हैं।

इसका किसानो को नुकसान यह हो सकता है जैसे किसी किसान को अपने खेत के लिए 100 किल्लो यूरिया चाहिए होती थी अब उसे 2 की जगह 3 बैग यूरिया की जरूरत पड़ेगी लेकिन तीसरा बैग सबसिडी के बिना पुरे मूल्य पर ही मिलेगा जिस से किसानो को काफी नुकसान हो सकता है ।

सरकार ने चालू वित्त वर्ष में उर्वरक सबसिडी के लिए 70,000 करोड़ रुपए का बजट दिया है और खजाने पर भारी बोझ को कम करने के लिए कई समाधान मांगे हैं। सूत्रों ने बताया कि कृषि मंत्रालय द्वारा किए गए विश्लेषण में यह संकेत दिया गया है कि यूरिया का उपयोग प्रति एकड़ 4-6 प्रतिशत तक कम हो गया है।

अधिकारियों ने कहा कि यूरिया खपत में कुल कमी मिट्टी पोषक तत्व की 100 प्रतिशत नीम कोटिंग के कारण हो सकती है। एक अधिकारी ने कहा, ‘‘एक निर्णय ने औद्योगिक गतिविधियों के लिए अत्यधिक सबसिडी वाले यूरिया का उतार-चढ़ाव बंद कर दिया है।’’ यद्यपि भारत ने 2016-17 में 24.2 मिलियन टन यूरिया का उत्पादन किया था लेकिन घरेलू मांग को पूरा करने के लिए उसे 8 मिलियन टन आयात करना पड़ा था।

सरकार ने 2022 तक उत्पादन बढ़ाने के लिए बंद यूरिया निर्माण संयंत्रों को पुनर्जीवित करने के लिए काम शुरू कर दिया है ताकि उर्वरक आयात करने की कोई आवश्यकता न पड़े।

पशुओं में थनों की सोजिश ठीक करने के घरेलू नुस्खे

भारत में थानों की सोजिश बहुत ही आम बीमारी है इसका मुख्या कारण पशु के शेड का गन्दा होना है क्योंकि जब भी पशु गन्दी जगह पर बैठता है तो गंदगी थानों के सुराख़ में चली जाती है ।जिस से उस में कीटाणु पनपने लग जाते है जो इन्फेक्शन का कारण बनते है इस लिए हमेशा पशु का शेड साफ सुथरा होना चाहिए ।डॉक्टरी इलाज से पहले हमें कुछ घरेलू इलाज प्रयोग करने चाहिए। आइये जानते हैं ऐसे कुछ घरेलू नुस्खों के बारे में।

1. सरसों के तेल से हवाने की मालिश करना: थनों की बीमारी होने की सूरत में पशु पालकों के द्वारा थोड़ा-सा सरसों का तेल गर्म पानी में डाल लिया जाता है और इस घोल से हवाने की मालिश की जाती है। सरसों के तेल में, सोजिश को कम करने के गुण पाये जाते हैं और यह खून के दौरों को बढ़ा कर जख्म के जल्दी ठीक होने में मदद करता है। इसके इलावा सरसों का तेल रोगाणु नाशक भी होता है।

2. हल्दी और सरसों के तेल के पेस्ट से हवाने की मालिश करना: पीसी हुई हल्दी को सरसों के तेल में मिलाकर पेस्ट बना लिया जाता है, सोजिश होने की सूरत में हवाने पर इसकी मालिश की जाती है। हल्दी और सरसों के तेल में रोगाणु नाशक हाने के साथ-साथ सोजिश कम करने की भी शक्ति होती है, इनका पेस्ट हवाने की सोजिश को हटाता है, जख्मों को ठीक करता है और रोगाणुओं को नष्ट करता है।

3. काली मिर्च ग्लो और गुड़ खिलाना : काली मिर्च को पीस कर उस में ग्लो मिलाकर, गुड़ में डालकर जानवर को खिला दिया जाता है। ग्लो और काली मिर्च में सोजिश हटाने के गुण होते हैं इसलिए इनका मिश्रण लेवे की सोजिश में सहायक होता है।

4. लहसुन खिलाना :पशुओं को समय समय पर लहसुन खिलाया जा सकता है। लहसुन में जीवाणु नाशक, कीटाणु नाशक, रोगाणु नाशक गुण होते हैं जो लेवे की सोजिश होने से रोकता है।

5. एक अन्य उपाय अनुसार 100 ग्राम मीठा सोडा, 100 ग्राम नींबू का अर्क, 100 ग्राम जौं खार, 50 ग्राम काली मिर्च, 250 ग्राम देसी घी, 1 किलो गुड़ चीनी और 100 ग्राम कलमी शोरा लेकर सभी को मिलाकर दिन में दो बार पशु को दिया जाता है।

पशु के हवाने व थनों की सफाई रखनी चाहिए और साफ सुथरे व सूखे तथा नर्म स्थान पर बांधना चाहिए। दूध निकालने वाले व्यक्ति के हाथ भी साफ होने चाहिए।अंगूठे के दबाव से दूध नहीं निकालना चाहिए। थनों में दूध ज़्यादा समय तक नहीं रहने देना चाहिए।

इन तीन राज्यो में फैला किसान आंदोलन, लोग दोगुने दाम पे खरीद रहे है दूध और सब्जी

अहमदनगर के पुंटांबा गांव से शुरू हुआ 200 किसानों का छोटा सा आंदोलन महाराष्ट्र के साथ-साथ मध्यप्रदेश और गुजरात में भी जोर पकड़ने लगा है। मालवा और निमाड़ क्षेत्र में हड़ताल के दूसरे दिन शुक्रवार को दूध और सब्जी की किल्लत हो गई। शहरों में बंदी का दूध बंटना भी बंद है, क्योंकि गांवों से दूध यहां पहुंच ही नहीं पा रहा है। किसानों को सब्जी उत्पादक और दूध विक्रेताओं का भी साथ मिल गया है।

उधर उज्जैन सब्जी मंडी में पुलिए के साए में सब्जियों की बिक्री हुई। लोगों को दो गुना दाम पर सब्जी और दूध खरीदना पड़ी। किसानों के हंगामें के बाद पुलिस ने यह व्यवस्था की थी। भोपाल में दूध विक्रेताओं ने हड़ताल का समर्थन नहीं किया, राजधानी में सभी स्थानों दूध मिला।

फसलों और दूध के उचित दाम दिलाने की मांग को लेकर हड़ताल के पहले दिन अंचल में गुरुवार को किसानों का गुस्सा फूट पड़ा। जगह-जगह सब्जी और उपज लाने से लोगों को रोका गया। सड़कों पर दूध बहा दिया गया। शाजापुर में किसानों ने एबी रोड पर आलू-प्याज फेंक जाम लगा दिया। पुलिस पर पथराव भी किया, इससे एसडीओपी सहित 8 पुलिसकर्मियों को चोटें आई हैं।

कर्जमुक्ति की प्रमुख मांग को लेकर आंदोलन कर रहे किसान आंदोलन में जारी हिंसा को देखते हुए प्रशासन ने अलग-अलग इलाकों में धारा 144 लागू की. ये इलाके नासिक और अहमदनगर जिले में प्रमुखता से हैं।

नासिक में कुछ किसानों को हिरासत में भी लिया गया है । गुरुवार को शुरू हुआ आंदोलन अब विदर्भ में भी फैलता दिख रहा है। कई हिस्सों में किसानों ने कृषि उत्पादों को सड़क पर फेंक दिया. बुलडाणा में किसानों ने दूध से होली खेली. यह दूध डेयरी को जाना था।

आंदोलनकारियों ने गुरुवार को प्रमुखता से यह कोशिश की कि मुम्बई, पुणे को होने वाली कृषि उत्पाद की आपूर्ति रोक दी जाए, जिसका असर शुक्रवार को दिख रहा है. एशिया की सबसे बड़ी नवी मुंबई मंडी में केवल 146 गाड़ियां सब्जी-फल ले कर पहुंची हैं, जबकि पुणे में दूध संकलन 50 फीसदी घट गया है।

इस बीच, सामाजिक कार्यकर्ता अण्णा हजारे ने किसानों के आंदोलन का समर्थन करते हुए सरकार से मध्यस्थता का प्रस्ताव रखा है, जबकि राज्य के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस कह चुके हैं कि सरकार किसानों से बात करने के लिए तैयार है. मुख्यमंत्री का आरोप है कि विपक्ष किसान आंदोलन को हिंसक बना रहा है.

 

 

ऐसे करें बारिश के मौसम में खीरे की उन्नत खेती

अगर आप खीरा की उन्नत खेती करना चाहते है तो आपको वैज्ञानिक तरीके से इसकी खेती करनी होगी | खीरा एक मौसमी फसल है, जो की गर्मी के मौसम में ज्यदातर किया जाता है | खीरे की खेती पुरे भारत में की जाती है यह एक Short term फसल है जो की अपना Life Cycle को 60 से 80 दिनों में पूरा करता है |

खीरा हमारे शरीर में पाचन शक्ति को बढ़ाने में मदद करता है, खीरे में Protein, vitamin C, Iron, Carbohydrate जैसे तत्व पाए जाते है  | वैसे तो खीरा गर्मी के मौसम में होता है पर वर्षा ऋतू में खीरे की फसल अधिक होती है |

यह हर प्रकार की भूमियों में जिनमें जल निकास का सही रास्ता हो, उगाया जाता है। अच्छी उपज के लिए जीवांश पदार्थयुक्त दोमट भूमि सबसे अच्छी होती है। इसकी फसल जायद और वर्षा में ली जाती है। अत: उच्च तापक्रम में अच्छी वृद्धि होती है, यह पाले को नहीं सहन कर पाता, इसलिए इसको पाले से बचाकर रखना चाहिए।

खीरे की उन्नत किस्मे

 

पंजाब नवीन : पंजाब नवीन खीरे की अच्छी किस्म है। इस किस्म में कड़वाहट कम होती है और इसका बीज भी खाने लायक होता है। इसकी फसल 70 दिन मे तुड़ाई लायक हो जाती हैं। इसकी औसत पैदावार 40 से 50 कुंतल प्रति एकड़ तक होती है।

इसके अलावा खीरे की प्रमुख प्रजातियां 

  • जापानी लौंग ग्रीन
  • स्ट्रेट एट
  • हिमांगी
  • पोइनसट
  • जोवईंट सेट

बीज की मात्रा :- एक किलो /एकर

बिजाई का ढंग :- बीज को ढाई मीटर की चौड़ी बेड पर  दो दो फुट के फासले  पर बीज सकते  हैं।  बीज दोनों साइड  लगाएं। एक जगह पर दो बीज लगाये।  खीरे की अगेती पैदावार के लिए इसे सुरंग मैं भी बीज सकते हैं। इस  से  कोहरे  से  बचाया  जा  सकता  है।

अगर बिजाई के लिए सुरंग बनानी है  तो दो मीटर  के सरिये को दोनों साइड  मैं ज़मीन मैं गाड़ दे। इसके बाद दोनों अर्ध गोलों पर सो गेज  की प्लास्टिक की शीट डाल  दें। और  दोनों साइड  से मिटटी से  ढक   दें।  और  फरबरी मैं  इन शीट  को हटा  दें।

खीरे के  लिए  खाद :-इस फसल  के लिए चालीस किलो न्यट्रोजन (नबे किलो यूरिया ), बीस किलो फ़ॉस्फ़ोरस ,(सवा क्वेंटल  सुपरफास्फेट ), और बीस किलो पोटास की  जरूरत  होती है। इसमें से एक तिहाई हिसा न्यट्रोजन सारी  फ़ॉस्फ़ोरस पोटाश  बिजाई के समय बेड़ो पे सामानांतर लाइन मैं  पांच इंच  की दूरी  पर  डालें।  बाकि बची काड बढ़ोतरी  के  टाइम पे  डालें।

सिंचाई :-पहले इसकी खाल मैं  पानी लगा  कर डौल के ऊपर  बीज लगाया  जाता है। इसके बाद दो तीन दिन बाद  पानी  दिया  जाता है।  गर्मिओं मैं पांच  छे दिन बाद पानी लगते  रहना  चाहिए।  आम तौर  पे  इसको दस  से  पन्द्र पानी लगते  हैं।

खरपतवार नियन्त्रण:- किसी भी फसल की अच्छी पैदावार लेने की लिए खेत में खरपतवारो का नियंत्रण करना बहुत जरुरी है। इसी तरह खीरे की भी अच्छी पैदावार लेने के लिए खेत को खरपतवारों से साफ रखना चाहिए। इसके लिए गर्मी में 2-3 बार तथा बरसात में 3-4 बार खेत की निराई-गुड़ाई करनी चाहिए।

फ्लो की तुड़ाई :- खीरे के फलों को कच्ची अवस्था में तोड़ लेना चाहिए जिससे बाजार में उनकी अच्छी कीमत मिल सके। फलों को एक दिन छोड़ कर तोड़ना अच्छा रहता है। फलों को तेजधार वाले चाकू या थोड़ा घुमाकर तोड़ना चाहिए ताकि बेल को किसी तरह का नुकसान न पहुंचे।खीरे की फसल को तोड़ते समय ये नरम होने चाहिए। पीले फल नहीं  होने देना चाहिए।

अगली फसल के लिए खीरे का बीज कैसे तैयार करें ?

खीरे का बीज तैयार करते समय खीरे की 2 किस्मो के बीच काम से काम 800 मीटर की दुरी होनी चाहिए।
जिन पौधें पर सही आकार, प्रकार और रंग के फल न आएं उन पौधों को तुरन्त निकाल देना चाहिए। बीज उत्पादन के लिए जब फल पीला पड़ जाए तथा बाहरी आवरण में दरारें पड़ जाएं उस समय तोड़ लेने चाहिए। फलों को लम्बाई में काटकर गुद्दे से बीज को हाथ से अलग करके साफ पानी से धेएं और बीजो को धूप में सुखाकर उनका भण्डारण करें