भारत में इस जगह पर बनता है इंसान के मूत्र से यूरिया

इस बात पर सुनने में यकीन नहीं होगा लेकिन ये बात सच्च है । कर्णाटक के जिला बेल्लारी में बिना पानी वाले मूत्रालय बढ़ते फसलों के लिए खाद का एक स्रोत बन गए हैं। वाल्मीकि सर्किल में पायलट प्रोजेक्ट के तहत स्थापित किए गए मूत्रालय लोगों के लिए वरदान साबित हुए हैं। वहीं, बेल्लारी सिटी कारपोरेशन द्वारा मूत्र से यूरिया निकालने का एक स्रोत बन गया है।

बेल्लारी डीसी रामप्रसाद मनोहर ने कहा कि जिले में स्वच्छ बेल्लारी मिशन के तहत वाटरलेस मूत्रालयों को स्थापित किया गया था। ये यूरीनल्स टच फ्री हैं इसलिए इनसे बीमारी फैलने का जोखिम भी कम होता है।

उपायुक्त ने कहा कि मूत्र में नाइट्रोजन, पोटेशियम और फॉस्फेट शामिल होते हैं, इसका उपयोग कृषि उद्देश्य के लिए किया जाता है। पायलट आधार पर एक बिना पानी वाला मूत्रालय स्थापित किया गया था और अधिक संख्या में लोग इसे प्रयोग कर रहे हैं। हम यहां जमा हुए मूत्र से यूरिया भी निकाल रहे हैं।

कृषि वैज्ञानिकों ने यह प्रमाणित किया है कि मूत्र से निकाले जाने वाले कंपोस्ट का इस्तेमाल फसलों के लिए किया जा सकता है। इसकी सफलता से उत्साहित जिला प्रशासन शहर के भीड़-भाड़ वाले इलाकों में पांच और ऐसे ही मूत्रालय स्थापित करने की योजना बना रहा है। बाद में इसे जिले के अन्य स्थानों में भी लगाया जाएगा।

बेल्लारी सिटी कॉर्पोरेशन के कमिश्नर एमके नवलदी ने कहा कि एक पारंपरिक मूत्रालय को बनाने में करीब 50,000 रुपए का खर्च आता है। वहीं वॉटरलेस यूरीनल को स्थापित करने में 20,000 रुपए से लेकर 25,000 रुपए का खर्च आता है। 20 लीटर क्षमता के पानी के डिब्बे का इस्तेमाल मूत्र को जमा करने के लिए बेसिन की तरह किया जाता है।

किसानों की उम्मीदों पर सरकार ने फेरा पानी, स्वामीनाथन रिपोर्ट पर दिआ यह जवाब

खरीफ की बुवाई में जी-जान से जुटे किसानों को उम्मीद थी कि इस बार सरकार उनकी मेहनत का उचित मूल्य देगी उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार आएगा लेकिन केन्द्र सरकार ने किसानों को उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। किसानों को फसल लागत मूल्य से 50 प्रतिशत अधिक न्यूनतम समर्थन मूल्य देने की स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट को नकार दिया है।

लोकसभा में मंगलवार को कृषि राज्यमंत्री एसएस अहलूवालिया ने कहा कि फसल लागत पर कम से कम 50 फीसदी वृद्धि को निर्धारित करने से बाजार में विकृति आ सकती है। सरकार के इस फैसले से किसानों को झटका लगा है। भारतीय किसान यूनियन अध्यक्ष भानू प्रताप सिंह ने कहा ” देशभर में अपने हक के लिए आंदोलन कर रहे किसान सरकार के इस फैसले से निराश हैं।”

उन्होंने कहा कि घाटे का सौदा बनती जा रही खेती को लेकर सरकार का अगर यही रवैया रहा तो किसान खेती छोड़ने पर मजबूर हो जाएगा। किसानों की समस्यओं के अंत के लिए हाल ही में मंदसौर से दिल्ली तक किसान मुक्ति यात्रा निकालने वाले स्वराज इंडिया के संयोजक योगेन्द्र यादव ने कहा ” नरेन्द्र मोदी और उनकी पार्टी ने किसानों को वादा किया था कि उनको फसलों की लागत पर 50 प्रतिशत का मुनाफा दिलाया जाएगा। उस हिसाब से देखें तो एक भी फसल में सरकार अपने वादे का आधा भी नहीं दे रही है। ”

उन्होंने कहा कि पिछले दिनों केन्द्र सरकार ने घोषणा कि खरीफ 2017-18 के लिए सब फसलों के दाम बढ़ा दिए गए हैं। धान का समर्थन मूल्य बढ़ाकर 1550 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया गया है, जबकि अरहर-तुअर दाल के समर्थन मूल्य में 400 रुपए बढ़ाकर 5450 रुपए कर दिया गया है, लेकिन इसके पीछे जो सच है सरकार ने उसे छिपा लिया है। ”

धान की लागत 1484 रुपए है और अगर किसान को 1550 रुपए प्रति कुंतल का समर्थन मूल्य मिल भी जाए तो उसे सिर्फ 4 प्रतिशत बचत होगी। ” योगेन्द्र यादव ने कहा कि सरकार जिस तरह समर्थन मूल्य का फैसला करती है उस पर किसान संगठनों ने बार-बार सवाल उठाए हैं।

कृषि नीति विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने बताया ” सरकारों ने किसानों को उनके उचित आय से वंचित रखा है, जो किसानों का न्यूनतम समर्थन मूल्य से मिलता है। जब भी न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की बात होती है, तब कहा जाता है कि इसकी जरूरत नहीं है, फसलों का मूल्य कम रखना चाहिए, नहीं तो खुदरा खाद्य कीमतों में वृद्धि होगी। यानी उपभोक्ताओं को सस्ता भोजन उपलब्ध कराने के लिए किसानों को गरीब रखा गया है। ”

देश में किसानों की समस्याओं और कृषि संकट के अंत को लेकर एक नीति बनाने के लेकर लगातार काम कर रहे कृषि नीति विशेषज्ञ रमनदीप सिंह मान ने बताया ” न्यूनतम समर्थन मूल्य को लेकर केन्द्र से लेकर राज्य सराकरों का रवैया किसानों के हित में नहीं है। ” उन्होंने केन्द्र सरकार की तरफ से खरीफ सीजन 2017-18 के लिए जारी न्यूनतम समर्थन मूल्य से किसानों को कोई लाभ नहीं होगा, जबतक सरकार किसानों की आय को लेकर गंभीर होकर काम नहीं करती है।

ये मशीन जो चारा काटने के साथ अट्टा चक्की का काम भी करती है

ये है आधुनिक और छोटी मशीन चारा काटने वाली मशीन (Chaff Cutter Cum Pulverizer) ।इसकी खास बात यह है ये मशीन चारा काटने के साथ अट्टा चक्की का भी काम करती है । इस लिए यह मशीन डेरी फार्मिंग ,बकरी पालन ,गौशाला आदि जगह पर उपयोग हो सकती है ।

यह मशीन किसी बड़ी चारा काटने वाली मशीन जितना चारा काट सकती है इसकी क्षमता एक घंटे में 500 से 1000 किल्लो तक की है ।

इसकी बॉडी 6MM लोहे से बनी है । इसका वजन सिर्फ 100 किल्लो है । इतने हलके वजन होने के कारण आप इसको कहीं भी रख जा लेजा सकते है ।

इसमें 3 High Carbonized ब्लेड लगे होते है जिनकी धार कभी कम नहीं होती । इस मशीन को 2 H .P की मोटर के साथ चलाया जाता है । बिना मोटर के इस मशीन की कीमत 23100 रुपए है ।

अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है जा किसी तरह की और जानकारी लेना चाहते है तो इस 09033329666 पर कॉल जा Whats App कर सकते है

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

 

किसानो की जरूरत के हिसाब से बनया है यह लीफान कार्गो

कहते है की आवशकता ही अविष्कार की जननी है । ऐसे ही किसानो की जरूरत के हिसाब से त्यार क्या गया है यह लीफान तिपहिया कार्गो (lifan cargo tricycle) । इसमें लीफान के इंजन के साथ एक ट्राली जुडी हुई होती है ।

यह 800 किल्लो तक का वजन उठा कर 80 किल्लो मीटर की स्पीड से भाग सकता है । इसकी चैसी फ्रेम और कार्गो बॉक्स मजबूत होता है। इसका इंजन एक सिलेंडर होता है ।यह पेट्रोल से चलता है गियर शिफ़्ट में इसके 5 आगे + 1 रिवर्स होता है ।

यह तीन मॉडल (175cc , 200cc , 150cc ,250cc ) में आता है । 150cc वाले लीफान इंजन कार्गो 3 व्हीलर मोटरसाइकिल थोक कीमत 36000 रुपये है । जो की मॉडल के हिसाब से बढ़ती रहती है ।

अभी यह सिर्फ चीन में ही मिलते है । बहुत जल्द यह कंपनी भारत में इस प्रोडक्ट को लॉन्च करने वाली है । लेकिन अगर इसे अभी ऑनलाइन अलीबाबा वेबसाइट से भारत मंगवा सकते है ।

वीडियो भी देखें

Product Specification: item number: HY250ZH-Aengine type:LIFAN 150ccengine :single cylinder,4-stroke, water-cooledway valveunderneath type camshaft:lubricating systempressure splash:fuel consumption≤354exhaust pollution:CO≤3.8%,HC≤800ppmstarting ability:≤15sclutch type:Wet Multi-Platederailleur type:Regular meshing gear typetransmission ratio,junior:4.055Output sprocket teeth:15The capacity of lubricating oil:1.1Lcarburetor:PZ30lubricating oil pump:Internal and external rotorMagnetor type:Permanent magnet ACtransmission Type:ShaftTricycle specificationsDimension: 3500*1300*1150mmmmCargo box size:1.4m*2.2m (all flowered pattern)Rear axle:Full floating 5 holes booster king real axle 1140Front shocker:mountain type strong absorberRear shocker:5+4 lever steel plate with spring Wheels : 5.00-12 wheels(three wheels can be exchanged) 50*100mm keel frame28A battery3rd generation Wuyang round type headlightBigger fuel tankSmall footplate Max.Load capacity:1500 KG-2500KGMax.Speed:75km/htransmission Type:Shaft

Posted by Zou Jingli on Monday, June 26, 2017

एक शख्स, जो कभी साइकिल पर किन्नू बेचते थे, आज कमाते हैं करोड़ों

 

यह दिलचस्प कहानी है एक ऐसे किसान की जो कभी साइकिल पर टोकरी में फल बेचा करते थे लेकिन आज दुनिया भर के 12 देशों में इनका कारोबार फैला हुआ है। आपको यह जानकर हैरानी होगी कि इन्होंने महज़ प्राथमिक विद्यालय तक की पढ़ाई पूरी की,

फिर चंद पैसों से फल बेचने के धंधे को गले लगाया और आज देश के सबसे सफल किसानों में से एक हैं। एक ऐसा देश जहाँ हर साल हजारों की तादात में किसान आत्महत्या करते हैं और जहाँ के युवा खेती-बाड़ी के धंधों को गिरी नजरों से देखतें हैं, उन तमाम लोगों के लिए इस किसान की कहानी एक सीख साबित होगा

हम बात कर रहें हैं पंजाब के अबोहर निवासी सुरिंदर कुमार की सफलता के बारे में। एक गरीब परिवार में जन्में और पले-बढ़े सुरिंदर ने गांव के ही सरकारी स्कूल से पढ़ाई पूरी करने के बाद फल बेचने शुरू कर दिए। साल 1997 में किसानों या मंडी से किन्नू खरीदकर लाते और गली-गली उसे बेचा करते। कई सालों तक यह सिलसिला चलता रहा।

कुछ दिनों बाद सुरिंदर को इस फल के बिज़नेस में अपार सभावनाओं का अहसास हुआ। फिर उन्होंने बाज़ार में फल की एक स्टाल लगा ली। इसके बाद इन्होंने बिज़नेस के दायरे को बढ़ाने के बारे में सोचा लेकिन सबसे बड़ी अरचन पूंजी को लेकर थी। कुछ पैसे लोन लेकर इन्होंने पंजाब की मंदी में एक होलसेल दूकान खोल ली। उनका यह सफर चुनौती भरा रहा, लेकिन उन्होंने कभी हार नहीं मानी।

कारोबार को बड़ा करने के लिए सुरिंदर के दिमाग में एक आइडिया सूझा। फिर उन्होंने पंजाब के आस-पास के शहरों की मंडियों मन किन्नू भेजने शुरू कर दिए। इनका यह आइडिया बेहद कारगर साबित हुआ और काफी मुनाफा हुआ।शुरूआती सफलता के बाद इन्होंने विदेश में भी अपना कारोबार फैलाने की सोची। आज दुबई, बांग्लादेश, ब्राजील, यूक्रेन जैसे कई देशों में उनका कारोबार फैला हुआ है

अपनी सफलता को लेकर सुरिंदर बतातें हैं कि वैसे तो किन्नू का सीजन केवल साढ़े तीन महीने का होता है, लेकिन उक्त कारोबार को बढ़िया तरीके से चलाने के लिए उन्होंने खुद ही करोड़ों रुपये की लागत से पैक हाउस व कोल्ड स्टोर विकसित किया।

आज सुरिंदर के पास 40-40 लाख की चार एसी ट्रक भी है। इस ट्रक का इस्तेमाल कर वह ऑफ सीजन में किन्नू दक्षिण भारत में बेचते हैं। आज सुरिंदर के फल कारोबार का सालाना टर्नओवर करोड़ों में है। इतना ही नहीं करीब 400 लोगों को रोजगार मुहैया करा सुरिंदर ने भारत जैसे कृषि प्रधान देश में अन्य किसान भाइयों के सामने मिसाल पेश की है।

यह है भारत के टॉप 10 ट्रैक्टर

देश के कृषि को बल देने वाला एक अहम वाहन है ट्रैक्टर। आइए जानते हैं कि देश की तरक्की में अहम योगदान देने वाले कौन से हैं टॉप 10 ट्रैक्टर।

10. स्टैंडर्ड ट्रैक्टर्स

इस लिस्ट में 10वें नंबर पर है स्टैंडर्ड ट्रैक्टर्स। यह कंपनी 1975 में स्थापित हुई थी। यह कंपनी हार्वेस्टर्स और ट्रैक्टर्स बनाती है और कस्टमर्स को कई तरह की वैरायट के प्रॉडक्ट बेचती है। यह कंपनी दिल्ली आधारित है और इसके ट्रैक्टर पंजाब में बनते हैं।

 

9. प्रीत ट्रैक्टर्स

9वें स्थान पर काबिज प्रीत ट्रैक्टर्स 1980 में स्थापित हुई थी। यह कंपनी खेती से जुड़े विभिन्न प्रॉडक्ट बनाती है। इसके ट्रैक्टर 30 से 90 हॉर्सपॉवर तक की क्षमता के हैं। इस कंपनी को कई किसान पसंद करते हैं।

8. बलवान ट्रैक्टर्स

फोर्स मोटर्स के अंडर में आने वाली यह कंपनी 8वें स्थान पर है। पुणे आधारित यह कंपनी 1957 से ट्रैक्टर बना रही है। फोर्स मोटर्स न सिर्फ ट्रैक्टर बनताी है बल्कि कॅ​मर्शियल और पैसेंजर व्हीकल भी बनाती है।

7. एचएमटी लिमिटेड

एचएमटी का नमा जेहन में आते ही कई लोग घड़ीके बारे में सोचने लगते हैं। अगर आप भी ऐसा ही सोच रहे हैं तो हां यह सच है कि एचएमटी ही घड़ी भी बनाती थी और ट्रैक्टर भी बनाती है। यह कंपनी 1971 में बेंगलुरू से शुरू हुई थी।

6. न्यू हॉलैंड

बेहतरीन कस्टमर सपोर्ट के लिए मशहूर यह ट्रैक्टर कंपनी मूल रूप से इटली की है। न्यू हॉलैंड कई प्रॉडक्ट बनाती है। यह कंपनी भारत में 1996 में शुरू हुई और अबतक 2.5 लाख ट्रैक्टर से ज्यादा बेच चुकी है।

5. जॉन डियरे

इस लिस्ट में 5वें स्थान पर काबिज है जॉन डियरे। अमरीका की यह कंपनी भारत में अच्दा परफॉर्म कर रही है। यह कंपनी 1837 में स्थापित हुई थी और ग्लोबल फॉच्र्यून की लिस्ट में 300वें स्थान के आसापास है।

4. सोनालीका

इंटरनेशनल पंजाब आधारित यह कंपनी चौथे स्थान पर है। भारत की सबसे पुरानी ट्रैक्टर कंपनियों में से एक सोनालीका ने 2004 में पैसेंजर कार बनाने की ओर भी रुख किया था।

3. एस्कॉर्ट एग्री मशीनरी

कृषि के क्षेत्र में एस्कॉर्ट का नाम काफी मशहूर है। यह सिर्फ भारत में ही नहीं, विदेश में भी चर्चित है। 1960 में इस कंपनी की स्थापना हुई। यह कंपनी भारत के अलावा 40 अन्य देशों में भी ट्रैक्टर एक्सपोर्ट करती है।

 

2. टैफे

ट्रैक्टर एंड फार्म इक्विपमेंट्स लिमिटेड नामक यह कंपनी 1960 में ​स्थापित हुई थी। चेन्नई स्थित यह कंपनी टॉप 10 ट्रैक्टर्स की लिस्ट में दूसरे स्थान पर काबिज है।

1. महिंद्रा

महिंद्रा केवल भारत की ही नंबर एक ट्रैक्टर निर्माता कंपनी नहीं है, बल्कि दुनिया में सबसे ज्यादा ट्रैक्टर ​बेचने वाली कंपनी है महिंद्रा। 1964 में स्थापित हुई यह कंपनी ट्रैक्टर निर्माता कंपनियों में सर्वश्रेष्ठ है। साथ ही यह कंपनी पैसेंजर और कॅमर्शियल सेगमेंट के वाहनों में भी काफी मशहूर है।

वीडियो भी देखें

नीलगाय को अपने खेतों से दूर रखने के लिए इस्तेमाल करें यह 10 परंपरागत नुस्ख़े

किसान नीलगाय के आतंक से परेशान हैं। हजारों रुपए की लागत और हड्डी तोड़ मेहनत से तैयार होती फसल को छुट्टा जानवर बर्बाद कर देते हैं, किसानों को सबसे अधिक नुकसान नीलगाय करती हैं। कई किसान रात-रात भर जागकर खेतों की रखवाली कर रहे हैं। इन छुट्टा जानवरों का असर खेती पर पड़ रहा है।

नीलगाय के आतंक से परेशान किसानों के लिए कृषि वैज्ञानिकों ने कई घरेलू और परंपरागत नुस्ख़े बताए हैं जिससे काफी कम कीमत में किसानों को ऐसे पशुओं से आजादी मिल सकती है।

भारतीय गन्ना अऩुसंधान संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक (कीट और फसल सुरक्षा) डॉ. कामता प्रसाद बताते हैं, परंपरागत तरीके किसानों को जरुर आज़माने चाहिए।

नीलगाय रोकने के लिए करें यह 15 उपाय

  1. नीलगाय को खेतों की ओर आने से रोकने के लिए 4 लीटर मट्ठे में आधा किलो छिला हुआ लहसुन पीसकर मिलाकर इसमें 500 ग्राम बालू डालें। इस घोल को पांच दिन बाद छिड़काव करें। इसकी गंध से करीब 20 दिन तक नीलगाय खेतों में नहीं आएगी। इसे 15 लीटर पानी के साथ भी प्रयोग किया जा सकता है।
  2. बीस लीटर गोमूत्र, 5 किलोग्राम नीम की पत्ती, 2 किग्रा धतूरा, 2 किग्रा मदार की जड़, फल-फूल, 500 ग्राम तंबाकू की पत्ती, 250 ग्राम लहसुन, 150 लालमिर्च पाउडर को एक डिब्बे में भरकर वायुरोधी बनाकर धूप में 40 दिन के लिए रख दें। इसके बाद एकलीटर दवा 80 लीटर पानी में घोलकर फसल पर छिड़काव करने से महीना भर तक नीलगाय फसलों को नुकसान नहीं पहुंचाती है। इससे फसल की कीटों से भी रक्षा होती है
  3. खेत के चारों ओर कंटीली तार, बांस की फंटियां या चमकीली बैंड से घेराबंदी करें।
  4. खेत की मेड़ों के किनारे पेड़ जैसे करौंदा, जेट्रोफा, तुलसी, खस, जिरेनियम, मेंथा, एलेमन ग्रास, सिट्रोनेला, पामारोजा का रोपण भी नीलगाय से सुरक्षा देंगे।
  5. खेत में आदमी के आकार का पुतला बनाकर खड़ा करने से रात में नीलगाय देखकर डर जाती हैं।
  6. नीलगाय के गोबर का घोल बनाकर मेड़ से एक मीटर अन्दर फसलों पर छिड़काव करने से अस्थाई रूप से फसलों की सुरक्षा की जा सकती है।
  7. एक लीटर पानी में एक ढक्कन फिनाइल के घोल के छिड़काव से फसलों को बचाया जा सकता है।
  8. गधों की लीद, पोल्ट्री का कचरा, गोमूत्र, सड़ी सब्जियों की पत्तियों का घोल बनाकर फसलों पर छिड़काव करने से नीलगाय खेतों के पास नहीं फटकती।
  9. देशी जीवनाशी मिश्रण बनाकर फसलों पर छिड़काव करने से नीलगाय दूर भागती हैं।
  10. कई जगह खेत में रात के वक्त मिट्टी के तेल की डिबरी जलाने से नीलगाय नहीं आती है।

आ गया कम कीमत वाला मिनी ट्रेक्टर जो करे बड़े ट्रेक्टर वाले सारे काम

एक किसान के लिए सब से ज्यादा जरूरी एक ट्रेक्टर होता है । लेकिन महंगा होने के कारण हर किसान ट्रेक्टर खरीद नहीं सकता । क्योंकि छोटे से छोटा ट्रेक्टर कम से कम 4 लाख से शुरू होता है।

लेकिन अब एक ऐसा ट्रेक्टर आ गया है जो ट्रेक्टर से 4 गुना कम कीमत पर भी ट्रेक्टर के सभी काम कर सकता है । जी हाँ यह है त्रिशूल कंपनी द्वारा त्यार किया हुआ त्रिशूल मिनी ट्रेक्टर (TRISHOOL MINI TRACTOR)

10 HP से शुरू होने वाले यह मिनी ट्रेक्टर एक छोटे किसान के सारे काम कर सकता है । त्रिशूल मिनी ट्रेक्टर से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है। इसके शुरुआती 10 HP वाले ट्रेक्टर की कीमत तकरीबन 1 लाख 75 हजार रु है।

इसके बाकी मॉडल्स की कीमत इस तरह है।

  • 12 HP – 250000/-
  • 16 HP – 265000/-
  • 22 HP – 325000/-

त्रिशूल मिनी ट्रेक्टर 10 HP की जानकारी इस तरह है

  • इंजन – 510 CC ,फोर स्ट्रोक
  • लंबाई – 1950 MM . चौड़ाई – 860 MM. ऊंचाई – 1250 MM.
  • वजन – 550 किलोग्राम
  • इंजन सिलेंडर – एक
  • प्रकार- एयर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 3000
  • डीज़ल की खपत – 750 मी.ली एक घंटे में
  • गिअर – 3 आगे, 1 रिवर्स

बाकी मॉडल की जानकारी इस फोटो में देखें

यह मिनी ट्रेक्टर कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इसे खरीदना चाहते है तो नीचे  दिए हुए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते है

  • घोड़ावदार रोड , गोंडल
  • Dist :राजकोट (गुजरात)
  • फ़ोन:9825546964 and 9978443843

दिन में तीन बार बदलता है इस शिवलिंग का रंग

वैसे तो पूरे भारत मे अचलेश्वर महादेव के नाम से कई मंदिर है पर आज हम बात कर रहे है राजस्थान के धौलपुर जिले में स्थित अचलेश्वर महादेव मंदिर के बारे मे।

इस मंदिर की सबसे बड़ी खासियत है कि यहां स्थित शिवलिंग दिन मे तीन बार रंग बदलता है। सुबह शिवलिंग का रंग लाल रहता है, दोपहर को केसरिया रंग का हो जाता है, और जैसे-जैसे शाम होती है शिवलिंग का रंग सांवला हो जाता है।

ऐसा क्यों होता है इसका किसी के पास जवाब नहीं है। भगवान अचलेश्वर महादेव का यह मंदिर हजारों साल पुराना है। इस शिवलिंग कि एक और अनोखी बात यह है कि इस शिवलिंग के छोर का आज तक पता नहीं चला है।

कहते है बहुत समय पहले भक्तों ने यह जानने के लिए कि यह शिवलिंग जमीं मे कितना गड़ा है, इसकी खुदाई की, पर काफी गहराई तक खोदने के बाद भी उन्हे इसके छोर का पता नहीं चला।

इस चमत्कारी शिवलिंग के विषय में मान्यता है कि जो भी कुंवारा लड़का या लड़की यहां आकर मन्नत मांगते हैं उनकी जल्द ही शादी हो जाती है। शिवजी की कृपा से लड़कियों को मनचाहा वर भी मिल जाता है।

एक चरवाहे ने एक व्यापारी को दी ऐसी नसीहत की उसकी जिंदगी बदल गई

एक बहुत ही अमीर व्यापारी था उसका बिज़नेस बहुत बड़ा था और वो अक्सर अपने बिज़नेस को लेकर अलग-अलग राज्यों में घूमता रहता था । बहुत पैसा होने के बावजूद भी वो हर वक़्त चिंता में रहता ।रात को नींद के लिए वो नींद की गोली खाता था ।

ऐसे ही वो एक दिन एक बिज़नेस डील के लिए जा रहा था के रस्ते में उसकी गाड़ी ख़राब हो गई । ड्राईवर ने बोला की इसको ठीक करने के लिए शहर से मकैनिक बुलाना पड़ेगा इस लिए आप थोड़ी देर टहल ले ।

जब व्यापारी वहां घूम रहा था तो उसकी नज़र एक चरवाहे पर पड़ी जो एक पेड़ के नीचे आराम से सो रहा था । व्यापारी हैरान था कोई ऐसे कैसे दिन में आराम से सो सकता है ।व्यापारी से रहा नहीं गया वो चरवाहे के पास चला गया । जब व्यापारी चरवाहे के पास गया तो उसकी नींद खुल गई ।

व्यापारी ने चरवाहे को कहा “तुम यह भेड़ बकरी चरवाने की जगह पर कोई और काम क्यों नहीं करते जिस से तुम्हे और आमदनी हो बहुत पैसा आये”

चरवाहा “और काम से क्या होगा ?”
व्यापारी “अगर अच्छे पैसे होंगे तो तुम शहर जा सकते हो अपना छोटा बिजनेस शुरू कर सकते हो ”

चरवाहा “बिजनेस शुरू करने से क्या होगा ?”
व्यापारी “उस से तुम शहर में बढ़िया घर ले सकते हो तुम्हारे पास नौकर चाकर होंगे, बड़ी गाड़ी होगी ”

चरवाहा “नौकर-चाकर से क्या होगा ?”
व्यापारी “नौकर-चाकर से तुम्हे कोई भी काम करने की जरूरत नहीं रहेगी आराम से टांगे फैला कर सोना ”

चरवाहा ” तो साहब अब भी टांगे फैला कर सो रहा हूँ ,ऐसे ही मेरी नींद खरब की ,मुझे ज्यादा तो नहीं पता पर इतना जरूर कह सकता हूँ की मुझे इस पेड़ के नीचे आप के महल से अच्छी नींद आती है । जिंदगी में बहुत सी चीजें है जो मुफत में मिलती है पैसे से पीछे भागने से पहले उनका आनंद लेना सीखें ”

इतना बोल कर चरवाहा आराम से सो गया और व्यापारी पास में सुन्न बैठा जिंदगी के मायने ढूंढ़ता रहा ।अगर बात अच्छी लगी तो शेयर जरूर करें