हार्ट अटैक से एक महीने पहले आपकी बॉडी देती है वॉर्निंग, नज़रअंदाज़ ना करें ये लक्षण

भारत समेत दुनिया भर में सबसे ज़्यादा मौतें हृदयाघात या हार्ट अटैक से होती हैं। ऐसा माना जाता है कि अटैक से कुछ समय पहले ही इसके संकेत मिलना शुरू हो जाते हैं लेकिन लोग इन लक्षणों को आम समझ कर इन्हें नज़रअंदाज़ कर देते हैं जिसकी वजह से उनकी जान पे बन आती है। आइए जानते हैं कि कौन से हैं वो लक्षण जिनपर आपको हमेशा गौर करते रहना चाहिए।

तकनीकी रूप से हार्ट अटैक तब आता है जब हार्ट का कोई हिस्सा ब्लॉक हो जाता है एवं हार्ट को ऑक्सीजनयुक्त रक्त नहीं मिल पाता। ऐसे में तुरंत इलाज न मिलने पर मरीज़ की मृत्यु भी हो सकती है। ऐसी स्थिति बनने से पहले ही आप हाई ब्लडप्रैशर के शिकार हो जाते हैं तो यदि आपको उच्च रक्तचाप की शिकायत है तो अभी से सावधान हो जाएं।

हमारे दिल की सेहत में हुए बदलाव को जिस लक्षण के रूप में पहचाना जा सकता है वह है

थकान- थकान से यहाँ अभिप्राय है कि बिना श्रम करे अथवा मामूली कार्य करने में भी यदि अक्सर थकान महसूस करते हैं तो यह एक चिंता का कारण हो सकता है। यदि अपने पर्याप्त मात्रा में भोजन किया हो तथा नींद भी भरपूर ली हो तब भी यदि आपको थकान महसूस हो तो यह सामान्य बात नहीं है।

बेवजह नींद उचटना-दूसरा लक्षण है बेवजह नींद उचटना। यदि बार-बार आप नींद से जाग जाते हैं तो यह आपके अवचेतन का आपको जताने का एक तरीका है कि आपके शरीर के साथ कुछ ठीक नहीं है। ऐसे में बार-बार आपको लग सकता है कि आपको बाथरूम जाना है अथवा आपको बार-बार प्यास लगने के कारण उठना पड़ता है।

अपच की शिकायत -सामान्य भोजन करने के पश्चात् भी यदि आपको अपच की शिकायत रहती है तो यह भी आपके दिल की सेहत से जुड़ा मामला हो सकता है।यदि आप इन लक्षणों को महसूस कर रहे हैं तो आज ही आपको सजग हो जाना चाहिए। हमारी सेहत का ख्याल रखना हमारा परम कर्तव्य है। बिना समय गंवाए अपने दिल की जाँच कराएं और आवश्यक उपचार करें।

अन्य लक्षण जो कि हार्ट की किसी समस्या को इंगित करता है वह है हांफ भर आना। जब शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल पाती उस परिस्थिति में ऐसा होता है। इसके अलावा अक्सर आपको गहरी सांस लेने की भी आवश्यकता महसूस होती है।

अब हिरा रेन गन से जब चाहे खेत में बारिश होगी

भारत की खेती मानसून पर निर्भर है देशभर में मानसून की रफ्तार को लेकर कयास लगते रहते हैं कि मानसून समय पर पहुंचेगा या नहीं। लेकिन इसके उल्ट हिरा रेन गन से अब जब चाहो तब बारिश होगी।

चौकिए मत…! हिरा रेन गन लगाने के बाद सिंचाई के लिए प्रबंधन को न तो नहर की आवश्यकता होती है और न ही बारिश के लिए आसमान का मुंह ताकना होगा। रेन गन से आप जब चाहो बारिश की बौछारें पैदा कर सकेंगा। रेन गन से पानी की खपत कम हो जाती है ।

रेन गन सिस्टम लगने के बाद पानी की खपत 10 गुना कम हो जाती है। हिरा रेन गन से आप फसल को जितना चाहे, जब चाहे, नियंत्रित पानी देने की व्यवस्था होती है ।

रेन गन की इस्तमाल कहाँ क्या जा सकता है

  • गन्ने, मुँगफली,बाजरा,गेहूँ, चने और दालो की खेती में प्रयोग होता है ।
  • इनका उपयोग चाय बागान,कॉफी पौधकरन में भी किया जाता है ।
  • धूल दमन, हरी चराई, खेल के मैदान और गोल्फ कोर्स में इस्तेमाल होता है ।

हिरा रेन गन के दो मॉडल आते है जिनकी विशेषता निचे लिखी हुई है

पेंग्विन 

  • नोजल (मिमी) 12×4
  • प्रेशर (प्रेशर/ सेमी²) 4
  • रेडीअस (मीटर) 26
  • डिस्चार्ज (लिटर मिनट) 211

पेलिकन 

  • नोजल (मिमी) 14×5
  • प्रेशर (प्रेशर/ सेमी²) 4
  • रेडीअस (मीटर) 26
  • डिस्चार्ज (लिटर मिनट) 277

हिरा रेन गन के दोनों मॉडल की कीमत

  • पेंगुइन रेन गन = 2200 Rs. और स्टैंड = 2000 Rs.
  • पेलिकन रेन गन = 3300 Rs.और स्टैंड = 2500 Rs

भविष्य में इस तरह की अलग – अलग जानकारी इस तरह ही अलग – अलग तरीको से देते जाएगे तो आप हमसे जानकारी पाने के लिए हमसे जुड़ सकते हें.

और ज्यादा जानकारी के लिए निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क करें

हिरा अॅग्रो कॅाल सेंटर से 7741903237 / 9370722722  संपर्क करे.

रेन गन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो भी देखें

ग्रीन हाउस निर्माण की लागत और आमदनी

ग्रीनहाउस क्या है ? वास्तव में ग्रीन हाउस एक ऐसी निर्मित संरचना है जो पारदर्शी सामग्री से ढंकी होती है। ग्रीनहाउस सब्जियों और फुलों की वृद्धि के लिए नियंत्रित वातावरण की परिस्थितियां उपलब्ध कराता है। परंपरागत तरीके में खुली ज़मीन पर होने वाली खेती की तुलना में कम ज़मीन पर नियंत्रित खेती और अधिक उत्पादकता की वजह से भारत में इन दिनों ग्रीनहाउस की अवधारणा लोकप्रिय होती जा रही है।

ग्रीनहाउस खेती में आरंभिक निवेश लागत अधिक होती है। हालांकि ग्रीनहाउस संरचना के निर्माण के लिए लोन या सब्सिडी का विकल्प भी उपलब्ध है। आरंभिक स्तर पर लागत को कम करने के लिए कम लागत या कम प्रौद्योगिकी वाली ग्रीनहाउस संरचना के निर्माण का भी विकल्प उपलब्ध है जिसमें स्थानीय सामग्रियों मसलन बांस, लकड़ियों आदि का इस्तेमाल करके ग्रीनहाउस की सामान्य संरचना तैयार की जाती है।

इस लेख में हम उदाहरण के लिए निर्यात बाजार और घरेलु जरूरतों की पूर्ती के लिए गुलाब के फुलों के उत्पादन के मॉडल और उसके लिए तैयार की जाने वाली ग्रीनहाउस संरचना की लागत को सामने रख कर विचार करते हैं।

ग्रीनहाउस संरचना के निर्माण में लगने वाली सामग्री निम्नलिखित हैं

ज़मीन खरीद की आवश्यकता (लोकेशन बहुत महत्वपूर्ण, स्थानीय बाज़ार के नजदीक जमीन लेना अच्छा विचार)
ग्रीनहाउस संरचना का निर्माण (सामग्रियों सहित)
संरचना में लगने वाली सामग्रियों की खरीद
सिंचाई में काम आने वाली सामग्रियों की खरीद
फर्टिलाइज़र से जुड़ी सामग्री की खरीद
ग्रेडिंग और पैकिंग के लिए जगह की खरीद
रेफ्रेजरेटेड वैन की खरीद
कार्यालय उपकरण की खरीद
निर्यात के लिए आवश्यक प्रौद्योगिकी की खरीद
इन सभी संसाधनों को तैयार करने के लिए लगने वाली मजदूरी
तकनीक से जुड़े श्रमिकों पर होने वाले खर्च
कीटनाशकों, ऊर्वरकों & प्रेजेर्वेटिव्स की खरीद की लागत

ग्रीन हाउस कृषि में दो प्रकार की लागत आती है

1) निश्चित लागत वाली सामग्री

स्थायी सामग्री की लागत उदाहरण के लिए जमीन की लागत, निर्माण सामग्री की लागत, सिंचाई सुविधा या अन्य जरूरी सामग्रियों की लागत

2) समय समय पर होने वाले खर्च या आवर्ती लागत

पौधों को लगाने में होने वाले खर्च, बुआई की लागत, रखरखाव और मजदूरों पर आने वाले खर्च, स्टोरेज, पैकिंग और ढुलाई पर होने वाले खर्च आदि आदि।

दोनों ही परिस्थितियों में आने वाले खर्च का एक प्रकार का लेखा जोखा नीचे दिया गया है। नीचे दिए गए ये खर्च एक हेक्टेयर के ग्रीन हाउस में गुलाब की खेती से जुड़ा है।

निवेशक के द्वारा लगाया जाने वाले प्रारंभिक निवेश

प्रोजेक्ट की कुल लागत का 25 फ़ीसदी उद्यमी की ओर से लगाया जाएगा
मूल धन और ब्याज सात साल में वापिस किए जाने हैं जिसमें पहले साल ब्याज औऱ दो साल तक मूल धन पर रोक रहेगी।

स्थायी लागत का वर्णन इस प्रकार है                                                               सम्मिलित सामग्री राशि (रुपये में)

ज़मीन & उसको तैयार करने का खर्च                                                                          4 लाख
ग्रीन हाउस की लागत                                                                                                    13 लाख
कोल्ड स्टोरेज की लागत                                                                                              10 लाख
ऑफिस एरिया की लागत                                                                                            2.5 लाख
ग्रेडिंग & पैकिंग की लागत                                                                                          5 लाख
रेफ्रिजरेडेट वैन की लागत                                                                                           1 लाख
जेनेरेटर सेट                                                                                                               2 लाख
फैक्स, टेलिफोन, कम्प्यूटर                                                                                     1 लाख
फर्नीचर की लागत                                                                                                      50 हजार
विधुत आपूर्ति की स्थापना का खर्च                                                                     2 लाख
जल आपूर्ति, ड्रीप सिंचाई & फागिंग मशीन की प्रणाली का खर्च                                          6 लाख
बुआई सामग्री & बुआई की लागत                                                                         30 लाख
कुल                                                                                                                       77 लाख

प्रोजेक्ट की आवर्ती लागत का ब्यौरा

संख्या सामग्री खर्च

इलेक्ट्रिसिटी चार्ज प्रति वर्ष                                                                                     6 लाख
खाद & फर्टीलाइजर की लागत                                                                              1 लाख
पौधों की सुरक्षा का खर्च                                                                                          1 लाख
प्रीजरवेटिव्स की लागत                                                                                        3 लाख
पैकिंग सामग्री की लागत                                                                                      2 लाख
हवाई माल ढुलाई का खर्च                                                                                  125 लाख
श्रमिकों का खर्च                                                                                                      3 लाख
कमीशन/इंश्योरेंस                                                                                                  15 लाख
वेतन कर्मचारियों का                                                                                              5 लाख
उपरी लागत                                                                                                            50 हजार
अन्य खर्च                                                                                                                 4 लाख
कुल आवर्ति लागत                                                                                              166.5 लाख

इस तरह से ग्रीन हाउस प्रोजेक्ट की लागत स्थायी और आवर्ती लागत मिला कर पहले साल में 2 करोड़ 43 लाख और 50 हजार रुपया आता है।

इस प्रोजेक्ट से होने वाले उत्पादन का ब्यौरा

  • प्रति हेक्टेयर गुलाब के पौधों की संख्या – साठ हजार
    प्रत्येक पौधे से मिलने वाले गुलाब की संख्या – 100 से 150
  • निर्यात की गुणवत्ता वाले गुलाब की संख्या – 60-100
  • अंतर्राष्ट्रीय बाजार में प्रति गुलाब मिलने वाली कीमत – 6-11 रुपया
  • प्रति एकड़ में निर्यात किए जा सकने लायक गुलाब की संख्या – साठ लाख गुलाब
  • निर्यात से होने वाली आमदनी – कम से कम तीन करोड़ रुपया सालाना
  • ये आमदनी ग्रीन हाउस की स्थिति और वर्तमान बाजार मूल्य के मुताबिक परिवर्तिनीय है।

किसानो को बड़ी राहत, ट्रेक्टर और खाद की जीएसटी में मिली इतने फीसदी की छूट

जीएसटी काउंसिल ने किसानों को बड़ी राहत दी है. अब फर्टिलाइजर पर जीएसटी के तहत 12 फीसदी की बजाए 5 फीसदी टैक्स ही देना होगा. शुक्रवार को जीएसटी काउंसिल की बैठक में इस पर फैसला लिया गया. ट्रैक्‍टर के कल-पूर्जों पर भी टैक्‍स 28 फीसदी से कम करके 18 फीसदी कर दिया गया है.

अभी 8 फीसदी तक था टैक्‍स

फर्टिलाइजर पर 12 फीसदी टैक्‍स लगाए जाने पर कई राज्‍यों ने चिंता जताई थी. उनकी दलील थी कि इससे किसानों पर बोझ बढ़ेगा. जीएसटी लागू होने से पहले अभी तक खाद पर शून्‍य से लेकर 8 फीसदी तक टैक्‍स लगता था.

550 लाख टन खाद का होता है उपयोग

देश में हर साल करीब 22.4 करोड़ टन खाद्यान्‍न का उत्‍पादन होता है, जिसके लिए किसान करीब 550 लाख टन खाद का उपयोग करते हैं. अगर खाद पर 12 फीसदी टैक्‍स लगाया जाता तो 50 किलो के एक यूरिया बैग की कीमत में 35 रुपए का इजाफा हो जाता. लेकिन जीएसटी काउंसिल ने इसे कम करके किसानों को बड़ी राहत दी है.

ट्रैक्‍टर के कल-पूर्जों पर 18 फीसदी टैक्‍स

जीएसटी काउंसिल ने ट्रैक्‍टर के कल-पूर्जों पर भी कर की दर 28 फीसदी से कम करके 18 फीसदी कर दिया है. अभी तक इन पर 5 से लेकर 17 फीसदी के बीच कर लगता रहा था. जीएसटी काउंसिल ने इसे बढ़ाकर 18 फीसदी से 28 फीसदी कर दिया था. इस पर किसानों ने भारी चिंता जताई थी. देश में हर साल लगभग 6.5 लाख ट्रैक्‍टर की बिक्री होती है. सबसे अधिक बिक्री कॉम्‍पैक्‍ट ट्रैक्‍टर की होती है.