यह मशीन मात्र दो घंटे में करती है 1 एकड़ भूमि में गन्ने की रोपनी

अब गन्ने की खेती और भी आसान हो गई है। पहले गन्ने की खेती करने में जहां गन्ने को खेतों में गिराने, उर्वरक देने, कीटनाशी देने, कुदाल चलाने में अलग-अलग मजदूरों का सहयोग लेना पड़ता था। अब एक एकड़ में मात्र दो मजदूर से ही गन्ने की रोपनी की जा सकती है।

कटर एंड प्लांटर मशीन से यह संभव हो सका है। क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र माधोपुर में इस मशीन से इस वर्ष गन्ने की खेती फार्म में की गई है। खासकर बड़े किसानों व मध्यमवर्गीय किसानों के लिए यह फायदेमंद साबित हो रहा है।

इस मशीन से एक ही बार में गन्ने को बीज के लिए कटिंग संभव है। खेतों में नाली बनाने, बीज का शोधन करने, कीटनाशी व खरपतवारनाशी दवाओं का छिड़काव, जमीन की जुताई से लेकर मिट्टी को बराबर करने का काम भी एक ही साथ में संभव है।

इससे किसानों को समय की भी बचत हो रही है। एक एकड़ भूमि में गन्ने की रोपनी करने में मात्र दो घंटे का ही समय ही लग रहा है। जबकि मात्र दो मजदूर इसके लिए काफी है। जहां साधारण तरीके से गन्ने की खेती करने में प्रति एकड़ 16 क्वटल गन्ने का बीज लगा करते है वही इस मशीन से चार क्वटल गन्ने की बचत किसानों को हो रही है। जिसका सीधा लाभ किसान उठा रहे है।

बहुत सारी कंपनी यह मशीन त्यार करती है लेकिन हम आप को मोगा इंजीनियरिंग वर्क्स कंपनी की इस मशीन के बारे में बातयेंगे । यह मशीन एक साथ 3 कतरों में एक साथ गन्ना बीज सकते है। इस मशीन की और जानकारी के लिए आप इस नंबर 8285325047 पर संपर्क कर सकते है । यह कंपनी मीरुत, उत्तर प्रदेश की है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

आ गया मेगा टी अब ट्रेक्टर से पांच गुना कम कीमत पर करें ट्रैक्टर के सारे काम

बहुत से किसान हर साल इस लिए खेती करना छोड़ देते है क्यूंकि उनके पास खेती करने के लिए जरूरी साधन नहीं होते । एक किसान के लिए सबसे जरूरी चीज ट्रेक्टर होता है लेकिन ट्रेक्टर महंगा होने के कारण हर किसान इसे खरीद नहीं पता ।

ऐसे किसानो के लिए किर्लोस्कर कंपनी ने मेगा टी पेश क्या है । जिसकी कीमत तो ट्रेक्टर के मुकाबले कम है लेकिन यह ट्रेक्टर वाले सारे काम कर देता है । इस मशीन से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है।इसकी कीमत तकरीबन 1 लाख 40 हजार है।

मशीन की जानकारी

  • मॉडल – मेगा-टी (15 HP) हैंडल स्टार्ट
  • लंबाई – 2950 mm. चौड़ाई – 950 mm. ऊंचाई – 1300 mm.
  • इंजन का वजन – 138 किलोग्राम
  • इंजन की ऑयल कैपेसटी – 3.5 लीटर
  • प्रकार- वाटर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 2000
  • ब्लेडों की संख्या – 20
  • गिअर – 6 आगे, 2 रिवर्स

यह मशीन कैसे काम करता है इसके लिए वीडियो भी देखें

कहीं भी उगाएं बटन मशरूम, एक सीजन में 3 लाख तक कमाने का मौका

अगर खेतीबाड़ी के जरि‍ए अच्‍छी कमा ई करने के तरीका खोज रहे हैं तो बटन मशरूम की खेती एक अच्‍छा ऑप्‍शन हो सकता है। यह मशरूम की ही एक कि‍स्‍म होता है, मगर इसमें मि‍नरल्स और वि‍टामि‍न खूब होते हैं। इसकी खासि‍यत ये है कि‍ आप एक झोंपड़ी में भी इसकी फायदेमंद खेती कर सकते हैं। मशरूम अपने हेल्थ बेनेफि‍ट्स की वजह से लगातार पॉपुलर हो रही है। फुटकर में इसका रेट 300 से 350 रुपए कि‍लो है।

बड़े शहरों में तो यह इसी रेट में मि‍लता है। थोक का रेट इससे करीब 40% तक कम होता है। कई लोगों ने पारंपरि‍क खेती को छोड़कर मशरूम उगाना शुरू कर दि‍या है और अब अच्‍छी खासी कमाई कर रहे हैं। जैसे गोरखपुर के कि‍सान राहुल सिंह।

 उपज और मुनाफे का गणि‍त

राहुल हर साल 4 से 5 क्विंटल कंपोस्‍ट बनाकर उसपर बटन मशरूम की खेती करते हैं। इतनी कंपोस्‍ट पर करीब 2000 कि‍लो मशरूम पैदा हो जाता है। एक क्विंटल कम्पोस्ट में डेढ़ किलो बीज लगते हैं। इसकी बाजार में कीमत 200 से 250 रुपए होती है। मशरूम का थोक रेट 150 से 200 रुपए कि‍लो है।

अब 2000 कि‍लो मशरूम अगर 150 रुपए एक कि‍लो के हि‍साब से भी बि‍कती है तो करीब 3 लाख रुपए मि‍लते हैं। इसमें से 50 हजार रुपए लागत के तौर पर नि‍काल दें तो भी ढाई लाख रुपए बचते हैं, हालांकि‍ इसकी लागत 50 हजार से कम ही आती है। प्रति‍ वर्ग मीटर 10 कि‍लोग्राम मशरूम आराम से पैदा हो जाता है।

इस तरह होती है खेती

  • मशरूम अक्‍टूबर-नवंबर में लगाई जाती है और पूरी सर्दी इसका उत्‍पादन होता रहता है।
  • राहुल करीब 40 बाई 30 फुट की झोंपड़ी में खेती करते हैं। इसमें वह तीन तीन फुट चौड़ी रैक बनाकर मशरूम उगाते हैं।
  • इसके लि‍ए आपको कंपोस्‍ट तैयार करना होता है। आप इस काम के लि‍ए धान की पुआल का यूज कर सकते हैं। सबसे पहले धान की पुआल को भि‍गो दें और एक दि‍न बाद इसमें डीएपी, यूरि‍या, पोटाश व गेहूं का चोकर, जि‍प्‍सम, कैल्‍शि‍यम और कार्बो फ्यूराडन मि‍ला कर सड़ने के लि‍ए छोड़ दें।
  • उसे करीब 30 दि‍न के लि‍ए छोड़ दें। हर 4 से 5 दि‍न पर इसे पलटते रहें और आधा महीना हो जाने पर इसमें नीम की खली और गुड़ का पाक या शीरा मि‍ला दें।
  • एक महीना बीत जाने के बाद एक बार फि‍र से बावि‍स्‍टीन और फार्मोलीन छि‍ड़ने के बाद इसे कि‍सी ति‍रपाल से 6 घंटों के ढक दि‍या जाता है। अब आपका कंपोस्‍ट तैयार हो गया।

इस तरह बि‍छाएं कंपोस्‍ट

  • पहले नीचे गोबर की खाद और मि‍ट्टी को बराबर मात्रा में मि‍लाकर करीब डेढ़ इंच मोटी परत बि‍छाई जाती है। इसके ऊपर कंपोस्‍ट की दो से तीन इंच मोची परत चढ़ाएं।
  • इसके ऊपर कंपोस्‍ट की दो तीन इंच मोटी परत चढ़ाएं और उसके ऊपर मशरूम के बीज समान मात्रा में फैला दें। फि‍र इसके ऊपर एक दो इंच मोटी कंपोस्‍ट की परत और चढ़ा दें।
  • झोंपड़ी में नमी का स्‍तर बना रहना चाहि‍ए और स्‍प्रे से मशरूम पर दि‍न में दो से तीन बार छि‍ड़काव होना चाहि‍ए। झोंपड़ी का तापमान 20 डि‍ग्री बना रहे।
  • सभी एग्रीकल्‍चर यूनि‍वर्सि‍टी और कृषि‍ अनुसंधान केंद्रों में मशरूम के खेती की ट्रेनिंग दी जाती है। अगर आप इसी बड़े पैमाने पर खेती करने की योजना बना रहे हैं तो बेहतर होगा एक बार इसकी सही ढंग से ट्रेनिंग जरूर लें।

News Source: Money Bhaskar News

एक-एक मीटर की दूरी पर लगाए अनार, आंधी में भी नहीं गिरे पौधे

डीडीए उद्यानिकी अजय चौहान ने बताया अनार की खेती के लिए हल्की जमीन अत्यंत उपयुक्त होती है। ऐसी जमीन में क्यारी से क्यारी 5 मीटर व पौधे से पौधे की दूरी 3 मीटर रखना चाहिए। एक हेक्टेयर में 667 पौधे लगाए जाते हैं। पौधे लगाने के दूसरे वर्ष में प्रति पौधा 10-15 किलो का उत्पादन शुरू होता है। जो साल-दर-साल बढ़कर 30-35 किलो तक पहुंच जाता है। इस प्रकार एक बार पौधा लगाने के बाद वह आगामी 30 साल तक लगातार उत्पादन देता रहता है।

अनार के पौधे को विशेष काट-छांट की आवश्यकता पड़ती है। वही ड्रिप से पानी देने के कारण उत्पादन लागत भी कम हो जाती है। शासन भी राष्ट्रीय कृषि मिशन के तहत प्रति हेक्टेयर प्रथम वर्ष 45 हजार और दूसरे व तीसरे वर्ष 15-15 हजार रुपए का अनुदान देता है।

यह है हाईडेंसिटी प्लांटेशन तकनीक

अल्टाडेंसिटी प्लांटेशन तकनीक में पौधों को कम दूरी पर लगाया जाता है। ऊंचाई को नियंत्रित रखने के लिए समय-समय पर कटाई-छंटाई करना आवश्यक है। शाखा आने पर उसे ऊपर से काट दें। काटी शाखा में फिर तीन शाखाएं आती है। एक बढ़ने पर इसे फिर काट देते हैं। इस तरह यह पेड़ छतरीनुमा बन जाता है, इसकी ऊंचाई छह फीट रहती है। कृषि कॉलेज में हो रहे अनुसंधान में पौधे से पौधे की दूरी 1 मीटर और कतार से कतार की दूरी 3 मीटर रखी है। इस लिहाज से एक एकड़ में 674 पौधे आते हैं।

इसलिए हवा-आंधी से आड़ी नहीं होती है फसल 

उद्यानिकी विभाग के सेवानिवृत्त उद्यान विकास अधिकारी जवाहरलाल जैन ने बताया अल्ट्रा डेंसिटी प्लांटेशन तकनीक से पौधे रोपने पर तेज हवाओं का असर नहीं होता है। पेड़ अधिक व नुकसान कम होने के कारण चार गुना तक पैदावार में बढ़ोतरी होती है। किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। वहीं, सामान्य पद्धति से रोपे गए पौधे तेज हवा, बेमौसम बारिश होने से आड़े हो जाते हैं, फल झड़ने लगते हैं।