खेतीबाड़ी से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, कभी 45 हजार का करता था जॉब

एक ओर जहां आए दिन किसानों की खुदकुशी की खबरें सुनने को मिलती हैं। वहीं दूसरी ओर नौकरी छोड़ खेतीबाड़ी से जुड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। असम के रहने वाले समीर रंजन बोरडोलोई भी इनमें से एक हैं जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़ खेतीबाड़ी को न सिर्फ अपना करियर बनाया बल्कि करोड़ों का कारोबार भी खड़ा कर दिया। आइए जानते हैं समीर ने कैसे ये मुकाम हासिल किया।

समीर ने बताया किया कि एग्रीकल्चर में ग्रैजुएशन करने के बाद वो टाटा केमिकल्स के एग्रोकेमिकल डिविजन में नौकरी करने लगे। असम के जोरहट जिले में उनकी पोस्टिंग हुई। यहां उन्होंने देखा कि अधिकांश किसान टी क्रॉप पर निर्भर हैं। वो अच्छी उपज के लिए केमिकल्स और फर्टीलाइजर्स का बहुत ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

किसानों को केमिकल्स के कॉकटेल से बचाने के लिए उनको आइडिया मिला और 2003 में उनकी फर्स्ट वेंचर एसएस बोटैनिकल्स की शुरुआत हुई। समीर एग्रीप्रेन्योर हैं और उन्होंने एक से ज्यादा बिजनेस में हाथ आजमाया है। उनकी कंपनी का टर्नओवर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

समीर कहते हैं कि आइडिया से प्रभावित होकर दो बैंकों ने उनका साथ दिया। एसबीआई से उन्होंने 5 लाख रुपए का लोन लेकर शुरुआत की थी। इसके बाद इंडियन बैंक ने 10 लाख रुपए का लोन दिया। लोन मिलने के बाद उन्होंने एक एग्री क्लीनिक की शुरुआत की। यहां पर वो मिट्टी की जांच के साथ खेती से जुड़े से अन्य मसलों पर किसानों को सुझाव देते हैं।

बच्चों को देते हैं एग्रीप्रेन्योर बनने का मंत्र

इसके अलावा समीर स्कूली स्तर पर बच्चों को खेती के बारे में जानकारी देने के मकसद से फार्म स्कूल भी चलाते हैं। यहां पर बच्चों को खेतीबाड़ी की जानकारी दी जाती है। उनका कहना है कि इसका मकसद युवाओं का गांव से पलायन रोकना है। साथ ही वे खेती कर अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अच्छी इनकम अर्जित कर सकें। उनके साथ 2000 से ज्यादा किसान जुड़े हैं।

फार्म टूरिज्म पर शुरू किया है काम

समीर का कहना है कि खेतीबाड़ी में कमाई की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने हाल ही में फार्म टूरिज्म पर काम शुरू किया है। इसके जरिए वो पर्यटकों को गांव के रहन-सहन से रूबरू करवाते हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ग्रीन कमांडो का कॉन्सेप्ट तैयार किया है जिसका मकसद युवाओं को खेती के बारे में जानकारी देना है।

मॉडल विलेज किया डेवलप

उन्होंने नॉथ-ईस्ट के कुछ जिलों में मॉडल विलेज की शुरुआत की है। जहां किसान सिर्फ ऑर्गेनिक खेती करते हैं और संसाधनों को बचाने पर जोर देते हैं। इसके अलावा बांस की खेती को बढ़ावा दिया है। बांस से बने सामानों की अच्छी डिमांड है। इससे किसानों की इनकम बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ऐसा है बिजनेस मॉड्यूल

समीर ने एक और फर्म की नींव रखी जिसका नाम फार्म2फूड फाउंडेशन है। इसके जरिए वो किसानों और युवाओं को खेती की टेक्निक्स सिखाते हैं। एमडी ऑग्रेनिक्स के अंतर्गत 250 गायें हैं। वहीं वो अपने फर्म से 650 टन वर्मी कम्पोस्ट भी तैयार करते हैं। इनको बेचकर भी पैसे मिल जाते हैं। इसके अलावा वो उन कंपनियों में स्टेक खरीदते हैं जिनका फोकस रूरल होता है।

अब इस राज्य किसानों को मिलेगा बिना किसी गारंटी के तीन लाख तक कृषि ऋण

बिहार के किसानों को अब बिना किसी गारंटी के तीन लाख रुपए तक कृषि ऋण मिल सकता है। अभी इसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपए है। राज्य मे 1.61 करोड़ किसान हैं, जिनमें 60 लाख के पास ही केसीसी है। केसीसी को बढाने के लिए प्रखंडों में शिविर लगाए जाएंगे। कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार से बैंक प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद जानकारी दी। 23 जनवरी को हुई इस बैठक में फैसला लिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रखंड स्तर पर तिथि तय कर कैंप लगा कर किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाएंगे। कैं में सभी संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। किसान चैपाल में बैंक खाते की जानकारी ली जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से आसानी से मिल सके।

किसानों के ज्वाइंट लाइबिलिटी ग्रुप (जेएलजी) के माध्यम से पिछले वर्षों में बैंकों द्वापरा ऋण देने में कमी आई है। जेएलजी के माध्यम से अधिकतर बटाईदारों, भूमिहीन किसानों को ऋण की सुविधा मिलती है। पर जब से खाता-खेसरा की मांग होने लगी है, बटाईदार व भूमिहीन किसानों को ऋण मिलने में परेशानी हो रही है।

कृषि मंत्री ने बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 200 प्रोजेक्ट में मात्र 15 प्रोजेक्ट स्वीकृत होना दुखद है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के तहत लेकर काम कर रही है। 21 जिलों में बाढ़ से हुए फसल नुकसान के लिए 894 करोड़ रुपये में से 80 प्रतिशत राशि किसानों के खाते में चली गई है।

 

इजरायल की पावरफुल मशीनें, इनकी टेक्नोलॉजी का लोहा मानती है दुनिया

इस समय दुनिया के कई देश सूखे का सामना कर रहे हैं। वहीं, इजरायल ने आधुनिक टेक्नोलॉजी से न सिर्फ खेती से जुड़ी कई समस्याएं खत्म कीं, बल्कि दुनिया के सामने खेती को फायदे का सौदा बनाने के उदाहरण रखे हैं।

इजरायल ने न केवल अपने मरुस्थलों को हराभरा किया, बल्कि अपनी तकनीक को दूसरे देशों तक भी पहुंचाया। खेती-किसानी के लिए इजरायल ने बाग-बगीचों और पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने जैसी कई ऐसी मशीनें बनाईं, जिनकी आज दुनिया भर में तूती बोल रही है।

कुछ ही घंटों में ही जोत ली जाती हैं सैकड़ों एकड़ जमीन

इजरायल में बहुत कम बारिश होती है। इसके चलते यहां बारिश का फायदा जल्द से जल्द उठाना होता है। आमतौर पर खेत जोतने में ही काफी समय लग जाता है। इसके लिए इजरायल ने इटली से खेत जोतने वाली ये विशालकाय मशीनें खरीदी थीं।

इसके बाद इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने इससे भी आधुनिक मशीनों का प्रोडक्शन शुरू किया। इस तरह अब इजरायल में ये मशीनें अधिकतर किसानों के पास है। इसके अलावा किसान इन्हें किराए पर भी ले सकते हैं। इन मशीनों से कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ जमीन जोत ली जाती है।

कारपेट की तरह शिफ्ट कर देती हैं बगीचे

फोटो में दिखाई दे रही यह मशीन इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई है। इसका उपयोग बाग-बगीचों और पौधों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए किया जाता है। इससे घास-फूंस और पौधों की जड़ों तक को नुकसान नहीं पहुंचता। अब ऐसी मशीनों का उपयोग कई देशों में होने लगा है।

पानी की बचत के लिए अनोखी मशीन

इजरायल में पानी की कमी होने के चलते यहां नहरों की व्यवस्था नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इजरायल के रमत नेगेव डिजर्ट एग्रो रिसर्च सेंटर ने खेतों की सिंचाई के लिए इन स्पेशल मशीनों को डिजाइन किया। इससे न सिर्फ खेतों की सिंचाई होती है, बल्कि पानी की भी काफी बचत हो जाती है। मशीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।

मूंगफली जमीन से निकालकर साफ भी कर देती है

इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई यह मशीन मूंगफली और जमीन के अंदर होने वाली सब्जियों व अनाज को निकालने का काम करती है। मशीन की खासियत यह है कि यह सिर्फ मूंगफली को जमीन से निकालने के बाद उसे साफ भी करती जाती है।

इसके बाद मशीन में ही बने ड्रमों में भरती चली जाती है। इससे न सिर्फ किसानों की मेहनत ही बचती है, बल्कि कम समय में ढेर सारा काम हो जाता है। बता दें कि इजरायल में मूंगफली की काफी खेती होती है।

पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर दूसरी जगह कर कर देती है शिफ्ट

सूखा होने के बाद भी इजरायल हरा-भरा देश है। दरअसल, इजरायल ने अन्य देशों की तरह विकास के नाम पर पेड़-पौधों को नाश नहीं होने दिया। इसके लिए यहां पेड़ काटने के बजाय उन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

इसके लिए इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने ऐसी मशीनों का निर्माण किया, जो बड़े से बड़े पेड़ को जड़ सहित उखाड़कर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कर देती है। इससे पेड़ों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता।

एक-एक बूंद के लिए तरसने वाले किसान अब ऐसे कर रहे है विदेशों में अनार का निर्यात

रेतीले धोरों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने वाले बाड़मेर के किसानों ने कम समय में ऐसा करिश्मा कर दिखाया है कि अब विदेशों तक पहचान कायम है। किसानों ने एक सपना देखा कि क्या रेतीले धोरों में भी अनार हो सकता है। बस इसी आस के साथ 2010 में बालोतरा के बूड़ीवाड़ा में अनार का पहला प्लांट लगाया था।

बस 4 साल में अनार तैयार हो गया। अनार की क्वालिटी व स्वादिष्टता के चर्चे दूर-दूर तक छा गए। इसके बाद बाद तो किसानों ने अनार की बंपर बुवाई शुरू कर दी। अब वर्तमान में 4500 हैक्टेयर में अनार की खेती हो रही है। केवल 7 साल में बाड़मेर के किसानों ने वो करिश्मा कर दिखाया, मुश्किल तो था लेकिन असंभव नहीं। अब अनार की खेती और उत्पादन में बाड़मेर प्रदेश में पहले पायदान पर है।

बाड़मेर में कम आर्द्रता के कारण अनार में बीमारियां कम फेल रही है। इसी वजह से अनार की साइज, क्वालिटी और स्वाद अनोखा है। बाड़मेर का अनार नेपाल सहित कई देशों में निर्यात हो रहा है। सिंदुरी किस्म का अनार की बंपर पैदावार हो रही है। इसी वजह से अब अनार की खेती में बाड़मेर का प्रदेश में पहला स्थान है। 4500 हैक्टेयर में अरबों रुपए के अनार की खेती हो रही है।

7 साल में किसानों ने रचा इतिहास, प्रदेश में सबसे अधिक अनार उत्पादन वाला जिला बना बाड़मेर

नेपाल भेजने के लिए अनार की पैकिंग

धोरीमन्ना के गडरा में कृषि फार्म हाउस में इन दिनों अनार की पैकिंग के लिए टेंट लगाकर श्रमिक रात-दिन जुटे हुए है। किसान बालूराम विश्नोई व सुरेश ढाका ने बताया कि यह अनार नेपाल के लिए जाएगा। पैकिंग के लिए मजदूर लगाए गए है। 2500 पौधों का साढ़े तीन हैक्टेयर में बगीचा लगाया था। अब तो हर गांव-गांव अनार की खेती होने लगी है, किसान रुचि दिखा रहे है। नेपाल के लिए निर्यात करने वाले व्यापारी ने 52 रुपए प्रति किलो के हिसाब से अनार की बोली लगाकर खरीदा है।

4500 हैक्टेयर में 135 करोड़ का अनार : बाड़मेर में अनार की 4500 हेक्टयेर में 135 करोड़ के अनार का उत्पादन हो रहा है। एक हैक्टेयर में 625 पौधे लगाए जाते है। इससे एक हैक्टेयर में 3 से 3.5 लाख का अनार उत्पादन होता है।

अनार के उत्पादन में बाड़मेर प्रदेश में पहले नंबर पर है। 2010 में बुड़ीवाड़ा में अनार का पहला प्लांट लगाया। इसके बाद अब 4500 हेक्टयेर में अनार की खेती हो रही है। सिंदुरी किस्म का अनार यहां की कम आर्द्रता के कारण प्रसिद्ध है। अनार की साइज, क्वालिटी और स्वाद भी अलग है। -पदमसिंह, सहायक कृषि अधिकारी, बाड़मेर

जाने यूरिया के ईस्तमाल से पराली को प्रोटीन पशु खुराक बनाने का तरीका

पशुओं के लिए तूड़ी/पराली को यूरिया से उपचार करने का तरीका भैंसों/गायों के रोयों में स्थित सूक्ष्म जीव यूरिया को तोड़कर अपनी जीव प्रोटीन बनाने के लिए प्रयोग कर लेते हैं जो पशु की ज़रूरतों को पूरा करती है।

इसलिए पशुओं के वितरण में 1 प्रतिशत यूरिये का प्रयोग करने से वितरण में यूरिया अच्छी तरह मिक्स होना चाहिए और यूरिया की डलियां नहीं होनी चाहिए। पशुओं के चारे के लिए यदि तूड़ी/पराली को यूरिये से उपचार करके प्रयोग करते हैं तो तूड़ी/ पराली के खुराकी गुणों में वृद्धि की जा सकती है और उपचारित पराली को सूखे तौर पर प्रयोग करके पशुओं की खुराक में प्रोटीन की कमी को दूर भी किया जा सकता है।

यूरिये से कैसे उपचारित की जाये तूड़ी?

तूड़ी/पराली को यूरिये से उपचार करने के लिए 4 क्विंटल तूड़ी या कुतरी हुई पराली लें और इसे ज़मीन पर बिछा लें। फिर 14 किलो यूरिये को 200 लीटर पानी में घोल लें और तूड़ी/पराली पर छिड़क लें ताकि सारी तूड़ी/पराली गीली हो जाये।

अच्छी तरह मिलाने के बाद इसे दबाकर 9 दिनों के लिए रखें। 9 दिनों के बाद उपचारित की हुई तूड़ी तैयार हो जाती है। यह गुणकारी और नर्म हो जाती है।

किस तरह खिलानी है?

खिलाते समय तूड़ी को एक तरफ से ही खोलें और कुछ देर हवा लगने दें। यदि हवा नहीं लगवाते तो अमोनिया गैस जो बनी होती है वह पशु की आंखों में चुभने लगती है। फिर पशु को थोड़ा थोड़ा रिझाओ। उपचारित तूड़ी को प्रति 4 किलो के हिसाब से हरे चारे में मिलाकर बड़े पशुओं को खिलई जा सकती है।

नोट – इसका प्रयोग, घोड़े, सुअरों और 6 महीने से कम उम्र के पशुओं के लिए ना किया जाये

स्त्रोत – गुरू अंगद देव वैटनरी यूनिवर्सिटी, लुधियाना

किसान का अनोखा फार्मूला ,फसलों को बुरी नज़र से बचाएगी सनी लियोनी

क्या सनी लियोनी का पोस्टर खेतों में लगी फसलों को बुरी नजर से बचा सकता है? आप सोच रहे होंगे ये बकवास है. लेकिन आन्ध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक किसान ने फसलों को बुरी नजर से बचाने के ऐसी ही एक अजीबोगरीब तरकीब अपनाई है.

यहां किसान ने खेत में बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोनी के पोस्टर लगाए हैं. ये पोस्टर भी छोटा नहीं है…. दो बड़े पोस्टर में सनी लियोनी लाल बिकनी में नजर आ रही हैं. इस पोस्टर को लगाने में किसान ने 600 रुपये खर्च किए हैं.

ये पोस्टर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. पोस्टर खेत के दोनों किनारों पर लगाए हैं. इनपर तेलुगू में लिखा है, ‘मुझसे जलना मत’. साथ ही किसान ने दावा किया है कि इसे लगाने के बाद से उनकी फसल की पैदावार भी बढ़ गई है.

रेड्डी ने बताया कि उनके एक दोस्त ने सनी लियोनी के पोस्टर लगाने की सलाह दी. दोस्त के इस सुझाव पर उन्होंने अमल किया और अब हर कोई सिर्फ सनी लियोनी को देखता है न कि उनके फसल को. उन्होंने कहा, “इस साल 10 एकड़ में अच्छी पैदावर हुई है. मेरी फसल की तरफ लोगों की नजर नहीं जाती. अब मेरी फसलें अच्छी हो रही हैं.”

ये कोई पहला मौका नहीं है जब सनी लियोनी के पोस्टर का इस्तेमाल किया गया हो. इससे पहले साल 2016 में भी केरल के कोल्लम जिले में श्री नारायण पॉलिटेक्निक कॉलेज ने नए बैच के स्टूडेंट्स के स्वागत के लिए एडल्ट फिल्म स्टार मिया खलीफा और सनी लियोनी का बैनर लगाया था. बैनर पर मलयालम में लिखा था ‘नए छात्र-छात्राओं का स्वागत है.’

शहर के पास है जमीन तो गुलाब से सालाना 6 लाख तक कमाएं, समझें पूरा गणि‍त

गुलाब की खेती के साथ सबसे अच्‍छी बात ये है कि‍ इसकी डिमांड कभी कम नहीं होती। एक बार बोने के बाद गुलाब का पौधा करीब 8 साल तक फूल देता है। इसमें शरुआती मेहनत के बाद केवल पौधों की छंटाई करनी होती है और सिंचाई पर ध्‍यान देना होगा। एक गुलाब का पौधा सालभर में 1 से 2 कि‍लो फूल देता है।

एक एकड़ गुलाब की खेती से आप 2 लाख से 6 लाख रुपए तक सालाना कमा सकते हैं। इतना अंतर इसलि‍ए हैं क्‍योंकि आपकी कमाई इस बात पर भी निर्भर करती है कि‍ आप कौन सी कि‍स्‍म के गुलाब की खेती कर रहे हैं, क्‍योंकि‍ सजावटी गुलाब, खुश्‍बू वाले गुलाब व इत्र तथा गुलकंद बनाने वाले गुलाब अलग-अलग होते हैं और इनका बाजार भी अलग अलग है।

सबसे पहले मार्केट देखें

अगर आपको इत्र, गुलकंद और गुलाबजल के लि‍हाज से गुलाब की खेती करनी है तो उसके लि‍ए बुल्गारिया रोजा डेमसेना सबसे अच्‍छा है, इसके अलावा देसी गुलाब की प्रजाति‍यां चुन सकते हैं, जो आपकी मि‍ट्टी के अनुकूल हो। अगर आपको फूलमाला के लि‍हाज से खेती करनी है तो गंगानगरी गुलाब अच्‍छा रहता है।

इसके अलावा अगर आपको सजावटी कि‍स्‍म के फूलों की खेती करनी है तो उसके लि‍ए दर्जनों प्रजाति‍यां हैं जैसे कॉन्‍फीडेंस, एवन, मि‍स्‍टर लिंकन। केअर-लेस, लव, अमेरि‍क हैरि‍टेज रंगबि‍रंबा गुलाब होता है। जिन कि‍सानों की जमीन शहरों के आसपास है वह सजावटी फूलों की खेती करें इन्‍हें कट फ्लावर भी कहते हैं। एक एकड़ में 4 बीघा होता है और एक बीघा में 1500 से 1800 पौधे लग जाते हैं।

लंबे टाइम तक मि‍लता है फूल

राजस्‍थान के दौसा में गुलाब की खेती करने वाले वसुंधरा हर्बल एंड एग्रीबायोटेक के कपि‍ल देवा शर्मा ने बताया कि‍ उन्‍होंने करीब एक एकड़ जमीन में गुलाब की पौध लगाई है। सीजन के दौरान फूलों की कीमत 300 रुपए प्रति‍कि‍लो तक चली जाती है।

ऑफ सीजन में भी फूल 100 से 150 रुपए प्रति‍कि‍लो तक बि‍कते हैं। नवंबर से लेकर मई तक फूल मि‍लते हैं। कपि‍ल गंगानगरी कि‍स्‍म की खेती करती है, जि‍सका साइज बड़ा होता और शुश्‍बू भी होती है। यह फूल माला बनाने के काम में आता है।

सजावटी फूलों की कीमत ज्‍यादा है

शर्मा के मुताबि‍क, एक एकड़ से सालाना डेढ़ से दो लाख रुपए तक की कमाई हो जाती है। शुरू में थोड़ी मेहनत करनी होती है उसके बाद तो बस प्रूनिंग और सिंचाई पर ध्‍यान देना होता है। सजावटी फूलों की कीमत इस फूल से कहीं ज्‍यादा होती है। अगर आपके आसपास सजावटी गुलाब की मार्केट है तो उसकी खेती में तीन से 4 लाख तक सालाना कमाई हो सकती है।

2000 रुपये की दर से गेहूं खरीदेगी यहाँ की सरकार

मध्य प्रदेश में राज्य सरकार गेहूं के साथ ही धान के किसानों को 265 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी। मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान की फसल पर किसानों को यह बोनस मिलेगा।

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार पिछले साल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमतें मिली थी, इसलिए राज्य के किसानों को गेहूं और धान का उचित मूल्य नहीं पाया था। इसलिए हमने फैसला किया है कि मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान पर किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जायेगा।

रबी में गेहूं की खरीद 2,000 रुपये की दर से होगी

किसानों को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश का किसान कर्जमाफी या खैरात नहीं चाहता। उसे पसीने की कमाई चाहिए। इसलिए उपज का पूरा मूल्य मुख्यमंत्री कृषि उत्पादकता प्रोत्साहन योजना से दिया जाएगा।

इस योजना के तहत गेहूं और धान पर एमएसपी के अतिरिक्त 200 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। गेहूं की खरीदी 2,000 रुपए प्रति क्विंटल से कम में नहीं होगी। इसके साथ ही भावांतर योजना जारी रहेगी। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई राहत और फसल बीमा राशि को मिलाकर की जाएगी।

किसानों को 265 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे

सरकार पर 1670 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। गेहूं पर 1340 करोड़ रुपए और धान पर 330 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। गेहूं का एमएसपी 1735 रुपये प्रति क्विंटल है, इसमें बकाया 265 रु. की राशि राज्य सरकार मिलाएगी। यानी किसान के खाते में 265 रुपये ज्यादा आएंगे।

धान खरीदी में भी यही प्रक्रिया रहेगी। रबी विपणन सीजन 2018-19 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017-18 के लिए धान कामन ग्रेड का एमएसपी 1,550 रुपये और ए ग्रेड के धान का भाव 1,590 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

सिर्फ C2 फार्मूला से मिल सकता है किसानो को लाभ

वित्त मंत्री अरुण जेटली के न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने के फॉर्मूले को एक्‍सपर्ट्स ने सि‍रे से खारि‍ज कर दि‍या। उनका कहना है कि‍ इसमें कुछ भी नया नहीं है। अभी जो MSP तय होती है वह भी तकरीबन इसी फॉर्मूले पर है। जब लागत की कैलकुलेशन ही सही नहीं होगी तो उस पर लाभ कैसे मि‍लेगा। स्‍थि‍ति‍ जस की तस है, जेटली का यह फॉर्मूला लाभकारी नहीं है।

दरअसल, विपक्ष और कृषि विशेषज्ञ सरकार से उत्पादन की कॉस्ट का फॉर्मूला बताने की मांग कर रहे थे। जेटली ने राज्यसभा में कहा कि सरकार एमएसपी तय करते समय ए2+एफएल (वास्तविक लागत और किसान परिवार के श्रम की लागत) का फॉर्मूला अपनाएगी।

उन्‍होंने बताया कि‍ किसानों को बीज, फर्टिलाइजर कॉस्ट, फैमिली लेबर की इनपुट वैल्यू जैसे फैक्टर्स को कैलकुलेट करके 50 फीसदी रिटर्न उपलब्ध कराएगी। इस आधार पर ही एमएसपी तय किया जाएगा, लेकि‍न कृषि‍ वि‍शेषज्ञों ने इसका वि‍रोध कि‍या है।

फॉर्मूले पर नहीं रि‍जल्‍ट पर बात करें

इंटरनेशनल एग्री बि‍जनेस एक्‍सपर्ट वि‍जय सरदाना कहते हैं कि हमें फॉर्मूले की बात नहीं कि‍सानों के वेलफेयर की बात करनी चाहि‍ए। मुद्दा ये है कि सरकार जो भी तरीका अपना रही है क्‍या उससे कि‍सानों को फायदा हो रहा है। अगर उससे कि‍सानों को फायदा ही नहीं हो रहा तो ये एक तरह की पॉलिटि‍क धोखाधड़ी है। फॉर्मूला तो कुछ भी हो सकता है। हमें उसका रि‍जल्‍ट देखना होगा।मकसद है कि‍सानों को गरीबी से बाहर नि‍कालना और मुझे इस बात पर संदेह है कि‍ इस फॉर्मूले से यह मकसद हासि‍ल हो पाएगा।

मान लें पंजाब का कि‍सान ईंधन, फर्टीलाइजर्स वगैरा पर खूब खर्च करता है और उसकी कॉस्‍ट 30 हजार रुपए आ गई तो क्‍या सरकार उसे 45 हजार रुपए देगी। वहीं ऑर्गेनि‍क खेती करने वाला कि‍सान फर्टीलाइजर्स वगैरा नहीं खरीदता। अगर सरकार के गणि‍त पर चलें तो उस कि‍सान की कॉस्‍ट तो बहुत कम रह जाएगी। फॉर्मूले केवल उलझाने के लि‍ए होते हैं।

प्रॉफिट बढ़ाने की बजाए लागत घटा दी

जय कि‍सान आंदोलन के राष्‍ट्रीय संयोजक अवि‍क साहा के मुताबि‍क, वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली की इस घोषणा में कुछ भी नया नहीं है। अभी भी सभी प्रमुख फसलों का न्‍यूनतम समर्थन मूल्‍य देखें तो यह इसी फॉर्मूले के आसपास है जो जेटली अब बता रहे हैं, जब वह पहले लाभकारी नहीं था तो अब कैसे हो गया? लागत कैलकुलेट करने का तरीका ही सही नहीं है।

वहीं भारतीय किसान यूनियन के राष्‍ट्रीय प्रवक्‍ता धर्मेंद्र मलि‍क ने कहा कि‍ हमें पहले से ही इस बात पर संदेह था, आखि‍र सरकार ने वही कि‍या। जेटली ने अपने बजट भाषण में कहा था कि‍ सरकार ने रबी की फसलों की जो एमएसपी तय की है वह लागत का डेढ़ गुना है।

इस बार गेहूं की एमएसपी 1735 रुपए तय की गई है। वर्ष 2016-17 में यह 1625 रुपए थी। यानी केवल 6.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। क्‍या यही है लागत का डेढ़ गुना। उन्‍होंने कहा कि‍ कि‍सान नासमझ नहीं है। इस घोषणा को कोई अर्थ नहीं है। लागत कैलकुलेट करने का सरकार का तरीका ही पूरी तरह से अवैज्ञानि‍क है।

कृषि‍ विशेषज्ञ देविंदर शर्मा भी इस पर सवाल उठा चुके हैं। उन्‍होंने अपनी फेसबुक पोस्‍ट पर लि‍खा है कि‍ सरकार का यह दावा कि‍ वह कि‍सानों को लागत का डेढ़ गुना एमएसपी दे रही है, मुझे पि‍छले साल की एक फि‍ल्‍म की याद दि‍लाता है। जि‍सका शीर्षक है, ‘डोंट रेज़ द ब्रि‍ज, लोवर द रि‍वर’ यानी पुल की ऊंचाई बढ़ाने की बजाए नदी को और गहरा कर दि‍या जाए। फसलों की कीमत बढ़ाने की बजाए कि‍सानी की लागत की कैलकुलेशन को ही कम कर दि‍या जाए। 50 % लाभ का आभास कराया जाए, बाकी काम शोर मचाने वाले कर देंगे।

सरकार को क्‍या करना चाहिए था

जय कि‍सान आंदोलन के राष्‍ट्रीय संयोजक अवि‍क साहा का कहना है कि सरकार को अगर वाकई अपने बजट वादे को पूरा करना है तो A2+FL पर नहीं बल्‍कि C2 पर 50 फीसदी जोड़कर एमएसपी तय करनी चाहि‍ए। भले ही सरकार 50 फीसदी नहीं करती 40 ही करती मगर कॉस्‍ट सी2 रखती। धर्मेंद्र भी इससे हामी भरते हैं। वह कहते हैं कि‍ अगर सरकार सी2 के ऊपर कुछ प्रति‍शत बढ़ा कर एमएसपी तय करती है यह कि‍सानों के लि‍ए फायदेमंद होता।

अभी इस तरह से तय होती है लागत

अभी सरकार कमीशन फॉर एग्रीकल्‍चर कॉस्ट एंड प्राइज (CACP) की सिफारिशों के आधार पर एमएसपी तय करती है। वहीं सीएसीपी सरकार को सि‍फारि‍शें भेजने से पहले सभी राज्‍यो से सि‍फारि‍शें लेती है।

प्रोडक्‍शन की कॉस्‍ट नि‍कालने के तीन फॉर्मूले हैं – A2, A2+FL और C2.

A2 – कि‍सान की ओर से की गई सभी तरह की पेमेंट चाहे वो कैश में हो या कि‍सी वस्‍तु की शक्‍ल में, फर्टीलाइजर्स, कैमिकल, मजदूरों की मजदूरी, ईंधन, सिंचाई का खर्च सहि‍त अन्‍य खर्च जोड़े जाते हैं।

A2+FL – इसमें A2 के अलावा परि‍वार के सदस्‍यों द्वारा खेतीबाड़ी में की गई मेहतन का मेहनताना जोड़ा जाता है, जि‍से अनपेड फैमिली लेबर कहा जाता है।

C2 – लागत को कैलकुलेट करने का यह फार्मूला सबसे ज्‍यादा समग्र है। इसमें इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर कॉस्‍ट को भी जोड़ा जाता है। इसमें जमीन का कि‍राया व जमीन तथा खेतीबाड़ी के काम में लगी स्‍थाई पूंजी पर ब्‍याज को भी शामि‍ल कि‍या जाता है। यह कॉस्‍ट A2+FL के ऊपर जोड़ी जाती है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और यूपी के कई इलाकों में ओलावृष्टि, अगले दो दिन हो सकती है बारिश

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में रविवार को भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को ओले से नुकसान हुआ है। ओलों और तेज हवाओं से गेहूं की तैयार खड़ी फसल गिर गई है। देश के कई हिस्सों में सोमवार को भी बारिश जारी है।

महाराष्ट्र के कुछ हस्सिों में रविवार को बेमौसम ओलावृष्टि और भारी बारिश होने के चलते दो लोगों की जान चली गई है। और फसलों को नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि बारिश संबंधी घटनाओं के कारण दो महिलाएं घायल भी हुयी हैं। उधर मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि किसानों को परेशान होने की जरुरत नहीं, उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार बारिश और ओलों से सबसे ज्यादा नुकसान मध्य प्रदेश में हुआ है। एमपी में भोपाल समेत हरदा, सीहोर, देवास, बैतुल, शिवपुरी, भिंड, सिवनी, रायसेन, छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भारी बारिश होने के साथ ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। खासकर चने, गेहूं और मसूर की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचा है।

मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के प्रवक्ता भगवान सिंह मीना ने बताया, “ओलावृष्टि से गेहूं की बालियां पूरी तरह बिखर गई हैं। चने की खड़ी गिल्ठियां भी नीचे गिर गई हैं। पकने वाली फसल भी गिर गई है। कई जगह किसानों को खेत काटने की नौबत नहीं आएगी। मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 75 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।

” मौसम की मार उत्तर प्रदेश के किसानों पर भी पड़ी है। उत्तर प्रदेश में भी कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है। इस वक्त सरसों पक रही है तो चना और मसूर में फलियां पड़ रही थी, जिन्हें काफी नुकसान पहुंचा है।

औरैया के बीहड पट्टी में यमुना किनारे बसा गाँव खानपुर के किसान अब्दुल रसीद (45 वर्ष) बताते हैं, “मैंने पांच बीघा खेत में चना बोया था, बारिश के साथ ओले गिरने से फसल आधी नष्ट हो गई है। अब तो फसल पर हुआ खर्चा भी निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।” वहीं, इसी जिले के गाँव पैगंबरपुर के किसान सरोज कुमार (38 वर्ष) ने बताया, “सरसों में फली आ गई थी, जो तेज हवा चलने से गिर गई है।

” उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में रविवार को घने बादल छाए रहे। इन घने बादलों को देखकर किसान चिंता में हैं। बाराबंकी जिले के सिद्धौर ब्लॉक के अजमल पट्टी गाँव के किसान जैनेन्द्र अवस्थी बताते है, “हमें डर है कि अगर यहां ओलावृष्टि होती है तो सरसों, गेहूं, चने समेत सभी फसलों को भारी नुकसान होगा।” वहीं, हैदरगढ़ ब्लॉक के तारागंज के किसान नीरज मिश्रा बताते हैं, “इस बरसात से किसान काे सिर्फ नुकसान ही होगा। मौसम को देखते हुए यहां भारी बारिश हो सकती है।

” मध्य प्रदेश में बारिश के साथ जमकर गिरे ओले।

मौसम की बेरुखी का खामियाजा महाराष्ट्र के किसान भी भुगत रहे हैं। महाराष्ट्र के जलाना जिले में काफी नुकसान की खबर है। रविवार सुबह बारिश से जिन किसानों की फसलें बच गई हैं, वो भी डरे हुए हैं। मौसम विभाग ने आऩे वाले 2 दिनों में मौसम बारिश की आशंका जताई है।

आने वाले दिन में बारिश की आशंका

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर के पास एक पश्चिमी विक्षोभ अधिक सक्रिय है, दूसरी ओर दक्षिणी राजस्थान और गुजरात में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो गया है, ऐसे स्थिति में दोनों के प्रभाव से उत्तर पश्चिम भारत के ज्यादातर इलाकों में बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग की मानें तो 11 से 14 फरवरी के बीच जम्मू कश्मीर से लेकर मध्य भारत में मध्य प्रदेश और पूर्व में बिहार तक तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं, ओडिशा और पश्चिम बंगाल पर हवाओं में एक विपरीत चक्रवाती क्षेत्र बन गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। ऐसे में देश के ज्यादातर राज्यों में बारिश की अच्छी संभावना है।