मंडी में फसल बेचकर किसान को मिल सकता है ट्रैक्टर और पावर टिलर ,ये है पूरी स्कीम

अक्सर छोटे किसान अपनी उपज को सीधे मंडी में न लाकर गाँव में ही व्यापारियों को सस्ते में बेच देते हैं। गाँव में व्यापारी किसान की उपज की तौल में गड़बड़ी करके और दूसरे तरीकों से किसानों को उनके माल का पूरा पैसा नहीं देते हैं।

किसानों को अपनी उपज को खुद मंडी तक लाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मंडी परिषद किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर और साइकिल उपहार के तौर पर दे रहा है।

किसानों खुद मंडी आकर वहां पर अपने सामान का सही दाम व उपज की सही तौल पाने के अलावा मंडी व्यापार का गणित खुद समझें इसके लिए मंडी परिषद , उत्तर प्रदेश ने मंडी आवक किसान उपहार योजना शुरू की है। इस योजना नें किसान अपनी उपज मंडी में बेचकर मंडी कार्यालय की मदद से किमती उपहार जीत सकते हैं।

मंडी आवक किसान उपहार योजना के बारे में नवीन गल्ला मंडी लखनऊ के सचिव डी के वर्मा बताते हैं, ” मंडी में किसान अपनी अपज को व्यापारी को बेचता है, तो व्यापारी उसे एक खरीद पर्ची यानी कि 6R स्लिप देता है।

किसान इस पर्ची को मंडी समिति कार्यालय पर दिखा कर निशुल्क लकी ड्रॉ का कूपन ले सकता है। अगर ड्रॉ में किसान का कूपन चुना जाता है, तो उसे साइकिल, प्रेशर कुकर, पंपिंग सेट, स्प्रेयर ,पंखा जैसे इनाम मिल सकते हैं।

” वो आगे बताते हैं कि हर छठे महीने में मंडी में होने वाले बंपर ड्रॉ में कूपन शामिल होने पर किसानों को पावर टिलर , हार्वेस्टर और 35 हार्स पावर का ट्रैक्टर दिया जाता है।

मंडी में किसान की लाई गई उपज के बिक जाने पर उसे 6R स्लिप मिलती है, जिसमें उसकी बेची गई उपज की कीमत लिखी रहती है। 6R स्लिप पर लिखे हुए रेट के हिसाब से हर 5,000 रुपए की बिक्री होने पर किसान मंडी समिति के कार्यालय पर जाकर एक कूपन ले सकते हैं।

इस कूपन को हर महीने , तीन महीने और छठे महीने पर होने वाले लकी ड्रॉ में शामिल किया जाता है, कूपन चुने जाने पर मंडी की तरफ से किसानों को उपहार दिए जाते हैं। यह लकी ड्रॉ मंडलायुक्त द्वारा निकाला जाता है।

”मंडियों में किसानों को लाने के लिए कृषि में दुर्घटना सहायता, खलिहान आग दुर्घटना सहायता योजना और मंडी आवक किसान उपहार योजना चलाई जा रही हैं और किसान भी इन योजना का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में हुए ड्रॉ में हमने किसान किसानों को साइकिलें और दूसरे उपहार दिए हैं।” मंडी सचिव डी के वर्मा ने बताया।

मंडियों में किसानों के लिए होने वाले लकी ड्रॉ में मिलने वाले उपहार

  • हर महीने होने वाला लकी ड्रॉ-इनाम ( मोबाइल – 10 ,साइकिल -10 , प्रेशर कुकर – 10)
  • हर तीसरे महीने होने वाले लकी ड्रॉ-इनाम (पंपिंग सेट -एक , स्प्रेयर – दो , पंखा – तीन)
  • हर छठे महीने वाले लकी ड्रॉ – इनाम ( ट्रैक्टर – एक, पावर टिलर – दो , थ्रेशर – तीन)

नौकरी के साथ बतख पालन से भी कमा रहा है लाखों,

ज्यादातर लोग नौकरी करके ही अपना घर चलाते हैं। बढ़ती महंगाई, महंगी होती शिक्षा को देखते हुए अब कमाई बढ़ाने के लिए लोग नौकरी के साथ-साथ पार्ट टाइम बिजनेस पर जोर दे रहे हैं। हरियाणा के निवासी विकास कुमार ऐसे ही एक उदाहरण हैं जिन्होंने नौकरी के साथ बतख पालन शुरू किया और अब वह इससे मंथली लाखों में कमाई कर रहे हैं। आइए जानते हैं विकास के सफर के बारे में…

करनाल के रहने वाले विकास कुमार ने मनीभास्कर डॉट कॉम से बातचीत में बताया कि वो एक प्राइवेट बैंक में लोन डिपार्टमेंट में नौकरी करते हैं। नौकरी के साथ उन्होंने बतख पालन का काम शुरू किया, जिससे उनकों लाखों में इनकम हो रही है। उन्होंने बतख पालन शौकिए के तौर पर शुरू किया था। लेकिन सरकार की मदद से यह अब बड़े बिजनेस में तब्दील हो गया है।

कैसे की शुरुआत

सरकार का मिला साथ पढ़ाई पूरी करने के बाद विकास खेती-बाड़ी में जुट गए। खेती-बाड़ी में काम करते हुए वो बिजनेस अपॉर्चुनिटी की तलाश में थे। इस दौरान उन्हें सरकार का एक विज्ञापन दिखा और उसके बाद उनकी लाइफ निकल पड़ी।

एग्री क्लिनिक एंड एग्री बिजनेस स्कीम को कैंडिडेट्स की जरूरत थी। उन्होंने इसके लिए अप्लाई किया और फिर इंटरव्यू और स्क्रीनिंग के बाद ट्रेडिंग प्रोग्राम के लिए उनका सेलेक्शन हुआ। यहां उन्हें बतख पालन के बारे में जानकारी मिली। ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने विकास डक फार्म की नींव रखी।

पार्ट टाइम है बतख पालन का काम विकास ने कहा कि वो एक प्राइवेट बैंक के लोन डिपार्टमेंट में नौकरी करते हैं। जहां उनकी मंथली सैलरी 17 हजार रुपए है। नौकरी के साथ वो बतख पालन का भी काम करते हैं। करीब 4 हजार रुपए में उन्होंने 50-60 बतख से इसकी शुरुआत की थी। अब उनके फार्म में बतख की संख्या बढ़कर 4 हजार तक हो गई है। इसके अलावा वो खेती भी करते हैं।

ऐसे होती है कमाई

विकास ने बताया कि बतख पालन से वो सालाना 10 लाख रुपए तक आमदनी कर लेते हैं। वो कहते हैं कि सर्दियों में बतख के अंडे की डिमांड ज्यादा होती है। एक अंडे की कीमत 10 से 11 रुपए होती है। इसके अलावा बतख के बच्चे निकालते हैं।

जिसको वो बाजार में बेचते हैं। बतख की मांस बाजार में 350 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकती है। वो गोरखपुर औऱ हिमाचल प्रदेश में बतख की सप्लाई करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने बतख पालन पर तीन दिवसीय ट्रेनिंग मॉड्यूल पैकेज बनाया है और वो गांव के 6 लोगों को रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं।

खेतीबाड़ी से खड़ा किया करोड़ों का कारोबार, कभी 45 हजार का करता था जॉब

एक ओर जहां आए दिन किसानों की खुदकुशी की खबरें सुनने को मिलती हैं। वहीं दूसरी ओर नौकरी छोड़ खेतीबाड़ी से जुड़ने वालों की संख्या बढ़ती जा रही है। असम के रहने वाले समीर रंजन बोरडोलोई भी इनमें से एक हैं जिन्होंने अपनी नौकरी छोड़ खेतीबाड़ी को न सिर्फ अपना करियर बनाया बल्कि करोड़ों का कारोबार भी खड़ा कर दिया। आइए जानते हैं समीर ने कैसे ये मुकाम हासिल किया।

समीर ने बताया किया कि एग्रीकल्चर में ग्रैजुएशन करने के बाद वो टाटा केमिकल्स के एग्रोकेमिकल डिविजन में नौकरी करने लगे। असम के जोरहट जिले में उनकी पोस्टिंग हुई। यहां उन्होंने देखा कि अधिकांश किसान टी क्रॉप पर निर्भर हैं। वो अच्छी उपज के लिए केमिकल्स और फर्टीलाइजर्स का बहुत ज्यादा उपयोग कर रहे हैं।

किसानों को केमिकल्स के कॉकटेल से बचाने के लिए उनको आइडिया मिला और 2003 में उनकी फर्स्ट वेंचर एसएस बोटैनिकल्स की शुरुआत हुई। समीर एग्रीप्रेन्योर हैं और उन्होंने एक से ज्यादा बिजनेस में हाथ आजमाया है। उनकी कंपनी का टर्नओवर 3 करोड़ रुपए से ज्यादा है।

समीर कहते हैं कि आइडिया से प्रभावित होकर दो बैंकों ने उनका साथ दिया। एसबीआई से उन्होंने 5 लाख रुपए का लोन लेकर शुरुआत की थी। इसके बाद इंडियन बैंक ने 10 लाख रुपए का लोन दिया। लोन मिलने के बाद उन्होंने एक एग्री क्लीनिक की शुरुआत की। यहां पर वो मिट्टी की जांच के साथ खेती से जुड़े से अन्य मसलों पर किसानों को सुझाव देते हैं।

बच्चों को देते हैं एग्रीप्रेन्योर बनने का मंत्र

इसके अलावा समीर स्कूली स्तर पर बच्चों को खेती के बारे में जानकारी देने के मकसद से फार्म स्कूल भी चलाते हैं। यहां पर बच्चों को खेतीबाड़ी की जानकारी दी जाती है। उनका कहना है कि इसका मकसद युवाओं का गांव से पलायन रोकना है। साथ ही वे खेती कर अपने पैरों पर खड़े हो सकें और अच्छी इनकम अर्जित कर सकें। उनके साथ 2000 से ज्यादा किसान जुड़े हैं।

फार्म टूरिज्म पर शुरू किया है काम

समीर का कहना है कि खेतीबाड़ी में कमाई की अपार संभावनाएं हैं। उन्होंने हाल ही में फार्म टूरिज्म पर काम शुरू किया है। इसके जरिए वो पर्यटकों को गांव के रहन-सहन से रूबरू करवाते हैं। इसके अलावा उन्होंने एक ग्रीन कमांडो का कॉन्सेप्ट तैयार किया है जिसका मकसद युवाओं को खेती के बारे में जानकारी देना है।

मॉडल विलेज किया डेवलप

उन्होंने नॉथ-ईस्ट के कुछ जिलों में मॉडल विलेज की शुरुआत की है। जहां किसान सिर्फ ऑर्गेनिक खेती करते हैं और संसाधनों को बचाने पर जोर देते हैं। इसके अलावा बांस की खेती को बढ़ावा दिया है। बांस से बने सामानों की अच्छी डिमांड है। इससे किसानों की इनकम बढ़ाने में मदद मिलेगी।

ऐसा है बिजनेस मॉड्यूल

समीर ने एक और फर्म की नींव रखी जिसका नाम फार्म2फूड फाउंडेशन है। इसके जरिए वो किसानों और युवाओं को खेती की टेक्निक्स सिखाते हैं। एमडी ऑग्रेनिक्स के अंतर्गत 250 गायें हैं। वहीं वो अपने फर्म से 650 टन वर्मी कम्पोस्ट भी तैयार करते हैं। इनको बेचकर भी पैसे मिल जाते हैं। इसके अलावा वो उन कंपनियों में स्टेक खरीदते हैं जिनका फोकस रूरल होता है।

अब इस राज्य किसानों को मिलेगा बिना किसी गारंटी के तीन लाख तक कृषि ऋण

बिहार के किसानों को अब बिना किसी गारंटी के तीन लाख रुपए तक कृषि ऋण मिल सकता है। अभी इसकी अधिकतम सीमा एक लाख रुपए है। राज्य मे 1.61 करोड़ किसान हैं, जिनमें 60 लाख के पास ही केसीसी है। केसीसी को बढाने के लिए प्रखंडों में शिविर लगाए जाएंगे। कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार से बैंक प्रतिनिधियों के साथ बैठक के बाद जानकारी दी। 23 जनवरी को हुई इस बैठक में फैसला लिया गया।

उन्होंने कहा कि प्रखंड स्तर पर तिथि तय कर कैंप लगा कर किसान क्रेडिट कार्ड बनाए जाएंगे। कैं में सभी संबंधित पदाधिकारी मौजूद रहेंगे। किसान चैपाल में बैंक खाते की जानकारी ली जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का लाभ डीबीटी के माध्यम से आसानी से मिल सके।

किसानों के ज्वाइंट लाइबिलिटी ग्रुप (जेएलजी) के माध्यम से पिछले वर्षों में बैंकों द्वापरा ऋण देने में कमी आई है। जेएलजी के माध्यम से अधिकतर बटाईदारों, भूमिहीन किसानों को ऋण की सुविधा मिलती है। पर जब से खाता-खेसरा की मांग होने लगी है, बटाईदार व भूमिहीन किसानों को ऋण मिलने में परेशानी हो रही है।

कृषि मंत्री ने बैंक प्रतिनिधियों से कहा कि राष्ट्रीय बागवानी मिशन के तहत 200 प्रोजेक्ट में मात्र 15 प्रोजेक्ट स्वीकृत होना दुखद है। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों की आय दोगुनी करने के लक्ष्य के तहत लेकर काम कर रही है। 21 जिलों में बाढ़ से हुए फसल नुकसान के लिए 894 करोड़ रुपये में से 80 प्रतिशत राशि किसानों के खाते में चली गई है।

 

बेकार प्लास्टिक की बोतल से ऐसे बनायें चूहा पकड़ने का ट्रैप

चूहों की संख्या मई-जून माह में कम होती है, यही समय चूहा नियंत्रण अभियान के लिए सही समय होता है, यह अभियान सामूहिक रूप में चलाना चाहिए। चूहे खेत खलिहानो, घरों और गोदामों में अनाज खाने के साथ-साथ ही अपने मलमूत्र से अनाज बर्बाद कर देते हैं।

एक जोड़ी चूहा एक वर्ष में 800-1000 की संख्या में बढ़ जाते हैं,अगर चूहों के संख्या कम हो तो आप प्लास्टिक की बोतल का ट्रैप बना कर भी चूहों को पकड़ सकते है ।इस तरिके से आप को कोई खर्चा भी नहीं होगा और किसी खतरनाक दवाई की भी जरूरत नहीं पड़ेगी ।

इस तरीके से आप घर पर भी आसानी से चूहों को पकड़ सकते हैं। आज हम आपको बताते है कि कैसे आप घर पर चूहे पकड़ने की मशीन बना सकते है।

जरूरत का सामान

  • प्लास्टिक की बोतल
  • कैंची
  • स्टिकस
  • रबड़ बैंड
  • थ्रेड
  • यू क्लिप

बनाने का तरीका

  1. सबसे पहले प्लास्टिक की बोतल का ऊपरी हिस्सा कैंची से काट लें। ध्यान रखें कि उसे सिर्फ एक ही साइड से काटना है।
  2. अब बोतल के दोनों हिस्सों पर दो इंच के गेप से दाए और बाए साइड होल करके दो स्टिक्स आड़ी फंसा दें।
  3. ध्यान रखें कि ये दोनों स्टिक्स पैरेलर हो। अब इन दोनों स्टिक्स पर रबड़ बैंड दोनों ओर फंसा दें।
  4. अब एक मजबूत धागा लें और बोतल के मुंह में लगाकर ढक्कन बंद कर दें। इस बात का ध्यान रखें कि धागे की लंबाई इतनी होनी चाहिए कि उसेे खिंचने पर बोतल का कटा हिस्सा खुल सकें।
  5. अब यू क्लिप का किनारा सीधा करके उसमें खाने की चीज फंसा दें। इसे बोतल के अंदर हाथ डालकर तली से बाहर निकालें।
  6.  धागे के हिस्से पर नॉट बनाकर इस यू क्लिप के बाहर निकले नुकीले हिस्से पर लटका दें।

इस ट्रैप को कैसे बनाते है इसके लिए वीडियो देखें

इजरायल की पावरफुल मशीनें, इनकी टेक्नोलॉजी का लोहा मानती है दुनिया

इस समय दुनिया के कई देश सूखे का सामना कर रहे हैं। वहीं, इजरायल ने आधुनिक टेक्नोलॉजी से न सिर्फ खेती से जुड़ी कई समस्याएं खत्म कीं, बल्कि दुनिया के सामने खेती को फायदे का सौदा बनाने के उदाहरण रखे हैं।

इजरायल ने न केवल अपने मरुस्थलों को हराभरा किया, बल्कि अपनी तकनीक को दूसरे देशों तक भी पहुंचाया। खेती-किसानी के लिए इजरायल ने बाग-बगीचों और पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने जैसी कई ऐसी मशीनें बनाईं, जिनकी आज दुनिया भर में तूती बोल रही है।

कुछ ही घंटों में ही जोत ली जाती हैं सैकड़ों एकड़ जमीन

इजरायल में बहुत कम बारिश होती है। इसके चलते यहां बारिश का फायदा जल्द से जल्द उठाना होता है। आमतौर पर खेत जोतने में ही काफी समय लग जाता है। इसके लिए इजरायल ने इटली से खेत जोतने वाली ये विशालकाय मशीनें खरीदी थीं।

इसके बाद इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने इससे भी आधुनिक मशीनों का प्रोडक्शन शुरू किया। इस तरह अब इजरायल में ये मशीनें अधिकतर किसानों के पास है। इसके अलावा किसान इन्हें किराए पर भी ले सकते हैं। इन मशीनों से कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ जमीन जोत ली जाती है।

कारपेट की तरह शिफ्ट कर देती हैं बगीचे

फोटो में दिखाई दे रही यह मशीन इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई है। इसका उपयोग बाग-बगीचों और पौधों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए किया जाता है। इससे घास-फूंस और पौधों की जड़ों तक को नुकसान नहीं पहुंचता। अब ऐसी मशीनों का उपयोग कई देशों में होने लगा है।

पानी की बचत के लिए अनोखी मशीन

इजरायल में पानी की कमी होने के चलते यहां नहरों की व्यवस्था नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इजरायल के रमत नेगेव डिजर्ट एग्रो रिसर्च सेंटर ने खेतों की सिंचाई के लिए इन स्पेशल मशीनों को डिजाइन किया। इससे न सिर्फ खेतों की सिंचाई होती है, बल्कि पानी की भी काफी बचत हो जाती है। मशीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।

मूंगफली जमीन से निकालकर साफ भी कर देती है

इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई यह मशीन मूंगफली और जमीन के अंदर होने वाली सब्जियों व अनाज को निकालने का काम करती है। मशीन की खासियत यह है कि यह सिर्फ मूंगफली को जमीन से निकालने के बाद उसे साफ भी करती जाती है।

इसके बाद मशीन में ही बने ड्रमों में भरती चली जाती है। इससे न सिर्फ किसानों की मेहनत ही बचती है, बल्कि कम समय में ढेर सारा काम हो जाता है। बता दें कि इजरायल में मूंगफली की काफी खेती होती है।

पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर दूसरी जगह कर कर देती है शिफ्ट

सूखा होने के बाद भी इजरायल हरा-भरा देश है। दरअसल, इजरायल ने अन्य देशों की तरह विकास के नाम पर पेड़-पौधों को नाश नहीं होने दिया। इसके लिए यहां पेड़ काटने के बजाय उन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

इसके लिए इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने ऐसी मशीनों का निर्माण किया, जो बड़े से बड़े पेड़ को जड़ सहित उखाड़कर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कर देती है। इससे पेड़ों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता।

एक-एक बूंद के लिए तरसने वाले किसान अब ऐसे कर रहे है विदेशों में अनार का निर्यात

रेतीले धोरों में पानी की एक-एक बूंद के लिए तरसने वाले बाड़मेर के किसानों ने कम समय में ऐसा करिश्मा कर दिखाया है कि अब विदेशों तक पहचान कायम है। किसानों ने एक सपना देखा कि क्या रेतीले धोरों में भी अनार हो सकता है। बस इसी आस के साथ 2010 में बालोतरा के बूड़ीवाड़ा में अनार का पहला प्लांट लगाया था।

बस 4 साल में अनार तैयार हो गया। अनार की क्वालिटी व स्वादिष्टता के चर्चे दूर-दूर तक छा गए। इसके बाद बाद तो किसानों ने अनार की बंपर बुवाई शुरू कर दी। अब वर्तमान में 4500 हैक्टेयर में अनार की खेती हो रही है। केवल 7 साल में बाड़मेर के किसानों ने वो करिश्मा कर दिखाया, मुश्किल तो था लेकिन असंभव नहीं। अब अनार की खेती और उत्पादन में बाड़मेर प्रदेश में पहले पायदान पर है।

बाड़मेर में कम आर्द्रता के कारण अनार में बीमारियां कम फेल रही है। इसी वजह से अनार की साइज, क्वालिटी और स्वाद अनोखा है। बाड़मेर का अनार नेपाल सहित कई देशों में निर्यात हो रहा है। सिंदुरी किस्म का अनार की बंपर पैदावार हो रही है। इसी वजह से अब अनार की खेती में बाड़मेर का प्रदेश में पहला स्थान है। 4500 हैक्टेयर में अरबों रुपए के अनार की खेती हो रही है।

7 साल में किसानों ने रचा इतिहास, प्रदेश में सबसे अधिक अनार उत्पादन वाला जिला बना बाड़मेर

नेपाल भेजने के लिए अनार की पैकिंग

धोरीमन्ना के गडरा में कृषि फार्म हाउस में इन दिनों अनार की पैकिंग के लिए टेंट लगाकर श्रमिक रात-दिन जुटे हुए है। किसान बालूराम विश्नोई व सुरेश ढाका ने बताया कि यह अनार नेपाल के लिए जाएगा। पैकिंग के लिए मजदूर लगाए गए है। 2500 पौधों का साढ़े तीन हैक्टेयर में बगीचा लगाया था। अब तो हर गांव-गांव अनार की खेती होने लगी है, किसान रुचि दिखा रहे है। नेपाल के लिए निर्यात करने वाले व्यापारी ने 52 रुपए प्रति किलो के हिसाब से अनार की बोली लगाकर खरीदा है।

4500 हैक्टेयर में 135 करोड़ का अनार : बाड़मेर में अनार की 4500 हेक्टयेर में 135 करोड़ के अनार का उत्पादन हो रहा है। एक हैक्टेयर में 625 पौधे लगाए जाते है। इससे एक हैक्टेयर में 3 से 3.5 लाख का अनार उत्पादन होता है।

अनार के उत्पादन में बाड़मेर प्रदेश में पहले नंबर पर है। 2010 में बुड़ीवाड़ा में अनार का पहला प्लांट लगाया। इसके बाद अब 4500 हेक्टयेर में अनार की खेती हो रही है। सिंदुरी किस्म का अनार यहां की कम आर्द्रता के कारण प्रसिद्ध है। अनार की साइज, क्वालिटी और स्वाद भी अलग है। -पदमसिंह, सहायक कृषि अधिकारी, बाड़मेर

बहुत ही कम ख़र्चे में फसल काटती है यह मिनी कंबाइन ,जाने पूरी जानकारी

भारत में अब भी गेहूं जा दूसरी फसलें काटने का काम हाथ से ही होता है क्योंकि भारत में किसानो के पास जमीन बहुत ही कम है और वो बड़ी कंबाइन से फसल कटवाने का खर्च नहीं उठा सकते इस लिए अब एक ऐसी कंबाइन आ गई है जो बहुत कम खर्च में फसल काटती है ।

साथ ही अब बारिश से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है मिनी कंबाइन Multi Crop हार्वेस्टर यह कंबाइन छोटे किसानो के लिए बहुत फयदेमंद है इस मशीन से कटाई करने से बहुत कम खर्च आता है और फसल के नुकसान भी नहीं होता।

बड़ी कंबाइन से फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।

अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं । छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है । यह मशीन 1 घंटे मे 2 एकड़ फसल की कटाई करती है ,यह मशीन एक दिन मे 14 एकड़ तक फसल की कटाई करती हैऔर इसमें अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान,मक्का अदि भी काट सकते है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर आप इस कंबाइन को खरीदना चाहते है तो नीचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क करें

Address–  Karnal -132001 (Haryana), India
phone -+91 184 2221571 / 72 / 73
+91 11 48042089
Email-exports@fieldking.com

जाने यूरिया के ईस्तमाल से पराली को प्रोटीन पशु खुराक बनाने का तरीका

पशुओं के लिए तूड़ी/पराली को यूरिया से उपचार करने का तरीका भैंसों/गायों के रोयों में स्थित सूक्ष्म जीव यूरिया को तोड़कर अपनी जीव प्रोटीन बनाने के लिए प्रयोग कर लेते हैं जो पशु की ज़रूरतों को पूरा करती है।

इसलिए पशुओं के वितरण में 1 प्रतिशत यूरिये का प्रयोग करने से वितरण में यूरिया अच्छी तरह मिक्स होना चाहिए और यूरिया की डलियां नहीं होनी चाहिए। पशुओं के चारे के लिए यदि तूड़ी/पराली को यूरिये से उपचार करके प्रयोग करते हैं तो तूड़ी/ पराली के खुराकी गुणों में वृद्धि की जा सकती है और उपचारित पराली को सूखे तौर पर प्रयोग करके पशुओं की खुराक में प्रोटीन की कमी को दूर भी किया जा सकता है।

यूरिये से कैसे उपचारित की जाये तूड़ी?

तूड़ी/पराली को यूरिये से उपचार करने के लिए 4 क्विंटल तूड़ी या कुतरी हुई पराली लें और इसे ज़मीन पर बिछा लें। फिर 14 किलो यूरिये को 200 लीटर पानी में घोल लें और तूड़ी/पराली पर छिड़क लें ताकि सारी तूड़ी/पराली गीली हो जाये।

अच्छी तरह मिलाने के बाद इसे दबाकर 9 दिनों के लिए रखें। 9 दिनों के बाद उपचारित की हुई तूड़ी तैयार हो जाती है। यह गुणकारी और नर्म हो जाती है।

किस तरह खिलानी है?

खिलाते समय तूड़ी को एक तरफ से ही खोलें और कुछ देर हवा लगने दें। यदि हवा नहीं लगवाते तो अमोनिया गैस जो बनी होती है वह पशु की आंखों में चुभने लगती है। फिर पशु को थोड़ा थोड़ा रिझाओ। उपचारित तूड़ी को प्रति 4 किलो के हिसाब से हरे चारे में मिलाकर बड़े पशुओं को खिलई जा सकती है।

नोट – इसका प्रयोग, घोड़े, सुअरों और 6 महीने से कम उम्र के पशुओं के लिए ना किया जाये

स्त्रोत – गुरू अंगद देव वैटनरी यूनिवर्सिटी, लुधियाना

किसान का अनोखा फार्मूला ,फसलों को बुरी नज़र से बचाएगी सनी लियोनी

क्या सनी लियोनी का पोस्टर खेतों में लगी फसलों को बुरी नजर से बचा सकता है? आप सोच रहे होंगे ये बकवास है. लेकिन आन्ध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक किसान ने फसलों को बुरी नजर से बचाने के ऐसी ही एक अजीबोगरीब तरकीब अपनाई है.

यहां किसान ने खेत में बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोनी के पोस्टर लगाए हैं. ये पोस्टर भी छोटा नहीं है…. दो बड़े पोस्टर में सनी लियोनी लाल बिकनी में नजर आ रही हैं. इस पोस्टर को लगाने में किसान ने 600 रुपये खर्च किए हैं.

ये पोस्टर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. पोस्टर खेत के दोनों किनारों पर लगाए हैं. इनपर तेलुगू में लिखा है, ‘मुझसे जलना मत’. साथ ही किसान ने दावा किया है कि इसे लगाने के बाद से उनकी फसल की पैदावार भी बढ़ गई है.

रेड्डी ने बताया कि उनके एक दोस्त ने सनी लियोनी के पोस्टर लगाने की सलाह दी. दोस्त के इस सुझाव पर उन्होंने अमल किया और अब हर कोई सिर्फ सनी लियोनी को देखता है न कि उनके फसल को. उन्होंने कहा, “इस साल 10 एकड़ में अच्छी पैदावर हुई है. मेरी फसल की तरफ लोगों की नजर नहीं जाती. अब मेरी फसलें अच्छी हो रही हैं.”

ये कोई पहला मौका नहीं है जब सनी लियोनी के पोस्टर का इस्तेमाल किया गया हो. इससे पहले साल 2016 में भी केरल के कोल्लम जिले में श्री नारायण पॉलिटेक्निक कॉलेज ने नए बैच के स्टूडेंट्स के स्वागत के लिए एडल्ट फिल्म स्टार मिया खलीफा और सनी लियोनी का बैनर लगाया था. बैनर पर मलयालम में लिखा था ‘नए छात्र-छात्राओं का स्वागत है.’