ट्रैक्टर के बिना सौलर से चलती है ये बिजाई मशीन, बैटरी से भी करती हैं बिजाई

प्रभातपट्टन निवासी छात्र ने अपने सहपाठियों के साथ मिलकर सोलर ऊर्जा से चलने वाली ऐसी मशीन बनाई है जिसके उपयोग से खेत में बोवनी और फसलों पर कीटनाशक का छिड़काव आसानी से किया जा सकता है। इस मशीन से एक घंटे में एक एकड़ में बोवनी और 45 से 50 मिनट में स्प्रे हो जाएगा।

बारिश में अगर धूप नहीं निकली तो मशीन में बैटरी भी लगी है। बैटरी को चार्ज कर मशीन का उपयोग किया जा सकता है। मशीन बनाने में लगभग 22 हजार रुपए का खर्च आता है। छात्रों ने मशीन को प्राटोटाइप ऑफ ऑटोमेटिक सीड फीडिंग एंड स्प्रे मशीन सोलर एनर्जी नाम दिया है।

श्री बालाजी कॉलेज बैतूल की मैकेनिकल ब्रांच के छात्र अमन आकोटकर, विशाल पंडोले, गोविंद मौखेड़े, नरेश मंडल और अर्पणा पाटनकर ने बताया उन्होंने किसानों की बोवनी और स्प्रे की समस्या को लेकर प्रोफेसर विकास मालवीय के मार्गदर्शन में सौर ऊर्जा से स्वचलित बीज बुवाई और कीटनाशक स्प्रे करने वाली मशीन का प्रोजेक्ट तैयार किया। मशीन के सामने वाले हिस्से से फसलों पर दवा का स्प्रे और पीछे वाले हिस्से से बोवनी होती है।

बोवनी के साथ कीटनाशक के स्प्रे में भी कर सकते हैं उपयोग

ऐसे काम करती है मशीन

अमन आकोटकर ने बताया मशीन में सोलर पैनल लगे हैं जो सूर्य से मिलने वाली ऊर्जा से मशीन को संचालित करेगी। बारिश में सूर्य की ऊर्जा नहीं मिलने पर इसमें बैटरी भी लगाई है। बैटरी को बिजली के माध्यम से भी चार्ज किया जा सकता है। इसके अलावा बोवनी और स्प्रे के लिए 9 वोल्ट की मोटर लगाई है।

स्प्रे के लिए दवा का घोल संग्रहित करने और बीज को संग्रहित करने के लिए टैंक लगाए हैं। यह मशीन एक दिशा में चलती है। तीन कतारों में बुवाई और स्प्रे हो सकता है। बुवाई के लिए दाना पांच सेमी दूरी पर गिरता है।छात्रों ने बताया जल्द ही इस मशीन को किसानों के लिए उपलब्ध कराने के लिए प्रक्रिया की जा रही है।

किसान का कमाल : 3 बीघा जमीन में की 45 लाख की फसल की पैदावार

बेशक मध्यप्रदेश में किसानों की माली हालत दयनीय है और सरकारों से फसल के सही दाम मिलने की मांगे लगातार की जा रही है। लेकिन, शिवपुरी जिला के छोटे से गांव अगरा के किसान ने वो कारनामा किया है जिससे उसके चर्चे हर जुबान पर हैं।

दरअसल यहां एक किसान ने आम खेती से हटकर कुछ खास करते हुए तीन बीघा जमीन से 70 किलो केसर का उत्पादन किया है। ज्ञात रहे कि वर्तमान समय में बाजार में एक किलो केसर की कीमत लगभग 65 हजार रुपए है। इस कीमत से 70 किलो केसर की कीमत 45 लाख रुपए के करीब आंकी जा रही है।

ग्रेजुएट किसान ने किया कमाल

किसान का नाम सुरेश आदिवासी है। सुरेश ने कोलारस विधानसभा के छोटे से गांव अगरा में रह कर खेती करते हुए ये कमाल कर दिखाया है। सुरेश ने मतस्य पालन से ग्रेजुएशन किया है और इसके बाद उन्होंने कुछ न करते हुए खेती करना फायदेमद समझा,

जिसके बलबूते पर आज वे खास किसान होते हुए चर्चा का विषय बन गए हैं। गांव में रहकर खेती को फायदे का धंधा बनाने वाले सुरेश आज बहुत खुश है। इतना ही नहीं वे अन्य किसानों को खेती की इस तकनीक को अपनाने की सलाह भी देते हैं।

आ गया त्रिशूल फार्म मास्टर जो कम पैसों में करे ट्रेक्टर के सारे काम

एक किसान के लिए सब से ज्यादा जरूरी एक ट्रेक्टर होता है । लेकिन महंगा होने के कारण हर किसान ट्रेक्टर खरीद नहीं सकता । क्योंकि छोटे से छोटा ट्रेक्टर भी कम से कम 4 लाख से शुरू होता है । लेकिन अब एक ऐसा ट्रेक्टर आ गया है जो ट्रेक्टर से 4 गुना कम कीमत पर भी ट्रेक्टर के सभी काम कर सकता है । जी हाँ यह है त्रिशूल कंपनी द्वारा त्यार किया हुआ त्रिशूल फार्म मास्टर ( Trishul Farm Master )

मोटर साइकिल जैसे लगने वाला यह ट्रेक्टर एक छोटे किसान के सारे काम कर सकता है । त्रिशूल फार्म मास्टर से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है।इसकी कीमत तकरीबन 1 लाख 45 हजार रु है।

त्रिशूल फार्म मास्टर मशीन की जानकारी

  • इंजन – 510 CC ,फोर स्ट्रोक
  • लंबाई – 7.5 फ़ीट . चौड़ाई – 3 फ़ीट. ऊंचाई – 4 फ़ीट.
  • वजन – 440 किलोग्राम
  • ग्राउंड से उचाई – 10 इंच
  • इंजन सिलेंडर – एक
  • प्रकार- एयर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 3000
  • डीज़ल की खपत – 650 मी.ली एक घंटे में
  • गिअर – 4 आगे, 1 रिवर्स
  • डीज़ल टैंक कैपेसिटी – 14 लीटर

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इसे खरीदना चाहते है तो नीचे  दिए हुए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते है

घोड़ावदार रोड , गोंडल
Dist :राजकोट (गुजरात)
फ़ोन:98252 33400

गुलाब की खेती से गुलाबी हुए काश्तकारों के चेहरे, कर रहे इतनी कमा

गुलाब की खेती चमोली जिले के चीन सीमा से लगे जोशीमठ ब्लॉक के ग्रामीणों के लिए आर्थिकी का सबल जरिया बन गई है। यात्रा सीजन होने के कारण एक-एक गुलाब सौ-सौ रुपये तक में बिक रहा है। साथ ही गुलाब के तेल से भी ग्रामीणों की अच्छी आमदनी हो रही है। अब तक ग्रामीण गुलाब का तेल बेचकर तीन लाख रुपये की कमाई कर चुके हैं।

जोशीमठ ब्लॉक के भोटिया जनजाति बहुत ग्रामीण क्षेत्रों में लोग अन्य फसलों के साथ गुलाब की खेती पर विशेष ध्यान दे रहे हैं। असल में यह नकदी फसल बाहुल्य क्षेत्र है। लोग यहां आलू, राजमा व चौलाई की खेती के अलावा सेब, आड़ू, खुबानी, पुलम आदि की बागवानी भी करते हैं।

गांवों के जंगल से सटे होने के कारण फसलों को जंगली जानवर तबाह कर देते हैं। रही-सही कसर पूरी कर देता है मौसम। ऐसे में फसल का दो तिहाई हिस्सा भी बामुश्किल काश्तकारों को मिल पाता है। इसी को देखते हुए काश्तकारों ने गुलाब की खेती शुरू की है।

उन्होंने गुलाब के पौधे खेतों के चारों ओर लगाए हैं और बीच में बोई जाती हैं नकदी फसलें। गुलाब के पौधों पर कांटे होने के कारण यह घेरबाड़ का काम भी कर रहे हैं। अच्छी बात यह है कि गुलाब को बाजार भी हाथोंहाथ मिल रहा है।

एक साल में 35 क्विंटल गुलाब जल

ग्रामीण गुलाब से तेल भी निकाल रहे हैं। सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई (देहरादून) की ओर से काश्तकारों को 13 आसवन संयंत्र निश्शुल्क दिए गए हैं। इनसे काश्तकारों ने इस साल 35 क्विंटल गुलाब जल तैयार किया है। सौंदर्य प्रसाधन से जुड़ी कंपनियां काश्तकारों से सीधे गुलाब जल खरीद रही है। साथ ही स्थानीय बाजार में भी गुलाब जल की खासी मांग है। बदरीनाथ व हेमकुंड साहिब आने वाले यात्री गुलाब जल को हाथोंहाथ खरीद रहे हैं।

गुणवत्ता में उत्तम दमिश्क, हिमरोज व नूरजहां

क्षेत्र में समुद्रतल से 5000 फीट की ऊंचाई पर उगने वाले दमिश्क, हिमरोज व नूरजहां प्रजाति का गुलाब उगाया जा रहा है। गुलाब की ये प्रजातियां हर्बल के साथ ही उच्च गुणवत्ता वाली भी मानी जाती हैं। इनका एक पौधा 15 साल तक फूल देता है।

इन गांवों में हो रही गुलाब की खेती

जोशीमठ ब्लॉक के द्वींग, तपोण, सलूड़, सुनील, परसारी, मेरग, तपोवन, लाता आदि गांवों में गुलाब की खेती हो रही है। इन गांवों की देखादेखी अब अन्य गांवों के लोग भी गुलाब उगा रहे हैं।

बना रहे हैं गुलाब तेल

परसारी निवासी किसान नरेंद्र सिंह बिष्ट के मुताबिक गुलाब की खेती हमारे लिए वरदान साबित हो रही है। मैं अब तक चार क्विंटल गुलाब जल का उत्पादन कर चुका हूं। इसके अलावा संयंत्र से गुलाब का तेल भी बनाया है। इससे मुझे एक लाख रुपये की आमदनी हुई है।

वहीं, सगंध पौधा केंद्र सेलाकुई देहरादून के वैज्ञानिक सुनील साह के अनुसार काश्तकार गुलाब की खेती कर हजारों बेहतर मुनाफा कमा रहे हैं। गुलाब जल के साथ-साथ गुलाब के तेल का उत्पादन भी काश्तकार करने लगे हैं।

मुनाफे की फसल: केला की जगह शुरू हुई ड्रैगन फ्रूट की खेती

आंधी-तूफान के साथ-साथ पनामा रोग के कारण केला की खेती किसानों के लिए मुफीद नहीं रही। नुकसान झेलने वाले किसान अब विकल्प के तौर पर ड्रैगन फ्रूट की खेती कर रहे हैं। पूर्णिया जिला में रूपौली प्रखंड अंतर्गत हरनाहा गांव के प्रगतिशील किसान विमल मंडल ने इसकी खेती की शुरुआत की है।

उनके पास दूसरे किसान भी ड्रैगन फ्रूट की खेती की जानकारी के लिए आते हैं। हालांकि अभी किसानों में इसके बाजार को लेकर आशंका है।

विमल मंडल ने बताया कि ड्रैगन फ्रूट का औषधीय महत्व है। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन-ए की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। मेट्रो सिटी में यह छह से आठ सौ रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा। स्थानीय बाजार में व्यापारी इसे दो सौ रुपये प्रति किलो की दर से खरीद रहे हैं। ड्रैगन फ्रूट की खेती में पहली बार प्रति एकड़ तीन लाख रुपये के करीब लागत आती है, लेकिन दूसरे साल से यह घटकर एक चौथाई रह जाती है। मुनाफा केले से कई गुना अधिक है।

एक कट्ठा में लगते हैं 40 पौधे जानकारी लेने पहुंचे मुखिया रामवती देवी सहित, पप्पू मंडल, महेंद्र मंडल, पिंटू यादव को विमल मंडल ने बताया कि दस कट्ठा जमीन में फसल उगाने के लिए नासिक से ड्रैगन फ्रूट के पौधे मंगवाए, जो 150 रुपये प्रति पौधा मिला। उसे दस फीट की दूरी पर लगाया। प्रति कट्ठा चालीस पौधे लगे। दो पौधों के बीच में आठ फीट लंबा सीमेंट का खंभा लगाया गया।

मई में इसमें फूल आया और फल भी लग गए। फूल लगने के 36 दिनों के बाद फल तैयार हो गया। एक पौधा से जून तक छह फल निकले। दिसंबर तक फल निकलता रहेगा। एक फल का वजन 200 से 400 ग्राम तक होता है।

पौधा उपलब्ध कराने वाले व्यवसायी ने 150 रुपये किलो की दर से फल को खरीद लिया है। केला में रासायनिक खाद और कीटनाशक का भरपूर उपयोग किया जाता है, जबकि ड्रैगन फ्रूट की खेती में इसका उपयोग नहीं होता। इस कारण इसका औषधीय और पादप गुण सुरक्षित रहता है।

‘ड्रैगन फ्रूट में औषधीय गुण होते हैं। इसमें कैल्शियम, फास्फोरस, विटामिन-ए और कैलोरी की प्रचुर मात्रा पाई जाती है। कम उपलब्धता के कारण इसकी कीमत अधिक मिलती है।’

छोटे किसानो का नया बैल मेगा टी, ट्रेक्टर से पांच गुना कम कीमत पर करें ट्रैक्टर के सारे काम

बहुत से किसान हर साल इस लिए खेती करना छोड़ देते है क्यूंकि उनके पास खेती करने के लिए जरूरी साधन नहीं होते । एक किसान के लिए सबसे जरूरी चीज ट्रेक्टर होता है लेकिन ट्रेक्टर महंगा होने के कारण हर किसान इसे खरीद नहीं पता ।

ऐसे किसानो के लिए किर्लोस्कर कंपनी ने मेगा टी पेश क्या है । जिसकी कीमत तो ट्रेक्टर के मुकाबले कम है लेकिन यह ट्रेक्टर वाले सारे काम कर देता है । इस मशीन से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है।इसकी कीमत तकरीबन 1 लाख 40 हजार है।

मशीन की जानकारी

  • मॉडल – मेगा-टी (15 HP) हैंडल स्टार्ट
  • लंबाई – 2950 mm. चौड़ाई – 950 mm. ऊंचाई – 1300 mm.
  • इंजन का वजन – 138 किलोग्राम
  • इंजन की ऑयल कैपेसटी – 3.5 लीटर
  • प्रकार- वाटर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 2000
  • ब्लेडों की संख्या – 20
  • गिअर – 6 आगे, 2 रिवर्स

यह मशीन कैसे काम करता है इसके लिए वीडियो भी देखें

इन राज्यों को 72 घंटों में मिल सकती है गर्मी से राहत, मानसून हुआ एक्टिव, मौसम विभाग का ताजा अपडेट

तेज गर्मी से झुलस रहे दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, यूपी, बिहार सहित कई राज्यों को अगले 72 घंटे में बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बन गई है। करीब एक हफ्ते कमजोर रहने के बाद शनिवार से मानसून फिर से सक्रिय हो गया है। मौसम विभाग ने अगले 3 दिनों में दिल्ली और मध्‍य प्रदेश सहित उत्तर और उत्तर-पश्चिम भारत के कई राज्यों को गर्मी से राहत की उम्मीद जताई है।

अगले 48 घंटों में जहां झारखंड, मध्‍य प्रदेश और बिहार में मानसून सक्रिय हो जाएगा। वहीं, 3 दिन के अंदर दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, पश्चिमी यूपी और उत्तराखंड में प्री-मानसून की बारिश से राहत मिलेगी। मौसम विभाग की वेबसाइट पर मैप के जरिए ताजा अपडेट भी है।

अगले 72 घंटों में किन इलाकों को मिलेगी राहत

आईएमडी के अनुसार शनिवार से मानसून अरब सागर, महाराष्ट्र, गुजरात के कई हिस्सों में फिरसे सक्रिय हो चुका है। अगले 2 से 3 दिनों में यह महाराष्‍ट्र के बचे हुए हिस्सों, गुजरात, बिहार, झारखंड, मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडीशा, पश्चिम बंगाल और साउथ सौराष्‍ट्र के ज्यादातर इलाकों में दस्त दे देगा। अगले 72 घंटों में इन इलाकों में अच्छी बारिश की उम्मीद है।

दिल्ली और आस-पास के इलाकों को जल्द राहत

मौसम विभाग के अनुसार 27 जून से दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, पश्चिमी यूपी में प्री-मानसून की अच्छी बारिश होगी, जिससे इन इलाकों में तेज गर्मी से राहत मिलेगी। प्री-मानसून के बाद 29 जून से इन इलाकों में मानसून की बारिश होने की उम्मीद है। यानी अगले 72 घंटों के बाद उत्तर भारत के ज्यादातर इलाकों में बारिश होने से तेज गर्मी से राहत मिल जाएगी। बता दें कि पिछले कुछ दिनों से दिल्ली और आस-पास के इलाकों में 43-44 डिग्री सेंटीग्रेड से ज्यादा तापमान दर्ज किया गया।

मुंबई में जोरदार बारिश का अनुमान

मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में मुंबई में अच्छी बारिश होने का अनुमान हे। मुंबई में मानसून ने 7 जून को ही दस्तक दे दी थी। लेकिन उसके बाद मानसून कमजोर दिखा। हालांकि शनिवार से मानसून फिरसे सक्रिय हो चुका है।

अभी कहां है मानसून

23 जून तक मानसून ने केरल, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडीशा, तेलंगाना, पूरे नॉर्थ-ईस्ट, महाराष्‍ट्र के ज्यादातर इलाकों, झारखंड, वेस्ट बंगाल और छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों को कवर कर लिया है। हालांकि पिछले कुछ दिनों से मानसून कमजोर पड़ गया, जिससे मध्‍य और उत्तर व उत्तर पश्चिमी भारत की ओर इसके बढ़ने की चाल भी कमजोर पड़ गई।

किन शहरों के लिए राहत की खबर

अगले 72 घंटों में मानसून और प्री-मानसून बारिश से अहमदाबाद, सूरत, नागपुर, नासिक, भोपाल, इंदौर, उज्जैन, जबलपुर, रांची, गया, पटना, धनबाद, रांची, दरभंगा, गया, वाराणसी, गोरखपुर, छपरा, कोरबा, दिल्ली, चंडीगढ़, इलाहाबाद, लखनऊ, कानपुर, ग्वालियर, आगरा, जयपुर, कोटा, देहरादून, शिमला में अच्छी बारिश हो सकती है। अभी देश के ये इलाके भी भीषण गर्मी से जूझ रहे हैं। पंजाब और राजस्थान के पश्चिमी इलाकों में बचे कुछ शहरों में 1 जुलाई से मानसून की बारिश शुरू हो सकती है।

दिल्ली सहित इन 13 राज्यों पर भारी पड़ सकते हैं 72 घंटे, IMD का ऑरेंज अलर्ट, कहा- तैयार रहें लोग

मौसम विभाग ने देशभर के कई राज्यों में अगले 3 दिन यानी 72 घंटे (28, 29, 30 जून) के लिए अलर्ट जारी कर दिया है। दिल्ली, यूपी, एमपी सहित इन 13 राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी है। आईएमडी ने ताजा अपडेट में 13 राज्यों के लिए ऑरेंज अलर्ट भी जारी किया है।

ऑरेंज अलर्ट का मतलब है कि इन इलाकों में रहने वाले अपने-अपने स्तर पर तैयार रहें, हो सकता है कि भारी बारिश से यहां हालात बिगड़ जाएं। वहीं इन 72 घंटों में करीब एक दर्जन राज्यों के लिए यलो अलर्ट भी जारी हुआ है।

इस बीच मानसून अगले 24 घंटों में पूर्वी राजस्थान, मध्‍य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, छत्तीसगढ़, झारखंड को पूरी तरह से कवर कर लेगा। इसके बाद दिल्ली, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भी मानसून की एंट्री हो जाएगी। 1 से 2 जुलाई तक मानसून तकरीबन पूरे देश को कवर कर लेगा।

28 से 30 जून तक कैसा रहेगा देश का हाल

28 जून

भारी से भारी बारिश: 28 जून को आईएमडी ने दिल्ली, हरियाणा, चंडीगढ़, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, मध्‍य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक के तटीय इलाकों और जम्मू कश्‍मीर में भारी से भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

भारी बारिश: वहीं, 28 जून को उत्तराखंड, पंजाब, राजस्थान, गोवा, मध्‍य महाराष्‍ट्र, विदर्भ, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, हिमालयन वेस्ट बंगाल, सिक्किम, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, उड़ीसा, झारखंड और केरल के कुछ इलाकों में भारी बारिश की चेतावनी है।

29 जून

भारी से भारी बारिश: आईएमडी ने 28 जून को उत्तराखंड, कोंकण, गोवा और कोस्टल कर्नाटक में भारी से भारी बारिश का अनुमान जाहिर किया है।

भारी बारिश: वहीं, 29 जून को हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली, पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, कर्नाटक के तटीय इलाकों और जम्मू कश्‍मीर के कुछ इलाकों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

30 जून

भारी से भारी बारिश: 30 जून को उत्तराखंड, अरुणाचल प्रदेश, आसाम, मेघालय, हिमालयन वेस्ट बंगाल, सिक्किम और कर्नाटक के तटीय इलाकों में भारी से भारी बारिश का अलर्ट है।

भारी बारिश: वहीं, 30 जून को बिहार, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक के अंदरूनी इलाकों और केरल में भारी बारिश का अलर्ट है।

यहां है ऑरेंज अलर्ट

जिन राज्यों के लिए मौसम विभाग ने ऑरेंज अलर्ट जारी किया है, उनमें दिल्ली, मध्‍य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, हरियाणा, कर्नाटक, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश और सिक्किम शामिल हैं।

रेड अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट में अंतर

रेड अलर्ट और ऑरेंज अलर्ट दोनों ही भारी से बहुत भारी बारिश या भारी से भारी बारिश होने की स्थिति में जारी किए जाते हैं। लेकिन दोनों में अंतर यह होता है कि रेड अलर्ट में वार्निंग दी जाती है और एक्शन शुरू हो जाता है। वहीं, ऑरेंज अलर्ट की स्थिति में अलर्ट जारी किया जाता है कि उन इलाकों के लोग किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहें।

अब तक (1-20 जून) देश में बारिश का हाल

क्षेत्र                                कितनी हुई बारिश       नॉर्मल           कम या ज्यादा (%)

  • पूरे देश में                             84.5 mm       90.6 mm            -7%
  • उत्तर-पश्चिम भारत              28.8 mm        32.8 mm            -12%
  • मध्‍य भारत                           72.6 mm        79.9 mm            -9%
  • दक्षिण भारत                        132.4 mm      97.6 mm            +36%
  • पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत        158 mm         216.2 mm           -27%

अब किसान खुद करेंगे बिजली की खेती

राज्यभर के किसान अब बिजली की खेती कर सकेंगे। राज्य सरकार किसानों को अपने ही खेतों में सौर ऊर्जा का उत्पादन करने के लिए सोलर पैनल मुहैया कराएगी। सौर ऊर्जा का उपयोग किसान खेती से जुड़े कार्यों के लिए कर सकेंगे और इसके बाद शेष बिजली सरकार को बेचकर खुद समृद्ध बन सकेंगे।

  • मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने शनिवार को उपमुख्यमंत्री नितिन पटेल, ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल व ऊर्जा राज्य मंत्री प्रदीप सिंह जाडेजा की उपस्थिति में इस संबंध में सूर्य शक्ति किसान योजना (स्काई) की घोषणा की।
  • उन्होंने कहा कि पूरे देश में इस तरह की पहल करने वाला गुजरात पहला राज्य है। किसान अपने ही खेत में सौर ऊर्जा का उत्पादन कर खेती कर सकेंगे। खेती से जुड़ी बिजली के उपयोग के बाद शेष बिजली सरकार को बेचकर कमाई भी कर सकेंगे। किसानों के लिए यह काफी अहम योजना है। राज्य सरकार ने इस योजना को क्रांतिकारी कदम बताया।

  • ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल ने इसकी विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि राज्यभर में किसान खुद बिजली का उत्पादन करेंगे। जितनी जरूरत हो उतनी बिजली का उपयोग कर बाकी बिजली बेच सकेंगे।

सरकार मुहैया कराएगी सोलर पैनल, 12 घंटे बिजली

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार सोलर पैनल मुहैया कराएगी। इसके लिए कुल खर्च की सिर्फ 5 फीसदी रकम ही किसानों को चुकानी होगी। केन्द्र व राज्य सरकार की 60 फीसदी सब्सिडी वाली इस योजना के तहत राज्य के किसानों को 12 घंटे बिजली मिलेगी।

किसानों के खेतों में दिनों में सिंचाई के लिए पानी मिल सकेगा। जो किसान इस योजना में नहीं जुड़ेंगे उन्हें आठ घंटे बिजली मिलेगी।राज्य सरकार किसानों के एवज में 35 फीसदी रकम की 7 वर्ष के लिए सस्ते ब्याज पर ऋण देगी। बिजली के उत्पादन व उपयोग के बाद जो यूनिट ग्रिड में भेजी जाएगी तो प्रति यूनिट पहले सात वर्ष के लिए किसानों को सात रुपए प्रति यूनिट के रूप से चुकाया जाएगा।

आ गया कम कीमत वाला मिनी ट्रेक्टर जो करे बड़े ट्रेक्टर वाले सारे काम

एक किसान के लिए सब से ज्यादा जरूरी एक ट्रेक्टर होता है । लेकिन महंगा होने के कारण हर किसान ट्रेक्टर खरीद नहीं सकता । क्योंकि छोटे से छोटा ट्रेक्टर कम से कम 4 लाख से शुरू होता है।

लेकिन अब एक ऐसा ट्रेक्टर आ गया है जो ट्रेक्टर से 4 गुना कम कीमत पर भी ट्रेक्टर के सभी काम कर सकता है । जी हाँ यह है त्रिशूल कंपनी द्वारा त्यार किया हुआ त्रिशूल मिनी ट्रेक्टर (TRISHOOL MINI TRACTOR)

10 HP से शुरू होने वाले यह मिनी ट्रेक्टर एक छोटे किसान के सारे काम कर सकता है । त्रिशूल मिनी ट्रेक्टर से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है। इसके शुरुआती 10 HP वाले ट्रेक्टर की कीमत तकरीबन 1 लाख 75 हजार रु है।

इसके बाकी मॉडल्स की कीमत इस तरह है।

  • 12 HP – 250000/-
  • 16 HP – 265000/-
  • 22 HP – 325000/-

त्रिशूल मिनी ट्रेक्टर 10 HP की जानकारी इस तरह है

  • इंजन – 510 CC ,फोर स्ट्रोक
  • लंबाई – 1950 MM . चौड़ाई – 860 MM. ऊंचाई – 1250 MM.
  • वजन – 550 किलोग्राम
  • इंजन सिलेंडर – एक
  • प्रकार- एयर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 3000
  • डीज़ल की खपत – 750 मी.ली एक घंटे में
  • गिअर – 3 आगे, 1 रिवर्स

बाकी मॉडल की जानकारी इस फोटो में देखें

यह मिनी ट्रेक्टर कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इसे खरीदना चाहते है तो नीचे  दिए हुए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते है

  • घोड़ावदार रोड , गोंडल
  • Dist :राजकोट (गुजरात)
  • फ़ोन:9825546964 and 9978443843