ये है ट्रेक्टर चलित राइस मिल जो 1 घंटे में निकालती है 1200 किलो चावल

किसान धान उगता है और बाजार में बहुत कम भाव में बेच देता है । व्यापारी द्वारा उसका आर्थिक शोषण होता है । जहाँ तक की अगर उसे खुद खाने के लिए चावल की जरूरत होती है तो उसे अपने खाने के लिए चावल बाजार से खरीदना पड़ता है क्योंकि उसके द्वारा पैदा की हुई धान पर छिलका लगा होता जिसको खाने से पहले उतरना पड़ता है । इन दोनों बातों का हल अब निकल आया है ।

अब बाजार में ऐसी ट्रेक्टर से चलने वाली राइस मिल आ गई है जिस से आप चावल का छिलका आसानी से उतार सकते है । जिस से किसान चावल को सीधे बाजार में बेच सकता है । और अपने खाने के लिए भी रख सकता है । सीधे बाजार में बेचने से किसानो को दोगुना लाभ हो सकता है । इस मशीन को चलने के लिए ट्रेक्टर की पावर 34 से 50 H.P. तक होनी चाहिए । यह मिल एक घंटे में 1000-1200 किलो चावल साफ़ कर देती है ।

इस मिल की मुख्य विशेषता यह है, कि इसमें एक ही बार में धान की डिहस्किंग एवं पॉलिशिंग होती है तथा चावल भी कम टूटता है एवं ऊर्जा की खपत भी कम होती है। इस मिल को आसानी से ट्रेक्टर से एक गांव से दूसरे गांव ले जाया जा सकता है। इसके परिणाम अत्यंत उत्साह जनक पाए गए हैं, जिसके कारण कृषकों में इसकी मांग बढ़ रही है।

ये मिल कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

इस मिल की पूरी जानकारी के लिए आप निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क कर सकते है ।

पूर्वांचल कृषि यन्त्र उद्योग
Village– Mubarakpur, Tanda, Distt:-Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh,
Phone : +917210113837

 

पहली ही फसल में किसान ने खजूर की खेती से कमाए 4 लाख रु

इराक से शुरू हुई खजूर की खेती अब मिस्र, लीबिया, पाकिस्तान, यूएसए, सूडान,सऊदी अरब और भारत तक में होती है। भारत खूजर के सबसे बड़े इम्पोर्टर देशों में से भी एक है। खजूर का इस्तेमाल अचार, जूस, चीनी, स्टार्च, छुहारा और शराब बनाने में भी किया जाता है। इसकी हर एक चीज काम की है।

खजूर की गुठली से पोल्ट्री आहार तैयार किया जाता है। इसकी पत्तियों से टोकरियां, कागज, रस्सी और झाड़ू बनाई जाती है। कई बीमारियों में भी खजूर दवा की तरह काम करता है। इस तरह से खजूर की खेती करना भी काफी फायदे का सौदा है। इसकी कई तरह की किस्म होती हैं।

राजस्थान के बाड़मेर जिले के चाइटन तहसील के आलमसर गांव के किसान सादुलाराम सियोल ने पहले ही साल में खूजर की खेती कर साढ़े तीन लाख रुपए कमाए थे। आज हम बता रहे हैं आप कैसे खजूर की खेती कर लाखों रुपए कमा सकते हैं।

50 साल से भी ज्यादा होती है लाइफ

  • खजूर के पेड़ सालों तक लगे होते हैं, इनकी लाइफ 50 साल से भी ज्यादा होती है ऐसे में जरूरी है कि इनके बीच में प्रॉपर स्पेस रखा जाए।
  • इन पेड़ों की अच्छी ग्रोथ के लिए हर रो (पंक्ति) के बीच 8 मीटर तक का डिस्टेंस रखा जाता है।
  • प्रति हेक्टेयर इसके करीब 160 प्लांट लगाए जाते हैं।

जमीन को कैसे तैयार करें

  • जिस जमीन पर खेती करना है उसकी 2 से 3 बार जुताई जरूरी होती है। बाद में मिट्टी को एक लेवल में करना होता है।
  • इसके लिए खोदे गए गड्ढों को करीब 2 हफ्ते तक ओपन रखने की सलाह दी जाती है।
  • जुलाई से सितंबर का टाइम प्लांटिंग के लिए बेस्ट होता है।
  • यदि जमीन में इरिगेशन की फेसिलिटी है तो फार्मर खजूर के प्लांट के बीच वाली जगह में दूसरी फसलें भी लगा सकते हैं। जैसे काला चना, हरा चना, मसूर, पपीता या सब्जियां भी उगा सकते हैं।

कितना पानी देना जरूरी

  • पेड़ों को कितना पानी देना है यह एरिया की क्लाइमेट कंडीशन और मिट्टी की मॉइश्चर होल्ड करने की कैपेसिटी पर डिपेंड करता है।
  • पेड़ों में लगातार मॉइश्चर बने रहना चाहिए लेकिन पानी ठहरना नहीं चाहिए। बारिश के मौसम में अलग से पानी देने की कोई जरूरत नहीं होती।
  • भारी बारिश से पानी जम जाए तो उसका निकलना सही होता है, वरना यह प्लांट को डैमेज कर सकता है।
  • हर साल 5 से 6 बार सिंचाई पर्याप्त होती है। प्लांटिंग के तुरंत बाद फ्रिक्वेंट इरिगेशन की जरूरत होती है।

अच्छी क्वालिटी के लिए क्या करना जरूरी

  • अच्छी क्वालिटी के लिए ओर्गेनिक फर्टिलाइजर्स का यूज करना चाहिए। इससे खजूर की पैदावार भी बढ़ती है।
  • केमिकल फर्टिलाइजर N: P: K को 30:20:50 के रेशो में अप्लाई करना चाहिए। यह मार्च और अप्रैल के महीने में यूज करना चाहिए।
  • इंडिया में ‘N’ का रिकमंडेड डोज 1.40kg/ट्री है। एक एडल्ट ट्री को 600ग्राम ‘N’, 100 ग्राम ‘P’ और 75 ग्राम ‘K’ की जरूरत हर साल होती है।
  • खजूर में मादा पौधों के बीच में 10 फीसदी नर पौधे होने चाहिए।

अब होती है हार्वेस्टिंग

  • खजूर प्लांटिंग के 6 से 7 साल में हार्वेस्टिंग के लिए तैयार हो जाते हैं। वैरायटी के हिसाब से खजूर अलग-अलग स्टेज में तोड़े जाते हैं। इसलिए हार्वेस्टिंग लोकल डिमांड पर भी डिपेंड करती है।
  • खजूर की पैदावार मिट्टी और क्लाइमेट पर डिपेंड करती है। 10 साल पुराना पेड़ हर साल 50 से 60 किलो खजूर देता है। साल दर साल इसकी खपत बढ़ती है। 15 साल तक एक पेड़ 80 किलो तक फल देता है।

विदर्भ के किसान की कहानी

68 साल के सवी थंगवाल विदर्भ के किसान हैं। जब खराब खेती से परेशान होकर विदर्भ के किसान आत्महत्या तक करने पर मजबूर हो गए थे तब थंगवाल ने एक अलग राह खोजी। उन्होंने ट्रेडीशनल खेती न करते हुए खजूर की खेती शुरू की। उन्होंने 2 एकड़ जमीन में खूजर के 130 प्लांट लगाए। एक प्लांट की कॉस्ट 6 हजार रुपए आई।

3 साल के बाद ही प्लांट में फ्रूट्स आना शुरू हो गए। चौथे साल 25 से 30 किलो खजूर प्रति पेड़ से प्राप्त होने लगे। खजूर बाजार में 300 रुपए किलो तक बिके। जिससे थंगवाल को बड़ा प्रॉफिट हुआ। अब उन्होंने 25 एकड़ जमीन में 300 प्लांट लगाए हैं। हर पेड़ से 100 किलो तक खजूर मिल रहा है। वे कहते हैं कि एक प्लांट को लगाने का खर्चा भी अब 3600 रुपए तक आ चुका है।

कितनी हुई इनकम

  • एक प्लांट की लागत 6 हजार रुपए।
  • इसी तरह 130 प्लांट की लागत 7 लाख 80 हजार रुपए।
  • एक प्लांट से 30 किलो खजूर एक सीजन में।
  • इसी तरह 130 प्लांट से 3900 किलो खजूर मिले।
  • एक किलो खजूर की कीमत 300 रुपए किलो।
  • इसी तरह 3900 किलो खजूर की कीमत 11 लाख 70 हजार रुपए।
  • इस तरह किसान को एक सीजन में ही 3 लाख 90 हजार रुपए का मुनाफा हुआ।
  • अगले सीजन से इसमें लागत की रकम भी नहीं जुड़ेगी और सौ प्रतिशत मुनाफा होगा।

कीड़े-मकोड़े पकड़ने का मिला नया आइडिया, सालाना लाखों में कर रही कमाई

कीड़े-मकोड़े फसल की पैदावार को अत्यधिक क्षति पहुंचाते हैं जिससे न सिर्फ किसानों की मेहनत बर्बाद होती है, बल्कि उनको आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए किसान कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं,

जिसका प्रतिकूल असर खेती पर पड़ता है और प्रोडक्शन घट जाता है। किसानों की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए महाराष्ट्र के वर्धा की रहने वाली निलिशा जिभकाटे को एक नया आइडिया मिला और आज वो अपने खास आइडिया से सालाना लाखों में कमाई कर रही हैं।

क्या मिला नया आइडिया

निलिशा ने मनी भास्कर को बताया कि कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ जाता है, ऐसे में किसान कीटनाशक का प्रयोग करते हैं, जो कि फसल और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में स्टिकी ट्रैप के इस्तेमाल से फसलों में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

स्टिकी ट्रैप एक पीले रंग की शीट होती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खेत में लगाई जाती है। इससे फसलों पर कीटों से रक्षा हो जाती है। एक ऐसी तकनीक है कि ये कीड़े खुद व खुद जाल में फंस जाएंगे।

कैसे करता है काम

हर कीट पीले रंग की ओर आकर्षित होता है। अब अगर उसी रंग की शीट पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाकर फसल की ऊंचाई से करीब एक फीट और ऊंचे पर टांग दिया जाए तो कीट रंग से आकर्षित होकर इस शीट पर चिपक जाता है।

फिर यह फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। मकसद यह है कि कीड़ों से न सिर्फ फसलों की सुरक्षा हो, बल्कि रसायन का इस्तेमाल भी घटे व बंपर उत्पादन भी हो। इसका प्रयोग बेहद आसान व सस्ता है। यह हर मौसम के लिए कारगर है।

सिर्फ दो दिन की किसान हड़ताल से ही लोग बेहाल

कर्ज माफी और उपज के लाभकारी मूल्य को लेकर किसानों के आंदोलन के तीसरे दिन रविवार को सब्जी-फल की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई। राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले 172 संगठनों के आह्वान पर किसानों ने अपनी उपज मंडियों तक भेजना बंद कर दिया है। इस कारण मंडियों में आवक कम हो गई है और सब्जियों की खुदरा कीमतों में 10-20 रुपये प्रति किग्रा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित सात राज्यों में इस आंदोलन का खासा असर दिख रहा है।दूध मार्किट में ना पहुँचने से भी दूध के दाम लगभग दोगने हो गए है । लोग दोगने दाम पर दूध खरीद रहे है ।

पंजाब में जालंधर की सबसे बड़ी सब्जी मंडी में 20 किग्रा का टमाटर का क्रेट 40-47 रुपये में मिल रहा था वह 300 रुपये से ज्यादा में बिका। इसमें पांच गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। चंडीगढ़ में 10-15 रुपये प्रति किग्रा के भाव बिक रहा टमाटर 20-25 रुपये पर पहुंच गया है। सप्लाई कम होने से टमाटर के अलावा आलू, शिमला मिर्च, लौकी और खीरे के भाव भी चढ़ गए हैं।

एक दिन पहले दिल्ली की थोक मंडी में 10-50 रुपये कैरेट बिकने वाला टमाटर 250-300 रुपया तक पहुंच गया। आजादपुर मंडी के बिक्रेता अनिल मल्होत्रा के अनुसार टमाटर की खेप मंडी में शनिवार को काफी कम पहुंची।

दो-तीन दिन बाद ही पता चलेगा कि अन्य सब्जियों व फलों पर आंदोलन का क्या असर पड़ता है, क्योंकि किसानों ने अभी चक्का जाम नहीं किया है। आलू-प्याज के थोक बिक्रेता श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि प्याज के भाव में 2-3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अभी इसका भाव और बढ़ेगा क्योंकि प्याज इन दिनों मध्य प्रदेश से ही आ रहा है।

किसान के बेटे ने पिता के लिए बनाया Remote से चलने वाला ट्रैक्टर

भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, ये बात अक्सर लोग कहते हैं, साथ ही ये भी कहा जाता है कि भारत में प्रतिभाओं को उचित मंच नहीं मिल पाता है। उसके बाद भी अक्सर आप देखते होंगे कि प्रतिभा अपने आप चमक बिखेर देती है। कुछ बड़ा या फिर नया करने के लिए जरूरी नहीं कि आप किसी बड़े संस्थान में पढ़ाई करें, जो काम आईआईटी के छात्र नहीं कर सकते हैं वो काम एक किसान के बेटे ने कर दिखाया है। उसकी प्रतिभा का डंका आज पूरे देश में बज रहा है।

राजस्थान के बारां जिले के बमोरीकलां गांव में एक किसान के बेटे ने जो कारनामा किया है उस से उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। 19 साल का ये युवक लगातार नए आविष्कार करने में लगा रहता है। उस ने अब जो चीज तैयार की है उस से खेती काफी आसान हो सकती है। छोटी सी उम्र में इस युवक ने अपनी बुद्धि के बल पर 27 से अधिक आविष्कार किए हैं। इस लड़के का नाम योगेश कुमार है। इसके आविष्कार देख कर आईआईटी में पढ़ने वाले लोग भी हैरान हैं। योगेश नागर फिलहाल मैथ्स से बीएससी कर रहा है। वो फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है।

योगेश के पिता राम बाबू नागर 15 बीघा जमीम पर खेती करते हैं. इसी से परिवार का खर्चा चलता है। अपने पिता की मुश्किलों को देख कर योगेश ने कुछ ऐसा करने की ठानी जिस से उनका काम आसान हो जाए, इसके लिए वो लगातार काम कर रहा था। उसके पिता को ट्रैक्टर चलाते समय पीठ में दर्द की शिकायत होती थी। पिता की तकलीफ को दूर करने के लिए योगेश ने रिमोट ऑपरेटिव सिस्टम डेवलप किया है। इससे खेत में एक जगह बैठकर रिमोट से ट्रैक्टर चलाकर जुताई की जा सकती है। बिना ड्राइवर के ट्रैक्टर को चलता देखकर गांव वाले भी हैरान रह जाते हैं।

अब योगेश के पिता का काम काफी आसान हो गया है। वो एक जगह खड़े हो कर ट्रैक्टर चलाते हैं। इस से उनका समय भी बचता है और पीठ दर्द की शिकायत से भी मुक्ति मिल गई है। योगेश के इस आविष्कार से गांव के लोग भी हैरान हैं, उनका कहना है कि योगेश में बहुत प्रतिभा है, उसे सही मार्गदर्शन मिले तो वो भारत का नाम रोशन कर सकता है। अब योगेश की चर्चा पूरे देश में हो रही है। रिमोट से ट्रैक्टर चला कर योगेश ने वो कारनामा किया जिस से भारत के किसानों की काफी मदद हो सकती है।अब योगेश को उम्मीद है कि उनके पिता को खेती के दौरान आने वाली समस्याओं का सामना नहीं करकना पड़ेगा।

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