कीड़े-मकोड़े पकड़ने का मिला नया आइडिया, सालाना लाखों में कर रही कमाई

कीड़े-मकोड़े फसल की पैदावार को अत्यधिक क्षति पहुंचाते हैं जिससे न सिर्फ किसानों की मेहनत बर्बाद होती है, बल्कि उनको आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ता है। इन समस्याओं से निपटने के लिए किसान कीटनाशकों का प्रयोग करते हैं,

जिसका प्रतिकूल असर खेती पर पड़ता है और प्रोडक्शन घट जाता है। किसानों की इस समस्या से निजात दिलाने के लिए महाराष्ट्र के वर्धा की रहने वाली निलिशा जिभकाटे को एक नया आइडिया मिला और आज वो अपने खास आइडिया से सालाना लाखों में कमाई कर रही हैं।

क्या मिला नया आइडिया

निलिशा ने मनी भास्कर को बताया कि कीट-पतंगों का प्रकोप बढ़ जाता है, ऐसे में किसान कीटनाशक का प्रयोग करते हैं, जो कि फसल और पर्यावरण दोनों के लिए नुकसानदायक होता है। ऐसे में स्टिकी ट्रैप के इस्तेमाल से फसलों में होने वाले नुकसान से बचा जा सकता है।

स्टिकी ट्रैप एक पीले रंग की शीट होती हैं जो फसल को नुकसान पहुंचाने वाले कीटों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिए खेत में लगाई जाती है। इससे फसलों पर कीटों से रक्षा हो जाती है। एक ऐसी तकनीक है कि ये कीड़े खुद व खुद जाल में फंस जाएंगे।

कैसे करता है काम

हर कीट पीले रंग की ओर आकर्षित होता है। अब अगर उसी रंग की शीट पर कोई चिपचिपा पदार्थ लगाकर फसल की ऊंचाई से करीब एक फीट और ऊंचे पर टांग दिया जाए तो कीट रंग से आकर्षित होकर इस शीट पर चिपक जाता है।

फिर यह फसल को नुकसान नहीं पहुंचा पाते हैं। मकसद यह है कि कीड़ों से न सिर्फ फसलों की सुरक्षा हो, बल्कि रसायन का इस्तेमाल भी घटे व बंपर उत्पादन भी हो। इसका प्रयोग बेहद आसान व सस्ता है। यह हर मौसम के लिए कारगर है।

सिर्फ दो दिन की किसान हड़ताल से ही लोग बेहाल

कर्ज माफी और उपज के लाभकारी मूल्य को लेकर किसानों के आंदोलन के तीसरे दिन रविवार को सब्जी-फल की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई। राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले 172 संगठनों के आह्वान पर किसानों ने अपनी उपज मंडियों तक भेजना बंद कर दिया है। इस कारण मंडियों में आवक कम हो गई है और सब्जियों की खुदरा कीमतों में 10-20 रुपये प्रति किग्रा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित सात राज्यों में इस आंदोलन का खासा असर दिख रहा है।दूध मार्किट में ना पहुँचने से भी दूध के दाम लगभग दोगने हो गए है । लोग दोगने दाम पर दूध खरीद रहे है ।

पंजाब में जालंधर की सबसे बड़ी सब्जी मंडी में 20 किग्रा का टमाटर का क्रेट 40-47 रुपये में मिल रहा था वह 300 रुपये से ज्यादा में बिका। इसमें पांच गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। चंडीगढ़ में 10-15 रुपये प्रति किग्रा के भाव बिक रहा टमाटर 20-25 रुपये पर पहुंच गया है। सप्लाई कम होने से टमाटर के अलावा आलू, शिमला मिर्च, लौकी और खीरे के भाव भी चढ़ गए हैं।

एक दिन पहले दिल्ली की थोक मंडी में 10-50 रुपये कैरेट बिकने वाला टमाटर 250-300 रुपया तक पहुंच गया। आजादपुर मंडी के बिक्रेता अनिल मल्होत्रा के अनुसार टमाटर की खेप मंडी में शनिवार को काफी कम पहुंची।

दो-तीन दिन बाद ही पता चलेगा कि अन्य सब्जियों व फलों पर आंदोलन का क्या असर पड़ता है, क्योंकि किसानों ने अभी चक्का जाम नहीं किया है। आलू-प्याज के थोक बिक्रेता श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि प्याज के भाव में 2-3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अभी इसका भाव और बढ़ेगा क्योंकि प्याज इन दिनों मध्य प्रदेश से ही आ रहा है।

किसान के बेटे ने पिता के लिए बनाया Remote से चलने वाला ट्रैक्टर

भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, ये बात अक्सर लोग कहते हैं, साथ ही ये भी कहा जाता है कि भारत में प्रतिभाओं को उचित मंच नहीं मिल पाता है। उसके बाद भी अक्सर आप देखते होंगे कि प्रतिभा अपने आप चमक बिखेर देती है।

कुछ बड़ा या फिर नया करने के लिए जरूरी नहीं कि आप किसी बड़े संस्थान में पढ़ाई करें, जो काम आईआईटी के छात्र नहीं कर सकते हैं वो काम एक किसान के बेटे ने कर दिखाया है। उसकी प्रतिभा का डंका आज पूरे देश में बज रहा है।

राजस्थान के बारां जिले के बमोरीकलां गांव में एक किसान के बेटे ने जो कारनामा किया है उस से उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। 19 साल का ये युवक लगातार नए आविष्कार करने में लगा रहता है। उस ने अब जो चीज तैयार की है उस से खेती काफी आसान हो सकती है। छोटी सी उम्र में इस युवक ने अपनी बुद्धि के बल पर 27 से अधिक आविष्कार किए हैं। इस लड़के का नाम योगेश कुमार है। इसके आविष्कार देख कर आईआईटी में पढ़ने वाले लोग भी हैरान हैं। योगेश नागर फिलहाल मैथ्स से बीएससी कर रहा है। वो फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है।

योगेश के पिता राम बाबू नागर 15 बीघा जमीम पर खेती करते हैं. इसी से परिवार का खर्चा चलता है। अपने पिता की मुश्किलों को देख कर योगेश ने कुछ ऐसा करने की ठानी जिस से उनका काम आसान हो जाए, इसके लिए वो लगातार काम कर रहा था। उसके पिता को ट्रैक्टर चलाते समय पीठ में दर्द की शिकायत होती थी। पिता की तकलीफ को दूर करने के लिए योगेश ने रिमोट ऑपरेटिव सिस्टम डेवलप किया है। इससे खेत में एक जगह बैठकर रिमोट से ट्रैक्टर चलाकर जुताई की जा सकती है। बिना ड्राइवर के ट्रैक्टर को चलता देखकर गांव वाले भी हैरान रह जाते हैं।

अब योगेश के पिता का काम काफी आसान हो गया है। वो एक जगह खड़े हो कर ट्रैक्टर चलाते हैं। इस से उनका समय भी बचता है और पीठ दर्द की शिकायत से भी मुक्ति मिल गई है। योगेश के इस आविष्कार से गांव के लोग भी हैरान हैं, उनका कहना है कि योगेश में बहुत प्रतिभा है, उसे सही मार्गदर्शन मिले तो वो भारत का नाम रोशन कर सकता है। अब योगेश की चर्चा पूरे देश में हो रही है। रिमोट से ट्रैक्टर चला कर योगेश ने वो कारनामा किया जिस से भारत के किसानों की काफी मदद हो सकती है।अब योगेश को उम्मीद है कि उनके पिता को खेती के दौरान आने वाली समस्याओं का सामना नहीं करकना पड़ेगा।

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