पशुपालक इस मानसून में सस्ता और पौष्टिक हरा चारा पाने के लिए करें अजोला की खेती, जानें पूरी जानकारी

देश में बढ़ती जनसंख्या के कारण कृषि योग्य भूमि दिन प्रतिदिन घटती जा रही है। कृषि से होने वाली आय में हर साल कमी आती जा रही है। ऐसे संकट में पशुपालन एक फायदे का विकल्प हो सकता है। परन्तु पशु पालन में भी परंपरागत तरीके से हरे चारे की आपूर्ति करना असंभव हो गया है। एक तरफ पशुपालन के लिए हरे चारे का प्रबंध करना बहुत मुश्किल हो गया है।

ऐसे में जरूरी है कि पशुपालन में इस्तेमाल होने वाले पारंपरिक हरे चारे की बजाय नए अपरंपरागत खाद्य प्रदार्थ का इस्तेमाल हो ताकि पशुपालन के कारण मनुष्य की खाद्य प्रणाली पर बोझ ना आए और पशुपालन करन फायदेमंद रहे। इसी पद्धति को ध्यान में रखते हुए अजोला की खेती करना पशुपालक के लिए बहुत ही फायदेमंद व आसान तरीका होगा जिससे पशुपालन में लाभ की बढ़ोतरी हो सकती है।

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क्या है अजोला

हरियाणा पशु विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ ज्योति एवं डॉ देवेन्द्र ने बताया कि अजोला एक नमी वाले जलवायु में पाए जाना वाला जलीय फर्न होता है। ये पानी की सतह पर तैरती रहती है। धान की खेती में भी अजोला को हरी खाद के रूप में उगाया जाता है।

अजोला बहुत ही पौष्टिक आहार होता है जिसे पशुओं को हरे चारे के स्वरूप में खिलाया जा सकता है। जहां हमारे भारतवर्ष में सालभर हरा चारा पशुओं को उपलब्ध नहीं हो पा रहा है वहीं, अजोला खेती से पशुपालक सस्ता और पौष्टिक आहार दे सकतें हैं।

कैसे करें अजोला की खेती

एक गड्डा 2.5 मीटर गुणा 1.5 मीटर गुणा 20 सेंटीमीटर गहराई बनाएं और उसमें एक पॉलीथीन शीट बिछा दें। ध्यान रखे की क्यारी में 10 सेमी, आधा पानी का स्तर बना रहे। क्यारी में 15 किलो छानी हुई मिट्टी फैला दें और लगभग 5 किलो गाय के गोबर (सडने के पूर्व के 2 दिन का) को पानी में मिला दिया जाता है। जिससे अजोला को कार्बन प्राप्त होगा। क्यारी में 10 सेमी के जल स्तर को बनाए रखने के लिए पर्याप्त मात्रा में पानी डाला जाता है।