खीरे की बिना बीज वाली इन प्रजातियों की करें खेती, मिलेगा अधिक उत्पादन और ज्यादा मुनाफा

यदि किसान खीरे की खेती में अधिक उत्पादन के साथ-साथ ज्यादा मुनाफा प्राप्त करना चाहते हैं तो वैज्ञानिक तरीके को अपनाए। हरियाणा में खीरे की खेती नेट हाउस के अंदर, पॉली हाउस व प्लास्टिक की सुंरग के अंदर की जाती है।

इस बारे में राष्ट्रीय अवाॅर्ड से पुरस्कृत प्रोफेसर सुरेश कुमार अरोड़ा, पॉली हाउस एंव ग्रीन हाउस विशेषज्ञ ने बताया कि खीरे की खेती करने के लिए किसानों को कुछ महत्वपूर्ण बातों का ध्यान रखना बहुत ही जरूरी होता है।

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सबसे पहले किस्मों का चुनाव: खीरे की खेती के लिए अच्छी शंकर जातियों का चुनाव करना अत्यंत आवश्यक होता है।  जो किसान अगस्त और सितंबर में खीरे की खेती की बिजाई करते हैं।

इस मौसम के लिए 5 खीरे की प्रमुख शंकर प्रजातियां हैं, जो कि हॉलैंड, नीदरलैंड व इजरायल की सीडलेस यानी बिना बीज वाली हैं इन में सन स्टार, किंग स्टार, फॉल्कन स्टार, कैप्टन स्टार, हिल्टन, मल्टी स्टार आदि छह मुख्य उच्चकोटि की किस्में हैं। इनका प्रयोग करना चाहिए।

ऐसे तैयार करें नाली

खीरे की बिजाई के लिए नाली से नाली की दूरी 170 सेमी. होनी चाहिए। जबकि उंचाई डेढ़ फिट हो। अाधार 80 सेमी. व जहां पर बीज की रोपाई करनी है वो ऊपर की चौड़ाई 45 सेमी होनी चाहिए।

बीमारियों से बचाव:

रोपाई या बिजाई के बाद खीरे की फसल का बीमारियों से बचाव करने के लिए पीली व नीली पटि्टयों का प्रयोग करें। एक एकड़ नेट हाउस के अंदर लगभग 50 पीली पट्टियां और 50 नीली पट्टियां फ्रूट क्रीम का पतला लेप करके सूतली से टांग दे। ताकि खीरे को बीमारियों से बचाया जा सके।

ऐसे करें बिजाई

खीरे की बिजाई करने के लिए किसान सीधा बीज भी लगा सकते हैं। या फिर इन बीजों की पौध भी तैयार करवा सकते हैं। पौधे से पौधे की दूरी 40 सेमी व कतार से कतार के दूरी 30 सेमी रखनी चाहिए।