बीए, बीएड करने के बाद भी नहीं मिली जॉब तो शुरू की बागवानी, अब ये किसान कमा रहा है लाखों रूपये

बीए, बीएड करने के बाद भी प्राइवेट या सरकारी जॉब नहीं मिली तो बागवानी को ही आमदनी का जरिया बना दिया। अब हर साल सब्जी बेचकर लाखों रुपए कमा लेते हैं। उचाना खुर्द का 30 वर्षीय राकेश पिछले दो सालों से बागवानी की खेती कर रहा है। राकेश ने पढ़ाई करने के बाद नौकरी हासिल करने की काफी प्रयास किए, लेकिन सरकारी जॉब नहीं मिली।

आखिर थक हारकर उसने जिला बागवानी कार्यालय के अधिकारियों से पारंपरिक खेती की बजाय नई खेती करने की सलाह मांगी। बागवानी कार्यालय ने उसे खेत में बाग लगाकर सब्जियां उगाने की सलाह दी। इसके बाद राकेश ने अमरूद व बेर का बाग लगाए। सब्जी की बिजाई भी करने लगा। जिसके बाद उसको अब अच्छी आमदनी हो रही है। उन्होंने पूरे खेत में ड्रिप लगाई हुई है। जिससे पूरे खेत में सिंचाई ड्रिप विधि से ही करते हैं।

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किसान राकेश बताते हैं कि बागवानी खेती से जमीन की ताकत बनी रहती है। वहीं, देसी खाद डालने से जमीन की उर्वरक भी बढ़ जाती है। जिससे फसल की पैदावार में भी काफी इजाफा होता है। पारंपरिक खेती में जहां खर्चा और मेहनत ज्यादा है वहीं बागवानी खेती में खर्चा कम और आमदनी ज्यादा है। बागवानी खेती का एक ओर फायदा है कि पारंपरिक खेती में छह माह बाद रुपए आते हैं जबकि बागवानी में प्रतिदिन जेब में रुपए आ जाते हैं।

एक एकड़ में बेर लगाया, 50 हजार का बेचा

युवा किसान राकेश ने दो साल पहले चार एकड़ में अमरूद व एक एकड़ में बेर का बाग लगाया था। जिसके बाद पिछले साल उसको बाग से आमदनी शुरू हो गई थी। पिछली साल उसने डेढ़ लाख के अमरूद बेच दिए थे और 50 हजार से ज्यादा रुपए के बेर बेच दिए थे। इसके अलावा उसने एक एकड़ में घीया भी उगाई हुई थी।

जिसको उसने नरवाना, उचाना व जींद की सब्जी मंडी में अच्छे भाव में बेचा। वहीं कुछ लोग तो उसके खेत से ही घीया खरीदकर ले जाते थे। पिछले सीजन में घीया एक लाख रुपए से ज्यादा की बिकी थी। इस बार भी उसने घीया को एक एकड़ में उगाया हुआ है। इसके अलावा वह खीर, भिंडी, मूली, गाजर व अन्य सब्जियां भी उगाते हैं।