पॉली हाउस में पौधों की जड़ों का सूत्रकृमि रोग से बचाव करने के लिए किसान इस विधि से करें भूमि का उपचार

पॉली हाउस व ग्रीन हाउस के अंदर लगाई जाने वाली पांच रंग की शिमला र्मिच, टमाटर, बिना बीज वाला खीरा, हरी र्मिच, बिना बीज वाला बैंगन सब्जियों की जड़ों में सूत्रकृमि रोग न आए इसके लिए किसानों को भूमि का सौरीकरण विधि से उपचार करने का यह बिल्कुल सही समय है।

पाॅलीहाउस एंव ग्रीन हाउस एक्सपर्ट राष्ट्रीय अवार्ड से पुरस्कृत प्रोफेसर डा. सुरेश कुमार अरोड़ा ने बताया कि जून­-जुलाई में किसानों को चाहिए कि पिछली फसल के बैड़ों को तोड़कर जमीन की मिट्टी पलटने वाले हल से गहरी जुताई कर दें।  ध्यान रहे कि हल उतर- दक्षिण, पूर्व-पश्चिम दिशा में दो-दो बार चलाना हैं। जुताई के बाद सुहागा नहीं लगाएं।

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पाॅली हाउस या ग्रीन हाउस के अंदर ड्रिप लाइन बिछा दें। उसके बाद पूरे पॉली हाउस क्षेत्र को किसी प्लास्टिक की पन्नी से ढक देना चाहिए। ढकने के बाद पन्नी के चारों तरफ थोड़ी-थोड़ी मिट्टी डाल दें। इसमें बनने वाली भांप भी संरक्षित रहे। पूरे पॉली हाउस के अच्छे से गेट बंद कर देने चाहिए। ताकि उसके अंदर खूब गर्मी पैदा हो जाए।

हर 3-4 दिन में दोहराएं ड्रिप लाइन से पानी देने की प्रक्रिया

पॉली हाउस में बिछाई गई ड्रिप लाइन द्वारा 15 से 20 मिनट तक पानी तीन-चार दिन में भूमि में छोड़ना चाहिए। इस विधि को जुलाई महीने तक दोहराते रहें। इस दौरान जो गर्मी पड़ेगी व धूप हाेगा,

उससे पॉली हाउस में तापमान 65 से 70 डिग्री तक चला जाता है और पाॅली हाउस में जमीन पर बिछाई गई पन्नी के अंदर भाप बनती है। भाप पन्नी के अंदर ही रह जाएगी उड़ेगी नहीं वह फिर से जमीन पर ही गिरेगी। इससे सूत्रकृमि कीट व उनके अंडे नष्ट हो जाते हैं।

40 दिन की अवस्था में पौधे को होता है सूत्रकृमि से खतरा

यदि किसान ऐसा नही करते तो अगस्त सितंबर एंव अक्तूबर के महीने में जैसे ही पौधे बड़े होने लगते हैं 40 दिन की अवस्था में एकदम से जड़ों के सूत्रकृमि रोग की चपेट में ले लेने का खतरा पैदा हो जाता है। इससे होगा ये कि जड़ो के ऊपर फफोले से बन जाते है। इसमें पौधा मर जाता है। यानि सूख जाता है। इस रोग के फैलने के बाद फसल का 80 से 90 प्रतिशत किसान की फसल का नुकसान हो सकता है।