पुरे देश में अपनी मिठास के लिए प्रसिद्ध यमुना का मीठा तरबूज़ और खरबूजा पककर हुआ तैयार

यमुना का क्षेत्र तरबूज की खेती के लिए विख्यात है। यहां यमुना के दायरे में पड़ने वाली रेतीली जमीनों में हर साल किसान कड़ी मेहनत कर पूरे परिवार के साथ मिलकर तरबूज और खरबूजे तथा अन्य सब्जियां भी उगाते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा इस क्षेत्र में किसानों द्वारा तरबूज का उत्पादन किया जाता है। इसके चलते किसान नवंबर के महीने में तरबूज की पौध लगाना शुरू कर देते हैं।

जबकि 25 जनवरी के आसपास तरबूज की प्लेजें तैयार करना शुरू कर देते हैं। मई महीने में बेलों पर तरबूज के फल तोड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं। यमुना के मशहूर मीठे तरबूज की तो बात ही अलग है। मीठा लजीज यमुना का तरबूज अपने स्वाद के लिए पूरे देश में प्रसिद्ध है। किसान तारुण खान व इरशाद खान ने बताया कि एक बार की तुड़ाई में 150 क्विंटल के करीब तरबूज मिल जाता है।

जो कि एवरेज उत्पादन होता है। ऐसे में मंड़ियों में भाव अगर अच्छा मिल जाए तो किसानों को अच्छा खासा मुनाफा हो जाता है। यमुना के बड़े व्यापक क्षेत्र में तरबूज व खरबूजे का उत्पादन कर किसान हर साल दिल्ली, पंजाब, देहरादून, चंडीगढ़, सहारनपुर, पंजाब मंडियों में ले जाते हैं।

फसल तैयार करने पर हजारों का आता है खर्च

किसान जुल्फान ने बताया कि एक एकड़ तरबूज की फसल तैयार करने में हजारों रुपए खर्च होतें है। दो एकड़ में तरबूज लगाने के लिए दो किलो तरबूजका बीज पर्याप्त होता है। जिसकी कीमत लगभग 5 हजार से लेकर 65 हजार तक होती है।

बीज का दाम वेरायटी पर डिपेंड होता है। मिश्री वैरायटी के तरबूज का बीज सबसे मंहगा होता है। उससे कम होता है, अरूण वैरायटी का बीज जो कि 27 हजार रुपए किलो के करीब आता है। इस बार हमने अपने खेतों में सभी वरायटी का बीज लगया है।

स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

तरबूज गर्मियों का मुख्य फल है। मई-जून की तेज धूप व लू से बचाने में काफी फायदेमंद होता है। ज्यादा गर्मी से यह फल अधिक मीठा और जायकेदार हो जाता है, जबकि बारिश इसकी दुश्मन साबित होती है। इसका सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत फायदेमंद होता है। शरीर में पानी की कमी को पूरा करता है। इसके साथ ही इसमें काफी मात्रा में ऊर्जा होती है।

मैग्नीशियम, सल्फर, लोहा, आक्जौलिक अमल तथा पोटेशियम भी काफी मात्रा में पाई जाती है। तरबूजे के लिए अधिक तापमान वाली जलवायु सबसे अच्छी होती है। गर्म जलवायु अधिक होने से इसकी बढ़वार अच्छी होती है। ठंडी व पाले वाली जलवायु उपयुक्त नहीं होती। अधिक तापमान से फलों की वृद्धि अधिक होती है। बीजों के अंकुरण के लिए 22-25 डिग्री तापमान सर्वोत्तम रहता है। c