जमीन पर नहीं इस तकनीक से हवा में उगाए सब्जियां, बरसात और बीमारी से भी नहीं होगी ख़राब

बागवानी विभाग हरियाणा की ओर से उन्नत तरीके से सब्जियों के उत्पादन लेने के लिए शुरू की गई वर्टिकल पद्धति किसानों के लिए वरदान बन रही है। हमारे देश में सब्जियों पर ओले, ज्यादा बरसात व कीड़े लगने से फसलें नष्ट हो जाती थी। इस पद्धति के तहत सब्जियों पर ज्यादा बारिश, ओले व कीड़ों का भी प्रभाव नहीं पड़ता है। इस पद्धति से किसानों के लिए काफी फायदा है।

सब्जियों के पौधों को पॉली हाउस में ऊपर बांध दिया जाता है और बांस-बल्लियों के सहारे बेल को उपर चढ़ा दिया जाता है। जिससे सब्जियां जमीन पर नहीं टिकती हैं। पौधे ऊपर की ओर बढ़ते हुए अधिक उत्पादन लिया जाता है। इसके अलावा फसलें जमीन पर फैलने की बजाय ऊपर की ओर बढ़ती हैं, 

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सब्जियां जमीन को नहीं छूने के कारण उनके आकार व रंग काफी साफ होते हैं, जिससे सब्जी के दाम भी बढ़िया मिलते हैं। वर्टिकल पद्धति के तहत पॉली हाउस बनाकर उसमें सब्जियों की पौध लगाई जाती है।

इस पद्धति के तहत सब्जियां उगाने में किसानों को न केवल बागवानी विभाग की ओर से 50 प्रतिशत की प्रति एकड़ सब्सीडी दी जा रही है, वहीं इस पद्धति से खेती करने पर किसान दोगुना उत्पादन भी प्राप्त कर सकते हैं। राज्य के गुड़गांव, करनाल सहित अन्य जिलों में इस पद्धति से खेती की जा रही है। रेवाड़ी जिले में इस वर्ष से 65 एकड़ जमीन पर सब्जियां उगाने का लक्ष्य रखा गया है।

गांव धवाना में 20 एकड़ में घिया व तोरई उगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। इसमें किसानों को 31 हजार 250 रुपए प्रति एकड़ की सब्सीडी दी जाती है।अधिकारी डॉ. दीन मोहम्मद ने बताया कि इस पद्धति से खीरा, घीया, टमाटर, शिमला मिर्च, तोरई, करेला, सादा मिर्च व ऑफ सीजन धनिया भी उगाया जा सकता है।