ये है देश की सबसे पौष्टिक गेहूं, देती है 70 क्विंटल की पैदावार

भारत में किसानों की हालत कुछ ज्यादा अच्छी नहीं है, बहुत से किसान सिर्फ पारम्परिक खेती पर निर्भर हैं। ऐसे में किसान ये सोचता है कि वह गेहूं वगैरा की अच्छी किस्मों को उगाये और अच्छी पैदावार ले सके। आज हम सभी किसान भाइयों को गेहूं के ऐसी किस्म के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे देश की सबसे पौष्टिक गेहूं कहा जाता है और ये 70 क्विंटल की पैदावार आसानी से देती है।

हम बात कर रहे हैं एचडी 3226 (पूसा यशस्वी) किस्म के बारे में, भारत में विकसित अब तक के सबसे अधिक पौष्टिक गेहूं (एचडी 3226 (पूसा यशस्वी)) का बीज तैयार करने के लिए बीज उत्पादक कम्पनियों को शुक्रवार यानि 30 अगस्त को इसका लाइसेंस जारी कर दिया गया है और इस बीज की बिक्री अगले साल से शुरू होगी।

आपको बता दें कि इन कम्पनियों को रबी फसल के दौरान गेहूं की इस सबसे पौष्टिक किस्म का प्रजनक बीज उपलब्ध करा दिया जायेगा। अगले वर्ष से किसानों को सीमित मात्रा में इसका बीज उपलब्ध कराया जाएगा। एचडी 3226 किस्म की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें गेहूं की अब तक उपलब्ध सभी किस्मों से ज्यादा प्रोटीन और ग्लूटीन है।

इसमें 12.8 प्रतिशत प्रोटीन, 30.85 प्रतिशत ग्लूटीन और 36.8 प्रतिशत जिंक है। अब तक गेहूँ की जो किस्में हैं उनमें अधिकतम 12.3 प्रतिशत तक ही प्रोटीन है। इस गेहूँ से रोटी और ब्रेड तैयार किया जा सकेगा।

70 क्विंटल की पैदावार

इस किसम के प्रजनक और प्रधान वैज्ञानिक डॉ. राजबीर यादव ने बताया कि इस बीज का विकास आठ साल में किया गया है। इसकी पैदावार आदर्श स्थिति में 70 क्विंटल प्रति हेक्टेयर तक ली जा सकती है। यह गेहूँ रतुआ रोग और करनाल मल्ट रोधी है। साथ ही उनका कहना है कि भारतीय गेहूं में कम प्रोटीन के कारण इसका निर्यात नहीं होता था लेकिन अब ये समस्या समाप्त हो जायेगी।

फसल तैयार होने में लगते हैं 142 दिन

डॉ. राजबीर यादव ने बताया कि आगे किसान इस गेहूं की भरपूर पैदावार लेना चाहते हैं तो इसे अक्टूबर के अंत या नवम्बर के पहले सप्ताह में लगाना जरूरी है। इसकी फसल 142 दिन में तैयार हो जाती है। यह किस्म पंजाब, हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड के तराई क्षेत्र तथा जम्मू-कश्मीर एवं हिमाचल प्रदेश के कुछ हिस्सों के लिए उपयुक्त है।