चने की ये दो नई किस्मे देती है 12% अधिक उत्पादन ,जाने पूरी जानकारी

देश के किसानो के लिए एक अच्छी खबर है । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने चने की दो नई किस्मे पूसा चिकपी – और सुपर एन्नीगिरी -किस्म को विकसित किया है । बता दें कि आईसीएआर (ICAR) के अनुसार यह किस्में आंध्रप्रदेश, गुजरात, कर्नाटक, मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र राज्यों में खेती के लिए काफी उपयुक्त है। इन राज्यों में यह किस्मे बहुत अच्छा ही उत्पादन देंगी जिस से किसानो को कम समय में ज्यादा उत्पादन मिलेगा । आज हम आपको इन दोनों किस्मों की विशेषताओं के बारे में जानकरी देंगे ।

पूसा चिकपी- 10216

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चने की यह किसम सूखे क्षेत्रों में बेहतर उपज देने के लिए त्यार की गई है । इसकी औसतन पैदावार लगभग 6 क्विंटल प्रति एकड़ होती है । भारत के मध्य के इलाकों जैसे मध्य प्रदेश में नमी की उपलब्धता की कमी की स्थिति में यह चने की पुराणी किस्म पूसा -372 की तुलना में 11.9% अधिक पैदावार देती है ।

यह किस्म 110 दिन में पककर तैयार हो जाती है । इसके 100 बीजों का वजन लगभग 22.2 ग्राम तक होता है। चने की नई किस्म में चने की होने वाली बहुत सारी बीमारीओं जैसे फुसरैरियम, सूखी जड़, सड़न और स्टंट रोगों के प्रति मध्यम प्रतिरोधी क्षमता होती है। चने की इस किस्म की खेती को गुजरात, महाराष्ट्र, गुजरात समेत उन इलकों के लिए फायदेमंद है यहाँ पर पानी की बहुत कमी है ।

सुपर एन्नीगेरी-1

चने की दूसरी सुपर एन्नीगेरी-1 किस्म की औसत उपज 7.5 क्विंटल प्रति एकड़ है जो की पिछली किस्म से 150-160 किलो ज्यादा है । यह किस्म 95-110 दिनों में पक कर तैयार हो जाती है। चने की इस दूसरी नई किस्म की खेती आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और गुजरात में हो सकती है । अगर अब आप इसका बीज लेना चाहते है तो आपको इसके लिए इंतज़ार करना पड़ सकता है लेकिन अगले वर्ष से इन दोनों किस्मों का बीज असनी से उपलब्ध हो जायेगा।