काले गेहूं और काले चावल की खेती से ऐसे करें एक लाख/एकड़ की कमाई

डेरा फतेह सिंह के प्रगतिशील किसान परमजीत सिंह वड़ैच ने ऑर्गेनिक तरीके से काली गेहूं और काली धान की पैदावार शुरू करके नई तकनीक को ग्रामीण क्षेत्र तक पहुंचाया है। इनके द्वारा पैदा की गई काले रंग की गेहूं व काले चावलों की मार्केट में सौ से सवा सौ रुपये प्रति किलो तक डिमांड है। परमजीत के मुताबिक पिछले सीजन में आधा एकड़ से 50 हजार रुपये तक काली आर्गेनिक गेहूं बेच चुके हैं।

जिसका रिजल्ट देखते हुए इस बार इस गेहूं का रकबा बढ़ाने का मन है। परमजीत सिंह ने बताया कि पांच साल पहले वह पीजीआई में अपनी पत्नी के इलाज के लिए गया था। वहां भर्ती हुए पंजाब के कैंसर के सैकड़ों मरीजों को देख कर उसके मन में ऐसा डर पैदा हो गया कि उसने जहर युक्त खेती छोड़कर ऑर्गेनिक खेती की तरफ रुख कर लिया।

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परमजीत ने बताया कि उसने नेशनल एग्रो फूड बायोटेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट मोहाली से संपर्क किया। जहां से उसे पता चला कि काली गेहूं और काली धान की खेती करके कई तरह की बीमारियों से बचा जा सकता है। लेकिन उसे केवल डेढ़ एकड़ का बीज ही मिल पाया। बीज पतला होने के कारण एक एकड़ में 25 किलो गेहूं की डाला जाता है। शोध के मुताबिक काली गेहूं शुगर फ्री है और इसमें कार्बोहाइड्रेट की मात्रा सामान्य गेहूं से आधी होती है।

इसका आटा भी हल्के काले रंग का होता है और खाने में फीका लगता है। एक एकड़ में इस गेहूं की पैदावार 14 से 16 किवंटल आर्गेनिक तरीके से है और यदि यूरिया डीएपी का इस्तेमाल से कोई किसान परहेज नहीं करता तो 18 से 20 क्विंटल की पैदावार भी ली जा सकती है।

गेहूं के साथ काले चावलों की भी खेती

परमजीत ने एक एकड़ में काले रंग के चावल भी सीधी बिजाई के जरिए इसी साल शुरू की है। जिसकी फसल पककर 10 दिन तक कटाई के लिए तैयार हो जाएगी। कृषि रिसर्च केंद्रों के मुताबिक काले चावल डायबिटीज और मोटापे से ग्रस्त लोगों के लिए बेहद फायदेमंद हैं। परमजीत ने बताया कि इस खेती के लिए उन्होंने सिक्किम एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी से आठ दिन की ट्रेनिंग ली और उन्हीं के प्रयास से काली धान का बीज उपलब्ध हो पाया।