देसी नस्ल की ये गाय 50 डिग्री तापमान में भी देती है रोजाना 30 लीटर दूध

पशुपालन करने वाले किसान भाई अक्सर इस दुविधा में रहते हैं कि कौनसी नस्ल की गाय से डेयरी फार्म की शुरुआत की जाये। क्योकि ज्यादातर नस्ल की गाय गर्मियों में दूध बहुत कम देने लगती हैं और किसानों को नुकसान झेलना पड़ता है। लेकिन आज हम आपको एक ऐसी देसी नस्ल की गाय के बारे में बताएंगे जो 50 डिग्री तापमान में भी रोजाना 30 लीटर दूध देती है।

हम बात कर रहे हैं थारपारकर नसल की गाय के बारे में। थारपारकर एक देसी नस्ल की गाय है और इस गाय की मांग राजस्थान के साथ दूसरे प्रदेशों में भी काफी बढ़ रही है। भारत के अलग अलग प्रदेशों के किसान थारपारकर गाय को पालने में ज्यादा महत्व दे रहे हैं। इसीलिए इस गाय की कीमत डेढ़ से दो लाख रु. तक है।

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चिकित्सा एवं अनुसंधान प्रशिक्षण केंद्र के डॉ. अनिल घोड़ेला का कहना है कि गांवों में हुए एक सर्वे के अनुसार पिछले काफी सालों से अच्छी नस्ल की गायों का पलायन दूसरे राज्यों में किया जा रहा है। इसी लिए हर साल करीब 20 हजार से अधिक थारपारकर नस्ल की गाय को दूसरे राज्यों में भेजा जा रहा है।

थारपारकर व साहिवाल नस्ल के प्रति किसान व्यावसायिक रूप में काफी ज्यादा रुझान दिखा रहे हैं। विदेशी नस्ल की जर्सी व एसएफ नस्ल की गाय अधिक दूध देती हैं लेकिन उनके दूध में पौष्टिकता और गुणवत्ता कम होने के कारण भी किसानों के लिए ये थारपारकर नस्ल की गाय पहली पसंद बनती जा रही है।

इसका कारण ये है कि साहिवाल और थारपारकर गाय के दूध में प्रोटीन, कैल्शियम,मैग्निशियम और विटामिन भरपूर मात्रा में होने के कारण पशुपालक डेयरी फार्म में इस नस्ल से काफी मुनाफा कमा रहे हैं। डॉ. घोड़ेला का कहना है कि थारपारकर नस्ल की गाय 50 डिग्री से भी ज्यादा और कम से कम जीरो डिग्री तक तापमान भी आसानी से सहन कर सकती है। वर्तमान में करीब 600 थारपारकर गायों का संरक्षण भारत सरकार द्वारा संचालित केंद्रीय पशु प्रजनन फार्म सूरतगढ़ में किया जा रहा है।