जानें 34 बोरा प्रति एकड गेहूं निकालने का तरीका

कहा जाता है कि यदि किसान कुछ अलग अलग तरीके से फसलों के बीज कि बुवाई करें तो निश्चित ही उसे फसल के उत्पादन में लाभ मिलता है और वह खेती को लाभ का व्यवसाय बना सकता है। हलाकि मध्य प्रदेश के टिमरनी क्षेत्र के किसानों की मानें तो पिछले साल गेहूं उत्पादन पहले की तुलना में ठीक ही निकला था।

लेकिन रहटगांव तहसील के ग्राम खमगांव के दो किसानों ने देवास जिले के कन्नौद से किसी व्यापारी से (तेजस) किस्म का करीब चार क्विंटल गेहूं 4000 रूपये प्रति क्विंटल खरीदा था। तथा इन दोनों किसानों ने अपने खेतों में तेजस किस्म के गेहू की बुवाई पचास किलो प्रति एकड़ के हिसाब से की थी।

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इन किसानों ने इस बीज को करीब आठ एकड़ रकबे में बोया था। जिसमे अन्य गेहूं में जिस प्रकार से हम चार पानी देते हैं इस किस्म में भी उतने ही पानी दिए गए । इस बीज को उन्होंने वैज्ञनिको से सलाह लेकर बोया था।

110 दिन में तैयार हो गई थी फसल

प्रगितिशील किसान जगदीश सिंह ने बताया कि कई सालों के बाद पिछले साल उन्हें इतना चमक वाला गेहूं देखने को मिला और पहली बार इतनी ज्यादा उपज प्राप्त हुई। उन्होंने पहले हल्दी, कोलियस, स्वीट कॉर्न जैसी फसलों पर अच्छी कमाई की है और पिछले सीज़न ये तेजस गेहूं बोया था। और इसकी उपज से वो बहुत खुश हुए, इस किस्म (तेजस) के गेहूं की उन्होंने करीब 34 बोरा प्रति एकड़ उपज ली है।

तेजस गेहूं की बुआई का तरीका

इन किसानों ने बताया कि तेजस किस्म के गेहूं की बुआई का तरीका कुछ अलग है। इसे बोने के लिए पहले तो करीब 6 इंच निचे गहरायी में ट्रैक्टर से डीएपी खाद की बुआई की जाती है। उसके बाद 2 इंच पर गेहूं की बुआई की जाती है।

इसके पीछे वैज्ञानिक कारण है, वैज्ञानिकों का कहना है कि जैसे जैसे गेहूं की जड़ें नीचे डीएपी में मिलती जाएँगी तो गेहूं की ग्रोथ बढ़ेगी और जड़ें भी मज़बूत होती हैं। इसी तरीके से इन प्रगितिशील किसानों ने पिछले रबी सीज़न में 34 बोरा प्रति एकड़ गेहूं की उपज ली है।