नवंबर में करें टमाटर की खेती, जाने कौन सी किस्में हैं सबसे बेहतर

सब्जियों में टमाटर को प्रमुख सब्जी के रूप में जाना जाता है। टमाटर के विविध उपयोग के कारण इसकी मांग सालभर रहती है। टमाटर की उपलब्धता भी पूरे वर्षभर बनी रहती है। इसकी खेती सर्दी और गर्मी दोनों ऋतुओं में की जा सकती है। वैसे टमाटर उष्ण कटिबंधीय जलवायु की फसल है। यह पाले से विशेष रूप से प्रभावित होती है। इसके बीजांकुरण के लिए तापमान 21 से 24 डिग्री सेंटीग्रेड और फल लगने के लिए 30 से 35 डिग्री सेंटीग्रेड तक हाेना चाहिए। अधिक वर्षा वाले क्षेत्र टमाटर की खेती के लिए अनुपयुक्त हैं।

खेती की तैयारी – टमाटर की खेती विभिन्न प्रकार की मिट्टियों में की जा सकती है, परंतु अच्छे जल निकास वाली चिकनी बलुई दोमट मिट्‌टी इसके लिए अच्छी मानी जाती है। टमाटर की अगेती खेती के लिए हल्की मिट्‌टी उपयुक्त रहती है। दुर्गापुरा स्थित राजस्थान कृषि अनुसंधान संस्थान के उद्यान संभाग में प्रोफेसर डॉ. सुब्रत मुखर्जी और एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. कमल कुमार मीना का कहना है कि 6-7 पी.एच. मान वाली भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी रहती है। टमाटर के लिए समतल सतह वाली भुरभुरी भूमि की आवश्यकता होती है।

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टमाटर की उन्नत किस्में : टमाटर के पौधों की वृद्धि की प्रकृति के अनुसार इसकी किस्मों को वर्गों में विभक्त किया गया है।
निर्धारित वृद्धि वाली : पूसा शीतल, पंजाब छुआरा, रोमा, एच.एस. 102, पूसा गोल, पंजाब केसरी पूसा अर्ली, ड्वार्क, सी.ओ.-2, इस प्रकार की किस्मों का पुष्पक्रम हर गांठ पर होता है।

अनिर्धारित वृद्धि वाली : मार्गलोब, बेस्ट ऑफ आल, पूसा रूबी, सेलेक्शन 120, पंत बहार, पंत टी-3, इस प्रकार के टमाटर में पुष्पक्रम हर तीसरी गांठ पर होता है। उन्होंने बताया कि पूसाबहार व पूसा कल्याणी वर्षभर उगाई जाने वाली किस्में हैं। पूसा शीतल कम तापमान वाले क्षेत्र के लिए, पूसा हाइब्रिड-1 उच्च तापमान वाले क्षेत्र के लिए, अर्का विकास सूखा स्थितियों के लिए अाैर अर्का मेघाली वर्षा युक्त परिस्थितियों के लिए अनुकूल है।

बीज की मात्रा : टमाटर की एक हैक्टेयर में खेती के लिए 400 से 500 ग्राम बीज की आवश्यकता होती है। संकर किस्मों के लिए 100 से 500 ग्राम प्रति हैक्टेयर बीज की आवश्यकता होती है। बीजोपचार केप्टान नामक रसायन से 4 ग्राम प्रति किलोग्राम की दर से करना चाहिए।

बुआई का समय और विधि : मैदानी क्षेत्र में टमाटर की बुअाई वर्ष में दो बार जून व जुलाई और नवंबर व दिसंबर में की जाती है। पहाड़ी क्षेत्र के लिए इसकी बुआई मार्च-अप्रैल में की जाती है। टमाटर की एक हैक्टेयर क्षेत्र में रोपाई के लिए 100 से 125 वर्गमीटर से तैयार की गई पौध पर्याप्त रहती है।

पौधशाला की भूमि तैयार कर 5 गुणा एक मीटर की 10 से 15 सेंटीमीटर जमीन से उभरी हुई क्यारियां बनानी चाहिए। बीज बुआई के लिए पहले नर्सरी का उपचार अच्छा रहता है। इसके लिए नर्सरी की मिट्‌टी को फार्मेल्डिहाइड के घोल (50 लीटर पानी में एक मिलीलीटर दवा) से तर कर दें। ऐसा करने से भूमि जनित रोग नहीं लगते हैं।

पौधरोपण : पौधशाला की क्यारियों में जब पौध 4-5 सप्ताह की या 7 से 10 सेंटीमीटर की हो जाए, तो खेत में रोपित करनी चाहिए। शरद कालीन फसल की रोपाई के लिए पत्तियों व पौधों की आपसी दूरी क्रमश: 75 सेंटीमीटर व 60 सेंटीमीटर और ग्रीष्मकालीन फसल के लिए 75 सेंटीमीटर व 45 सेंटीमीटर रखें। एक स्थान पर एक ही पौधा लगाएं। पौधरोपण के तुरंत बाद हल्की सिंचाई करनी चाहिए।

सिंचाई : टमाटर की फसल से अच्छी उपज प्राप्त करने के लिए सिंचाई का विशेष महत्व है। गर्मी में 5-7 दिन और सर्दी में 10 से 12 दिन के अंतराल पर सिंचाई करें।