अब खरपतवार से भी होगी किसानों को आमदनी, एक किलो से होगी 20 रूपये की कमाई

अभी तक खेतों में उगने वाली जंगली घास यानी खरपतवार किसानों के लिए परेशानी का कारण बनती आई है, लेकिन अब यही घास उन्हें मुनाफा देने लगेगी। इतना ही नहीं खेतों में किसान दो फसलों के वकफे पर घास की खेती करके अतिरिक्त आमदन ले सकेंगे। अब यही घास वाहनों के लिए ईंधन बनाने में काम आएगी। इससे एथेनॉल बनाया जा सकेगा। इसकी खोज कानपुर के एक बायोकेमिकल इंजीनियर ने की है। एथेनॉल अभी पेट्रोल में 10 प्रतिशत तक मिलाया जा रहा है।

इसे अभी गन्ने से बनाया जा रहा है। घास से ज्यादा मात्रा में एथेनॉल बनाने से ब्राजील और कनाडा की तरह भारत में भी वाहन चलाने के लिए 100 फीसद एथेनॉल का इस्तेमाल होने लगेगा। इससे किसानों को घास से ही अच्छी-खासी आमदनी होने लगेगी। पीएयू लुधियाना के बायोकेमिकल के सहायक डॉ. शर्मा ने इस बात की पुष्टी की है। उन्होंने बताया कि इस दिशा में हरकोर्ट बटलर प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (एचबीटीयू), कानपुर के बायोकेमिकल इंजीनियरिंग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. ललित कुमार सिंह ने जंगली घास से सस्ता एथेनॉल बनाने में सफलता प्राप्त की है।

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एक किलो घास से मिलेगा 300 मिली. एथेनॉल

शोध के मुताबिक दुनिया भर में इस दिशा में काम चल रहा है। एथेनॉल की मांग बढ़ने पर अधिक उत्पादन होगा और तब इसकी लागत और कम आएगी। अभी सीमित मात्रा में उत्पादन के कारण यह शीरे (गन्ने के वेस्ट) से बनाए जाने वाले एथेनॉल से थोड़ा महंगा पड़ रहा है। घास में 40 फीसदी सेलूलोज, 24 फीसद हेमी सेलूलोज और बाकी लिगनिन तत्व होते हैं। इसी से ग्लूकोज और जायलोज बनता है। एक किलो घास से अनुमानत: 300 मिली एथेनॉल प्राप्त किया जा सकता है, जिस से किसान को 20 रूपये के करीब आमदन होगी।

एथेनॉल से कम होगा प्रदूषण

यहां बता दें कि पेट्रोल से निकलने वाले धुएं में कार्बन मोनोऑक्साइड, नाइट्रोजन व सल्फर डाईऑक्साइड होता है, जो पर्यावरण के लिए खतरनाक है। लेकिन एथेनॉल को पेट्रोल में मिलाने पर यह हानिकारक तत्व कम निकलेंगे। फिलहाल पेट्रोल में दस फीसद एथेनॉल मिलाया जा रहा है। घास से उत्पादन होने पर इसकी मात्रा बढ़ाई जा सकेगी। घास के लिए लागत शून्य होगी। यह हमारे देश में खेतों में खुद ही उग जाती है, इससे किसानों को भी लाखों का लाभ हो सकता है।

एथेनॉल मिले पेट्रोल से बढ़ती है वाहन के इंजन की उम्र

इस संबंधी एक पेट्रोल पंप मालिक ने बताया कि सभी पेट्रोलियम कंपनियां एथनॉल को मिलाकर पेट्रोल बेच रही हैं। कनाडा और ब्राजील जैसे देशों में तो एथेनॉल से ही वाहनों को चलाया जा रहा है। अगर घास से एथेनॉल बनाया जा सकता है तो यह पेट्रोल का स्थान ले सकता है। पहले जब पेट्रोल में एथेनॉल मिलाना शुरू हुआ था तो इसे मिलावटी कहकर विरोध हुआ था परंतु इससे प्रदूषण कम होने के साथ इंजन की उम्र बढ़ती है।