अब यूरिया डालना हुआ बहुत सस्ता और आसान

अब किसानों के लिए खेतों में यूरिया डालना बहुत सस्ता और आसान हो जाएगा। यानि कि जहां किसानों को अब तक 45 किलो यूरिया डालना पड़ता था अब उसके मुकाबले 500 ml नैनो यूरिया से काम चल जाएगा। आपको बता दें कि इंडियन फारमर्स फर्टिलाइजर कोआपरेटिव लिमिटेड (IFFCO) अगले साल के मार्च महीने से नई नैनो प्रौद्योगिकी आधारित नाइट्रोजन उर्वरक का उत्पादन शुरू करने जा रहा है।

इस नैनो यूरिया के बाजार में उपलब्ध होने के बाद किसानों को एक बोरी यूरिया की जगह सिर्फ एक बोतल नैनो उत्पाद डालना पड़ेगा। अनुमान है कि एक बोतल नैनो यूरिया की कीमत करीब 240 रुपए होगी। यानि कि परम्परागत यूरिया के एक बैग के मुकाबले इसकी दस प्रतिशत कम होगी। इसका इस्तेमाल करने से किसानों को काफी बचत होगी।

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कंपनी(IFFCO) के प्रबंध निदेशक उदय शंकर अवस्थी का कहना है कि गुजरात के अहमदाबाद स्थित कलोल कारखाने में नाइट्रोजन आधारित उर्वरक का उत्पादन किया जाएगा। साथ ही उन्होंने बताया कि यह पूरी तरह से मेक इन इंडिया के तहत बनाया जाएगा। इससे प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के 2022 तक किसानों की आमदन को दोगुना करने के लक्ष्य को पूरा करने में मदद मिलेगी। उनका कहना है कि कंपनी सालाना ढाई करोड़ बोतल उत्पादन की योजना तैयार कर रही है ।

बढ़ेगा उत्पादन

अवस्थी ने साथ में ये भी बताया कि नैनो यूरिया की 500 मिलीलीटर की बोतल 45 किलो यूरिया के बराबर होगी। यानि कि इस नए नैनो उत्पाद के प्रयोग से देश में 50 प्रतिशत तक खपत कम होगी और साथ ही फसलों का उत्पादन भी बढ़ेगा। मौजूद समय की बात करें तो देश में तीन करोड़ टन यूरिया की खपत है और किसान इसका अधिक इस्तेमाल करते हैं।

लेकिन इस नए उर्वरक से अब इस खर्च में कमी आएगी। फ़िलहाल किसान प्रति एकड़ 100 किलोग्राम यूरिया की डालते हैं। लेकिन इस नए मामले में प्रति एकड़ एक बोतल नैनो उर्वरक से काम चल जाएगा। आपको बता दें की इसका प्रयोग इफको द्वारा भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की सहायता से देश में 11000 स्थानों पर किया जा रहा है। इसके अलावा 5000 अन्य स्थानों पर भी इसकी जांच की जा रही है। नैनो नाइट्रोजन उर्वरक की जांच हर जलवायु क्षेत्र और मिट्टी में की जाएगी। साथ ही इस नई तकनीक से उर्वरक पर सब्सिडी आधी रह जाएगी।

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