गन्ने की ये तीन नई किस्में किसानों को करेंगी मालामाल, 95 टन प्रति हैक्टेयर होगी पैदावार

पूरी दुनिया में लगभग हर खाद्य पदार्थों में लोग चीनी का इस्तेमाल जरूर करते हैं, फिर चाहे हो सुबह की चाय हो या कोई मिठाई। आप जानते ही होंगे कि चीनी गन्ने से बनाई जाती है। गन्ने के उत्पादन में दुनिया भर भारत का दूसरा स्थान है। इसी बीच गन्ने की खेती करने वाले किसानों के लिए रहत की खबर है। आपको बता दें कि उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर के गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा गन्ने की तीन नई किस्मों को विकसित किया गया है।

इन किस्मों को लगातार 10 साल के रिसर्च के बाद विकसित किया गया है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस रिसर्च से गन्ना किसानों और शुगर मिलों को बड़ी राहत मिलेगी। गन्ने की इन तीन नई किस्मों में सबसे खास बात यह है कि ये तीनों किस्में रोगमुक्त हैं और तीनों ही किस्में चीनी की रिकॉर्ड तोड़ रिकवरी देंगी। सबसे बड़ी बात ये है कि इन किस्मों को हर तरह की मिट्टी में उगाया जा सकेगा।

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ये हैं नई किस्में

गन्ना शोध संस्थान के वैज्ञानिकों द्वारा कोसा 13235, कोसा 13452 और कोसा 10239 किस्मों को विकसित किया गया है। आइये इनके बारे में पूरी जानकारी प्राप्त करें…

सबसे पहले बात करें को.से 13452 किस्म की तोये यह मध्यम देर से पकने वाली गन्ना किसम है। ये किस्म करीब 86 से 95 टन प्रति हेक्टेयर का उत्पादन देगी। दूसरी किस्म है को.से 13235। वैज्ञानिकों के अनुसार गन्ने की ये किस्म किसानों के लिए वरदान साबित हो सकती है। इसका कारण ये है कि बाकी गन्नों की तुलना में यह शीघ्र पकने वाला गन्ना है।

इससे किसान करीब 81 से 92 टन प्रति हेक्टेयर की उपज ले सकते हैं। ये फसल सिर्फ 10 महीने में पक कर तैयार हो जाती है। तीसरी किस्म है को.से 10239। इस किस्म का गन्ना मध्यम देर से पकने वाला गन्ना है। वैज्ञानिकों के अनुसार जल भराव की स्थिति में इसकी 63 से 79 टन प्रति हेक्टेयर पैदावार होती है। ऊसर या बंजर जमीन पर इसकी पैदावार 61 से 70 टन पाई गई है।

किसानों के लिए सबसे खास बात यह है कि इन तीनों ही किस्मों में कीट और रोगों के प्रकोप शून्य है। आपको बता दें कि भारत में लगभग 5 मिलियन हेक्टेयर से भी अधिक क्षेत्रफल में गन्ने की खेती होती है। जिसमें सबसे ज्यादा यानि कि देश का लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा गन्ना उत्तर प्रदेश में ही होता है। ऐसे में किसानों को इन नई किस्मों की खेती से काफी फायदा मिल सकता है और किसानों की आमदन में बढ़ोतरी हो सकती है।

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