इस किसान से जानें बाल्टी में मोती की खेती करने का तरीका, 4 से 5 लाख तक हो सकती है कमाई

किसान भाई ये सोचते हैं कि मोती सिर्फ समुद्री सीपों में हो सकते हैं, लेकिन आपको बता दें कि आप गलत हैं। आज हम आपको एक केरल के कासरगोड इलाके के एक ऐसे किसान के बारे में जानकारी देंगे जो पिछले दो दशकों से अपने घर में ही बाल्टी में मोती की खेती कर रहा है। 65 वर्षीय केजे माथचन अपने आंगन में बने तालाब में हर साल 50 बाल्टी से अधिक मोतियों की खेती करते हैं और ज्यादातर मोतियों को ऑस्ट्रेलिया, सऊदी अरब, कुवैत और स्विट्जरलैंड में निर्यात करके हर साल लाखों की कमाई करते हैं।

माथचन का कहना है कि उन्होंने 1999 में अपने तालाब में मोती की खेती करनी शुरू की थी। लेकिन उन्हे कहना है कि यह जल्दबाजी में लिया गया फैसला था और बहुत से लोगों ने इसकी आलोचना की। लेकिन इस किसान ने मेहनत नहीं छोड़ी और इसके बाद वो महाराष्ट्र और पश्चिमी घाटों से निकलने वाली नदियों से सीपों को लाया और उन्हें अपने घर में, बाल्टियों में उपचारित करने लगा।

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पहले 18 महीनों में इस किसान को 50 बाल्टी मोती उत्पादन मिला। माथाचन का कहना है कि शुरुआत में उन्होंने लगभग 1.5 लाख रुपये खर्च किए थे और लगभग 4.5 लाख के मोतियों का उत्पादन हुआ। इसी तरह उन्हें 3 लाख रुपए का फायदा हुआ। इसके बाद कारोबार लगातार आगे बढ़ रहा है और अब इस किसान ने लोगों को ट्रेनिंग देने का लाइसेंस भी प्राप्त कर लिया है और वो और भी किसानों को मोती की खेती सिखाना चाहते हैं।

इस किसान का कहना है कि मोती तीन प्रकार के होते हैं- कृत्रिम, प्राकृतिक और संवर्धित। मैं पिछले 21 वर्षों से संवर्धित मोतियों की खेती कर रहा हूँ। इसकी खेती करना आसान है, क्योंकि भारत में ताजे पानी के शम्बुक आसानी से उपलब्ध होते हैं।“ वह नदियों से लाए गए सीपों को काफी सावधानी से खोलते हैं और इन्हें एक जीवाणु युक्त मेष कंटेनर में 15-25 डिग्री सेल्सियस गर्म पानी में पूरी तरह डुबो देते हैं।

डेढ़ वर्षों में नाभिक, मोती के सीप से कैल्शियम कार्बोनेट जमा करके मोती का एक थैली बनाता है। इस पर कोटिंग की 540 परतें होतीं हैं, तब जाकर एक उत्तम मोती का निर्माण होता है। इनके बनाए हुए टैंक की लंबाई लगभग 30 मीटर, चौड़ाई 15 मीटर और गहराई 6 मीटर है। इसके साथ ही माथचन अपनी बाकि ज़मीन पर वनीला, नारियल और आम की कई किस्मों की भी खेती करते हैं।

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