राजस्थान में इस खेती से किसानों को हो रहा लाखों का मुनाफा

अनार में जो गुण है वो किसी और फल में नहीं है इसलिए कहावत भी है एक अनार सौ बीमार । अनार के इन्हीं गुणों का महत्व समझते हुए अब अलवर के किसान फसलों के बजाय अनार की खेती में रूचि लेने लगे हैं।

कम लागत मेें लगने वाले अनार से प्रतिवर्ष लाखों रुपए की कमाई हो रही है। पिछले तीन सालों में उद्यान विभाग करीब 60 हजार पौधे वितरित कर चुका है। यदि यही स्थिति रही तो वो दिन दूर नहीं जब अलवर का नाम अनार के खेती के लिए पहचाना जाएगा।

घरेलू खेती से कम हो गए अनार के दाम

आज से तीन साल पहले बाजार में अनार की कीमत 140 – 150 रुपए थी। महंगा होने के कारण आम आदमी को अनार नसीब नहीं हो पाता था। लेकिन जब अलवर जिले में अनार की खेती बढऩे के कारण अब घरेलू अनार बाजार में आया तो दाम भी 70 – 80 रुपए तक आ गए हैं।

तीन साल पहले तक मात्र 10 प्रतिशत ही किसान अनार की खेती करते थे, लेकिन अब करीब 50 प्रतिशत किसानों ने अनार के बाग लगा लिए हैं। एक बार पौधा लगने के बाद दूसरे साल ही फल दे देता है। एक पौधा करीब 25 साल तक फल देता है।प्रतिदिन अनार का जूस पीने से खून तो बढ़ता ही है। इसे प्रतिदिन खाने से शारीरिक सौंदर्य भी बढ़ता है।

सरकार देती है सब्सिडी

अनार का बाग लगाने के लिए उद्यान विभाग शर्तो के अनुसार सब्सिडी देता है। एक किसान को 24 हजार रुपए की सब्सिडी दी जाती है। जो कि तीन किश्तों में दी जाती है। पहली किश्त में 60 प्रतिशत, द्वितीय में 20 प्रतिशत व तृतीय में भी 20 प्रतिशत सब्सिडी दी जाती है।

राजस्थान में अभी तक जयपुर, सीकर, पाली, श्रीगंगानगर, हनुमानगढ़, झालावाड, जालोर आदि जगहों के नाम ही अनार की खेती के लिए जाने जाते थे। अब इसमें अलवर का नाम भी शामिल हो गया है। अलवर में टिश्यू कल्चर वाले अनार के पौधे लगाए जा रहे हैं। वर्तमान में अलवर जिले में किशनगढ़बास, राजगढ़, मुंडावर, बहरोड, तिजारा व उमरैण में अनार की खेती बहुतायत में हो रही है।

मांग बढऩे से बढ़ा रूझान

घरेलू व विदेशी बाजार में अनार की मांग बढऩे के कारण किसानों का रूझान अनार की खेती की तरफ बढ़ा है। किसानों को सरकार सब्सिडी भी दे रही है। उत्पादकता बढ़ाने के लिए समय समय पर प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। तीन सालों में 60 हजार अनार के पौधे वितरित किए जा चुके हैं।

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