जाने कैसे इस किसान ने उगाई किसान ने उगाई आलू-गेहूं की अंतर फसल

कम बीज डालकर अधिक गेहूं उत्पादन लेने की तकनीक सुनी थी, लेकिन जब खेत में आजमाई तो कामयाब हो गए। यह उत्पादन लिया है करनाल जिला के गांव ब्रास निवासी किसान सुरजीत सिंह ने। उन्होंने गेहूं और आलू की फसल ली है। सबसे खास बात यह है कि किसी तरह की बीमारी भी नहीं लगी। यही नहीं वे पहले बासमती की एक किस्म भी खुद ईजाद कर चुके हैं और भारत के राष्ट्रपति द्वारा किसान को सम्मानित किया जा चुका है।

ये हुआ उत्पादन: किसान के अनुसार आलू और गेहूं की फसल उगाने में कुल खर्च प्रति एकड़ 8 हजार रुपए आया। आलू की किस्म हिमसोना उगाई। गेहूंऔर आलू दोनों मिलाकर 51400 रुपए का फसलों का उत्पादन हुआ।

सुरजीत सिंह के अनुसार जो किसान गेहूं की अगेती किस्म उगाते हैं वे आलू गेहूं साथ-साथ बिजाई कर सकते हैं। पहले गेहूं की कटाई होगी, फिर किसान आलू की फसल ले सकता है। कपास के नीचे आलू गेहूं की बिजाई भी ली जा सकती है। क्योंकि प्रदेश में करीब 6 लाख हेक्टेयर में कपास होती है। वर्ष 2008 में कपास की बासमती किस्म “सुरजीत बासमती” भी ईजाद कर चुके हैं।

यह कमजोर बंजर खारे पानी में आसानी से हो सकती है। किसान को इसके लिए सम्मान भी मिला। वे आज भी गेहूं-धान दलहनी फसलों का बीज खेत में तैयार करते हैं। दूर दराज से किसान उनके यहां आधुनिक खेती के तरीके सीखने के लिए आते हैं। सुरजीत बीए पास हैं। उनके पास एक बैंक से कॉल भी आया कि आप नौकरी ज्वाइन कर सकते हैं, लेकिन उन्होंने खेती को प्राथमिकता दी।

बकौल सुरजीत सिंह उन्होंने आलू बिजाई की मशीन से खेत में गेहूं की बिजाई की। प्रति एकड़ 100 किलोग्राम यूरिया 100 किलोग्राम डीएपी लिया। डीएपी के साथ 15 किलोग्राम गेहूं का बीज भी मिला दिया। एक खाने से आलू का बीज मशीन से खेत तक पहुंचता रहा, जबकि दूसरे से गेहंू का बीज और डीएपी खेत तक पहुंचा। मेढ के ऊपर आलू और दोनों ओर गेहूं की फसल उगी।

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