एप्पल बेर बेंच लखपति बन गया ये शख्स, इस ट्रिक ने यूं बदली किस्मत

पंजाब के मालवा में धान, गेहूं और कपास को छोड़कर किसान अब दूसरी फसलों और बागबानी की तरफ आकर्षित हो रहे हैं। ऐसे ही एक किसान हैं फाजिल्का के चक्क बनवाला के महिंदर प्रताप धींगड़ा। उन्होंने पिछले साल अपनी साढ़े 6 एकड़ जमीन में थाई एप्पल बेर का बाग लगाया है। पहले साल उन्हें इससे 50 हजार रुपए प्रति एकड़ कमाई हुई जिसके इस साल बढ़कर प्रति एकड़ एक लाख रुपए से ज्यादा पहुंच जाने का अनुमान है।.

पश्चिम बंगाल से लाई थाई एप्पल बेर की पनीरी…

पूरी तरह जैविक खेती करने वाले महिंदर प्रताप धींगड़ा थाई एप्पल बेर की पनीरी पश्चिम बंगाल से लेकर आए थे। वह बताते हैं, बाग लगाने से पहले और बाद में मेरे मन में कई तरह के सवाल थे। पहली फसल देखकर थोड़ी तसल्ली हुई। इस बार फल और अच्छे नजर रहे हैं। भाव भी 30 से 35 रुपए प्रतिकिलो मिल रहा है।

इसकी अधिकांश खरीददार निजी कंपनियां है जो इसे विदेश भेजती हैं। अब हालांकि आकर्षक रूप और स्वाद के कारण स्थानीय बाजारों में भी इसकी मांग बढ़ रही हैं। उनके बाग का फल दिल्ली के अलावा लुधियाना, मोगा, जालंधर भी जाता है।

थाई एप्पल लॉन्ग टाइम इन्वेस्टमेंट…

महिंदर प्रताप धींगड़ा के अनुसार, उनके आसपास के कई गांवों के किसान थाई एप्पल बेर को देखने के लिए उनके बाग में रहे हैं। हाल ही में फाजिल्का जिले के ही झुमियांवाली गांव में भी एक किसान ने 12 एकड़ में इसका बाग लगाया है।

जिस तरह किसान रुचि दिखा रहे हैं, उससे लगता है कि अगले कुछ बरसों के दौरान इसका रकबा और बढ़ेगा। धींगड़ा कहते हैं, थाई एप्पल लॉन्ग टाइम इन्वेस्टमेंट है। एक बार इसका बाग लगाने के बाद 15 साल तक फसल ले सकते हैं।

थाईलैंड में इसे जुजुबी भी कहा जाता है…

थाई एप्पल का नाम आते ही जेहन में सेब का ख्याल आता है लेकिन यह बेर की एक किस्म है जो थाईलैंड में होती है। वहां इसे जुजुबी भी कहा जाता है। इसका स्वाद बेर जैसा ही होता है। थाईलैंड से ही यह किस्म भारत आई।

सेब जैसा दिखने वाला इसका फल 30 से 50 ग्राम तक का हो सकता है जबकि दूसरी किस्मों में बेर का वजन 5 से 10 ग्राम होता है। इसके एक पेड़ पर 40 से 50 किलो तक बेर लगते हैं। यह क्षारीय, अम्लीय और शुष्क, सभी तरह की मिट्टी में हो जाता है। फाजिल्का जिले की मिट्टी और जलवायु इसके लिए सबसे मुफीद है।

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