ये है बिजली की तरह चारा काटने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

हरा चारा काटने वाली मशीने तो आप ने बहुत देखी होंगी लेकिन काटने के बाद चारे का कुतरा(छोटा छोटा काटना ) भी करना पड़ता है । जिस से पशु अच्छी तरह से चारे चारे को खा सकते है । इस लिए आप को पहले चारा काटना पड़ता है फिर कुतरना पड़ता है ।

ये है आधुनिक और छोटी मशीन चारा काटने वाली मशीन ।इसकी खास बात यह है ये मशीन चारा । यह मशीन बिजली की तरह चारा कटती है ।इस लिए यह मशीन डेरी फार्मिंग ,बकरी पालन ,गौशाला आदि जगह पर उपयोग हो सकती है ।

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इस मशीन की कीमत 26000 है। यह मशीन मोटर और इंजन दोनों से चलती है। इस मशीन मे 2 Hp की मोटर लगी है इस मशीन का इंजन 5 Hp का है। यह मशीन एक घंटे में 800 KG हरा चारा और 500 KG सूखा चारा काटती है।

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इन आसान तरीकों से मिलेगा मोती की तरह साफ दूध

किसान भाइयों भारत दुनिया का कुल 18.43 फीसदी दुग्ध उत्पादन करता है. ये तो हम सभी लोग जानते है कि दूध में प्रोटीन, वसा व लैक्टोज पाया जाता है जो हमारी सेहत के लिए बहुत लाभदायक होता है. सबसे बड़ी समस्या आती है दूध को खराब होने से बचाना.

ज्यादा दूध उत्पादन के लिए अच्छी नस्ल के पशुओं को पाला जाता है, पर स्वच्छ दूध उत्पादन के बिना ज्यादा दूध देने वाले पशुओं को रखना भी बेकार है.

स्वच्छ दूध हासिल करने के लिए अच्छी नस्ल के पशुओं को रखने के साथ साथ उन को बीमारियों से बचाने और टीकाकरण कराने की जरूरत होती है, जिस से सभी पोषक तत्त्वों वाला दूध मिल सके.

अक्सर देखा जाता है कि कच्चा दूध जल्दी खराब होता है. खराब दूध अनेक तरह की बीमारियां पैदा कर सकता है, इसलिए दूध के उत्पादन, भंडारण व परिवहन में खास सावधानी बरतने की जरूरत होती है.

कच्चे दूध में हवा, दूध दुहने वाले गंदे उपकरणों, खराब चारा, पानी, मिट्टी व घास से पैदा होने वाले कीटाणुओं से खराबी आ सकती है. इस वजह से कम अच्छी क्वालिटी के दूध बाहरी देशों को नहीं बेच पाते हैं जबकि पश्चिमी देशों में इस की मांग बढ़ रही है.

वैसे, दूध में जीवाणुओं की तादाद 50,000 प्रति इक्रोलिटर या उस से कम होने पर दूध को अच्छी क्वालिटी का माना जाता है. दूध इन वजहों से खराब हो सकता है:

  • थनों में इंफैक्शन का होना.
  • पशुओं का बीमार होना.
  • पशुओं में दूध के उत्पादन से संबंधित कोई कमी होना.
  • हार्मोंस की समस्या.
  • पशुओं की साफसफाई न होना.
  • दूध दुहने का गलत तरीका.
  • दूध दुहने का बरतन और उसे धोने का गलत तरीका होना.
  • दूध जमा करने वाले बरतन का गंदा होना.
  • चारे व पानी का खराब होना.
  • थनों का साफ न होना.

स्वच्छ दूध उत्पादन के लिए ये सावधानियां बरतना जरूरी हैं:

  •  पशुओं का बाड़ा या पशुशाला और पशुओं के दुहने की जगह साफ हो. वहां मक्खियां, कीड़े, धूल न हो.
  • बीड़ी सिगरेट पीना सख्त मना हो. शेड पक्के फर्श वाले हों. टूटफूट नहीं होनी चाहिए. गोबर व मूत्र निकासी के लिए सही इंतजाम होना चाहिए. पशुओं को दुहने से पहले शेड को साफ और सूखा रखना चाहिए. शेड में साइलेज और गीली फसल नहीं रखनी चाहिए. इस से दूध में बदबू आ सकती है.
  • पशु को दुहने से पहले उस के थन और आसपास की गंदगी को अच्छी तरह साफ कर लेना चाहिए.
  • शेड में शांत माहौल होना चाहिए. सुबह और शाम गायभैंस के दुहने का तय समय होना चाहिए.
  • दूध दुहने वाला सेहतमंद व साफ सुथरा होना चाहिए. दुहने वाले को अपने हाथ में दस्ताने पहनने की सलाह दी जानी चाहिए. दस्ताने न होने पर हाथों को अच्छी तरह जीवाणुनाशक घोल से साफ करना चाहिए. उस के नाखून व बाल बड़े नहीं होने चाहिए.
  • दूध रखने वाले बरतन एल्युमिनियम, जस्ते या लोहे के बने होने चाहिए. दुधारू पशुओं के थनों को दूध दुहने से पहले व बाद में पोटैशियम परमैगनेट या सोडियम हाइपोक्लोराइड की एक चुटकी को कुनकुने पानी में डाल कर धोया जाना चाहिए और अच्छी तरह सुखाया जाना चाहिए.
  • दूध दूहने से पहले और बाद में दूध की केन को साफ कर लेना चाहिए. इन बरतनों को साफ करने के लिए मिट्टी या राख का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए.

  • दूध दुहने से पहले थन से दूध की 2-4 बूंदों को बाहर गिरा देना चाहिए क्योंकि इस में बैक्टीरिया की तादाद ज्यादा होती है, जिस से पूरे दूध में इंफैक्शन हो सकता है.
  • दूध दुहते समय हाथ की विधि का इस्तेमाल करना चाहिए. अंगूठा मोड़ कर दूध दुहने की कोशिश नहीं करनी चाहिए. इस से थन को नुकसान हो सकता है और उन में सूजन आ सकती है.
  • एक पशु का दूध 5-8 मिनट में दुह लेना चाहिए, क्योंकि दूध का स्राव औक्सीटोसिन नामक हार्मोन के असर पर निर्भर करता है. अगर दूध थन में छोड़ दिया जाता है तो यह इंफैक्शन की वजह बन सकता है.
  • दूध दुहने के 2 घंटे के भीतर दूध को घर के रेफ्रिजरेटर, वाटर कूलर या बल्क मिल्क कूलर का इस्तेमाल कर के 5 डिगरी सैल्सियस या इस से नीचे के तापमान में रखना चाहिए.
  • दूध के परिवहन के समय कोल्ड चेन में गिरावट को रोकने के लिए त तापमान बनाए रखा जाना चाहिए.
  • स्वास्थ्य केंद्रों पर पशुओं की नियमित जांच करा कर उन्हें बीमारी से मुक्त रखना चाहिए, वरना पशु के इस दूध से इनसान भी इंफैक्शन का शिकार हो सकता है.
  • पानी को साफ करने के लिए हाइपोक्लोराइड 50 पीपीएम की दर से इस्तेमाल किया जाना चाहिए. फर्श और दीवारों की सतह पर जमे दूध व गंदगी को साफ करते रहना चाहिए.
  • दूध दुहते समय पशुओं को न तो डराएं और न ही उसे गुस्सा दिलाएं.
  • दूध दुहते समय ग्वालों को दूध या पानी न लगाने दें. सूखे हाथों से दूध दुहना चाहिए.
  • एक ही आदमी दूध निकाले. उसे बदलने की कोशिश नहीं करनी चाहिए.

  • दूध की मात्रा बढ़ाने या ज्यादा मुनाफा कमाने के लिए इस में गैरकानूनी रूप से बैन की गई चीजों को मिलाना व इस की क्वालिटी के साथ छेड़छाड़ करना ही मिलावट कहलाता है. यह मिलावटी दूध सब के लिए नुकसानदायक होता है. पानी, नमक, चीनी, गेहूं, स्टार्च, वाशिंग सोड़ा, यूरिया, हाइड्रोजन पेराक्साइड वगैरह का इस्तेमाल दूध की मात्रा बढ़ाने व उसे खराब होने से बचाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जो गलत है

.दूध की मिलावट का कुछ सामान्य तरीकों से पता किया जा सकता है. जैसे दूध का खोया बना कर, दूध में हाथ डाल कर, जमीन पर गिरा कर, छान कर व चख कर. इस के अलावा वैज्ञानिक तरीके से भी दूध की मिलावट की जांच की जा सकती है.

अमरुद और निम्बू की खेती से बदली किस्मत

तराना के एक किसान ने परम्परागत फसलों से आगे बढ़ बागवानी फसलों को अपनाकर खेती में एक सफल उदहारण प्रस्तुत किया है. उन्होंने अमरुद और निम्बू की फसल में पसीना बहाया और उनकी मेहनत रंग लायी और वे बागवानी फसलों से सालाना करीब 5 लाख रूपये कमा रहे है. उनकी इस मेहनत को सार्वजानिक रूप से भी सम्मानित किया जाएगा.

खंडाखेड़ी निवासी हरिशंकर देवड़ा ने सरकार की फल क्षेत्र विस्तार योजना के अंतर्गत उद्यानिकी विभाग से अमरुद और निम्बू के पौधे प्राप्त कर बगीचा लगाया था. उनकी कड़ी मेहनत से मात्र 10 वर्षों में 6 बीघा जमीन से कुल 250 कुंतल अमरुद और 150 कुंतल नीम्बू की बम्पर उपज से उन्हें सालाना 5 लाख रूपये प्राप्त हो रहा है. हरिशंकर देवड़ा को आत्मा योजना के अंतर्गत 26 जनवरी को श्रेष्ठ उद्यानिकी कृषक का पुरूस्कार राशि 10 हजार रूपये कलेक्टर द्वारा दी जाएगी.

हरिशंकर ने बताया पहले परम्परागत खेती में उन्हें सीमित मुनाफा प्राप्त होता था. उस आय से परिवार का भरण पोषण और बच्चों को शिक्षा दिलाने में काफी कठिनाई होती थी. उद्यनिकि विभाग की सलाह से उन्होंने फलोद्यान लगाया और तब उन्हें बिलकुल भी उम्मीद नहीं थी कि उद्द्यानिकी फसल से वो अपनी आय को इतना बढ़ा सकतें हैं.

देवड़ा के पास कुल 11 बीघा जमीन है जिनमें वो 4 बीघा में अमरुद और 2 बीघा में निम्बू की फसल व बाकी जमीन पर पारम्परिक फसलों को उगाते हैं. लेकिन उद्यानिकी फसल को उगाने के बाद प्राप्त फायदे को देखकर वो उद्यानिकी फसलों का रकबा बढ़ने की सोच रहे हैं.

हरिशंकर देवड़ा की बहु संगीता महिलाओं के लिए मिसाल बनी हुई है. संगीता ने कठोर परिश्रम से घर में पशुपालन के माध्यम से दूध का व्यवसाय शुरू किया है. उनके यहाँ 7 भैंसे और 2 गाय है जिनसे उन्हें सुबह और शाम 25-25 लीटर दूध प्राप्त होता है. इसके अलावा गोबर से बनी हुई प्राक्रतिक खाद का उपयोग खेतों में किया जाता है. संगीता ने दूध का व्यवसाय शुरू किया जिसके कारण वो भी आत्मनिर्भर हो गई है.

पुलिस जवानों ने जान जोखिम में डालकर गेहूं में लगी आग बुझाई

फतेहाबाद में पुलिस जवानों ने मानवता की मिसाल कायम की। जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गेहूं में लगी आग बुझाई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस से यह मैसज जा रहा है के पुलिस अपनी जान पर खेल क्र लोगों की मदद करती है ।

दरअसल भूना कुलां रो़ड पर गेहूं के खेतों में आग लग गई। जिससे दर्जनों एकड़ गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई। आग पर काबू पाने के लिए फायरब्रिगेड बुलाने का वक़्त नहीं था अगर वो उसी वक़्त आग नहीं बुझाते तो फसलों का बहुत नुक्सान हो जाता ।

इस लिए फायरब्रिगेड ने नहीं बल्कि खुद भूना शहर पुलिस के जवानों ने काबू पाया। जवानों ने हाथ में वृक्ष की टहनियां लेकर खुद खेतों में उतरे अौर आग पर तुरंत काबू पाया। एेसी मानवता देख किसानों के भी होंसले बुलंद हो गए।

आग बुझाने वाले पुलिसकर्मियों के लिए बहुत सारे इनाम ही मिल रहे है ।डीजीपी बीएस संधू के बाद ओपी धनखड़ ने 11-11 हजार का इनाम देने की घोषणा की है । इस से पहले डीजीपी ने 10-10 हजार के इनाम की घोषणा की थी ।

खाद, बीज और लोन के लिए इस नंबर पर कॉल करें…

अक्सर यह देखा गया है कि किसी भी क्षेत्र की अधूरी जानकारी रखने पर हम उस क्षेत्र में तरक्की नहीं कर पातें है. इसलिए पूरी जानकारी का होना बहुत ही अनिवार्य है. किसान भाइयों के लिए राज्य सरकार कई सारी योजनाएं निकालती है लेकिन उस योजना की जानकारी ना होने के कारन किसान भाई उसका लाभ नही उठा पाते.

किसानों की खाद-बीज और पानी से लेकर लोन सहित अन्य समस्याओं की सुनवाई टोल फ्री नंबर 18002331850 पर होगी। किसान मितान केन्द्र के लिए सरकार ने यह टोल फ्री नंबर जारी किया है। इसके साथ ही किसानों की समस्या सुनने के लिए कृषि विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।

विभाग ने बाकायदा ड्यूटी पर रहने वाले अफसरों का मोबाइल नंबर जारी किया है। किसान उनके नंबर पर सीधे कॉल कर सकते हैं। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि किसान खेती-किसानी के साथ ही राजस्व, सहकारिता, ऊर्जा एवं जल संसाधन विभाग से संबंधित जानकारी भी मितान केन्द्र के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।

मितान केन्द्र में आने वाले किसानों की समस्या धौर्य से सुनने की नसीहत अफसरों को दी गई है। कहा गया है कि उपलब्ध योजनाओं के आधार पर उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए आश्वस्त करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए। आने वाले किसानों और उनकी समस्याओं का रिकॉर्ड रखने और उनकी समस्याओं की जानकारी संबंधित विभाग के जिला स्तर के प्रमुख अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

किसान मितान केन्द्र के अफसरों के नंबर

नोडल अफसर

  • आरके परगनिया सहायक संचालक- 9827104237
  • बीआर धृतलहरे विकास अधिकारी- 9009539911
  • बीके टिकरिहा कृषि अधिकारी- 9300834514

बुधवार व गुरुवार

  • पूनम चौहान कृषि विस्तार अधिकारी- 9755042526
  • आरके साहू कृषि विस्तार अधिकारी- 9754867078

शुक्रवार

  • बीके श्रीवास्तव कृषि विस्तार अधिकारी- 8305225653
  • कमला गंधर्व कृषि विस्तार अधिकारी- 7804027751

शनिवार

  • हिमाचल मोटघरे व श्री नवनीत मिश्रा- 9828654060

सभी दिन

  • विजय ठाकुर कृषि विस्तार अधिकारी- 9406405551

आखिरकार मानसून ने दी किसानो को एक और अच्छी खबर

गर्मी के सख्त तेवर के बीच में भारतीयों के लिए एक राहत भरी खबर आयी है, मौसम विभाग के मुताबिक इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय रहेगा जिसके चलते औसत के मुकाबले 97 फ़ीसदी बारिश होने के आसार हैं, जो किसानों के लिए खुश होने वाली खबर है।

आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत में औसत से कम बारिश हुई थी जिसका असर देश के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई थी लेकिन इस बार मौसम विभाग का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होगा।

देश में 97 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद

सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश ने कहा कि आईएमडी को इस साल देश में 97 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है, हालांकि बारिश में पांच प्रतिशत तक की कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि मई के आखिरी या फिर जून के पहले हफ्ते तक केरल में मॉनसून दस्तक दे देगा। इससे पहले मौसम की सूचना देने वाली एक निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी कहा था कि इस बार पर्याप्त बारिश होगी और देश मे सूखे के आसार ना के बराबर है।

देश के हर इलाके में अच्छी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग का कहना है कि इस साल देश के हर इलाके में अच्छी बारिश का अनुमान है। मानसून की चाल पर आईएमडी 15 मई को अनुमान बताएगा आएगा, वहीं मानसून पर अगला अपडेट जून में आएगा।

एक एकड मे होता है 10 लाख का मुनाफा एकड

स्टीविया (कुदरती शूगर फ्री फसल) शूगर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस स्वीटेस्ट गिफ्ट ऑफ नेचर के नाम से भी जाना जाता है। स्टीविया के पत्ते चीनी से करीबन 40 गुना ज्यादा मीठे होते हैं। पत्तों को पाउडर बना कर भी इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनियों द्वारा पाउडर बनाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाया जाता है। पाउडर में चीनी से करीब 400 गुना ज्यादा मिठास होती है। चाय के एक कप में 6 पत्ते डाल कर पी जा सकती है। जिससे सेहत को बिलकुल भी नुकसान नहीं होता और मिठास उतनी ही होती है। स्टीविया के पत्ते केमिकल, कॉलेस्ट्रोल व कैलोरी मुक्त होते हैं।

खालसा कॉलेज पटियाला के एमएससी एग्रीकलचर सेकेंड ईयर के लवप्रीत सिंह ने गांव धबलान स्थित कॉलेज कैंपस में स्टीविया का ट्रायल लगाया। उन्होंने बताया कि लुधियाना की एग्री नेचुरल कंपनी 3 रुपए प्रति पनीरी के हिसाब से देते हैं। एक पौधा 5 साल तक चल सकता है।

साल दर साल बढ़ता है उत्पादन

हर तीन महीने बाद इसके पत्ते तोड़े जा सकते हैं यानि कि साल में 4 बार 1 एकड़ में 35 हजार के करीब पौधे लग सकते हैं। स्टीविया की फल्ड (Flood), स्प्रिंकल (Sprinkle) और ड्रिप (Drip) तरीके से सिंचाई होती है।

पहले साल 10, दूसरे 15, 3 साल बाद 22, 4 साल बाद 15 और 5वें साल 10 क्विंटल सूखे पत्ते होते हैं। यह 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकते हैं। जो लोग एग्री नेचुरल कंपनी से स्टीविया की पनीरी खरीदते हैं, कंपनी उनसे कॉन्ट्रेक्ट करके मार्किट रेट से थोड़ा कम में पत्तों को खरीद लेती है।

स्टीविया में नहीं लगती कोई बीमारी

3 रुपए के हिसाब से स्टीविया के 35 हजार पौधे 1 लाख 5 हजार रुपए के हैं। 150 रुपए किलो के हिसाब से बेचा जाए तो पहले साल में 10 क्विंटल पत्तों से डेढ़ लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। अगले 4 साल में कुल 9 लाख 30 रुपए का मुनाफा हो सकता है। स्टीविया को कोई बीमारी नहीं लगती।

बहुत ही कम ख़र्चे में फसल काटती है यह मिनी कंबाइन,वीडियो देखें

चावल जा दूसरी फसलें काटने का काम हाथ से ही होता है क्योंकि भारत में किसानो के पास जमीन बहुत ही कम है और वो बड़ी कंबाइन से फसल कटवाने का खर्च नहीं उठा सकते इस लिए अब एक ऐसी कंबाइन आ गई है जो बहुत कम खर्च में फसल काटती है ।

साथ ही अब बारिश से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है मिनी कंबाइन Multi Crop हार्वेस्टर यह कंबाइन छोटे किसानो के लिए बहुत फयदेमंद है इस मशीन से कटाई करने से बहुत कम खर्च आता है और फसल के नुकसान भी नहीं होता।

बड़ी कंबाइन से फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं । छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है ।

यह मशीन 1 घंटे मे 1 बीघा फसल की कटाई करती है और इसमें अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान,मक्का अदि भी काट सकते है ।

अब पावर वीडर करेगा खरपतवार की रोकथाम वो भी बहुत कम खर्चे में

एक किसान के लिए खरपतवार की रोकथाम सबसे बड़ी मुसीबत होते है ।अगर वक़्त पर खरपतवार पर नियंत्रण ना क्या जाए तो यह आपकी पूरी फसल ख़राब कर देते है आपकी फसल के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है ।

लेकिन खरपतवार की रोकथाम इतना आसान काम नहीं है अगर हाथ से खरपतवार की रोकथाम की जाए तो बहुत समय और मेहनत लगती है लेकिन अगर नदीननाशक दवाइओं का प्रयोग किया जाए तो बहुत महंगा पड़ जाता है ।

ऐसे में किसानो के लिए एक बहुत ही उपयोगी मशीन का अविष्कार क्या है जिस से आप मिन्टों में खेत से खरपतवार का सफाया कर सकते है । इतना ही नहीं इस मशीन के साथ और भी अटैचमेंट्स आती है।

जिस में एक पावर वीडर (खरपतवार निकलने के लिए ) आता है जिसकी कीमत 4250 रु होती है । एक पैडी कटर आता है जिस से आप धान की कटाई कर सकते है ।जिसकी कीमत 2000 रु है साथ में एक ब्रश कटर आता है जिस से आप घास काट सकते है । जिसकी कीमत 2000 रु है ।

सो इस तरह से आप एक मशीन से अलग अलग अटैचमेंट्स लगा कर अलग अलग तीन काम कर सकते है । इस मशीन को आप किराये पर भी दे सकते है । और अच्छा लाभ कमा सकते है ।

मशीन की जानकारी

इसमें 4 स्ट्रोक 52CC इंजन लगा होता है जो पेट्रोल पर चलता है । एक लीटर पेट्रोल से आप इस मशीन को दो घंटे तक चला सकते है । जिस से आप बहुत सा काम ख़तम कर सकते है ।इस मशीन की कीमत सिर्फ 16000 रु है और इसकी अटैचमेंट्स की कीमत अलग है ।अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो 9830182243 नंबर पर संपर्क कर सकते है ।इसके इलवा आप इस लिंक https://dir.indiamart.com/impcat/power-weeder.html पर क्लिक करके और भी डीलर से संपर्क कर सकते है

पावर वीडर कैसे काम करता है वीडियो देखें

क्या कहता है मौसम का पूर्वानुमान

पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। अनुमान के मुताबिक इस हफ्ते जहाँ एक ओर पश्चिम बंगाल व हिमालयी क्षेत्र जैसे सिक्किम व हिमाचल में बारिश व गरज-चमक के आसार हैं तो वहीं पश्चिमी राजस्थान, महाराष्ट्र और उड़ीसा राज्यों में भी बारिश की संभावना है।

इसके अतिरिक्त राजधानी दिल्ली समेत हरियाणा व चंडीगढ़ में भी बारिश, धूल भरी आंधी की संभावना व्यक्त की गई है।

इस मौसम में वैज्ञानिक सलाह के तौर पर अनाज के भंडारण का विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया गया है। भंडारगृहों में नमी आदि पर खास नजर रखनी होगी। इस समय भंडारण किए गए अनाज को रखने से पूर्व उसके पूरी तरह से सूखा होना जरूरी है। गेहूँ की जिस फसल में बाली में दूध आने की अवस्था है उसमें सिंचाईं करना आवश्यक है।

इसके साथ-साथ इन दिनों हरा चना की बुवाई करना जरूरी है। इसके लिए पूसा विशाल, पूसा रत्ना, पूसा 5931, पूसा बैसाखी, पीडीएम-11, SML-32, SML-668 हायब्रिड किस्मों की बुवाई की जा सकती है।

खीरे की बुवाई के लिए पूसा उदय व भिंडी की A-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका संकर किस्मों की बुवाई कर देनी चाहिए। भिंडी की फसल में माइट के प्रकोप पर निगरानी करने की आवश्यकता है। इथियान की 1.5 मिलि./लिटर पानी के साथ उपयोग करने की जरूरत है। रबी की फसल की कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करने की सलाह दी जाती है। साथ ही उन फसलों की बुवाई की जा सकती है जो हरी खाद बनाती है।