देश में इन 14 कीटनाशकों पर तत्काल प्रतिबंध, इनसे फैलता है कैंसर

केंद्र सरकार ने स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए खतरनाक 18 कीटनाशकों पर रोक लगा दी है। सरकार की ओर से गठित समिति ने अपनी सिफारिश में इन कीटनाशकों से होने वाले संभावित नुकसान पर प्रकाश डाला था, जिसके बाद केंद्र ने इन पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया।

इन कीटनाशकों के इस्तेमाल पर कई देशों ने पहले से ही पाबंदी लगा रखी है। सरकार ने बेनोमिल, कार्बाराइल, फेनारिमोल, मिथॉक्सी एथाइल मरकरी क्लोराइड, थियोमेटॉन सहित कुल 14 कीटनाशकों पर तत्काल प्रभाव से प्रतिबंध लगाया है, जबकि एलाचलोर, डिचलोरवस, फोरेट और फोस्फामिडॉन देश में 2020 से प्रतिबंधित होंगे।

कीटनाशकों की समीक्षा के लिए गठित समिति ने 16 जुलाई को इस मुद्दे पर सरकार को रिपोर्ट सौंपी थी, जिसने सिफारिशों में कहा कि ये कीटनाशक लोगों के स्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए खतरनाक हैं। विभिन्न स्तरों पर इनका प्रयोग फसल को कैंसर कारक व विषैला बनाता है। इसी वजह से कई देशों ने इनके इस्तेमाल पर पूरी तरह से पाबंदी लगा रखा है। समिति ने कहा कि इन्हें प्रतिबंधित किया जाना ही उचित व्यवस्था होगी।

कंपनियां जारी करेंगी चेतावनी

केंद्र सरकार द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जिन कीटनाशकों को तत्काल प्रभाव से प्रतिबंधित किया गया है, उनका निर्माण करने वाली कंपनियों को देशभर में मौजूद इन कीटनाशकों का इस्तेमाल रोकने के लिए चेतावनी जारी करनी होगी। उन्हें बाजार से अपना माल वापस लेना होगा। कंपनियों को चेतावनी में स्पष्ट करना होगा कि स्वास्थ्य एवं पर्यावरण के लिए खतरनाक होने के मद्देनजर इन कीटनाशकों का प्रयोग नहीं किया जाए।

सर्वोच्च न्यायालय का रुख सख्त

सर्वोच्च न्यायालय ने भी केंद्र को इन कीटनाशकों पर जल्द फैसला लेने के लिए कहा था। न्यायालय ने सरकार को दो महीने का वक्त दिया था। इससे पहले महाराष्ट्र में नवंबर 2017 में कीटनाशकों के इस्तेमाल से 50 से भी ज्यादा किसानों की मौत हो गई थी।

जानलेवा 66 कीटनाशकों का हो रहा इस्तेमाल

हाल में सूचना का अधिकार (आरटीआई) के तहत पूछे गए एक सवाल के जवाब में सरकार ने स्पष्ट किया था कि देश में ऐसे 66 कीटनाशकों को इस्तेमाल में लाया जाता है, जो एक या उससे ज्यादा देशों में प्रतिबंधित हैं। इनमें 28 पर पहले ही रोक लगाई जा चुकी है।

राउंडअप का उपयोग करने वाले किसान को इस कारण मिलेगा 1,900 करोड़ रुपये का मुआवजा

अमरीका के सैन फ्रांसिस्को में एक माली ने एक बड़ी कंपनी के ख़िलाफ लगभग (1900 करोड़) 29 करोड़ डॉलर का मुकदमा जीत लिया है.डिवेन जॉनसन की ज़िंदगी में जीत की इस खुशी से पहले कैंसर आया जो उन्हें माली की नौकरी के दौरान हुआ.

कैंसर का पहला लक्षण दिखा लाल चकते के रूप में जो उनके लगभग 80 फ़ीसद शरीर में फैल गए थे. जॉनसन तब 42 साल के थे. साल 2012 में बेनिसिया के स्कूलों में माली का काम करने के दौरान उन्होंने पौधों में साल भर खरपतवार नाशक दवा लगाई. ये दवा थी- राउंडअप एंड रेंजर प्रो हर्बिसाइड जिसे मोन्सेंटो कंपनी बनाती है.

साल 2014 में पता चला कि उन्हें हॉजकिन लिम्फ़ोमा कैंसर है. कंपनी मोन्सेंटो के ख़िलाफ़ मुक़दमे के लिए उन्होंने साल 2015 में तैयारी शुरू की. जॉनसन का दावा इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिसर्च ऑन कैंसर के शोध पर आधारित था

जिसमें राउंडअप हर्बिसाइड को कैंसर का कारण बताया गया है. इस हर्बिसाइड में ग्लाइफोसेट होता है जो कैंसर पैदा कर सकता है. ये एजेंसी विश्व स्वास्थ्य संगठन से संबद्ध है.

खुशखबरी ! दुनिया के बाजार में अब कहीं भी फसल बेच सकेंगे भारत के किसान

भारत के किसानों की अब दुनिया के बाजार में सीधी पहुंच होगी। सरकार ने कृषि उत्पाद के निर्यात के लिए देश के 50 जिलों की पहचान की है। इन जिलों में 20 कृषि आइटम के क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। क्लस्टर में खेती के साथ उत्पादित वस्तुओं को निर्यात के लायक बनाने की सारी सुविधाएं होंगी। मतलब, क्लस्टर के निकलने के बाद ये कृषि उत्पाद सीधे निर्यात के लिए पोर्ट पर जाएंगे।

2020 तक कृषि निर्यात को 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य

वाणिज्य मंत्रालय ने कृषि निर्यात को 2020 तक 60 अरब डॉलर करने का लक्ष्य रखा है। अभी कृषि निर्यात 31 अरब डालर का है। विश्व भर में होने वाले कृषि निर्यात कारोबार में भारत की हिस्सेदारी सिर्फ 2.2 फीसदी है।

20 कृषि उत्पादों पर होगा फोकस

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक क्लस्टरों में 20 कृषि उत्पादों की खेती की जाएगी। खेती निर्यात बाजार को ध्यान में रखकर की जाएगी। चिन्हित उत्पादों में

अंगूर, अनानास, केला, सेब, लीची, संतरा, गुलाबी प्याज, प्याज, आलू, टमाटर, चाय, कॉफी, मिर्च, अदरक, पुदीना, हल्दी, जीरा,मेथी, रबर व समुद्री उत्पाद शामिल हैं। क्लस्टर विकसित करने के लिए राज्य सरकार की भी मदद ली जाएगी। क्लस्टर में शामिल किसानों को सरकार की तरफ से इंसेंटिव भी दिए जाएंगे। हालांकि इंसेंटिव का मैकेनिज्म राज्य सरकार से परामर्श के बाद तैयार किया जाएगा।

सभी इलाके में होंगे कृषि निर्यात क्लस्टर

वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक क्लस्टर देश के सभी इलाके नार्थ, वेस्ट, ईस्ट, वेस्ट व सेंट्रल में स्थित होंगे। वाणिज्य मंत्रालय के मुताबिक प्याज के लिए मध्य प्रदेश व महाराष्ट्र में क्लस्टर विकसित किए जाएंगे।

मध्य प्रदेश के इंदौर, सागर व दामोह तो महाराष्ट्र के नासिक में प्याज के लिए क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। आलू के निर्यात के लिए उत्तर प्रदेश के आगरा, फर्रुखाबाद, पंजाब के जालंधर, कपूरथला,होशियारपुर, नवांशहर, गुजरात के बनस्कंथा, सबरकंथा तो मध्य प्रदेश के इंदौर व ग्वालियर में कल्स्टर तैयार होंगे।

टमाटर के निर्यात के लिए मध्य प्रदेश के शहडोल, कर्नाटक के कोलार, आंध्र प्रदेश में करनूल तो उत्तरांचल में रूद्रपुर में क्लस्टर विकसित किए जाएंगे। मेथी के निर्यात के लिए राजस्थान के सीकर व बीकानेर को चिन्हित किया गया है। लीची के निर्यात के लिए बिहार के मुजफ्फरपुर तो जीरा निर्यात के लिए गुजरात के मेहसाना व बनसकंथा चिन्हित किए गए हैं।

निजी कंपनियां भी होंगी सहभागी

मंत्रालय के अधिकारी ने बताया कि कृषि निर्यात क्लस्टर विकसित करने में निजी कंपनियों को भी सहभागी बनाया जा सकता है। क्लस्टर में निर्यात सुविधा स्थापित करने में निजी कंपनियां अपना योगदान दे सकती है।

वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक कृषि निर्यात में 52 फीसदी योगदान मांस, चावल व समुद्री उत्पाद का है। वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2013 में भारत का कृषि निर्यात 36 अरब डॉलर का था जबकि वर्ष 2017 में कृषि निर्यात घटकर 31 अरब डॉलर का रह गया।

दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है ये, खाएंगे तो शरीर बन जाएगा फौलादी

आजकल के दौर में जंक फूड का इतना क्रेज बढ़ चुका है कि लोग अपने शरीर को जरूरी ताकत देनी वाली सब्जी, दाल का सेवन कम ही करते हैं. लेकिन, बहुत कम लोग जानते हैं कि कुछ सबज्यिां ऐसी होती हैं, जिन्हें कुछ दिन खाने पर ही इसका फायदा मिल जाता है.

ऐसी ही एक सब्जी है कंटोला. यह दुनिया की सबसे ताकतवर सब्जी है. इसे औषधि के रूप में भी इस्तेमाल किया जाता है. इस सब्जी में इतनी ताकत होती है कि महज कुछ दिन के सेवन से ही आपका शरीर तंदुरुस्त बन जाता है या यूं कहें कि फौलादी बन जाता है. कंटोला को ककोड़े और मीठा करेला नाम से भी जाना जाता है.

कंटोला आमतौर पर मॉनसून के मौसम में भारतीय बाजारों में देखा जाता है. इसमें कई स्वास्थ्य लाभ है जिसकी वजह से इसकी खेती दुनियाभर में शुरू हो गई है. इसकी मुख्य रूप से भारत के पर्वतीय क्षेत्रों में खेती की जाती है.

यह सब्जी स्वादिष्ट होने के साथ-साथ प्रोटीन से भरपूर होती है. इसे रोज खाने से आपका शरीर ताकतवर बनता है. इसके लिए कहा जाता है कि इसमें मीट से 50 गुना ज्यादा ताकत और प्रोटीन होता है. कंटोल में मौजूद फाइटोकेमिकल्स स्वास्थ्य को बढ़ावा देने में काफी मदद करता है. यह एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर सब्जी है. यह शरीर को साफ रखने में भी काफी सहायक है.

अगर आप भी अपनी रोजाना डाइट में इसे शामिल करते हैं तो दूसरे तत्वों और फाइबर की कमी को भी यह पूरी करती है. ककोड़े यानी मीठा करेला को सेहतमंद माना जाता है. आयुर्वेद में भी इसे सबसे ताकतवर सब्जी के रूप में माना गया है.

एंटी एलर्जिक : कंटोल में एंटी-एलर्जन और एनाल्जेसिक सर्दी खांसी से राहत प्रदान करने और इस रोकन में काफी सहायक है.

हाई ब्लड प्रेशर होगा दूर : कंटोला में मौजूद मोमोरडीसिन तत्व और फाइबर की अधिक मात्रा शरीर के लिए रामबाण हैं. मोमोरेडीसिन तत्व एंटीऑक्सीडेंट, एंटीडायबिटीज और एंटीस्टे्रस की तरह काम करता है और वजन और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखता है.

पाचन क्रिया होगी दुरुस्त : अगर आप इसकी सब्जी नहीं खाना चाहते तो अचार बनाकर भी सेवन कर सकते हैं. आयुर्वेद में कई रोगों के इलाज के लिए इसे औषधि के रूप में प्रयोग करते हैं. यह पाचन क्रिया को दुरुस्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है.

कैंसर से बचाए : कंटोला में में मौजूद ल्युटेन जैसे केरोटोनोइडस विभिन्न नेत्र रोग, हृदय रोग और यहां तक कि कैंसर की रोकथाम में सहायक है.

वजन घटाने में सक्षम: कंटोला में प्रोटीन और आयरन भरपूर होता है जबकि कैलोरी कम मात्रा में होती है. यदि 100 ग्राम कंटोला की सब्जी का सेवन करते हैं तो 17 कैलोरी प्राप्त होती है. जिससे वजन घटाने वाले लोगों के लिए यह बेहतर विकल्प है.

छत पर ऐसे उगाएं बिना मिट्टी से सब्‍जी,1 लाख के निवेश पर होगी 2 लाख तक कमाई

खेतों के घटते आकार और ऑर्गेनिक फूड प्रोडक्ट की बढ़त मांग के चलते अर्बन फार्मिंग में नई और कारगर तकनीकों का चलन बढ़ता जा रहा है। मांग पूरी करने के लिए कारोबारी और शहरी किसान छतों पर, पार्किंग में या फिर कहीं भी उपलब्ध सीमित जगह का इस्तेमाल पैदावार के लिए कर रहे हैं।

इन तकनीकों में फिलहाल जो तकनीक सबसे ज्यादा सफल है उसमें मिट्टी का इस्तेमाल ही नहीं होता। मिट्टी न होने से इसे छतों पर छोटी जगह में आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। ये तकनीक इतनी सफल है कि सही जानकारी, सही सलाह से लगभग 1 लाख रुपए के खर्च से से आप घर बैठे सालाना 2 लाख रुपए तक की सब्जियां उगा सकते हैं।

मिट्टी के बिना अब छतों पर फार्मिंग

इस तकनीक को हाइड्रोपानिक्स कहा जाता है। इस तकनीक की खास बात यह है कि इसमें मिट्टी का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं होता है। इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

क्या है हाइड्रपानिक्स तकनीक

हाइड्रपॉनिक्स तकनीक में सब्जियां बिना मिट्टी की मदद से उगाई जातीं हैं। इससे पौधों के लिए जरूरी पोषक तत्वों को पानी के सहारे सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचाया जाता है।

पौधे एक मल्टी लेयर फ्रेम के सहारे टिके पाइप में उगते हैं और इनकी जड़े पाइप के अंदर पोषक तत्वों से भरे पानी में छोड़ दी जाती हैं। मिट्टी न होने की वजह से न छतों पर भार बढ़ता है। वहीं बिल्कुल अलग सिस्टम होने की वजह से छत में कोई बदलाव भी नहीं करने पड़ते

कैसे बन सकता है गार्डेन

हाइड्रपानिक्स एक पौधों को उगाने का बिल्कुल नया तरीका है और इसे किसान या कारोबारी अलग अलग तरह से इस्तेमाल में ला सकते हैं। वहीं इस क्षेत्र में काम कर रही कई कंपनियां भी आपको शौकिया गार्डन से लेकर कमर्शियल फार्म तक स्थापित करने में मदद कर सकती हैं।

इस बारे में हाइड्रपानिक्स कंपनी ‘हमारी कृषि’ से बात की। कंपनी उपज के लिए तैयार फ्रेम और टावर गार्डेन ऑनलाइन बेच रही है। कंपनी के 2 मीटर ऊंचे टावर में 40 पौधे लगाने की जगह है। कंपनी के मुताबिक करीब 400 पौधे वाले 10 टावर की लागत 1 लाख के करीब है। इस कीमत में टावर, सिस्टम और जरूरी पोषक तत्व शामिल हैं।

कंपनी के मुताबिक अगर सिस्टम को सही ढंग से इस्तेमाल किया जाए तो इसके बाद सिर्फ बीज और न्यूट्रिएंट का ही खर्च आता है। ये 10 टावर आपकी छत के 150 से 200 वर्ग फुट एरिया में आसानी से खड़े हो जाएंगे। छोटी जगह पर रखे फ्रेम को नेट शेड और बड़े स्तर पर खेती के लिए पॉली हाउस बनाकर ढकने से मौसम से सुरक्षा मिलती है।

क्या है निवेश और कमाई का गणित

  • कंपनी हमारी कृषि को स्थापित करने वाले अभिषेक शर्मा के मुताबिक ये तकनीक लोगों को रोजगार देने का अच्छा जरिए हो सकती है, क्योंकि परंपरागत कृषि के मुकाबले इसके मार्जिन बेहतर हैं।
  • शर्मा के मुताबिक एक पॉड से साल भर में 5 किलो लेटिस (सलाद पत्ता) की उपज मिल सकी है। ऐसे में 10 टावर यानि 400 पॉड से 2000 किलो सालाना तक उपज मिल सकती है।
  • फिलहाल लेटिस की कीमत भारत में 180 रुपए किलो है, शर्मा के मुताबिक अगर थोक में 100 रुपए किलो भी मिलते हैं तो अच्छी कंडीशन में साल में 2 लाख रुपए की उपज संभव है।
  • वहीं उनके मुताबिक आम स्थितियों में आप आसानी से एक साल में अपना निवेश निकाल सकते हैं। अगले साल रिटर्न ज्यादा होगा क्योकिं आपको सिर्फ रखरखाव, बीज और न्यूट्रिएंट का खर्च ही करना है।
  • यानी आप अपनी छत के सिर्फ 150 से 200 वर्ग फुट के इस्तेमाल से एक साल में ही अपना एक लाख का निवेश निकाल कर प्रॉफिट में आ सकते हैं।

क्यों ये तकनीक है फायदे का सौदा

  • इस तकनीक के जरिए नियंत्रित माहौल में खेती होती है, इसलिए अक्सर किसान हाइड्रपानिक्स की वजह से ऐसे सब्जियों का उत्पादन करते हैं जिसकी मार्केट कीमत ज्यादा होती है।
  • इस तकनीक में पानी, फर्टिलाइजर और कीटनाशक की खपत भी 50 से 80 फीसदी तक घट जाती है।
  • हमारी कृषि में छपे एक आर्टिकल के मुताबिक इस तकनीक से पैदावार 3 से 5 गुना तक बढ़ जाती है।
  • इस तकनीक में शुरुआती खर्च ज्यादा होता है। हालांकि बाद में लागत काफी कम होने से प्रॉफिट बढ़ जाता है।
  • नेट शेड या पॉलिहाउस की वजह से मौसम का असर इन फसलों पर काफी कम हो जाता है।

कैसे इस तकनीक से खड़ा कर सकते हैं कारोबार

  • इस तकनीक के जरिए अपनी छत पर खुद के लिए ताजी ऑर्गेनिक सब्जियां उगाई जा सकती हैं।
  • वहीं आप इसे अपने कारोबार में बदल सकते हैं। इस्राइल, दक्षिण अफ्रीका और साउदी अरब जैसे देश जहां जगह या पानी की कमी है, वहां ये तकनीक सफल कारोबार में बदल चुकी है।
  • इन देशों में किसान अपने घरों की छत के साथ साथ मॉल, ऑफिस की छतों पर गार्डन स्थापित कर रहे हैं। वहीं कई लोग आपस में मिल कर अपनी-अपनी छतों पर सब्जिया उगा रहे हैं।
  • वहीं आप इस तकनीक को सीख कर अपनी कंपनी स्थापित कर सकते हैं या फिर किसी स्थापित कंपनी के साथ जुड़ कर दूसरे लोगों को उनके ऑर्गेनिक फार्म या गार्डन स्थापित करने में मदद कर सकते हैं।

क्या हैं इस कारोबार में ध्यान देने वाली बातें

  • किसानों को पॉलिहाउस या नेट शेड पर अतिरिक्त खर्च करना पड़ सकता है। सिस्टम का खर्च वन टाइम है लेकिन शेड के रखरखाव का खर्च लागत बढ़ा सकता है। खेत जितना बड़ा होगा ये खर्च उतना ज्यादा होगा।
  • वहीं अभिषेक ने साफ कहा कि फसल पर तापमान, कीट जैसी कई बातों का असर पड़ता है। ऐसे में उपज के लिए खेती की बेसिक जानकारी और उस हिसाब से पौधों की देखभाल और बदलाव करने पड़ते रहते हैं।
  • रिटर्न इस बात से निर्भर होता है कि आप जो उगा रहे हैं उसकी क्वालिटी और मार्केट में उसकी कीमत क्या है। बेहतर कीमत के लिए मार्केटिंग स्किल्स भी चाहिए
  • इस काम में खेती से जुड़े अपने जोखिम बने रहते हैं, लेकिन परंपरागत खेती के मुकाबले इसके जोखिम काफी कम हैं और मार्जिन ऊंचा है।

1 दिन में 3900 गैलन पानी निकालता है यह “पहिया पंप”,वीडियो देखें

भारत में बहुत से किसान चल रहे नाले ,नदी बड़े रजबाहे के करीब रहते हैं, हालांकि, कई कारकों के कारण वह पानी का उपयोग करने में असमर्थ हैं। ऐसे किसानो के लिए पानी की ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम यह अद्भुत पानी पहिया पंप बहुत कामयाब साबित हो सकता है।

इसे पहली बार 1746 में बनाया गया था और अब इसे पुनः निर्मित किया गया है और हल्के और सस्ती आधुनिक सामग्री का उपयोग करके बहुत ही कामयाबी से त्यार किया गया है ।इसका डिजाइन इतना आसान है के इसको कोई भी त्यार कर सकता है ।

वाटर व्हील पंप कैसे काम करता है

इस पानी पहिया पंप का 6 फ़ीट व्यास पहिया होता है , जिसे 1-1/4 इंच के 160 फीट की पॉलीथीन पाइप से त्यार किया जाता है, जो प्रति दिन 40 फीट की दुरी तक 3900 गैलन पानी पहुंचने में सक्षम होती है। पंप को काम करने के लिए कोई ईंधन या बिजली की आवश्यकता नहीं होती है और इसलिए पर्यावरण अनुकूल है।

एक बार जब कुंडली के निचले एक चौथाई हिस्से को पानी में डुबोया जाता है तो पानी के बहाव से पूरे कुंडल घूमती है, तो हवा का एक क्रम बदलता है और पानी पाइप के साथ कुंडली के केंद्र बिंदु की ओर बढ़ना शुरू हो जाता है और इस पंप के केंदर में एक और पाइप लगी होती जिस से हम पानी को काफी दुरी तक लेकर जा सकते है ।

ये पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

पंजाब का ये किसान खीरे की फसल से 4 महीने में कमा रहा है 18 लाख रुपए

गांव बठोई खुर्द के युवा किसान धान की खेती न कर पॉली हाउस में देसी खीरे उगाकर अच्छ मुनाफा कमा रहे हैं। युवा किसान बलजिंदर सिंह का कहना है कि पंजाब में पानी के हालतों को देखते हुए, अब रिवायती खेती को कम कर देना चाहिए।

इसलिए उन्होंने पहली बार एक एकड़ एरिया में देसी खीरा लगाया है। वह इसकी खेती के लिए आर्गेनिक खाद खुद ही तैयार कर रहा है। इस खीरे की खास बात यह है कि इस पर किसी प्रकार के कीटनाशक का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

खीरे की बेल को 15 दिन के अंदर 100 ग्राम कैल्शियम डाला जाता है। फसल साल में दो बार दो महीने चलती है और 22 से 25 रुपए के बीच रेट मिलता है। धान की फसल लगाने से पानी का लेवल तो नीचे जाता ही है, साथ में मुनाफा भी कम होता है।

देसी खीरा साल में दो बार जून-जुलाई आैर अक्टूबर-नवंबर में होता है, पानी की होती है बचत

चाइनीज खीरे से अलग है देसी खीरा, चार लाख रुपए आता है खर्च

साल में दो बार खीरे की फसल की खेती होती है। इससे पहले गर्मी के दो महीने जून व जुलाई और सर्दी के अक्तूबर आैर नवंबर में फसल लगती है। किसान की मानंे तो बीज से लेकर लेबर तक चार महीने में करीब 4 लाख रुपए खर्च अाता है और मुनाफा 18 लाख के करीब होता है।

चाइनीज खीरे से देसी खीरे की अलग पहचान है। चाइनीज खीरे की चमक ज्यादा होने के साथ ही बाहरी परत पर किसी प्रकार के रेशे नहीं होते। देसी खीरे में बाहरी परत पर कई जगह अलग-अलग निशान के साथ रेशे देखे जा सकते हैं। इस पर किसी प्रकार के पेस्टिसाइड का इस्तेमाल नहीं किया जाता।

पॉलीहाउस में खेती से होती है पानी की बचत

पॉलीहाउस में खीरे की खेती करने से पानी की बचत की जा सकती है। इसके लिए किसान तुपका प्रणाली से पानी बेल तक पहुंचाता है। इसमें उतना पानी ही इस्तेमाल किया जाता है, जितना पौधे को चाहिए। देसी खीरे की बेल 9 फीट तक बढ़ती है। जैसे-जैसे यह बढ़ती है वैसे ही पानी की मात्रा कम या ज्यादा हो सकती है। खीरे की बेल को 15 दिन के अंदर 100 ग्राम कैल्शियम डाला जाता है।

बासमती उगाने वाले किसानों के लिए चिंता की खबर, घटकर आधा हो सकता है मुनाफा

इस साल मानसून में खूब बारिश हो रही है। इस बारिश को धान के लिए वरदान लिए कहा जाता है। किसानों के चेहरे पर रौनक भी है। लेकिन चावल की सबसे बेहतरीन प्रजाति यानी बासमती पैदा करने वाले किसानों के लिए ये खबर निराश करने वाली हो सकती है।

अच्छे मुनाफे की बाट जोह रहे इन किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर सकता है। खतरनाक रसायनों के अत्यधिक प्रयोग के कारण यूरोपियन संघ के बाद अब सऊदी अरब ने भी भारत से आयात होने वाले बासमती चावल पर कड़ा रुख अख्तियार कर लिया है।

कुछ महीने पहले यूरोपीय संघ ने बासमती चावल में फंफूदीनाशक ट्रासाइक्लाजोल के लिए अवशेष सीमा कम कर 0.01 एमजी (मिलीग्राम) प्रति किलो निर्धारित किया था वहीं अब सऊदी फूड एंड ड्रग अथॉरिटी (SAUDA) ने नई गाइडलाइंस के तहत बासमती धान में कीटनाशकों के प्रयोग को 90 फीसदी तक कम करने को कहा है।

बाजार में अभी नई फसल नहीं आई है बावजूद इसके इसका असर दिखने लगा है। कृषि और प्रंसस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के ताजा आंकड़ों के अनुसार चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान बासमती चावल के निर्यात में सात फीसदी तक गिरावट दर्ज की गई है। बासमती धान की फसल अगले दो से तीन महीने में पककर तैयार हो जाएगी।

भारत पिछले पांच वर्षां से विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, लेकिन निर्धारित अवशेष सीमा (एमआरएल) से अधिक कीटनाशकों के अवशेषों के पाए जाने के कारण पिछले कुछ वर्षों में अमेरिका, यूरोप और ईरान जैसे बाजारों में निर्यातकों की परेशानी बढ़ गई है।

यूरोप की तरह सऊदी अरब ने भी कीटनाशकों के प्रयोग के लिए नई गाइडलाइन जारी कर दी है जिसके बाद से भारतीय ट्रेडिंग कंपनियों पर संकट आ गया है। यूरोपियन संघ ने आयात किए जाने वाले बासमती में मिलने वाले फंगेसाइड केमिकल (ट्राइसाइक्लोजाल) की मात्रा 1 पीपीएम से घटाकर 0.01 पीपीएम कर दिया था और अब सउदी अरब भी ऐसा करने जा रहा है।

“बासमती चावल में निर्यात सौदे कम होने के कारण धान की मांग कम हो गई है। जैसी खबरें आ रही हैं, उसके अनुसार तो आने वाले समय में मांग और घट सकती है।

यदि यह रोक जारी रहती है तो बासमती से प्रति क्विंटल औसतन 3500 रुपए तक कमाने वाले किसान को इसका आधा दाम भी मिलना मुश्किल हो जाएगा क्योंकि इस धान का भाव निर्यात पर निर्भर करता है। इस रोक के बाद अब यूरोप में पाकिस्तान के चावल की दखल बढ़ सकती है। भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है।

बासमती चावल के बड़े किसान अमृतसर के हरवंश सिंह कहते हैं “हमें दवाओं के बारे में सही जानकारी ही नहीं है। यूरोपिय संघ के रोक के बाद सऊदी का ये फैसला हम जैसे किसानों के लिए बहुत परेशानी खड़ी करे वाला है। दाम सही नहीं मिला तो हमारे यहां के किसानों को किसी और फसल की ओर ध्यान देना पड़ेगा।

एक्सपोर्ट में बड़ी गिरावट

भारत बासमती चावल का सबसे बड़ा निर्यातक है।  जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग के कारण निर्यात में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। चालू वित्त वर्ष 2018-19 के पहले तीन महीनों अप्रैल से जून के दौरान बासमती चावल के निर्यात में मात्रा के हिसाब से 7 फीसदी की गिरावट आई है।

बासमती चावल बेचने वाले देश के बड़े बासमती चावल निर्यातकों में शुमार कोहिनूर फूड्स के संयुक्त प्रबंध निदेशक गुरनाम अरोड़ा ने को बताया “निर्यात में कमी आ रही है। हम किसानों को कीटनाशकों के बारे में जानकारी भी दे रहे हैं। ये उनके हित में ही है। नई फसल आने में अभी समय है। ऐसे में हम लगातार यूरोपीय संघ और सऊदी अरब के अधिकारियों से बात कर रहे हैं।

हो सकता है कि आने वाले समय में समस्या का समाधान भी हो जाए। लेकिन अब समय आ गया है कि किसान मानकों के अनुसार ही कीटनाशकों का प्रयोग करें, वरना नुकसान बढ़ता ही जाएगा लेकिन अब चीन भी भारतीय बासमती चावल भारत से आयात करने जा रहा है, ऐसे में स्थिति में थोड़ा सुधार हो सकता है।”

ऐसे में किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या यह है कि वे अगर पेस्टीसाइड का प्रयोग कम कर देंगे तो पैदावार घट सकती है। ऐसे में उनके पास विकल्प कम बचते हैं। इस बारे में गुरनाम अरोड़ा ने कहा कि हम किसानों को कुछ मुआवजा भी देने की बात कर रहे हैं, ताकि उनके घाटे को कम किया जा सके।

Alert ! देश के इन 21 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी

देश में जहां बारिश ने कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई हुई है। वहीं कई हिस्से ऐसे भी हैं जहां या तो सूखा पड़ा है या फिर सामान्य से भी कम बारिश हुई है। अगर बारिश से मची भारी तबाही की बात करें तो केरल की स्थिति दयनीय है ।

यहां बीते 24 घंटे में बारिश और भूस्खलन से 26 मौतें हो चुकी हैं। इनमें 11 लोग इडुक्की जिले के हैं। मलबे से दो लोगों को जिंदा निकाला गया है। वहीं अमेरिका ने आज एक परामर्श जारी कर अपने नागरिकों से कहा कि वह बारिश और बाढ़ से जूझ रहे केरल की यात्रा पर जाने से बचें। वही दूसरी तरफ मौसम विभाग ने अगले तीन दिन तक 21 राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट जारी किया है।

उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली, झारखंड, बिहार, पश्चिमी बंगाल, सिक्किम, मध्यप्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नगालैंड, मणिपुर, मिजोरम, त्रिपुरा, कर्नाटक, तमिलनाडु, केरल और अंडमान निकोबार द्वीप समूह शामिल हैं। वहीं पूरे देश में अभी तक सामान्य से 10 फीसदी कम बारिश हुई है। 47 फीसदी हिस्सा ऐसा है जहां सामान्य बारिश हुई है। वहीं 39 फीसदी हिस्से में कम बारिश हुई है।

भारी बारिश के कारण कई नदियां उफान पर हैं जिस कारण राज्य के विभिन्न हिस्सों में कम से कम 24 बांधों को खोल दिया गया है। एशिया के सबसे बड़े अर्ध चंद्राकार बांध इडुक्की जलाशय से पानी छोड़े जाने से पहले रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केरल में भारी वर्षा एवं बाढ़ के आलोक में गुरुवार को मुख्यमंत्री पिनराई विजयन से बातचीत की और प्रभावित लोगों के लिए सभी संभव सहायता की पेशकश की।

जिन राज्यों ने बारिश ने भारी तबाही मचाई हुई है उनमें उत्तराखंड का भी नाम शामिल है। बारिश के कारण कैलाश मानसरोवर यात्रा प्रभावित हुई है। इस दौरान भूस्खलन आने से राज्य की 150 से अधिक सड़कें भी ब्लॉक हो चुकी हैं। जिस कारण चारधाम यात्रा रोकनी पड़ी। वहीं ऋषिकेश-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी बीते एक सप्ताह से प्रभावित है। मौसम विभाग ने राज्य में अगले तीन दिनों में भारी बारिश का अनुमान जताया है।

पशुओं  के लिए घर पर त्यार करें यह दलिया, 100% दूध बढ़ने की है गरंटी

आज हम आपको एक ऐसा दलिया बनाना सिखएंगे जिस से आपके पशु की दूध देने की क्षमता बहुत बढ़ जाएगी और यह सस्ता है कोई महंगा नहीं है और इसको बनाने के लिए जो हर जगह मिल जाएगा ।

इसमें दो चीजें का ध्यान जरूर रखें एक इसके बनाने की विधि और दूसरा इसको देने का समय दोनों को ध्यान से समझें । दलिया बनाने के लिए सबसे पहले आपको चाहिए गेहूं का दलिया। गेहूं का दलिया आप मक्की का और चीज का भी ले सकते हैं लेकिन गर्मी में गेहूं का दलिया सबसे अच्छा रहता है और इसके साथ आपको चाहिए तारा मीरा अगर आपको मिलता है तो बहुत अच्छी बात है अगर नहीं मिलता है तो कोई बात नहीं है ।

इसके बाद आती है हमारी शक्कर की जगह गुड का इस्तेमाल कर सकते है लेकिन गर्मी में शक्कर सबसे अच्छी रहती है । इसके साथ आप सरसों का तेल और मीठा सोढा का इस्तेमाल करें मीठा सोढा पांचन शक्ति के लिए बहुत अच्छा होता है । इसके अलावा किसान इसमें हमारे कॉटन सीड और कैल्शियम आदि डाल सकते है ।

इसको बनाना कैसे है सबसे पहले आपको लेना है दलिया और इसमें आपको पानी डाल कर आग पर पका लेना है उसके बाद हम इसमें हम सबसे पहले शक्कर डालेंगे और इसके बाद किसान भाइयो सरसों का तेल डालना है जोकि आपको सौ ग्राम के लगभग लेना है अपने पशुओं के हिसाब से अगर आपका पशु ज्यादा बड़ा है भी या तो आप इसको ज्यादा भी ले सकते है ।

तारामीरा भी आप 50 ग्राम तक इस्तेमाल कर सकते हैं कोई दिक्कत नहीं है ज्यादा भी कर लिया तो कोई प्रॉब्लम नहीं है यह पशु के लिए बहुत अच्छा है और इसके बाद सबसे जरूरी चीज आती है कि मीठा सोडा इसको इस्तेमाल करना अगर आपको इस्तेमाल करना है तो आप एक चम्मच दे सकते है लेकिन पशु को आपके पशु को दस्त वगैरह नहीं लगी होनी चाहिए ।

इस दलिया की पूरी जानकारी के लिए नीचे दिए हुए वीडियो को देखें ।