कभी ईंट ढोकर चलाते थे घर, अब सालाना कमा रहे 5 लाख रु., इनके संघर्ष पर इंग्लैंड में लिखी जा रही किताब

यह कहानी बिहार के एक किसान मो. इरफान की है। इनके पास पांच एकड़ जमीन थी लेकिन वह उपजाऊ नहीं थी। घर चलाने के लिए ईंट-भट्‌ठा पर मजदूरी करते थे। गाय पालकर व दूध बेचकर किसी तरह परिवार चलाते थे। 2004 में गांव में कुछ वैज्ञानिक आए।

उनसे मो. इरफान ने वर्मी कंपोस्ट बनाने के बारे में जानकर इसपर काम शुरू कर दिया। पहले ही साल उन्होंने 2 लाख रु. कमाए। इसके बाद उन्होंने 5 एकड़ जमीन खरीदी और ऑर्गेनिक खेती शुरू कर दी। अब इरफान सालाना पांच लाख रु. कमा रहे हैं।

इरफान पर बनी फिल्म देख इंग्लैंड से चले आए वैज्ञानिक

अब दूसरे किसानों को जागरूक करने के लिए कृषि विभाग ने इरफान पर शार्ट फिल्म बनाई। इस फिल्म को देखकर इंग्लैंड से वैज्ञानिकों की टीम इनकी खेती का तरीका देखने इनके गांव आ पहुंची। वर्मी कंपोस्ट प्लांट का विजिट किया। अब ये टीम इनकी सफलता की कहानी किताबों के पन्नों पर उतार रही है।

सफलता से हौसला बढ़ा, केले व मक्के की भी शुरू की खेती

मो. इरफान ने बताया, आमदनी नहीं होने के कारण अपने बच्चों को बेहतर शिक्षा नहीं दे पा रहा था। 2004 में गांव में कुछ वैज्ञानिक आए तो उनसे वर्मी कंपोस्ट बनाना सीखा।

पूरी मेहनत के साथ वर्मी कंपोस्ट बनाना शुरू किया। सफलता मिलने लगी तो हौसला बढ़ा और केले व मक्के की खेती भी शुरू की। आज मेरे बच्चे कॉन्वेंट स्कूल में पढ़ रहे हैं। पैसे जमा कर पांच एकड़ जमीन खरीदी और ऑर्गेनिक खेती करनी शुरू कर दी। अब तो गांव के कई किसान भी यह खेती शुरू कर चुके हैं।

जैविक खाद बनाने के साथ ही केंचुआ की भी कर रहे मार्केटिंग

  • माे. इरफान वर्मी कंपोस्ट प्लांट लगाने के साथ ही केंचुए की भी मार्केटिंग कर रहे हैं। सूबे के करीब 50 किसानों को केंचुआ मुहैया करा रहे हैं। 12 सदस्यों के समूह को ऑर्गेनिक खेती के लिए जागरूक किया है।
  • हर सदस्य 12 किसानों को यह टेक्निक सिखा रहे हैं। केंचुए से होने वाले फायदे बता रहे हैं। एक माह में 400 केजी तक केंचुआ बेचकर करीब 1 लाख तक कमा लेते हैं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *