बिना जुताई खेती करने का तरीका इस किसान से सीखें

खेती में लागत लगातार बढ़ती जा रही है, ऐसे में होशंगाबाद के किसान राजू टाइटस ने बिना रासायनिक खाद के खेती करने की तकनीक इजाद कर खेती को लाभ का धंधा बनाने की ओर कदम बढ़ाया है। टाइटस ने इसे जंगली खेती नाम दिया है।

वे बताते हैं कि जंगली खेती स्वत: ही होती है। इसमें खेत की जुताई की आवश्यकता नहीं होती। राजू 12 एकड़ जमीन में 30 साल से जंगली खेती कर रहे हैं।राजू ने बताया, वह सिक्योरिटी पेपर मिल में जॉब करते थे। जापानी कृषि वैज्ञानिक फुकुओकाजी की किताब में बिना निदाई-गुड़ाई के खेती का जिक्र था, इसके बाद उन्होंने जंगली खेती शुरू की।

कई किसान लेते हैं सलाह

राजू के अनुसार उनके पास स्थानीय और अन्य राज्यों के किसान इस खेती के टिप्स लेने के लिए संपर्क करते हैं। फिलहाल पंजाब और आंध्रप्रदेश के दो किसान बड़े स्तर पर इस खेती को कर रहे हैं। इन्होंने राजू टाइटस से ही इसे सीखा है।

जंगली खेती के फायदे

  • इस प्रकार की खेती में लागत ना के बराबर होती है, क्योंकि जुताई व रासायनिक खाद का उपायोग नहीं होता।
  • खरपतवार को नष्ट करने की जरूरत नहीं होती।
  • परंपरागत खेती से कम पानी की जरूरत होती है।
  • उपज जैविक होने से अन्य उपज से अधिक दाम मिलते हैं।
  • फलदार पौधों के साथ यह खेती आसानी से की जाती है।

ऐसे होती है यह खेती

72 वर्षीय राजू जंगली खेती में सीड बॉल का उपयोग करते हैं। सीड बॉल(Seed Ball) बनाने के लिए क्ले मिट्टी (चिकनी मिट्टी) लेते हैं, जो तालाब या नदी नालों के किनारे पर आसानी से उपलब्ध हो जाती है। यह बीज के लिए खाद का काम करती है। इसे बारीक कर पाउडर के रूप में पीसकर बीज पर लपेटा जाता है।

 

इस दौरान बीज पर मशीन से पानी का छिड़काव करते हुए मिला लें, जिससे बीज के ऊपर मिट्टी की परत चढ़ जाती है। फिर इसे बारिश की शुरुआत में एक पानी गिरने पर जैसे ही खेत में हरियाली आ जाए इन सीड बॉल को खेत में फेंक दिया जाता है।

इस दौरान खेत में जुताई नहीं करनी चाहिए, चूंकि क्ले मिट्टी उपजाऊ होती है, इसलिए खाद की भी आवश्यकता नहीं होती। यह सीड बॉल ही फिर पौधों को रूप ले लेती हैं।

सोशल मीडिया पर सक्रिय

टाइटस सोशल मीडिया पर भी सक्रिय रहते हैं। उन्होंने यू-ट्यूब पर राजू टाइटस नाम से चैनल, ब्लॉग और फेसबुक अकाउंट बनाया है। जिसमें समय-समय पर खेती किसानी से जुड़े हुए अपडेट डालते रहते हैं।

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