कुदरत का करिश्मा ! किसान के ट्यूबवेल से पानी की जगह निकल रही है आग

सिंचाई के लिए खेत में बोर खुदवाने वाले एक किसान के सामने समस्या खड़ी हो गई है। उसके बोर में ज्वंलनशील गैस निकल रही है। जब भी वह बोर चालू करता है, उससे आइल, डीजल निकलता है। आग के संपर्क में आने से उसमें आग भी लग जाती है।

पिछले एक माह से किसान परेशान है, उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। खेत में खड़ी फसल भी सूखने लगी है। यह हकीकत है मध्य प्रदेश के जिला दमोह की तहसील हटा के भरतलाई निवासी किसान बैजनाथ प्रसाद चौधरी की। जिनके खेत में पानी के लिए खुदवाए गए एक बोरिंग में से पानी के साथ-साथ आग की लपटें निकल रही हैं।

यहां पर बता दें कि बेजनाथ प्रसाद चौधरी ने अपने खेत में छह माह पहले एक बोरिंग खुदावाया था। इस बोरिंग से पिछले एक सप्ताह से लगातार खुद-ब-खुद पानी तो निकल ही रहा है, लेकिन पानी के साथ आइल, डीजल जैसा तरल पदार्थ निकल रहा है, जिसके संपर्क में आग की लपटें भी निकल रही है, जो गांव वालों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से लोगों का जमावड़ा भी लग रहा है।

बोरिंग से आग की लपटें निकलने के सिलसिला के बीच आज इस घटना को चार दिन हो चुके हैं। पंप से निरंतर गैस निकलने से किसान के खेत में आइल और डीजल एकत्रित हो गया है। किसान का कहना है कि बोरिंग हॉल से गैस का रिसाव अभी भी हो रहा है। इससे बोरिंग वाले क्षेत्र में गैस की बदबू आ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो बोरिंग में निकली गैस थोड़ी-सी चिंगारी के संपर्क में आते ही आग में बदल जाती है, इसी कारण ये हो रहा है।

बोरिंग के होल में आग तक लग रही है 

अपने खेत में बोरिंग करवाने वाले किसान का कहना है कि, उसने जून में करीब 385 फीट की खुदाई के बाद पानी आ गया था, लेकिन उसमें पंप नहीं लगवाया था। करीब चार दिन पहले उसने पंप लगवाया है, जब से बोरिंग होल में आग की लपटें निकलने लगी। कुछ ही समय में ये बात पूरे क्षेत्र में फैल गई और मौके पर ग्रामीणों का जमघट लगना शरू हो गया।

किसान ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी है। किसान का कहना है कि उसकी 5 एकड़ जमीन है। जिसमें सिंचाई के लिए पानी की जरुरत है, लेकिन अब सिंचाई नहीं हो पा रही है। इस संबंध मंे पीएचई के विशेषज्ञ रवि शाह का कहना है कि कहीं कहीं पर प्राकृतिक गैस के स्रोत मिलते हैं। हटा के कुछ क्षेत्र में ऐसी स्थिति है। ओएनजीसी की टीमें भी सर्चिंग में लगी हुईं हैं। मैं भी एक बार मौके का निरीक्षण करके आता हूं।

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