विदेशों में ऐसे होती है अफीम की खेती ,कंबाइन से कटवाते है फसल

अफीम की खेती करना भारत में गैर क़ानूनी है ।लेकिन मध्य प्रदेश ,राजस्थान और भारत के और कुश राज्यों में इसकी खेती के लिए सरकारी लाइसेंस मिलते है । इस अफीम को दवाई बनाने वाली कंपनी द्वारा इस्तेमाल क्या जाता है । दुनिआ में सबसे ज्यादा अफीम अफगानिस्तान में पैदा की जाती है  । यहाँ पर दुन्या की 90 % अफीम पैदा की जाती है ।अफीम की तासीर बहुत गर्म होती है | इसका अधिक सेवन करने से व्यक्ति का रंग सावंला हो जाता है |

लेकिन अफीम की खेती को चाहे भारत में हो या फिर अफगानिस्तान में अभी भी हजारों साल पुराने तरिके से इसकी खेती की जाती है ।जैसा की हम जानते है की अफीम हमे पोस्त के पौधे से प्राप्त होता है | पोस्त फूल देने वाला एक पौधा होता है | इसमें पहले फूल बनता है और फिर डोडा |भारत के किसान डोडा को चीरा लगा कर अफीम प्राप्त करते है |

लेकिन बहुत से देश ऐसे है जहाँ इसकी खेती बिलकुल नए तरिके से की जाती है ।नीदरलैंड में इसकी खेती बाकी फसलों की तरह ही की जाती है ।जैसे आम फसल बोई जाती है वैसे ही अफीम की फसल बोई जाती है और फिर पोस्त के डोडे को कंबाइन के साथ काट लिए जाता है ।

विदेशो में अफीम की खेती कैसे होती है इसके लिए ये निचे दी हुई वीडियो देखें

किसान नेता बोले, नाकाफी है एमएसपी में बढ़ोतरी, किसान अब भी घाटे में

बुधवार को मोदी सरकार ने अपने वादे के मुताबिक, खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में बढोतरी की है। इस फैसले के बाद गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उम्मीद जताई कि सरकार के इस निर्णय से जहां किसानों को अपनी फसलों का लाभकारी मूल्य मिलेगा वहीं इसका सकारात्मक प्रभाव देश की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा।

उन्होंने बताया कि एमएसपी बढ़ाने से सरकार के खजाने पर 15,000 करोड़ का बोझ आएगा। केंद्र ने सबसे अधिक रागी की एमएसपी में 52 फीसदी की बढ़ोतरी की है, वहीं धान के समर्थन मूल्य में 200 रुपये का इजाफा किया है। लेकिन देश के किसान नेता सरकार के इस फैसले से बहुत ज्यादा खुश नहीं दिखाई देते हैं। देश के मशहूर सामाजिक और राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव इसे किसान आंदोलन की छोटी जीत बताते हैं। उनका कहना है,

“किसानों के ऐतिहासिक संघर्ष ने इस किसान विरोधी सरकार को मजबूर किया कि वो चुनावी वर्ष में अपने पिछले चुनावी वादे को आंशिक रूप से लागू करे।” इसके साथ ही योगेंद्र यह भी याद दिलाते हैं कि सरकार ने जिस एमएसपी का ऐलान किया है यह वह डेढ़ गुना दाम नहीं है जो किसान आंदोलन ने मांगा था और न ही वह है जिसका वादा नरेंद्र मोदी ने किया था।

यह महज ऐसा वादा है जो सरकारी खरीद पर निर्भर है। यह अस्थाई है। वह कहते हैं, “किसान को संपूर्ण लागत पर ड्योढ़ा दाम की गारंटी चाहिए।”

आम किसान यूनियन के नेता और किसान मुद्दों पर खुलकर बोलने वाले केदार सिरोही ने एमएसपी व्यवस्था पर चुटकी लेते हुए ट्वीट किया है, “उन सभी 6% किसान जिनको समर्थन मूल्य का लाभ मिलता है सभी को बधाई।

” कृषि जानकार कहते रहे हैं कि महज 6 फीसदी किसान ही अपनी उपज एमएसपी पर बेच पाते हैं, बाकी किसानों तक सरकारी एजेंसियों की पहुंच ही नहीं है। अपने अगले ट्वीट में केदार पूछते हैं,

“मूल्य वृद्धि में सरकार द्वारा मजबूती दिखाई है मगर फिर प्रश्न वही कि इनकी खरीदने की व्यवस्था कैसे होगी। उन सभी फसलों के मूल्य में बड़ी वृद्धि की गई जो 1 % से कम खरीदी जाती हैं बाकी फसलों के दाम कम बढ़े हैं।

सरकार द्वारा यह सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई भी व्यापारी MSP से नीचे न खरीदे तो बात बन सकती है।” कृषि अर्थशास्त्री और किसान मुद्दों पर मुखर रहने वाले भगवान मीना का मानना है कि सरकार ने किसानों को धोखा दिया है। उनका ट्वीट है :

इसी तरह किसान मामलों के जानकार रमनदीप सिंह मान कहते हैं, ” मोदी जी जिस स्वामीनाथन रिपोर्ट का हवाला देकर प्रधानमंत्री बने थे उस हिसाब से धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2226रुपए प्रति क्विंटल होना चाहिए था, सरकार ने जो एमएसपी का ऐलान किया है वह 2014 की गणना के हिसाब से है जब बीजेपी सरकार को किसानों ने वोट दिया था।

मोदी सरकार ने किसानों को दी सबसे बड़ी खुशखबरी, इतने रुपये बड़े खरीफ फसलों के दाम

बुधवार को सरकार ने किसानों के हक में फैसला लिया है। धान, दाल, मक्का जैसी खरीफ की फसलों पर मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) बढ़ाने पर कैबिनेट की मंजूरी मिल गई है। सरकार का उद्देश्‍य है कि किसानों को अनाज के उत्पादन लागत पर ज्यादा मुनाफा मिल सके।

सबसे ज्यादा एमएसपी 52.5 फीसदी रागी पर बढ़ाया गया है। वहीं, धान की एमएसपी 200 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ी है। बता दें कि सरकार ने पिछले बजट में किसानों से एमएसपी बढ़ाने का वादा किया था। माना जा रहा है कि इससे केंद्र पर 33500 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च बढ़ेगा।

52.57 फीसदी तक बढ़ी MSP

रागी पर सबसे ज्यादा 52.57 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। इसके अलावा ज्वार पर 42 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। बाजरे पर 36.8 फीसदी एमएसपी बढ़ाई गई है। तुअर की एमएसपी 4.1 फीसदी, उड़द की एमएसपी 3.7 फीसदी और मूंग की एमएसपी 2.5 फीसदी बढ़ाई गई है।

फसल नई MSP (rs प्रति क्विंटल) पुरानी MSP (rs प्रति क्विंटल) कितना बढ़ा (%)

दूसरे अनाज उत्पादकों को भी फायदा

हाल ही में जारी कैबिनेट नोट के मुताबिक, एमएसपी का अतिरिक्त खर्च जीडीपी का 0.2 फीसदी है। अतिरिक्त खर्च में धान की हिस्सेदारी 12300 करोड़ रुपए होगी।

एफसीआई सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरण के लिए केवल गेहूं और चावल खरीदता है, इसलिए सरकार एक नई व्यवस्था स्थापित करना चाहती है ताकि यह तय किया जा सके कि अन्य फसलों के एमएसपी में बढ़ोत्तरी का लाभ भी किसानों तक पहुंचे।

नई खरीद नीति क्यों थी जरूरी

दाल, तिलहन और कॉटन की खरीद प्राइस सपोर्ट स्कीम (PSS) के तहत होती है, लेकिन इसमें कई खामियां बताई गईं। मौजूदा समय में किसानों को मूंगफली, सोयाबीन, रागी, मक्का, बाजरा और ज्वार सहित 23 अधूसूचित फसलों पर दाम एमएसपी से कम मिल रहा है। इन उत्पादों की खरीद पर सरकार संबंधित एजेंसियों को हो रहे नुकसान की भी भरपाई करेगी।

किसान बेटे ने की खुदकुशी, अब पोते को पढाने के लिए धो रही है गंदी बोतलें

एक 62 साल की बूढ़ी महिला जिसका नाम बलबीर कौर है, उसके हंसते-खेलते परिवार को बेटे के एक्सीडेंट ने तोड़कर रख दिया। पांच एकड़ जमीन, एक ट्रैक्टर आैर कार की मालकिन के पास आज कुछ भी नहीं है। बेटे के इलाज के लिए कर्ज लिया था, फिर भी वो ठीक नहीं हुआ।

ठीक नहीं होने से तंग आकर 2016 में घर में ही फंदा लगाकर उसने मौत को गले लगा लिया। इतना सब होते हुए भी उसने हौसला रखा आैर सोचा कि कर्ज देने वाले तंग न करें इसलिए जमीन, ट्रैक्टर, कार सब बेच दिया आैर लोगों का कर्ज चुका दिया।

  • घर की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए बहू भी 3 जुलाई 2016 को 10 साल के बेटे को छोड़कर चली गई। अब बुजुर्ग बलबीर गंदी बोतलें धोकर जो पैसे मिलते हैं उससे पोते को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं।
  • उसे उम्मीद है कि पोता पढ़-लिखकर फिर से अच्छे दिन लाएगा, भले ही वो दिन देखने के लिए वह जिंदा रहे या नहीं। पोता भी उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। हाल ही में पांचवीं क्लास उसने 97% नंबरों के साथ पास की है आैर दादी के साथ खाली समय में बोतलें भी साफ करवाता है।

गेहूं, धान से भरे रहने वाले बरामदे में आज गंदी बोतलों के क्रेट

  • बुजुर्ग बलबीर कौर ने पुराने दिन याद करते हुए बताया कि उसका हंसता-खेलता परिवार था। बेटा केसर सिंह पिता के साथ अपनी पांच एकड़ जमीन पर आम किसानों तरह खेती करता और खुशहाल जिंदगी व्यतीत कर रहा था। खेती के लिए ट्रैक्टर समेत हर सामान अपना था। घर में कार भी थी। 2011 में परिवार पर मुसीबतों का कहर टूट पड़ा।
  • बेटे केसर का एक्सीडेंट हुआ और कई साल चले इलाज में आमदनी बंद हो गई। उल्टा सिर पर काफी कर्ज चढ़ गया। बेबस होकर बेटे सुसाइड कर लिया। बहू 10 साल का पोता हमारी झोली में डालकर चली गई। कभी घर के इस बरामदे में जहां गेहूं, धान के बोरे और ट्रैक्टर होता था, वहां गंदी बोतलों के ढेर लगे हैं। इतना कहते ही बलबीर कौर की आंखें आंसुओं से भर जाती हैं।

कमाई का नहीं है कोई साधन

  • वे बताती हैं कि कमाई का कोई साधन नहीं है। गंदी बोतलें साफ करने बदले प्रति क्रेट पांच रुपए मिलते हैं। अब काम भी नहीं होता। बहुत कोशिश करने पर कभी 60 तो कभी पोते के हाथ बंटाने से 75 रुपए दिहाड़ी बन जाती है। इसी से परिवार का गुजारा चला रही हूं।
  • मन में दुख है कि किसी सरकार ने परिवार की सुध नहीं ली और न ही किसी योजना के तहत मदद की। आैर कुछ नहीं तो पोते की आगे की पढ़ाई का ही कुछ इंतजाम हो जाए तो सुकून मिल सके। बलबीर कौर के पति अजैब सिंह भी बीमार रहते हैं।

सिर्फ दो दिन की किसान हड़ताल से ही लोग बेहाल

कर्ज माफी और उपज के लाभकारी मूल्य को लेकर किसानों के आंदोलन के तीसरे दिन रविवार को सब्जी-फल की कीमतों में तेजी आनी शुरू हो गई। राष्ट्रीय किसान महासंघ के बैनर तले 172 संगठनों के आह्वान पर किसानों ने अपनी उपज मंडियों तक भेजना बंद कर दिया है। इस कारण मंडियों में आवक कम हो गई है और सब्जियों की खुदरा कीमतों में 10-20 रुपये प्रति किग्रा की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।

उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र सहित सात राज्यों में इस आंदोलन का खासा असर दिख रहा है।दूध मार्किट में ना पहुँचने से भी दूध के दाम लगभग दोगने हो गए है । लोग दोगने दाम पर दूध खरीद रहे है ।

पंजाब में जालंधर की सबसे बड़ी सब्जी मंडी में 20 किग्रा का टमाटर का क्रेट 40-47 रुपये में मिल रहा था वह 300 रुपये से ज्यादा में बिका। इसमें पांच गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई। चंडीगढ़ में 10-15 रुपये प्रति किग्रा के भाव बिक रहा टमाटर 20-25 रुपये पर पहुंच गया है। सप्लाई कम होने से टमाटर के अलावा आलू, शिमला मिर्च, लौकी और खीरे के भाव भी चढ़ गए हैं।

एक दिन पहले दिल्ली की थोक मंडी में 10-50 रुपये कैरेट बिकने वाला टमाटर 250-300 रुपया तक पहुंच गया। आजादपुर मंडी के बिक्रेता अनिल मल्होत्रा के अनुसार टमाटर की खेप मंडी में शनिवार को काफी कम पहुंची।

दो-तीन दिन बाद ही पता चलेगा कि अन्य सब्जियों व फलों पर आंदोलन का क्या असर पड़ता है, क्योंकि किसानों ने अभी चक्का जाम नहीं किया है। आलू-प्याज के थोक बिक्रेता श्रीकांत मिश्रा का कहना है कि प्याज के भाव में 2-3 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। अभी इसका भाव और बढ़ेगा क्योंकि प्याज इन दिनों मध्य प्रदेश से ही आ रहा है।

देश के इन 7 राज्यों में आज से शुरू हुआ किसान आंदोलन

पंजाब और मध्य प्रदेश समेत देश के 7 राज्यों में आज 1 जून से किसनों के अपनी मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है| मध्यप्रदेश में 1 जून से 10 जून तक प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है और पुलिसकर्मियों की छुट्टियाँ रद्द कर दी हैं|

मध्य प्रदेश के मंदसौर में किसानों ने रोजमर्या की जरूरतमंद चीजें सब्जियाँ और दूध को शहर से बाहर न भेजने का ऐलान किया है जिससे आम जनता को परेशानी हो सकती है| किसान यूनियनों ने अपनी मांगों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ 10 दिन का आंदोलन का आह्वान किया है जिसकी शुरुआत आज से हो गयी है|

मध्यप्रदेश 6 जून को राहुल गांधी की रैली है और 1 से 10 जून के बीच किसानों द्वारा आंदोलन की घोषणा की है इसी को देखते हुए पुलिस प्रशासन सतर्क हो गया है।

मध्यप्रदेश के ये जिले हैं सबसे ज्यादा संवेनशील

आगर-मालवा, खंडवा, खरगोन, ग्वालियर, छिंदवाड़ा, देवास, नरसिंहपुर, नीमच, बालाघाट, बुरहानपुर, भोपाल, मंदसौर, मुरैना, रतलाम, राजगढ़, रायसेन, शाजापुर, श्योपुर, सीहोर, हरदा और होशंगाबाद शामिल हैं। मध्यप्रदेश पुलिस ने अंदरूनी रिपोर्ट में किसानों की सक्रियता के बाद इन्हें इस लिस्ट में शामिल किया है।

आम लोगों को हो सकती है परेशानी

किसानों के इस आंदोलन से रोजमर्रा की चीजें शहर में नहीं पहुँच पर रही है जिससे लोगों को मुश्‍किलों का सामना करना पड़ सकता है. पिछले ही साल किसान संगठनों ने मध्य प्रदेश के मंदसौर में अपनी मांगों लेकर आंदोलन किया था, जिसमें राज्य पुलिस की फायरिंग में पांच किसानों की मौत हो गई थी.

आखिर क्यों कर रहे हैं किसान आंदोलन?

भारत के किसान स्वामीनाथन कमीशन को लागू करने और कर्ज माफ़ी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं, किसानों के आंदोलन के कारण 1 तरफ जहाँ आम आदमी को परेशानी उठानी पद रही है तो वहीँ यह आंदोलन केंद्र सरकार के लिये भी चिंता का विषय है| किसान आंदोलन को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के कार्यकर्ता आमने-सामने आ गए हैं, जिससे पुलिसकर्मी को भी काफी जद्दोजहद करनी पद सकती है|

कांग्रेस प्रेसिडेंट राहुल गाँधी करेंगे मंदसौर का दौरा

कांग्रेस पार्ट्री के प्रेसिडेंट 6 जून को मंदसौर का दौरा करने वाले हैं वे 1 सरकारी स्कूल में जनसभा को संबोधित करेंगे. बीजेपी इस जनसभा को राजनीती से प्रेरित बता रही है|

किसान आंदोलन का कार्यक्रम

  • किसान आंदोलन के पहले चरण में 1 से 4 जून तक गांवों में युवाओं के सांस्कृतिक कार्यक्रम और पुरानी खेल गतिविधियां होंगी।
  • 5 जून को किसान धिक्कार दिवस के रूप में मनायेंगे इसमें सरकार द्वारा किसानों के खिलाफ लिये गए फैसलों के बारे में चर्चा की जाएगी।
  • 6 जून को श्रद्धांजलि के रूप में मनाया जायेगा, 6 जून को ही राहुल गाँधी की मंदसोर में सभा होनी है
  • 8 जून को असहयोग दिवस के रूप में मनाया जाएगा।
  • 10 जून को भारत बंद रहेगा।

किसान आंदोलन पर हरियाणा के मुख्यमंत्री खट्टर का अजीब बयान

देश का अन्नदाता कथित किसान विरोधी नीतियों के विरोध में सड़कों पर उतर आया है। शुक्रवार से शुरू हुआ आंदोलन के दूसरे दिन भी जारी है। कर्जमाफी और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने सहित 32 मांगों के समर्थन में राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में किसानों ने सड़कों पर दूध बहाया और सब्जियां फेंकीं।

इसकी वजह से आने वाले दिनों में शहरों में दूध-सब्जी की कीमतों में तेजी आने की आशंका है। वहीं, किसान आंदोलन पर हरियाणा के मनोहर लाल खट्टर ने बयान देकर इस मामले को और गहरा दिया है। उन्होंने कहा, ‘हड़ताल से किसान अपना ही नुकसान कर रहे हैं। किसानों के पास कोई मुद्दा नहीं है।

उनका मकसद, अनावश्यक ही मीडिया और लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचना है। अगर वे अपने उत्पाद नहीं बेच रहे हैं तो इसमें उन्हीं का नुकसान है।’उल्लेखनीय है कि राष्ट्रीय किसान संघ के बैनर तले 110 और किसान एकता मंच के बैनर तले 62 किसान संगठनों ने सरकारी नीतियों के विरोध में शुक्रवार को 1 से 10 जून तक ‘गांव बंद’ आंदोलन का ऐलान किया था।

महासंघ के अनुसार, किसान सब्जियों के न्यूनतम मूल्य, खाद्यान्न के समर्थन मूल्य और किसानों के लिए न्यूनतम आय समेत कई मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।शुक्रवार को किसानों के आंदोलन के साथ बंद का असर 7 राज्यों में दिखा। हालांकि कोई हिंसक घटना होने की सूचना नहीं मिली। हालांकि कुछ ऐसे संगठन भी इसके पक्ष नहीं हैं।

एआईकेएससीसी के वीएम सिंह ने कहा कि उनका संगठन बंद के पक्ष में नहीं है, क्योंकि इससे किसानों को सीधे तौर पर आर्थिक नुकसान होता है। कई अन्य संगठन भी हड़ताल को समर्थन नहीं दे रहे हैं। यूपी, दिल्ली समेत पूरे उत्तर भारत में हालात सामान्य हैं और महासंघ के आह्वान का कोई असर नहीं है।

दूसरी ओर, महाराष्ट्र और मध्य प्रदेश में राज्य सरकारों ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए शहरों में पुलिस की तैनाती कर दी गई। माना जा रहा है कि अगर 10 दिन तक किसानों का यह आंदोलन चलता है तो शहर में सब्जियों और खाद्य पदार्थ को लेकर संकट खड़ा हो सकता है।

आंदोलन के दौरान किसानों ने कोई भी उत्पाद बाजार तक पहुंचाने से मना किया है, चाहे वह सब्जी हो दूध हो या फिर कुछ और। पुणे में किसानों ने खेडशिवापुर टोल प्लाजा पर 40 हजार लीटर दूध बहाया और सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया।

पंजाब में कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन किया गया। फरीदकोट में किसानों ने सड़कों पर फल और सब्जियों को फेंककर विरोध जताया। जबकि होशियारपुर में किसानों का जबर्दस्त प्रदर्शन किया। सड़कों पर दूध के टैंकर खाली कर दिए और सब्जियां भी फेंकी। बरनाला में निषेधाज्ञा तोड़कर ट्रैक्टर-ट्रालियों में सवार होकर किसान डीसी कॉम्प्लेक्स पहुंचे।

वहां किसानों की पुलिस मुलाजिमों से धक्कामुक्की हुई। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर उन्हें खदेड़ दिया। हड़ताल के पहले दिन मंडी में खूब सब्जियां बिकीं। लुधियाना में रोजाना की तुलना में महज चालीस फीसदी ही सब्जियां मंडी में पहुंची। मुक्तसर में किसान आंदोलन फीका रहा।

एक किसान ने महीनों की मेहनत से उगाई 400 किलो गोभी को ख़राब कर दिया

हम जिस देश में रहते हैं उसकी पूरी दुनिया में एक प्रधान देश के रूप में पहचान है. और देश में किसान को अन्नदाता भी कहा जाता है. लेकिन सबको भर पेट खाना देने वाला यही किसान जाने कितने सालों से आये दिन भूखा रह जाता है.

कभी सोचा है कि आने वाले समय में देश के इस अन्नदाता का क्या होगा? अब आप सोच रहे होंगे कि हम आपसे ये सवाल क्यों कर रहे हैं… तो इसका जवाब भी हम आपको दे देते हैं. हम ऐसा इसलिए बोल रहे हैं क्योंकि जो किसान पूरे साल मेहनत करके हमारे लिए सैंकड़ों किलो अनाज, फल, सब्ज़ियां उगाता है, उसको उसकी साल भर की मेहनत का इतना फल (पैसा) नहीं मिलता है कि वो एक हफ़्ते भी ठीक से खाना खा सके.

जी हां, ऐसा ही कुछ हुआ है महाराष्ट्र के एक किसान के साथ, जिसने दिन-रात मेहनत करके 400 किलो फूल गोभी का उत्पादन किया पर जब वो मार्केट में उसे बेचने गया तो उसे मात्र 442 रुपये देने की बात की गई. मतलब कि 1 किलो फूल गोभी 1 रुपये और 10 पैसे में.

जबकि मार्केट में जब हम लोग गोभी खरीदने जाते हैं तो 10 रुपये किलो से कम में तो कभी भी नहीं मिलती है. शायद आप भी सहमत होंगे मेरी इस बात से

जो लोग ऑनलाइन फ़्रेश सब्ज़ी खरीदते हैं, ताकि उनको उनके दरवाज़े पर ताज़ी सब्ज़ी मिले, क्या वो जानते हैं कि ये सब्ज़ी किसानों से कितने कम दामों में खरीदी जाती है और ऑनलाइन उसको अच्छी खासी कीमत में बेचा जाता है. बावजूद इसके वो ऐसा करते हैं तो ऐसे लोगों को किसान की दयनीय स्थिति से कोई मतलब नहीं होता है.

लेकिन एक कड़वा सच ये है कि अगर किसान की बात की जाए तो वो महीनों या सालभर मेहनत करके फ़सल उगाता है. इतना ही सालभर फ़सल को कीड़े, या किसी बीमारी से बचाने के लिए तरह-तरह के फ़र्टिलाइज़र्स, पेस्टिसाइड्स आदि को भी समय-समय पर डालता है.

एक बार की फसल के लिए एक किसान अपनी जमा-पूंजी सब कुछ दांव पर लगा देता है और उसके बदले उसको ना के बराबर पैसा मिलता है. अधिकतर मामलों में तो उनको इसके एवज में इतना भी नहीं मिलता, जितना कि उन्होंने उस पर खर्च किया होता है, और इसका नतीजा ये होता है वो क़र्ज़ के दलदल में फंसता चला जाता है, जहां से निकलना उसके लिए नामुमकिन ही होता है.

ऐसी ही कहानी है महाराष्ट्र के एक किसान की जो जलना जिले में रहकर खेती करता है. उसका एक बेहद ही परेशान करने वाला वीडियो ऑनलाइन पोस्ट किया गया है, जिसमें वो अपनी अपनी गोभी की पूरी फसल, जो उनने महीनों की मेहनत करके उगाई थी, को ख़ुद ही बर्बाद कर रहा है.

इस किसान ने ये कठोर कदम इसलिए लिया क्योंकि उसको 400 किलो गोभी के बदले मात्र 442 रुपये देने की बात की गई. 16 मार्च को पूरे महाराष्ट्र में फूलगोभी की कीमत निम्नानुसार है:

  • इस्लामपुर में 90 रुपये प्रति क्विंटल
  • पंढरपुर में 200 रुपये प्रति क्विंटल
  • नासिक में 285 रुपये प्रति क्विंटल
  • कोल्हापुर में 350 रुपये प्रति क्विंटल

आखिर सरकार ने कर दी वो घोषणा जिसका किसानो को बहुत वक़्त से था इंतज़ार

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने आज कहा कि खरीफ फसलों के आने के पहले ही किसानों के लिए फसलों की लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य निर्धारित कर दिया जाएगा। सिंह ने फिक्की की ओर से आयोजित मक्का सम्मेलन को सम्बोधित करते हुए कहा कि कुछ फसलों पर कृषि लागत का डेढ गुना मूल्य दिया जा रहा है लेकिन कुछ फसलों को यह मूल्य नहीं मिल रहा है।

खरीफ फसल के पहले ही सभी फसलों का बढा हुआ समर्थन मूल्य घोषित कर दिया जाएगा। इस संबंध में नीति आयोग से चर्चा की गई है और राज्यों के साथ भी विचार विमर्श किया जाएगा। उन्होंने कहा कि मक्का का भी मूल्य उत्पादन लागत का डेढ़ गुना नहीं है।

मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य उत्पादन लागत का 37 प्रतिशत ही है। इस समय मक्का का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1,440 रुपए प्रति क्विंटल है। उन्होंने कहा कि फसलों का मूल्य न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे आता है तो व्यापक पैमाने पर सरकारी स्तर पर उसकी खरीद की जाएगी। इससे राजकोष पर बोझ बढेगा लेकिन लोगों को यह समझना चाहिए कि इस पर पहला अधिकार किसानों और मजदूरों का है।

कृषि मंत्री ने कहा कि बिहार, आन्ध्र प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र और राजस्थान आदि राज्यों में व्यापक पैमाने पर मक्का की खेती की जाती है।उन्होंने विश्व की तुलना में प्रति हेक्टेयर मक्के की कम उत्पादकता पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि जहां अमेरिका में प्रति हेक्टेयर 9.6 टन प्रति हेक्टेयर से अधिक उत्पादन होता है वहीं भारत में इसका उत्पादन 2.43 टन प्रति हेक्टेयर है। भारत विश्व के 5 प्रमुख मक्का निर्यातक देशों में शामिल है।

अन्ना का अनशन शुरू ,किसानो को लेकर ये रखीं है मांगे

अन्ना हजारे आज से रामलीला मैदान पर अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। अन्ना किसानों की सात मांगों को लेकर दोबारा आंदोलन कर रहे हैं। हालांकि पिछली बार जिस लोकपाल कानून की मांग उन्होंने की थी वो इस आंदोलन का हिस्सा भी है।

अन्ना ने भूख हड़ताल शुरू करने से पहले कहा कि, ‘मैंने सरकार को 42 बार पत्र लिखा, मगर सरकार ने नहीं सुनी। अंत में मुझे अनशन पर बैठना पड़ा।’ इसके साथ ही अन्ना ये भी कहा कि चाहे इस बार भीड़ आए ना आए वह अकेले ही रामलीला मैदान में बैठे रहेंगे और जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती वह यहां से नहीं हटेंगे।

LIVE:

  • 1:26 PM- लोगों को आंदोलन में आने से रोका जा रहा है। ट्रेनें रद्द की और बसों को दिल्ली के बाहर रोकी जा रही हैं। शहीदों का बलिदान व्यर्थ नहीं होने देंगे।
  • 1:24 PM- मांगें पूरी होने तक अनशन जारी रहेगा। सरकार से चर्चा के लिए तैयार हूं। आजादी मिल गई, लेकिन आजादी कहां है?
  • 1:22 PM- किसानों के हक के लिए लड़ेंगे, मरेंगे। देश के लिए मरना मेरे लिए सौभाग्य है। सरकार ने आंदोलन करने से मुझे रोका। सरकार के आश्वासन पर मुझे भरोसा नहीं है।
  • 1:20 PM- देश के वीरों ने कुर्बानी देकर अंग्रेजों को निकाला, लेकिन देश में लोकतंत्र आज भी नहीं आया। गोरे अंग्रेज़ गए और काले अंग्रेज आ गए।
  • 12:40 PM- अन्ना ये भी कहा कि चाहे इस बार भीड़ आए ना आए वह अकेले ही रामलीला मैदान में बैठे रहेंगे और जब तक उनकी मांग नहीं मानी जाती वह यहां से नहीं हटेंगे।
  • 12:30 PM- कर्नाटक के पूर्व लोकायुक्त व सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज एन संतोष हेगड़े भी आंदोलन का हिस्सा बनने रामलीला मैदान पहुंचे।

रामलीला मैदान से पहले पहुंचे राजघाट

इससे पहले आज सुबह अन्ना हजारे राजघाट पहुंचे जहां उन्होंने गांधी जी की समाधि पर श्रद्धा सुमन अर्पित किए और फिर वहीं बैठ गए। इस वक्त अन्ना हजारे राजघाट पर बैठ कर प्रार्थना की। आधा घंटे से ज्यादा समय तक राजघाट में बिताने के बाद अन्ना हजारे यहां से रवाना हो गए।जानकारी के अनुसार जब अन्ना बापू की समाधि पर पहुंचे तो वह रो पड़े।

यहां से निकलकर अन्ना हजारे शहीद पार्क जाएंगे। उसके बाद वह रामलीला मैदान पहुंचे और अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल की शुरुआत कर दी।इससे पहले अन्ना हजारे ने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि, प्रदर्शन के लिए दिल्ली आ रहे लोगों की ट्रेनें रद्द की जा रही है। उन्होंने कहा कि क्या सरकार हिंसा को बढ़ावा देना चाहती है।

मेरे लिए पुलिस बल तैनात किया गया है जबकि मैंने कई बार पत्र लिख कर कहा था कि मुझे पुलिस प्रोटेक्शन की जरूरत नहीं हैं, आपकी पुलिस हमें नहीं बचा सकती है। सरकार को ऐसा धूर्त रवैया नहीं अपनाना चाहिए।दरअसल अन्ना लंबे समय से किसान आंदोलन को लेकर देशभर में भ्रमण कर रहे थे। वह किसानों के न्यूनतम मूल्य, फिक्स आमदनी की वकालत की बात कर रहे हैं। इसे लेकर ही केंद्र सरकार के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं।