प्रोफेसर का अनोखा जुगाड़, घास काटने वाली मशीन से बना दी धान काटने वाली मशीन

जेरोम सोरेंगे को-ऑपरेटिव कॉलेज और वर्कर्स कॉलेज में मनोविज्ञान के प्रोफेसर रहे हैं. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बालीगुमा गोड़गोड़ा में फार्म हाउस खोला. यहां वे सूकर, मुर्गी, ऐमु और मछली पालन कर रहे हैं. थोड़ी जमीन पर खेती-बाड़ी भी है. उन्हें खेत में धान काटने-कटवाने में बहुत परेशानी होती थी.

इससे बचने के लिए वह दिमाग लगाते रहते थे. अंतत: उन्होंने धान काटने की मशीन बना डाली. उन्होंने अलग से कुछ किया नहीं. मवेशी को खिलाने के लिए उनके पास पहले से घास मशीन हेच कटर थी. इस मशीन में ही उन्होंने विज्ञान ढूंढ़ निकाला.

तर्क भिड़ाया कि इससे घास कट सकता है तो धान क्यों नहीं. धान तो कट जा रहा था लेकिन इसकी बालियां बिखर जा रही थीं. उनके मुताबिक इस समस्या का हल उनकी बेटी नीरा मृदुला सोरेंग ने ढूंढ़ निकाला. नीरा चिरीमिरी (छत्तीसगढ़) में रहती हैं. वहां से उन्होंने पापा को धान काटने वाली मशीन का फोटो ह्वाट्सएप किया. इससे प्रो सोरेंग को आइडिया मिल गया.

उन्होंने हेच कटर में प्रोटेक्टर की जगह धान की बाली समेटने के लिए प्लास्टिक की पुरानी बाल्टी काटकर लगा दी. हो गयी मशीन तैयार. जेरोम बताते हैं कि तीन मजदूर तीन दिन में जितना काम कर सकता है, उतना काम कुछ घंटे में यह मशीन कर देती है.

मशीन में सिर्फ दो लीटर डीजल खर्च होगा. दो लीटर डीजल की कीमत 120 से 130 रुपये होती है. मान लिया जाये दो घंटे मशीन चलाने के लिए आप एक व्यक्ति को 150 रुपये देते हैं. इस तरह हिसाब लगाया जाये तो कुल खर्च 280 रुपये या अधिक-से-अधिक 300 रुपये होता है.

धान काटने के लिए एक मजदूर की प्रतिदिन की मजदूरी 150 रुपये होती है. तो तीन मजदूर की तीन दिनों की मजदूरी 1350 रुपये होती है. इस तरह समय के साथ-साथ एक हजार रुपये से अधिक की बचत भी हो रही है.इनके इस प्रयोग के बाद बहुत सारी कंपनी यह मशीन बनाने लगी है .जिनमे बाल्टी की जगह पर धातु लगाई जाती है .और ब्लेड भी बदल दिया है . जिससे अब यह मशीन पूरी तरह से कामयाब बन गई है

इसी सिद्धांत पर बनी मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

किसान ने बनाई ट्रेक्टर के साथ चलने वाली 5 गुना सस्ती कंबाइन मशीन

भारत की कृषिजोत छोटी है और खेतों तक जाने वाले रास्ते संकरे व पेड़ों से घिरे होते हैं. ऐसे में इन खेतों तक बड़े कृषि यंत्रों को ले जाना मुश्किल होता?है. खेती में काम आने वाले जुताई, बोआई, मड़ाई वगैरह के कृषि यंत्र अलगअलग फसलों के लिए अलगअलग तरह के होते हैं.

मड़ाई के कृषि यंत्र फसल के अनुसार अलगअलग तरह के बने होते हैं, जिन के द्वारा गेहूं, धान, राई वगैरह की मड़ाई की जाती है. छोटे किसानों के लिए अपनी फसल की मड़ाई के लिए महंगे व बड़े यंत्र खरीदना मुश्किल होता है. ऐसे में कभीकभी मड़ाई में देरी हो जाती है और देरी की वजह से कई बार बारिश या अन्य वजहों से फसल खराब भी हो जाती है.

किसानों की इन्हीं परेशानियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विकास खंड कप्तानगंज के गांव खरकादेवरी के रहने वाले 12वीं तक पढ़े नवाचारी किसान आज्ञाराम वर्मा ने एक ऐसी कंबाइन मशीन ईजाद की है, जो कई खूबियों के साथ कम लागत से तैयार की जा सकती है. यह विचार उन के दिमाग में तब आया जब साल 2015 में उन की तैयार गेहूं की फसल बरसात की वजह से कई बार भीग गई और वह अपने गेहूं की फसल की मड़ाई नहीं कर पाए. उन्होंने सोचा क्यों न एक ऐसी गेहूं कटाईमड़ाई की मशीन तैयार की जाए जो कटाई व मड़ाई करने के साथसाथ भूसा भी तैयार कर सके.

आज्ञाराम वर्मा ने इन्हीं परेशानियों को ध्यान में रख कर एक ऐसी कंबाइन मशीन का खाका तैयार किया, जो गेहूं की मड़ाई करने के साथसाथ भूसा भी तैयार कर सकती थी. इस के बाद वे इस मशीन को बनाने में जुट गए. इस के लिए उन्होंने लोहे के तमाम पुर्जे व जरूरी सामान खुले बाजार से खरीद कर अपनी एक वर्कशाप तैयार कर के मशीन बनानी शुरू कर दी. 11 नवंबर 2015 को उन्होंने एक ऐसी कंबाइन मशीन बना कर तैयार की, जो छोटी होने के साथसाथ किसी भी संकरे रास्ते से खेतों में पहुंचाई जा सकती थी.

उन के द्वारा तैयार की गई इस कंबाइन मशीन को बनाने में बहुत ही कम खर्च आया. करीब 2 लाख 75 हजार रुपए में बनी इस कंबाइन मशीन का वजन 18 क्विंटल है. यह अन्य कंबाइन मशीनों से करीब 5 गुना सस्ती है. साथ ही इस की खूबियां इसे और भी बेहतर बनाती हैं. इस मशीन को चलाने के लिए किसी तरह की ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती है और मशीन में आने वाली खराबी को किसान खुद ठीक कर सकता है. इस के लिए अधिक पावर के ट्रैक्टर की भी आवश्यकता नहीं होती है. यह कंबाइन मशीन गेहूं की फसल को जड़ के साथ काटती है.

खूबियां बनाती हैं बेहतर : इस कंबाइन मशीन की खूबियां इसे बेहतर साबित करती हैं. इस मशीन द्वारा 1 घंटे में करीब 1 एकड़ खेत की कटाई की जा सकती है. 7 फुट चौड़े कटर वाली इस मशीन में 9 बेल्टों का प्रयोग किया गया है. इस में इस्तेमाल किए गए सभी कलपुर्जे बाजार में आसानी से मिल जाते हैं और मशीन में किसी तरह की खराबी आ जाने से इस को आसानी से ठीक किया जा सकता है. इस मशीन से एकसाथ गेहूं की कटाई व भूसा बनाने का काम किया जा सकता है. इस के लिए मशीन में अलगअलग 2 भंडारण टैंक लगाए गए हैं. मशीन के बगल में मड़ाई के दौरान गेहूं का भंडारण हो जाता है व मड़ाई से निकलने वाला भूसा मशीन के ऊपर लगे टैंक में चला जाता है.

इस मशीन को ट्रैक्टर के आगे या पीछे जोड़ कर चलाया जा सकता है. ट्रैक्टर के पीछे जोड़ने के लिए 20 हजार रुपए खर्च होते हैं व 20 मिनट का समय लगता है व आगे जोड़ने में 20 हजार रुपए खर्च आता है व 1 घंटे का समय लगता है. फसल की मड़ाई के बाद इस कंबाइन मशीन को ट्रैक्टर से अलग कर के ट्रैक्टर को दूसरे इस्तेमाल में भी लाया जा सकता है.

किसान आज्ञाराम वर्मा द्वारा तैयार की गई मशीन को देखने के लिए दूरदूर से लोग आ रहे हैं और उन के द्वारा तैयार की गई इस मशीन की भारी मांग बनी हुई है. बस्ती जिले के सांसद हरीश द्विवेदी ने किसान आज्ञाराम वर्मा के खेतों में जा कर खुद इस मशीन से गेहूं की मड़ाई कर के इस की खूबियों को जांचापरखा. उन का कहना है कि यह मशीन छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी.

कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक इंजीनियर वरुण कुमार का कहना है कि आज भी खेतीकिसानी में काम में आने वाली मशीनें महंगी हैं, जिस की वजह से सभी किसान उन का फायदा नहीं ले पाते हैं. ऐसे में किसान आज्ञाराम वर्मा द्वारा तैयार की गई कंबाइन मशीन छोटे किसानों को आसानी से मिल सकेगी.

इस के पहले भी किसान आज्ञाराम वर्मा ने खेती से जुड़ी कई खोजों की हैं. उन्होंने जहां अधिक चीनी की परते वाली गन्ने की नई प्रजाति कैप्टन बस्ती के नाम से विकसित की है, वहीं गेहूं की नई किस्म एआर 64 भी विकसित की है. वे वर्तमान में खुशबूदार धान की नई किस्म को तैयार करने पर काम कर रहे हैं. आज्ञाराम वर्मा को उन की खोजों की वजह से राष्ट्रीय नव प्रवर्तन संस्थान द्वारा मार्च में 1 हफ्ते के लिए राष्ट्रपति भवन में अपने गन्ने की नई प्रजाति को प्रदर्शित करने का मौका भी दिया गया था. इसी के साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा उन्हें नवाचारी किसान के रूप में सम्मानित भी किया गया है.

आज्ञाराम वर्मा का कहना है कि कोई भी किसान चाहे तो खेती में काम आने वाले नए कृषि यंत्रों व बीज वगैरह को ईजाद कर सकता है, क्योंकि वह खेती के दौरान आने वाली तमाम समस्याओं को महसूस करता है. उस दौरान उस के दिमाग में परेशानियों को दूर करने के लिए तमाम ऐसे खयाल आते?हैं, जो किसी भी नई मशीन या बीजों को जन्म दे सकते हैं.

आज्ञाराम वर्मा द्वारा तैयार यह मशीन छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. आज्ञाराम ने अपनी इस कंबाइन मशीन का नाम कैप्टन बस्ती रखा है. इस मशीन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आज्ञाराम वर्मा के मोबाइल नंबरों 7398349644 व 9721885878 पर संपर्क किया जा सकता है.

यह मशीन कैसे काम करती है जानने के लिए वीडियो देखें

अब प्रिया पावर वीडर पर बैठ कर करें खेत की निराई गुड़ाई

अक्सर आप ने देखा होगा के कपास और दूसरी फसलों में खपतवार बहुत होते है जिनको निकलना बहुत ही जरूरी है अगर इन्हे वक्त पर ना निकला जाये तो सारी फसल ख़राब हो जाती है । बहुत से लोग गुड़ाई के लिए ट्रेक्टर जा फिर बैल का इस्तेमाल करते है  ।

क्योंकि ट्रेक्टर महंगा पड़ता है और बैल से काम बहुत धीरे होता है  । इस लिए दोनों ही विकलप कामयाब नहीं है  । ऐसे किसानो के लिए “प्रिया पावर वीडर” आया है । इसका एक फ़ायदा यह भी है के बाक़ी पावर वीडर की तरह इसे पकड़ कर चलने के जरूरत नहीं होती बल्कि आप इसके ऊपर बैठ कर चला सकते है ।

यह एक आधुनिक पावर मशीन है जो आमतौर पर कपास और गन्ने की फसल में से नदीन निकालने के लिए प्रयोग की जाती है। यह ज़मीन को नर्म करती है और गोडाई का काम भी कम करती है।

यह 2 मॉडल में उपलब्द है एक मॉडल में इसमें पेट्रोल इंजन लगा होता है जिसकी पावर 4.7 HP होती है । दूसरे मॉडल में इसमें डीज़ल इंजन लगा होता है जिसकी पावर 9 HP होती है। अधिक जानकारी के लिए आप निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क कर सकते है । कृष्णा गोहिल +91 8347472029, +91 8000935123

इस मशीन की विशेषताएं:

• अंतर फसली उगाने में सहायक मशीन है।
• जोताई के घेरे को आवश्यकतानुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है।
• खर्चा कम करती है।
• फसल को बिना कोई नुकसान पहुंचाए गोडाई करती है।
• इसे चलाना इतना आसान है कि महिलायें भी इसे आसानी से चला सकती हैं।

यह मशीन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो भी देखें 

अब बैलों से खेती करने वाले किसानो के लिए आ गई नई बिजाई मशीन

आप ने ट्रेक्टर के साथ खेत में बिजाई तो बहुत देखी होगी । लेकिन अभी भी बहुत से लोग है जो बैलों से खेती करते है । ऐसे किसान बीज बोने के लिए हाथ से छींटे दे देते है । जिस से फसल अच्छी नहीं होती । ऐसे किसानो के लिए अब बहुत सी कंपनी बिजाई की मशीन बना रही है ।

आज  हम आपको जिस कंपनी की मशीन दिखने वाले है उस कंपनी का नाम है “मौसम एग्रो” । यह कंपनी ट्रेक्टर के साथ चलने वाली बिजाई मशीन तो बनती ही है साथ में जानवरों यानि के बेलों के साथ चलनी वाली बिजाई मशीन भी बनती है ।

इस मशीन में एक बार में 14 किल्लो बीज डाला जा सकता है । यह मशीन 5 कतारों में एक साथ बिजाई करती है ।इसके इलावा धरती एग्रो भी ऐसे ही मशीन बनाते है आप वहां से भी इसकी जानकारी ले सकते है

यह मशीन कैसे काम करती है इसके लिए यह वीडियो देखें

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी कोई जानकारी के बारे में जानना चाहते है तो निचे दिए हुए नंबर पर कांटेक्ट करें

Ph. +91 – 2827 – 253454, 253654
Mob. +91 – 98795 76920 / 65
info@mausamagro.com
www.mausamagro.com

अब गीली और गिरी हुई फसल को बड़ी आसानी से कटेगी यह कंबाइन

वैसे तो धान की फसल तैयार करना काफी मुश्किल भरा होता है, किसान जी-जान लगा देता है फसल को तैयार करने में, लेकिन इसके बाद भी धान की मड़ाई करना भी काफी मुश्किल भरा काम होता है। खास तोर पर जब फसल बिलकुल त्यार हो और आंधी और बारिश से आप की खड़ी फसल फसल गिर जाये ।लेकिन अब बारिश और आंधी से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है हाफ फीड कंबाइन (Head Feed Combine Harvester )

आम कंबाइन से गिरी हुई फसल को काट पाना बहुत ही मुश्किल काम है और फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं ।

छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है । और इस मिनी कम्बाइन से एक एकड़ काटने में बहुत ही कम खर्च आता है।और इसमें ग्रेन लोस्स मतलब अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।

इसमें 72 Hp का फ़ोर स्ट्रोक डीजल इंजन लगा हुआ है इस मॉडल का नाम Model – Model- 4L 88 है । सिर्फ धान ही नहीं इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान सरसों अदि भी काट सकते है ।यह कंबाइन भारतीए सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है और इसके ऊपर सब्सिडी भी उपलब्ध है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है और कैसे गिरी हुई फसल उठा सकता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर आप इस कंबाइन को खरीदना चाहते है तो नीचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क करें

JASHODA AGRO WORKS
Mr. Vikram Patel

Khara Kuva, Railway Station Road, Sojitra, Anand, Gujarat, India – 387240

Call Us : 08048066431
Phone : +91-2697-234993
Mobile : +91-9426394460, +91-9427643303
Email Address : jashodaagroworks@gmail.com
Web Site : http://www.jashodaagroworks.in

कमाल की है ये पत्थर इकट्ठा करने वाली मशीन,यहाँ से खरीदें

पत्थर किसी भी खेत के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है । पत्थरों की वजह से कई बार उपजाऊ जमीन पर भी फसल नहीं उगती है । इस लिए इन पथरों को खेत से हटाना बहुत ही जरूरी है । लेकिन अगर एक एक पत्थर चुन कर निकलना पड़े तो ये बहुत ही मेहनत वाला नामुनकिन सा काम लगता है।

लेकिन अब एक ऐसी मशीन आ गई है जो इस काम को बड़ी आसानी से कर सकती है और वो भी तेज़ी के साथ । इस मशीन को स्टोन पिकर बोलते है । इस मशीन को धीमान एग्रो इंडस्ट्रीज द्वारा त्यार किया गया है । इस मशीन की कीमत लगभग 1 लाख 95 हज़ार है । इस कंपनी के इलवा भी और बहुत सारी कंपनी है जो इस तरह की मशीन त्यार करती है ।

इस मशीन को खरीदने के लिए जा किसी और जानकारी के लिए आप इन नंबर पर संपर्क कर सकते है।Contact: 9803610000 , +91 8968650085.

ये कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

आ गई ऐसी मशीन जो फसल काटने के साथ फसल का बंडल भी बना देगी

अब किसानों को मजदूर ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि अब फसल के बण्डल बनाने के लिए लेबर की जरूरत नहीं रहेगी । फसल काटने के लिए पहले ही मशीन उपलब्ध थी लेकिन अब ऐसी भी मशीन आ गई है जो गेहूं के फसल का बंडल भी बना देगी।

BCS कंपनी की मशीन आ गई है जो गेहूं की फसल काटने के बाद उसका बंडल बांधने का काम भी करती है। इस मशीन के आ जाने से किसानो काफी परेशानियों का समाधान हो जायगा । क्योंकि पहले कंबाइन के काटने से जब वह गेहूं को बिलकुल जड़ के पास से काटती तो थी लेकिन उससे भूसा नहीं मिलता था और किसानो के सामने पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो जा रही थी।

अब इस मशीन के आ जाने से कटे हुए गेहूं से पर्याप्त मात्रा में भूसा भी बना सकते है । साथ ही मजदूर खोजने की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाएगी। सिर्फ गेहूं ही नहीं यह मशीन गेहूँ , धान ,सोयाबीन ,धनिया, मूंग ,तिल्ली ,चना, मसूर, अलसी, सरसो और हर प्रकार के चारे की फसल काट सकते है ।

इस मशीन की कीमत बाजार में करीब ढाई लाख रुपये है। इसे ट्रैक्टर के बिना चलाया जा सकता है। मशीन में 10.2 हार्सपावर का इंजन बंधा हुआ है। मशीन एक घंटे में करीब एक एकड़ फसल काटकर उसके गट्ठर बांध देती है। जिसके लिए यह सिर्फ 1 लीटर डीज़ल का प्रयोग करती है । इसके 5 गेअर होते है जिसमे 4 आगे के और एक पीछे का होता है ।

अगर आप इसको खरीदना चाहते है तो BCS कंपनी के डीलर से संपर्क कर सकते है ।इसके डीलर भारत के सभी छोटे बड़े शहरों में है और ज्यादा जानकारी के लिए आप इनके हेड ऑफिस जो लुधिआना (पंजाब) में है संपर्क कर सकते है जिनके नंबर नीचे दिए है

Mr. S. K. Bansal + 91 98728 – 74743
Mr. Malkeet Singh Babrah (Head Production & Purchase)
+ 91 98728 – 74745

यह कैसे काम करते है देखने के लिए यह वीडियो देखें

अब जानवर नहीं पहुंचा सकेंगे नुकसान क्योंकि अब पल्स मशीन करेगी फसल की रखवाली

अब किसानों को फसल की रखवाली के लिए रातभर जागने की मजबूरी नहीं रहेगी। न ही फसल को जंगली जानवर नुकसान पहुंचा सकेंगे। फसल रक्षक पल्स मशीन फसलों की सुरक्षा करेगी। यह मशीन पंत विवि के किसान मेले में किसानों के लिए उपलब्ध हो सकेगी।

12 वोल्ट की बैटरी से संचालित इस मशीन के झटकों से हाथी, नील गाय, जंगली सुअर, हिरन, गीदड़, सेही, बंदर, सांड आदि जानवर फसल के करीब नहीं फटक सकेंगे।

खास बात यह है कि इस मशीन के करंट से जानवर या अंजाने में इंसान के छू लेने पर मौत होने जैसी कोई नौबत नहीं आएगी। एक बार फिर बता दे इस से किसी को कोई जानलेवा नुकसान नहीं होता ।

क्योंकि बैटरी का करंट होने के चलते इसमें अर्थिग होने की नौबत नहीं आती है। इस मशीन को घरों या फार्म हाउस के आसपास भी लगाया जा सकता है। जिससे कि बंदर नुकसान न पहुंचा सकें।

ऐसे करती है मशीन काम

छोटी सी इस मशीन को 12 वोल्ट की मशीन से करंट दिया जाता है। इसके बाद इस मशीन को खेतों के चारों ओर लगाए गए क्लच वायर से जोड़ दिया जाता है। तार की कीमत 160 रुपये प्रति किलो है, जबकि एक किलो में 75 मीटर लंबी तार आ जाती है। मशीन की कीमत नौ हजार रुपये है।

ये है मशीन की क्षमता

  • बैटरी एक बार चार्ज करने पर 24 घंटे चलती है
  • यह मशीन एक मिनट में 75 बार झटके देकर फसल की रखवाली करती है।
  • इसके करंट से कोई भी जानवर या आदमी नहीं मरेगा।

और जानकारी के लिए निचे दिए हुए नंबर और पते पर संपर्क करें

Ring Road Chamunda Dham colony,BIJNOR (UTTAR PRADESH)PIN-246701
EMAIL : nidhipulsmachine@gmail.com
Mobile No:9012384699, 8859595976

ये है हाथ से चलने वाली बिजाई मशीन, यहाँ से खरीदें

आप ने ट्रेक्टर के साथ खेत में बिजाई तो बहुत देखी होगी । लेकिन अभी भी बहुत से लोग है जो बैलों से खेती करते है । ऐसे किसान बीज बोने के लिए हाथ से छींटे दे देते है । जिस से फसल अच्छी नहीं होती । ऐसे किसानो के लिए अब बहुत सी कंपनी बिजाई की मशीन बना रही है जो हाथ से चलती है और जो बहुत अच्छी बिजाई करती है ।

आज  हम आपको जिस कंपनी की मशीन दिखने वाले है उस कंपनी का नाम है “ओम एग्रो वर्ल्ड ” । यह कंपनी ट्रेक्टर के साथ चलने वाली बिजाई मशीन तो बनाती ही है साथ में साथ से चलनी वाली बिजाई मशीन भी बनाती है ।

इस मशीन में एक बार में 4 किल्लो बीज डाला जा सकता है । यह मशीन 1 कतार में बिजाई करती है ।इस मशीन का वजन लगभग 12 किलो होता है । ये मशीन नरम और सख्त दोनों प्रकार की मिट्टी पर आसानी से चलती है इसके हेंडल की उचाई किसान अपने हिसाब से ऊपर निचे कर सकता है । इस मशीन की कीमत 5142 रुपये है ।

यह मशीन कैसे काम करती है इसके लिए यह वीडियो देखें

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी कोई जानकारी के बारे में जानना चाहते है तो निचे दिए हुए नंबर पर कांटेक्ट करें फ़ोन – +91 804296 4004 ,+91 98815 10419

1 दिन में 3900 गैलन पानी निकालता है यह “पहिया पंप”,वीडियो देखें

भारत में बहुत से किसान चल रहे नाले ,नदी बड़े रजबाहे के करीब रहते हैं, हालांकि, कई कारकों के कारण वह पानी का उपयोग करने में असमर्थ हैं। ऐसे किसानो के लिए पानी की ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम यह अद्भुत पानी पहिया पंप बहुत कामयाब साबित हो सकता है।

इसे पहली बार 1746 में बनाया गया था और अब इसे पुनः निर्मित किया गया है और हल्के और सस्ती आधुनिक सामग्री का उपयोग करके बहुत ही कामयाबी से त्यार किया गया है ।इसका डिजाइन इतना आसान है के इसको कोई भी त्यार कर सकता है ।

वाटर व्हील पंप कैसे काम करता है

इस पानी पहिया पंप का 6 फ़ीट व्यास पहिया होता है , जिसे 1-1/4 इंच के 160 फीट की पॉलीथीन पाइप से त्यार किया जाता है, जो प्रति दिन 40 फीट की दुरी तक 3900 गैलन पानी पहुंचने में सक्षम होती है। पंप को काम करने के लिए कोई ईंधन या बिजली की आवश्यकता नहीं होती है और इसलिए पर्यावरण अनुकूल है।

एक बार जब कुंडली के निचले एक चौथाई हिस्से को पानी में डुबोया जाता है तो पानी के बहाव से पूरे कुंडल घूमती है, तो हवा का एक क्रम बदलता है और पानी पाइप के साथ कुंडली के केंद्र बिंदु की ओर बढ़ना शुरू हो जाता है और इस पंप के केंदर में एक और पाइप लगी होती जिस से हम पानी को काफी दुरी तक लेकर जा सकते है ।

ये पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें