कि‍सान मशीन खरीदें 80 % पैसे सरकार देगी, पराली प्रबंधन के लि‍ए 1151.80 करोड़ मंजूर

सरकार पराली व अन्‍य एग्रीकल्‍चर वेस्‍ट के बेहतर मैनेजमेट को लेकर गंभीर हो गई है। वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में कहा था कि‍ सरकार पराली व अन्‍य एग्रीकल्‍चर वेस्‍ट को प्रबंधन के लि‍ए योजना लागू करेगी। पराली जलाने की वजह से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लि‍ए सरकार ने नई योजना का एलान कि‍या है।

इसके तहत पराली का प्रबंधन के लि‍ए मशीनें खरीदने के लि‍ए सरकारी की ओर से 80 फीसदी तक की आर्थि‍क मदद दी जाएगी। यही नहीं कृषि अवशेष न जलाने वालों को इनाम भी दि‍या जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पंजाब, हरियाणा , उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में फसल अवशेषों के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी प्रोत्‍साहन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इसके लि‍ए 1151.80 करोड़ रुपये मंजूर कि‍ए गए हैं।

80 फीसदी देगी सरकार

पराली प्रबंधन के लिए मशीनों का बैंक स्थापित जाएगा जहां से इन्हें किराये पर लिया जा सकेगा। इसके लिए किसानों की पंजीकृत सहकारी समितियों ,किसान समूहों,स्वयं सहायता समूहों, कृषि उत्पादनकर्ताओं के संगठनों,निजी उद्यमियों और महिला किसानों के समूहों को परियोजना की लागत का 80 प्रतिशत तथा निजी किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी एवं उपकरणों के वास्ते 50 प्रतिशत की वित्तीय मदद दी जाएगी।

इसके अलावा सरकार कि‍सानों की ट्रेनिंग का भी प्रबंध करेगी ताकि वह फसलों के अवशेषों का बेहतर प्रबंधन सीख सकें। सरकार वि‍ज्ञापन, शि‍वर व अन्‍य गतिवि‍धि‍यों के माध्‍यम से कि‍सानों तक इसकी जानकारी पहुंचाएगी। इसके अलावा कोई भी अवशेष न जलाने के लिए ग्राम/ग्राम पंचायत के लिए पुरस्‍कार भी दि‍या जाएगा। आगे पढ़ें कैसे मि‍लेंगे पैसे

कैसे मि‍लेंगे पैसे संबंधित

राज्‍य सरकारें जिला स्तरीय कार्यकारी समितियों (डीएलईसी) के माध्यम से विभिन्न लाभार्थियों और स्थान- कृषि प्रणाली पर निर्भर विशेष कृषि उपकरण की पहचान करेगी और कस्टम हायरिंग और व्यक्तिगत मालिक स्वामित्व के आधार पर मशीनों की खरीद के लिए कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए लाभार्थियों की पहचान और चयन करेगी ताकि पारदर्शी रूप से समय पर लाभ प्राप्त किए जा सकें।

राज्‍य नोडल विभाग/ डीएलइसी लाभार्थी की ऋण आवश्‍यकता के लिए बैंकों के साथ गठबंधन करेंगे। चयनित लाभार्थियों के नाम एवं विवरण जिला स्‍तर पर दस्‍तावेजों में शामिल किए जायेगें जिसमें उनके आधार/यूआईडी नम्‍बर तथा प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के माध्‍यम से दी गई वित्‍तीय सहायता दिखाई जाएगी। आगे पढ़ें कैसे काम करेगी पूरी व्‍यवस्‍था

कि‍स तरह से होगा काम

कृषि मंत्रालय फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए मशीन और उपकरण निर्माताओं का एक पैनल तैयार करेगा। राज्‍य स्‍तर पर संबंधित राज्‍य सरकारों के कृषि विभाग नोडल कार्यान्‍वयन एजेंसी होंगे। संबंधित राज्‍य सरकारों के प्रमुख सचिव कृषि एवं कृषि उत्‍पादन आयुक्‍त की अध्‍यक्षता में राज्‍य स्‍तरीय कार्यान्‍वयन समितियां नोडल एजेंसियों तथा अन्‍य संबंधित विभागों के साथ नियमित बैठकें करके अपने-अपने राज्‍यों में योजना क्रियान्‍वयन की निगरानी करेंगे।

जिला स्‍तरीय कार्यकारी समिति परियोजना तैयार करने, लागू करने और जिलों में निगरानी के लिए उत्‍तरदायी होगी। पराली जलाने पर निगरानी रखने के लिए एक समिति भी बनायेगी।

स्वराज ट्रैक्टर्स ने पेश की 60 एचपी से 75 एचपी तक के ट्रैक्टरों की नई सीरीज , जाने विशेषताएं

19 मिलियन अमरीकी डाॅलर क्षमता वाले महिन्द्रा ग्रुप की इकाई, स्वराज ट्रैक्टर्स ने आज पंजाब के मोहाली में 60 एचपी से 75 एचपी तक की रेंज में उच्च शक्ति वर्ग में बिल्कुल नया ट्रैक्टर प्लेटफाॅर्म लांच किया। इस प्लैटफाॅर्म पर आधारित ट्रैक्टरों को एक निर्धारित समय में उपलब्ध कराया जाएगा, जिसकी शुरुआत स्वराज 963 एफई के साथ हो रही है। स्वराज 963एफई स्वराज के 875 डीलरों के व्यापक नेटवर्क पर उपलब्ध होगा जिसकी शुरुआती कीमत 7.40 लाख रुपये एक्स शोरूम है।

स्वराज 963 एफई की डिजाइन पूरी तरह देश के भीतर स्वराज के आंतरिक आर ऐंड डी टीम ने तैयार की है और यह इस श्रेणी का अग्रणी उत्पाद है। स्वराज 963 एफई खेत की जुताई से लेकर फसल कटाई के बाद के कामकाज के लिए व्यापक पैमाने के ऐप्लिकेशंस के लिए सबसे अनुकूल है।

इसमें बड़ी आसानी के साथ रोटरी टिलर्स, एमबी प्लाऊ, टीएमसीएच, पोटैटो प्लांटर, डाॅजर्स, बेलर्स, बनाना मल्चर्स आदि लगाए जा सकते हैं। स्वराज 963 एफई दो-पहिया और चार-पहिया, दोनों विकल्पों के साथ उपलब्ध होगा जिनसे विभिन्न प्रकार की खेती के विविध जरूरतें पूरी होंगी।

स्वराज 963 एफई शुरुआत में पंजाब, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और छत्तीसगढ़ में उपलब्ध होगा और चरणबद्ध ढंग से 2018 के अंत तक संपूर्ण भारत में मिलने लगेगा।

स्वराज 963 एफई के विषय में

540 पीटीओ, 540 इकनाॅमिक पीटीओ और रिवर्स पीटीओ के साथ मल्टी स्पीड अग्रगति, आसान झटका, ट्रैक्टर फाॅरवर्ड तथा सिंगल रेंज में रिवर्स (सिंगल लीवर परिचालन, विशेषकर टीएमसीएच के लिए)।

बेहतर कार्य संपादन:

स्वराज 963 एफई एक शक्तिशाली 60एचपी इंजन से संचालित होता है जिससे इसी श्रेणी में बाकी ट्रैक्टरों की अपेक्षा 15 अतिरिक्त टाॅर्क मिलता है। यह विभिन्न अनुप्रयोगों और मृदा अवस्था के अनुसार अपेक्षित शक्ति और गति उत्पन्न करती है। यह ट्रैक्टर उद्योग में सर्वश्रेष्ठ 400 घंटा सर्विस अंतराल के साथ भी मिलता है जिससे रखरखाव के खर्च में कमी आती है और सर्विस स्टेशन में जाने का समय बचता है। इसमें लगे ज्यादा बड़े रेडिएटर की बदौल्त इंजन की कूलिंग बढ़ती है और इस तरह किसानों को इंजन गर्म होने की चिंता से मुक्त होकर ज्यादा लंबे समय तक इसका प्रयोग करने में आसानी होती है।

यह श्रेणी की सर्वश्रेष्ठ 2,200 किलोग्राम उत्तोलन क्षमता, कुशल कूलिंग के लिए बड़े रेडिएटर वाली शक्तिशाली स्वाभाविक चूसक (नाॅन टर्बो) इंजन से लैस है। 0.5 किलोमीटर/प्रतिघंटा की क्रीप स्पीड के कारण यह केला मलिं्चग और प्याज रोपाई जैसे कार्यों के लिए उपयुक्त है।

उच्चतर उत्पादकता:

स्वराज 963 एफई के उन्नत ट्रांस्मिशन में 12एफ ग 2आर गीयर बाॅक्स लगा है जिसमें 0.5 किमी/घंटा से 31.5 किमी/घंटा तक के गीयर चयन का व्यापक विकल्प उपलब्ध है। इस विशेषता के कारण यह सभी तरह के कार्यों और बेहतर उत्पादकता के अनुकूल है।

इस ट्रैक्टर में उच्च उत्तोलन क्षमता हाइड्राॅलिक सिस्टम भी लगी है जिससे यह विभिन्न तरह की जुताई और बुवाई के लिए उपयुक्त है। उच्चतर क्षमतायुक्त हाइड्राॅलिक पम्प से त्वरित उत्तोलन संभव होता है और इस ट्रैक्टर की उत्तोलन क्षमता 2200 किलोग्राम की है, जो श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ है।

टेक्नोलाॅजी:

यह बड़े आकार (12 इंच) के स्वतंत्र पीटीओ क्लच, सिंक्रोमेश ट्रांस्मिशन, 3-रेंज स्पीड विकल्प (12एफ और 2आर), तीव्र उत्तोलन के लिए उच्चतर पंम्प फ्लो युक्त प्रीसिशन हाइड्राॅलिक के साथ मिलता है।

आराम और एग्रोनॉमिक्स:

स्वराज963 एफई की बनावट, चालक के आराम और सुविधा में नए मानदंड स्थापित करने वाली डिजाइन में तैयार की गई है। इसमें सिंगल लीवर परिचालन की व्यवस्था है जिसके कारण फसल कटाई में काफी आसानी होती है  यह ट्रैक्टर बड़े प्लैटफाॅर्म, आरामदेह सीट, सस्पेंडेड पेडल्स और सिंगल शिफ्ट गीयर लीवर्स के साथ मिलता है। इस ट्रैक्टर की बनावट शानदार है, सुव्यवस्थित औजार समूह की व्यवस्था है और एक सिंगल पीस बोनेट है, जिनसे यह देखने में काफी आकर्षक लगती है।

1 दिन में 3900 गैलन पानी निकालता है यह “पहिया पंप”,वीडियो देखें

भारत में बहुत से किसान चल रहे नाले ,नदी बड़े रजबाहे के करीब रहते हैं, हालांकि, कई कारकों के कारण वह पानी का उपयोग करने में असमर्थ हैं। ऐसे किसानो के लिए पानी की ऊर्जा का उपयोग करने में सक्षम यह अद्भुत पानी पहिया पंप बहुत कामयाब साबित हो सकता है।

इसे पहली बार 1746 में बनाया गया था और अब इसे पुनः निर्मित किया गया है और हल्के और सस्ती आधुनिक सामग्री का उपयोग करके बहुत ही कामयाबी से त्यार किया गया है ।इसका डिजाइन इतना आसान है के इसको कोई भी त्यार कर सकता है ।

वाटर व्हील पंप कैसे काम करता है

इस पानी पहिया पंप का 6 फ़ीट व्यास पहिया होता है , जिसे 1-1/4 इंच के 160 फीट की पॉलीथीन पाइप से त्यार किया जाता है, जो प्रति दिन 40 फीट की दुरी तक 3900 गैलन पानी पहुंचने में सक्षम होती है। पंप को काम करने के लिए कोई ईंधन या बिजली की आवश्यकता नहीं होती है और इसलिए पर्यावरण अनुकूल है।

एक बार जब कुंडली के निचले एक चौथाई हिस्से को पानी में डुबोया जाता है तो पानी के बहाव से पूरे कुंडल घूमती है, तो हवा का एक क्रम बदलता है और पानी पाइप के साथ कुंडली के केंद्र बिंदु की ओर बढ़ना शुरू हो जाता है और इस पंप के केंदर में एक और पाइप लगी होती जिस से हम पानी को काफी दुरी तक लेकर जा सकते है ।

ये पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

आ गया त्रिशूल फार्म मास्टर जो कम पैसों में करे ट्रेक्टर के सारे काम

एक किसान के लिए सब से ज्यादा जरूरी एक ट्रेक्टर होता है । लेकिन महंगा होने के कारण हर किसान ट्रेक्टर खरीद नहीं सकता । क्योंकि छोटे से छोटा ट्रेक्टर भी कम से कम 4 लाख से शुरू होता है । लेकिन अब एक ऐसा ट्रेक्टर आ गया है जो ट्रेक्टर से 4 गुना कम कीमत पर भी ट्रेक्टर के सभी काम कर सकता है । जी हाँ यह है त्रिशूल कंपनी द्वारा त्यार किया हुआ त्रिशूल फार्म मास्टर ( Trishul Farm Master )

मोटर साइकिल जैसे लगने वाला यह ट्रेक्टर एक छोटे किसान के सारे काम कर सकता है । त्रिशूल फार्म मास्टर से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है।इसकी कीमत तकरीबन 1 लाख 45 हजार रु है।

त्रिशूल फार्म मास्टर मशीन की जानकारी

  • इंजन – 510 CC ,फोर स्ट्रोक
  • लंबाई – 7.5 फ़ीट . चौड़ाई – 3 फ़ीट. ऊंचाई – 4 फ़ीट.
  • वजन – 440 किलोग्राम
  • ग्राउंड से उचाई – 10 इंच
  • इंजन सिलेंडर – एक
  • प्रकार- एयर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 3000
  • डीज़ल की खपत – 650 मी.ली एक घंटे में
  • गिअर – 4 आगे, 1 रिवर्स
  • डीज़ल टैंक कैपेसिटी – 14 लीटर

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इसे खरीदना चाहते है तो नीचे  दिए हुए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते है

घोड़ावदार रोड , गोंडल
Dist :राजकोट (गुजरात)
फ़ोन:98252 33400

15 मिनट में 1 ट्राली भूसा भर देती है ये भूसा भरने वाली मशीन ,यहाँ से खरीदें

तमाम फसलों में कटाई व मड़ाई करने के बाद निकले भूसे को भरने में बहुत समय लगता है और तकलीफ भी बहुत होती है. हाथ से भरने और ज्यादा समय लगने के कारण लागत भी बढ़ जाती है. कई बार तो समय पर भूसा न भर पाने के कारण खेत पर ही काफी भूसा हवाओं द्वारा उड़ा दिया जाता है या फिर बरसात की चपेट में आने के कारण बुरी तरह से भीग जाता है.

मगर अब चिंता करने की बात नहीं है, क्योंकि भूसा भरने वाली खास मशीन बाजार में आ चुकी है. इसे मध्य प्रदेश की एक निजी कंपनी ने ईजाद किया है. यह मशीन स्ट्रा ब्लोअर के नाम से बाजार में आ गई है.

स्ट्रा ब्लोअर से संबंधित जानकारियां इस तरह हैं :

  •  यह मशीन पूरी तरह स्वदेशी तकनीक पर आधारित है. ट्रैक्टर चालित इस मशीन को किसी भी कंपनी के ट्रैक्टर के सहारे आसानी से चलाया जा सकता है. इस का आकार देखने में तोपनुमा होता है.
  • भूसा भरने और निकालने के लिए इस मशीन में 6-6 इंच लंबाई के 2 पाइप लगाए जाते हैं, जिन्हें सुविधा और जरूरत के मुताबिक घटायाबढ़ाया जा सकता है.
  • भूसा भरने वाले पाइप को सक्सन पाइप और भूसा बाहर निकालने वाले पाइप को डिलीवरी पाइप कहा जाता है.

  • इस मशीन से 15 मिनट में 1 ट्राली भूसा भरा जा सकता है.
  • इस के जरीए 20 फुट ऊंचाई तक भूसा भर सकते हैं.
  • अगर भूसा गीला हो तो भी इस मशीन से भूसा भरने में कोई परेशानी नहीं होती है.
  • कंपनी सीधे बिक्री का काम करती है, जिस से देश भर में कहीं इस के डीलर नहीं हैं. इस की बुकिंग कर के इसे हासिल कर सकते हैं.
  • सीधे बिक्री के पीछे कंपनी का मानना है कि इस से किसानों को सस्ती दर पर मशीनें मिल जाती हैं.

ज्यादा जानकारी के लिए कंपनी के प्रबंध संचालक भगवान दास विश्वकर्मा के मोबाइल नंबर 09425483416 पर संपर्क किया जा सकता है.

कंपनी का पूरा पता इस प्रकार है :

भारत कृषि यंत्र उद्योग, उदय नगर कालोनी, सागर रोड, विदिशा (मध्य प्रदेश)

फोन नंबर : 07592-250216, 09826294216

वीडियो देखे

इजरायल की पावरफुल मशीनें, इनकी टेक्नोलॉजी का लोहा मानती है दुनिया

इस समय दुनिया के कई देश सूखे का सामना कर रहे हैं। वहीं, इजरायल ने आधुनिक टेक्नोलॉजी से न सिर्फ खेती से जुड़ी कई समस्याएं खत्म कीं, बल्कि दुनिया के सामने खेती को फायदे का सौदा बनाने के उदाहरण रखे हैं।

इजरायल ने न केवल अपने मरुस्थलों को हराभरा किया, बल्कि अपनी तकनीक को दूसरे देशों तक भी पहुंचाया। खेती-किसानी के लिए इजरायल ने बाग-बगीचों और पेड़ों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने जैसी कई ऐसी मशीनें बनाईं, जिनकी आज दुनिया भर में तूती बोल रही है।

कुछ ही घंटों में ही जोत ली जाती हैं सैकड़ों एकड़ जमीन

इजरायल में बहुत कम बारिश होती है। इसके चलते यहां बारिश का फायदा जल्द से जल्द उठाना होता है। आमतौर पर खेत जोतने में ही काफी समय लग जाता है। इसके लिए इजरायल ने इटली से खेत जोतने वाली ये विशालकाय मशीनें खरीदी थीं।

इसके बाद इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने इससे भी आधुनिक मशीनों का प्रोडक्शन शुरू किया। इस तरह अब इजरायल में ये मशीनें अधिकतर किसानों के पास है। इसके अलावा किसान इन्हें किराए पर भी ले सकते हैं। इन मशीनों से कुछ ही घंटों में सैकड़ों एकड़ जमीन जोत ली जाती है।

कारपेट की तरह शिफ्ट कर देती हैं बगीचे

फोटो में दिखाई दे रही यह मशीन इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई है। इसका उपयोग बाग-बगीचों और पौधों को एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट करने के लिए किया जाता है। इससे घास-फूंस और पौधों की जड़ों तक को नुकसान नहीं पहुंचता। अब ऐसी मशीनों का उपयोग कई देशों में होने लगा है।

पानी की बचत के लिए अनोखी मशीन

इजरायल में पानी की कमी होने के चलते यहां नहरों की व्यवस्था नहीं है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए इजरायल के रमत नेगेव डिजर्ट एग्रो रिसर्च सेंटर ने खेतों की सिंचाई के लिए इन स्पेशल मशीनों को डिजाइन किया। इससे न सिर्फ खेतों की सिंचाई होती है, बल्कि पानी की भी काफी बचत हो जाती है। मशीन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इसे कहीं भी आसानी से ले जाया जा सकता है।

मूंगफली जमीन से निकालकर साफ भी कर देती है

इजरायल के इंस्टीट्यूट ऑफ एग्रीकल्चर इंजीनियरिंग द्वारा डवलप की गई यह मशीन मूंगफली और जमीन के अंदर होने वाली सब्जियों व अनाज को निकालने का काम करती है। मशीन की खासियत यह है कि यह सिर्फ मूंगफली को जमीन से निकालने के बाद उसे साफ भी करती जाती है।

इसके बाद मशीन में ही बने ड्रमों में भरती चली जाती है। इससे न सिर्फ किसानों की मेहनत ही बचती है, बल्कि कम समय में ढेर सारा काम हो जाता है। बता दें कि इजरायल में मूंगफली की काफी खेती होती है।

पेड़ों को जड़ सहित उखाड़कर दूसरी जगह कर कर देती है शिफ्ट

सूखा होने के बाद भी इजरायल हरा-भरा देश है। दरअसल, इजरायल ने अन्य देशों की तरह विकास के नाम पर पेड़-पौधों को नाश नहीं होने दिया। इसके लिए यहां पेड़ काटने के बजाय उन्हें शिफ्ट करने की प्रक्रिया अपनाई गई।

इसके लिए इजरायली कंपनी ‘एग्रोमॉन्ड लि.’ ने ऐसी मशीनों का निर्माण किया, जो बड़े से बड़े पेड़ को जड़ सहित उखाड़कर उन्हें दूसरी जगह शिफ्ट कर देती है। इससे पेड़ों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचता।

बहुत ही कम ख़र्चे में फसल काटती है यह मिनी कंबाइन ,जाने पूरी जानकारी

भारत में अब भी गेहूं जा दूसरी फसलें काटने का काम हाथ से ही होता है क्योंकि भारत में किसानो के पास जमीन बहुत ही कम है और वो बड़ी कंबाइन से फसल कटवाने का खर्च नहीं उठा सकते इस लिए अब एक ऐसी कंबाइन आ गई है जो बहुत कम खर्च में फसल काटती है ।

साथ ही अब बारिश से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है मिनी कंबाइन Multi Crop हार्वेस्टर यह कंबाइन छोटे किसानो के लिए बहुत फयदेमंद है इस मशीन से कटाई करने से बहुत कम खर्च आता है और फसल के नुकसान भी नहीं होता।

बड़ी कंबाइन से फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।

अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं । छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है । यह मशीन 1 घंटे मे 2 एकड़ फसल की कटाई करती है ,यह मशीन एक दिन मे 14 एकड़ तक फसल की कटाई करती हैऔर इसमें अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान,मक्का अदि भी काट सकते है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर आप इस कंबाइन को खरीदना चाहते है तो नीचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क करें

Address–  Karnal -132001 (Haryana), India
phone -+91 184 2221571 / 72 / 73
+91 11 48042089
Email-exports@fieldking.com

आ गई ऐसी मशीन जो फसल काटने के साथ फसल का बंडल भी बना देगी

अब किसानों को मजदूर ढूंढ़ने में दिक्कत नहीं होगी। क्योंकि अब फसल के बण्डल बनाने के लिए लेबर की जरूरत नहीं रहेगी । फसल काटने के लिए पहले ही मशीन उपलब्ध थी लेकिन अब ऐसी भी मशीन आ गई है जो गेहूं के फसल का बंडल भी बना देगी।

BCS कंपनी की मशीन आ गई है जो गेहूं की फसल काटने के बाद उसका बंडल बांधने का काम भी करती है। इस मशीन के आ जाने से किसानो काफी परेशानियों का समाधान हो जायगा । क्योंकि पहले कंबाइन के काटने से जब वह गेहूं को बिलकुल जड़ के पास से काटती तो थी लेकिन उससे भूसा नहीं मिलता था और किसानो के सामने पशुओं के चारे की समस्या उत्पन्न हो जा रही थी।

अब इस मशीन के आ जाने से कटे हुए गेहूं से पर्याप्त मात्रा में भूसा भी बना सकते है । साथ ही मजदूर खोजने की परेशानी से भी मुक्ति मिल जाएगी। सिर्फ गेहूं ही नहीं यह मशीन गेहूँ , धान ,सोयाबीन ,धनिया, मूंग ,तिल्ली ,चना, मसूर, अलसी, सरसो और हर प्रकार के चारे की फसल काट सकते है ।

इस मशीन की कीमत बाजार में करीब ढाई लाख रुपये है। इसे ट्रैक्टर के बिना चलाया जा सकता है। मशीन में 10.2 हार्सपावर का इंजन बंधा हुआ है। मशीन एक घंटे में करीब एक एकड़ फसल काटकर उसके गट्ठर बांध देती है। जिसके लिए यह सिर्फ 1 लीटर डीज़ल का प्रयोग करती है । इसके 5 गेअर होते है जिसमे 4 आगे के और एक पीछे का होता है ।

अगर आप इसको खरीदना चाहते है तो BCS कंपनी के डीलर से संपर्क कर सकते है ।इसके डीलर भारत के सभी छोटे बड़े शहरों में है और ज्यादा जानकारी के लिए आप इनके हेड ऑफिस जो लुधिआना (पंजाब) में है संपर्क कर सकते है जिनके नंबर नीचे दिए है

Mr. S. K. Bansal + 91 98728 – 74743
Mr. Malkeet Singh Babrah (Head Production & Purchase)
+ 91 98728 – 74745

यह कैसे काम करते है देखने के लिए यह वीडियो देखें

बहुत कमाल की है यह गन्ना काटने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

भारत में गन्ने की फसल मुख्या फसलों में से एक है इस लिए देश के बहुत सारे किसान गन्ने की खेती पर निर्भर है । लेकिन सब से मुश्किल काम गन्ने की कटाई का होता है। अगर इसको हाथ से करें तो बहुत वक़्त और मेहनत लगती है इस लिए अब एक ऐसी मशीन आ गई है जिस से गन्ने को काटने का काम बहुत आसानी से किया जा सकता है ।

शक्तिमान कंपनी द्वारा गन्ना काटने वाली मशीन त्यार की गई है जो गन्ना काटने का काम बहुत तेज़ी से कर सकती है । इस मशीन का इंजन बहुत ही ताकतवर है इसमें 6 सिलिंडर वाला 173 हॉर्स पॉवर का इंजन लगा है ।यह मशीन पूरी तरह से आटोमेटिक है इसके केबिन में डिस्प्ले लगा हुआ है जिस पर हम मशीन की सारी गतिविधि देख सकते है ।

इस मशीन को चलना बहुत ही आसान है । केबिन में AC भी लगा होता है पूरी मशीन को सिर्फ एक लिवर (जॉय स्टिक) से चल्या जाता है ।अगर आप इस मशीन की कीमत जा फिर कोई और जानकारी चाहते है तो निचे दिए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते है ।

  • TIRTH AGRO TECHNOLOGY PVT. LTD.
    Dist.: Rajkot.State: Gujarat- INDIA
    Pincode-360311.
  • +91 (2827) 661637 (30 Lines) / +91 (2827) 270 537
  • SMS +91 9925250169 /
  • mail– info@shaktimanagro.com

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

किसान ने बनाई छोटे किसानो के लिए फसल कटाई मशीन

खेती-बाड़ी में सबसे मेहनत का काम होता है फसल की कटाई करना। इसमें समय के साथ-साथ पैसा भी अधिक लगता है और साथ ही यह डर रहता है कि कहीं ऐसे में अगर बारिश या आंधी-तूफान आ गया तो पूरी फसल बर्बाद हो जाएगी। इन समस्याओं से निबटने के लिए जो मशीनें बनाई गईं वो सिर्फ बड़े किसानों के लिए ही लाभदायक थीं क्योंकि वह काफी महंगी होती हैं। ऐसे में छोटे किसानों की समस्यों को ध्यान में रखते हुए एक किसान ने ऐसा यन्त्र बनाया जिसे छोटे किसान आसानी से खरीद सकते हैं।

”खेत में सबसे ज्यादा समस्या कटाई में आती है। बाकी सभी काम के लिए मशीन हैं, कटाई के हार्वेस्टर (कटाई मशीन) बड़े किसान ही खरीद सकते हैं, इसलिए मुझे छोटे किसानों के लिए रिपर यानी कटाई मशीन मार्केट में लाना था।” मध्य प्रदेश के विदिशा ज़िले के सोजनवाले गाँव के किसान भगवान सिंह डांगी (63 वर्ष) बताते हैं,

”हमारे यहां सोयाबीन की खेती हेती है मैं भी करता हूं। इसकी कटाई करना काफी मुश्किल होता है था, इस लिए मैंने ऐसी मशीन बनाने का फैसला किया और पांच वर्ष पहले यह मशीन बनाई।” भगवान सिंह भले ही सिर्फ आठवी तक पढ़ें हैं, लेकिन मशीनों के प्रति उनका रुझान बचपन से ही था।

उनका रिपर विंडरोअर एक ऐसी मशीन है जो फसल काटती है और कटे अनाज की लाइन को बीच में जमा कर देता है। इस अविष्कार के लिए उन्हें तीन अवार्ड भी मिले, जिसमें उन्हें वर्ष 2013 में राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

उनके गाँव के आस पास के क्षेत्र में सोयाबीन एक बड़ी फसल है। फसल कटाई के व्यस्त समय में मजदूर की कमी एक बड़ी समस्या है। इसका समाधान निकालने के लिए भगवान सिंह ने एक ऐसी मशीन चाहते थे जो दो मुख्य कार्य कर सके- कटाई और विंड्रोइंग यानी कटी फसलों को एक जगह जमा करना। कटाई में पूरी फसल को व्यवस्थित तरीके से काटना और जबकि विंड्रोइंग का मतलब कटी फसल को एक लाइन में जमा करना ताकि आसानी से पैक किया जा सके और कटाई के बाद की प्रक्रिया को पूरा किया जा सके। इसके बाद उन्होंने इस रिपर को बनाने का फैसला किया।

उन्होंने बताया, ”इस मशीन से सोयाबीन, चना और गेहूं की कटाई की जा सकती है। इससे एक दिन में 10 एकड़ फसल की कटाई आसानी से की जा सकती है और अगर मज़दूरों से फसल की कटाई की जाए तो एक दिन में 20 मज़दूर सिर्फ एकड़ फसल की कटाई कर पाएंगे।”

मशीन को चलाने के लिए सिर्फ एक आदमी की जरूरत पड़ती है और मशीन के पीछे दो लोग चाहिए जो फसल को जमा करने का काम करेंगे। यह छोटे से खेत में, खड़ी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना तेज गति से मुड़ने में सक्षम है। परंपरागत रिपर यूनिट में, प्राइमर मूवर तक पहुंचे में कटी फसल सीधे नीचे गिर जाती है जिससे अनाज का नुकसान होता है।

नई खोज में विंड्रोइंग अटैचमेंट में नयापन डिजाइन और स्थानिक उपायों में मौजूद होती है, इससे अनाज नुकसान बहुत कम होता है। जमा किया गया अनाज दोनों टायर के बीच साफ-सुथरी लाइन में गिरता है जिससे जमा करने समेत दूसरे कार्य आसानी हो जाता हैं।

वो कहते हैं कि बेहतर प्रगति के लिए खेती के तरीकों में बदलाव किया जाना चाहिए। उनका मानना है कि आज खेती का ढंग अच्छा नहीं है, हमें तरक्की करने के लिए खेती करने का तरीका बदलना पड़ेगा और वो इस बदलाव में भागीदारी निभाना चाहते हैं जैसे कि, खेती के नए तरीके विकसित करके, कृषि कार्यप्रणाली और बीज की किस्मों में बदलाव कर।