अब पथरीली ज़मीन पर स्प्रींग कल्टीवेटर से करें खेत की जुताई

स्प्रींग टाइन कल्टीवेटर में फ्रेम, टाइन, रिवर्सिबल शावेल, खिंचने वाली प्रणाली, भारी कार्य करने वाला स्प्रिींग इत्यादि भाग होते हैं। स्प्रींग का कार्य टाइन को चलते समय कठोर-वस्तु एवं पत्थर से बचाना है। शावेल हीट ट्रिटेड स्टील का बना होता है।

इसका इस्तेमाल विशेष तोर पर उस भूमि में किया जाता है जहाँ पर बड़े पथर ज्यादा होते है ।
यहाँ पर आम कल्टीवेटर के इस्तमाल से कल्टीवेटर को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है और उसके मुड़ने और टूटने का डर रहता है । वहीँ स्प्रिंग कल्टीवेटर में स्प्रिंग लगे होने के कारण ये टूटता नहीं है।

यह कल्टीवेटर माउन्टेड टाइप होता हैं जो ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक प्रणाली द्वारा नियंत्रित होता है। यह यंत्र पशु चालित कल्टीवेटर (डोरा) की तुलना में 50 प्रतिशत मजदूरी की बचत तथा 30-35 प्रतिशत संचालन खर्च में बचत करती है।

उपयोग: इसका मुख्य कार्य सूखा या गीला नर्सरी बेड तैयार करने एवं चौड़ी कतार में निकाई-गुड़ाई करने तथा कादो करने में भी इसका प्रयोग करते हैं।

  • उत्पाद विवरण:
  • फ़्रेम: 75 x 40 मिमी
  • ट्यून्स संख्या : 11
  • ट्यून्स: 50 x 19 मिमी (जाली)
  • एंगल पिन: 50 x 6 मिमी
  • स्प्रिंग: 10 mm
  • लंबाई: 2458 मिमी:
  • पावर की आवश्यकता (एचपी): 50 – 55 एचपी
  • वजन : 260 किलोग्राम

 

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे

भारत इंजीनियरिंग कंपनी, शाम नगर, जी .टी. रोड, करनाल , हरियाणा,

MOBILE -+91-0184-2274720 +91 9996915558

यह  कैसे काम करते  है उसके लिए वीडियो भी देखें

ये है ट्रेक्टर चलित राइस मिल जो 1 घंटे में निकालती है 1200 किलो चावल

किसान धान उगता है और बाजार में बहुत कम भाव में बेच देता है । व्यापारी द्वारा उसका आर्थिक शोषण होता है । जहाँ तक की अगर उसे खुद खाने के लिए चावल की जरूरत होती है तो उसे अपने खाने के लिए चावल बाजार से खरीदना पड़ता है क्योंकि उसके द्वारा पैदा की हुई धान पर छिलका लगा होता जिसको खाने से पहले उतरना पड़ता है । इन दोनों बातों का हल अब निकल आया है ।

अब बाजार में ऐसी ट्रेक्टर से चलने वाली राइस मिल आ गई है जिस से आप चावल का छिलका आसानी से उतार सकते है । जिस से किसान चावल को सीधे बाजार में बेच सकता है । और अपने खाने के लिए भी रख सकता है । सीधे बाजार में बेचने से किसानो को दोगुना लाभ हो सकता है । इस मशीन को चलने के लिए ट्रेक्टर की पावर 34 से 50 H.P. तक होनी चाहिए । यह मिल एक घंटे में 1000-1200 किलो चावल साफ़ कर देती है ।

इस मिल की मुख्य विशेषता यह है, कि इसमें एक ही बार में धान की डिहस्किंग एवं पॉलिशिंग होती है तथा चावल भी कम टूटता है एवं ऊर्जा की खपत भी कम होती है। इस मिल को आसानी से ट्रेक्टर से एक गांव से दूसरे गांव ले जाया जा सकता है। इसके परिणाम अत्यंत उत्साह जनक पाए गए हैं, जिसके कारण कृषकों में इसकी मांग बढ़ रही है।

ये मिल कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

इस मिल की पूरी जानकारी के लिए आप निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क कर सकते है ।

पूर्वांचल कृषि यन्त्र उद्योग
Village– Mubarakpur, Tanda, Distt:-Ambedkar Nagar, Uttar Pradesh,
Phone : +917210113837

 

ये है पेडल से चलने वाला पंप एक घंटे में निकलता है 5000 लीटर पानी

खेती के लिए जो सबसे ज्यादा जरूरी चीज है वो है पानी ।पानी के बिना खेती की कल्पना करना भी मुश्किल है । लेकिन सिंचाई के लिए जरूरी ईंधन और बिजली हर किसान नहीं खरीद सकता । ऐसे किसानो के लिए बिना खर्चा किये अब आ गया है पेडल पंप जा ट्रेडल पंप (treadle pump)। इस पंप की खसयत यह है के पानी निकलने के लिए आपको बस खड़े होकर पेडल दबाने होते है । जिस से पानी अपने आप निकलना शुरू हो जाता है ।

इस पंप को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाना बहुत आसान है क्योंकि इसका वजन सिर्फ 12 किल्लो है ।एक आदमी जिसका वजन 60 किल्लो है वो इस पंप से 15 फ़ीट गहरे पानी को उठा कर 45 फ़ीट तक सिंचाई कर सकता है । यह मशीन एक घंटे में 2000- 5000 लीटर पानी निकल सकती है ।

सिर्फ खेत में ही नहीं इसे आप अपने घर की छत पर पानी वाली टंकी में पानी पहुंचने के लिए भी इसका इस्तमाल कर सकते है । इसके इलावा आप इसके इस्तमाल से बगीची को भी पानी दे सकते है । इसके साथ हम फवारा सिंचाई भी कर सकते है । इसकी कीमत भी सिर्फ 4050 रुपये से शुरू हो जाती है ।

कहाँ से खरीदें यह ट्रेडल पंप (treadle pump)

यह ट्रेडल पंप (treadle pump) कई कम्पनियों द्वारा त्यार किया जाता है । आप इस लिंक https://dir.indiamart.com/impcat/treadle-pump.html के ऊपर क्लिक करके सभी कम्पनियों के नाम जान सकते है और किसी भी कंपनी से इसे खरीद सकते है । इसके इलावा हम आपको एक कंपनी का नाम और एड्रेस बताएँगे जिस से आप इस मशीन को खरीद सकते है उस कंपनी का नाम है “एकफ्लो ट्रेडले पंप (Ecoflo Treadle Pump)” यह नासिक महाराष्ट्र की कंपनी है । इसको खरीदने के लिए आप इस नंबर 08048402340 पर संपर्क कर सकते है ।

यह पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

इस ट्रेक्टर की खूबियां जान कर रह जाएंगे हैरान

लोगों के शौक भी अजीबोगरीब होते हैं। कोई बीएमडब्ल्यू और मर्सीडिज में लग्जरी ड्राइविंग खोजता है तो कोई टैक्टर में। 1 करोड़ 69 लाख रुपए का यह टैक्टर इसी सपने से जन्मा है। यह साइंस और इनोवेशन के साथ लग्जरी और शौक का अनोखा मिश्रण है। किसी टॉप एसयूवी और इस टैक्टर में कई सारी समानताएं हैं। 24,200 पाउंड वजन के इस टैक्टर की टॉप स्पीड लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो लग्जरी के मामले में कारों को भी मात देती है।

 

एसयूवी से कई समानताएं

महंगी लग्जरी एसयूवी और इस टैक्टर में कई सारी समानताएं हैं। इसमें 6.7 लीटर टर्बो-डीजल इंजन, डूअल-क्लच गीयर-सेट और ऑटोमैटेड लॉकिंग डिफरेंशियल्स लगे हुए हैं। वास्तव में इस ट्रैक्टर को कार जैसा बनाने की कोशिश की गई है। वैसे भी यूरोप के रईस किसान हाई-होर्सपावर की मशीन के साथ टाइटर टर्निंग रेडियस और प्रीमियम डिजाइन के शौकीन हैं। उनका मानना है कि किसानी बेहद कठिन और 24 घंटे तथा सातों दिन होने वाला काम है। ऐसे में टै्रक्टर को थोड़ा लग्जरी होना चाहिए।

धुंआ नहीं निकलता

केस आईएच का नया ऑप्टिम 4 इनटू 4 ट्रैक्टर एक यूरोपीय लग्जरी सामान की तरह है, जो अमीरों के लिए प्राइज्ड पजेशन जैसा है। इसमें यूरोपीय यूनियन के प्रदूषण, कोलाहल और उत्सर्जन संबंधी सभी मानकों और प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन किया गया है। ऑटोमैटेड सिस्टम्स के कारण इससे धुआं न्यूनतम निकलता है। इससे जुड़े बेलर, सीडर, डिस्क कल्टीवेटर, बकेट्स जैसी चीजों का संचालन बेहद स्मूथ है। इसमें कई सारे पावर हाइड्रॉलिक्स लगे हुए हैं।

ये बातें भी हैं खास

  • 24,200 पाउंड वजन का यह खूबसूरत ट्रैक्टर चमचमाती लग्जरी कार को भी देता है मात
  • 50 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से भागती है यह शानदार मशीन
  • 2017 केस आईएच ऑप्टिम को मिला ट्रैक्टर ऑफ द ईयर का खिताब

टैक्टर ऑफ द ईयर

देखने में विशालकाय और डीजल से चलने वाला यह टैक्टर बाहर से बुलडोजर की तरह दिखता है। हालांकि इसका इंटीरियर इतना खूबसूरत और आरामदायक है कि इससे सवारी करना लड़कियों को भी पसंद है। क्योंकि एक तरफ जहां इसकी चारों ओर धूल होती है, वहीं इसके अंदर बैठा आदमी किसी लग्जरी कार में बैठे होने के अहसास में खोया रहता है। इस टैक्टर का नाम है- 2017 केस आईएच ऑप्टिम 270 सीवीएक्स। अपनी खासियतों के कारण ही ट्रैक्शन और आइरिश फार्मर्स जैसी मासिक मैग्जीन के पत्रकारों के एक समूह ने इसे टैक्टर ऑफ द ईयर का खिताब दिया।

ये है खेतीबाड़ी कचरे और गोबर से खाद बनाने वाली मशीन

रैपिड कॉम्पोस्ट एरिएटर (खाद बनाने वाली मशीन) ट्रैक्टर में लगाई जा सकने वाली वो मशीन है, जो कचरे को खाद बनाने का काम करती है। गुरमेल सिंह धोंसी ने 2008 में किसानो की मज़बूरी देख कर यह मशीन त्यार की ,इस से पहले जब कोई किसान कम्पोस्ट खाद बनाता था तो उसे ज्यादा लेबर की जरूरत होती थी इस लिए किसान को एक किल्लो के मगर 5-6 रुपये तक का खर्चा आता था ।जिस कारण कम्पोस्ट खाद बनाना काफी महंगा और मेहनत भरा काम था । इस मशीन को बनाने से पहले सिर्फ गोबर के इस्तमाल से ही कम्पोस्ट खाद त्यार करते थे । लेकिन अब खेतीबाड़ी कचरे से भी खाद त्यार की जा सकती है ।

इस से पहले जिस बायोमास को कुदरती तरीके से खाद बनने में 90 से 120 दिन लगते हैं, वो काम ये मशीन 25 से 35 दिनों में कर देती है। इस मशीन से एक घंटे में 400 टन तक खाद बनाई जा सकती है। यही वजह है कि गुरमेल सिंह धोंसी को राष्ट्रपति ने सम्मानित किया है।

गुरमेल सिंह धोंसी ने ऑर्गेनिक खाद बनाने वाली इस भारी-भरकम मशीन का ईजाद किया तो उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद थी कि धीरे-धीरे ही सही, लोगों को इस मशीन की अहमियत समझ में आने लगेगी। और क्यों न हो? एक ऐसी मशीन जो खेत के कचरे को बेहद कम लागत में खाद में तब्दील कर दे, वो किस किसान के काम नहीं आएगी?

उन्हें 2012 में तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने सम्मानित किया। किसान गुरमेल सिंह धोंसी खेती में अपने नए आइडियाज से मिसाल कायम की। छोटे-से गांव से आए धोंसी ने अब तक 24 ऐसे उपकरण बना दिए जो किसानों के रोजमर्रा काम में आते हैं। जिनकी डिमांड अब पाकिस्तान से भी आती है।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

मशीन को खरीदने जा और कोई जानकारी के लिए इस पते पर संपर्क करें

Address (Factory) : H-56, Industrial Area, Padampur,
Dist- Shriganganagar (Raj.)
Tel. No : 01505-223570 , 222570

चारा काटने और कुतरा करने वाली मशीन,1 घंटे में काटती है 3 टन हरा चारा

हरा चारा काटने वाली मशीने तो आप ने बहुत देखी होंगी लेकिन काटने के बाद चारे का कुतरा(छोटा छोटा काटना ) भी करना पड़ता है ।  जिस से पशु अच्छी तरह से चारे चारे को खा सकते है । इस लिए आप को पहले चारा काटना पड़ता है फिर कुतरना पड़ता है ।

लेकिन आज हम जिस मशीन की बात कर रहे है उसकी बात ही अलग है यह मशीन काटने के साथ साथ चारे के कुतरने का भी काम करती है और साथ में इतनी तेज़ी काम करती है के सिर्फ एक घंटे में 3 टन हरा चारा और 1 टन सूखा चारा काट कर कुतर भी देती है । इस मशीन से आप हर तरह का चारा आसानी से काट सकते है चाहे वो किसी भी फसल का क्यों ना हो ।

इस मशीन का नाम है मल्टी क्रॉप चॉपर – 2227 ( MULTI CROP CHOPPER- 2227 ) ।  यह मशीन संतोष एग्री मशीनरी द्वारा त्यार की गई है । इस मशीन को किसी भी ट्रेक्टर से जोड़ा जा सकता है जिसकी क्षमता 80HP जा उस से ज्यादा हो । यह मशीन चारे का साइलेज बनाने के लिए और डेरी फार्म के लिए बहुत ही उपयोगी है क्योंकि उनको बड़ी मात्रा में चारा चाहिए होता है और वह भी बहुत ही कम समय में ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

अगर आप इस मशीन की कीमत जानना चाहते है तो निचे दिए हुए पते पर संपर्क कर सकते है

  • Company Name : SANTHOSH AGRI MACHINERY
  • Address : No.282, Kartar Complex, Salem to cuddalur Main Road, Coimbatore – 636108, Tamil Nadu , India
  • Contact Person : Mr. Prem Kumar (Manager)
  • Mobile : +917373032415, +917373032411

प्रोफेसर का अनोखा जुगाड़, घास काटने वाली मशीन से बना दी धान काटने वाली मशीन

जेरोम सोरेंगे को-ऑपरेटिव कॉलेज और वर्कर्स कॉलेज में मनोविज्ञान के प्रोफेसर रहे हैं. रिटायरमेंट के बाद उन्होंने बालीगुमा गोड़गोड़ा में फार्म हाउस खोला. यहां वे सूकर, मुर्गी, ऐमु और मछली पालन कर रहे हैं. थोड़ी जमीन पर खेती-बाड़ी भी है. उन्हें खेत में धान काटने-कटवाने में बहुत परेशानी होती थी.

इससे बचने के लिए वह दिमाग लगाते रहते थे. अंतत: उन्होंने धान काटने की मशीन बना डाली. उन्होंने अलग से कुछ किया नहीं. मवेशी को खिलाने के लिए उनके पास पहले से घास मशीन हेच कटर थी. इस मशीन में ही उन्होंने विज्ञान ढूंढ़ निकाला.

तर्क भिड़ाया कि इससे घास कट सकता है तो धान क्यों नहीं. धान तो कट जा रहा था लेकिन इसकी बालियां बिखर जा रही थीं. उनके मुताबिक इस समस्या का हल उनकी बेटी नीरा मृदुला सोरेंग ने ढूंढ़ निकाला. नीरा चिरीमिरी (छत्तीसगढ़) में रहती हैं. वहां से उन्होंने पापा को धान काटने वाली मशीन का फोटो ह्वाट्सएप किया. इससे प्रो सोरेंग को आइडिया मिल गया.

उन्होंने हेच कटर में प्रोटेक्टर की जगह धान की बाली समेटने के लिए प्लास्टिक की पुरानी बाल्टी काटकर लगा दी. हो गयी मशीन तैयार. जेरोम बताते हैं कि तीन मजदूर तीन दिन में जितना काम कर सकता है, उतना काम कुछ घंटे में यह मशीन कर देती है.

मशीन में सिर्फ दो लीटर डीजल खर्च होगा. दो लीटर डीजल की कीमत 120 से 130 रुपये होती है. मान लिया जाये दो घंटे मशीन चलाने के लिए आप एक व्यक्ति को 150 रुपये देते हैं. इस तरह हिसाब लगाया जाये तो कुल खर्च 280 रुपये या अधिक-से-अधिक 300 रुपये होता है.

धान काटने के लिए एक मजदूर की प्रतिदिन की मजदूरी 150 रुपये होती है. तो तीन मजदूर की तीन दिनों की मजदूरी 1350 रुपये होती है. इस तरह समय के साथ-साथ एक हजार रुपये से अधिक की बचत भी हो रही है.इनके इस प्रयोग के बाद बहुत सारी कंपनी यह मशीन बनाने लगी है .जिनमे बाल्टी की जगह पर धातु लगाई जाती है .और ब्लेड भी बदल दिया है . जिससे अब यह मशीन पूरी तरह से कामयाब बन गई है

इसी सिद्धांत पर बनी मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

महिंद्रा ने भारत में पेश किया पहला चालक रहित ट्रैक्टर,अब घर बैठकर होगी खेती

ऑटोमोबाइल कंपनी महिन्द्रा ने भारत में पहली बार ड्राइवरलेस (चालक रहित) ट्रैक्टर को लॉन्च किया है। ड्राइवरलेस ट्रैक्टर को लेकर महिन्द्रा एंड महिन्द्र कंपनी ने कहा, यह ड्राइवरलेस ट्रैक्टर दुनिया भर के किसानों को ध्यान में रखते हुए लांच किया गया है।

कंपनी के बयान के मुताबिक इस ट्रैक्टर को चेन्नई में स्थित ग्रुप के इनोवेशन और टेक्नोलॉजी हब महिन्द्रा रिसर्च वैली में विकसित किया गया है। यह ड्राइवरलेस ट्रैक्टर वैश्विक किसानों के लिए मशीनीकरण की प्रक्रिया को फिर से परिभाषित करने के लिये पूरी तरह से तैयार है। कंपनी का दावा है कि यह इस नई तकनीक से कृषि के भविष्य में बड़ा बदलाव आएगा।

महिन्द्रा एंड महिन्द्रा लिमिटेड के अध्यक्ष (फॉर्म इक्विपमेंट सेक्टर) राजेश जेजुरिकर ने कहा, ‘वर्तमान में कृषि संबंधित मशीनों की जरूरत पहले से बहुत ज्यादा है। मजदूरों की कमी और उत्पादकता और कृषि उत्पादित क्षेत्रों को बेहतर बनाने की जरूरत इसका प्रमुख कारण हैं।

हमने पिछले साल अपनी ‘डिजिसेंस’ टेक्नोलॉजी को लॉन्च किया था और अब चालक रहित ट्रैक्टर की पेशकश कर रहे हैं। इनके जरिए भारतीय किसानों को ट्रैक्टर के लिए इंटेलीजेंस के बेमिसाल स्तर को पेश किया जाएगा।’

टैबलेट के जरिए कंट्रोल

ट्रैक्टर में जियोफेंस लॉक लगा हुआ है जो इसे खेत की मेंढ़ के अंदर बने रहने में मदद करता है, ट्रैक्टर को टैबलेट की मदद से दूरदराज के इलाकों में कंट्रोल किया जा सकता है। ट्रैक्टर में जीपीएस आधारित ऑटोस्टीर टेक्नोलॉजी लगी हुई है जो इसे एक सीधी लाइन में चलने में मदद करती है।

इसमें एक ऑटो लिफ्ट भी लगी हुई है जो खेती के समय औजारों को अपने आप खेत जोतने के लिए नीचे कर देगी और काम पूरा होने के बाद औजारों को अपने आप ऊपर उठा लेगी। बिना ड्राइवर के खेत जोतने के लिए ट्रैक्टर में कई तकनीक को इस्तेमाल किया गया है।

फीचर और इंजन

महिंद्रा के इस ट्रैक्टर में 20 हॉर्सपॉवर से 100 हॉर्सपॉवर ताकत वाले इंजन के साथ लांच कर सकती है। यह ट्रैक्टर ड्राइवरलेस तकनीक को ध्यान में रखकर बनाया गया है। फीचर के चलते ग्राहकों को जीपीएस बैसेड तकनीक पर ऑटोस्टीयर दिया है। जिसके कारण ट्रैक्टर सीधी लाइन में चलता है। इसके अलावा ऑटो हैंडलेड टर्न का भी फीचर दिया है। जो ट्रैक्टर को मोड़ने में मदद करता है।

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पीवेट सिस्टम का बटन दबाते ही होने लगती है 320 बीघा खेत में बरसात

जैतसर (श्रीगंगानगर) : वह जमाना लद गया, जब फसलों के लिए बारिश का इंतजार होता था। बारिश नहीं आने पर यज्ञ प्रार्थनाएं होती थी। श्रीगंगानगर के जैतसर केंद्रीय कृषि राज्य फार्म में 1.37 करोड़ रुपए की लागत से दो पी-वेट सिस्टम लगे हैं, जिसका बटन दबाते ही पूरे खेत में कृत्रिम बारिश शुरू हो जाती है। दोनों सिस्टम एक साथ शुरू करने पर 350 से ज्यादा फव्वारे एक साथ शुरू हो जाते हैं।

जैतसर में दो पीवेट सिस्टम, पहला 52 लाख का, दूसरा 85 लाख का

पहले पीवेट सिस्टम की सफलता के बाद अब फार्म में दूसरा सिस्टम स्थापित किया गया है। डायरेक्टर कस्वां ने बताया कि 2011 में खरीदे गए 438 मीटर लंबे पीवेट की लागत 52 लाख रुपए थी। दूसरा पीवेट सिस्टम 498 मीटर लंबा लगाया गया है, जिसकी लागत 85 लाख रुपए आई है।

पीवेट सिस्टम ऐसे करता है काम

जैतसर केंद्रीय राज्य यांत्रिकी कृषि फार्म के डायरेक्टर रामकुमार कस्वां ने बताया कि जैतसर फार्म में मानव श्रम का न्यूनतम इस्तेमाल करने को देखते हुए 2011-12 में पहली बार पी-वेट उपकरण लाए गए। इसके ऊपर 10 इंच की पाइप पानी की मैन सप्लाई के लिए लगी होती है, इस पाइप के नीचे 4-4 इंच की चार पाइपें लगी होती हैं, जिनमें मैन पाइप से पानी आता रहता है।

इसके बाद नीचे आधा इंच की पाइव लगी होती है, जिसमें स्प्रिंकलर सिस्टल लगा है। एक साथ 7 पी-वेट जोड़े गए हैं। इस प्रकार एक पी-वेट 71 मीटर लंबा है जिसमें 36 फव्वारे लगे होते हैं। पूरा पीवेट सिस्टम बिजली पर चलता है। एक कमरे में छोटा सा डिस्प्ले बोर्ड लगा है।

इसमें पानी की सघनता, पानी छोड़ने की स्पीड अादि की जानकारी रहती है। यहीं कंट्रोल रूप से पूरा सिस्टम संचालित होता है और पीवेट को आगे पीछे किया जा सकता है। पूरे सिस्टम को आगे-पीछे भी किया जा सकता है। टायरों के पास 3-3 हॉर्स पॉवर की मोटरें लगी हैं, जो पूरे सिस्टम का संचालन करती हैं।

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ये है बैलों से चलने वाला ‘पंचाल पंप’, एक घंटे में निकालता है 25 हजार लीटर पानी

बिजली संकट, डीजल के बढ़ते मूल्य, रासायनिक खादों से बंजर होती खेती, जमीन की घटती उर्वरा शक्ति ने खेती पर संकट खड़ा कर दिया है। काफी लंबे समय तक शोध और प्रयोगों के बाद खेती बिना बिजली, डीजल खर्च के कृषि आधारित सभी कामों के लिए एनीमल एनर्जी (पशु शक्ति) से चलने वाले स्क्रू पंप का अविष्कार कर तमाम झंझावातों से जूझ रहे किसान को नया मुकाम मिल गया है।

यह सब साकार किया है कि मलवां ब्लाक के मुरादीपुर गांव के रहने वाले पुरुषोत्तम लाल शर्मा ने। मैकेनिकल ट्रेड से इंजीनियर श्री शर्मा ने बिजली संकट, डीजल के संकट को देखते हुए वर्ष 2003-04 में बगैर पैसे के खेती प्रोजेक्ट पर काम शुरू किया। बकौल श्री शर्मा महाराष्ट्र में खेती और किसानी के लिए काम करने वाले सुभाष पाले से उनको इस क्षेत्र में काम करने की प्रेरणा मिली।

एनीमल एनर्जी के उपयोग को लेकर पांचाल पंप सिस्टम तैयार किया। यह एक ऐसा पंप है जिसे बैल, ऊंट, खच्चर चरखी की तरह खीचते हैं। पंप जमीन की सतह पर लगाया जाता है। इसके बाद इसी से चारा कटाई, आटा चक्की, धान थ्रेसरिंग, गेहूं थ्रेसरिंग, ग्राडिंग मशीन आदि चलती है जो एक हार्स पावर क्षमता की हो, बैट्री चार्जिग भी की जा सकती है।

डीजल, बिजली बिल, पेट्रोल का कुछ खर्च नहीं है। पंप से एक घंटे में 25 हजार लीटर पानी निकलता है। माडल के तौर पर यह पंप (पूरा सिस्टम) महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, झारखण्ड, बिहार के अलावा अमेरिका के फ्लोरिडा व अफ्रीका में चल रहे हैं।

आईआईटी कानपुर, लखनऊ, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय रूटक (रूरल टेक्नालॉजी एक्शन ग्रुप) ने अप्रूव्ड कर दिया है। इस अविष्कार के चलते ही आईसीएआर भारत सरकार (इंडियन काउंसिल एग्रीकल्चर रिसर्च) का सदस्य बनाया गया है। गांव में भी बिन पैसे खेती का बड़ा माडल तैयार कर रहे हैं।

यह पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

यह पंप को खरीदने के लिए आप निचे दिए हुए पते और नंबर पर संपर्क कर सकते है

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F-77, Udyougkunj, Road No. 7, Site – 5 Panki Industrial Area, Kanpur – 208022, Uttar Pradesh, India
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