ये है हाथ से चलने वाली और नदीन निकालने वाली हैरो डिस्क,वीडियो देखें

खेती में नदीन फसल को बहुत नुक्सान पहुंचते है । अगर यह बेकाबू हो जाए तो फसल का उत्पादन आधे से कम रह जाता है ।इस लिए इन्हे शुरुआत में ही काबू करना जरूरी है । लेकिन नदीनों पर काबू करने के लिए नदीननाशक के इलावा यंत्र का भी उपयोग किया जा सकता है ।

नदीननाशक का उपयोग इस लिए कम करना चाहिए क्योंकि इसका असर मुख्या फसल पर भी होता है और धीरे धीरे नदीनों की सहनशीलता बढ़ने लग जाती है और सारी नदीननाशक दवाएं बेअसर हो जाती है । इस लिए सबसे बेहतर यही होता है नदीनों का ख़ात्मा किसी यंत्र की मदद से किया जाए ।

डिस्क हैरो के बारे में हम सब जानते है । इसका इस्तेमाल ट्रेक्टर के साथ खेत में फसल अवशेषों को मिट्टी के अंदर गलाने के लिए किया जाता है । लेकिन अब एक ऐसे हैरो डिस्क आ गए है जिनका इस्तमाल हाथ से किया जाता है और इसके इस्तमाल से हम बड़ी आसानी से नदीनों को साफ़ कर सकते है ।

लेकिन बड़े खेद के बात है यह मशीन भारत में नहीं बनती यह मशीन अमेरिका में बनती है और इसकी कीमत करीब 4900 रुपये (76 $) है ।

लेकिन इसको बनाना कोई मुश्किल नहीं है किसान भाई अपने स्तर पर इसको त्यार कर सकते है वो भी बहुत ही कम कीमत पर ।यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें ।

ये है बिजली की तरह चारा काटने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

हरा चारा काटने वाली मशीने तो आप ने बहुत देखी होंगी लेकिन काटने के बाद चारे का कुतरा(छोटा छोटा काटना ) भी करना पड़ता है । जिस से पशु अच्छी तरह से चारे चारे को खा सकते है । इस लिए आप को पहले चारा काटना पड़ता है फिर कुतरना पड़ता है ।

ये है आधुनिक और छोटी मशीन चारा काटने वाली मशीन ।इसकी खास बात यह है ये मशीन चारा । यह मशीन बिजली की तरह चारा कटती है ।इस लिए यह मशीन डेरी फार्मिंग ,बकरी पालन ,गौशाला आदि जगह पर उपयोग हो सकती है ।

वीडियो देखे

इस मशीन की कीमत 26000 है। यह मशीन मोटर और इंजन दोनों से चलती है। इस मशीन मे 2 Hp की मोटर लगी है इस मशीन का इंजन 5 Hp का है। यह मशीन एक घंटे में 800 KG हरा चारा और 500 KG सूखा चारा काटती है।

ज्यादा जानकारी के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करे

website- http://hopeagrotech.com/
Customer Support email- info@hopeagrotech.com
WhatsApp 9825087673

बहुत ही कम ख़र्चे में फसल काटती है यह मिनी कंबाइन,वीडियो देखें

चावल जा दूसरी फसलें काटने का काम हाथ से ही होता है क्योंकि भारत में किसानो के पास जमीन बहुत ही कम है और वो बड़ी कंबाइन से फसल कटवाने का खर्च नहीं उठा सकते इस लिए अब एक ऐसी कंबाइन आ गई है जो बहुत कम खर्च में फसल काटती है ।

साथ ही अब बारिश से ख़राब हुई फसल वाले किसानो को घबरने की जरूरत नहीं क्योंकि अब आ गई है मिनी कंबाइन Multi Crop हार्वेस्टर यह कंबाइन छोटे किसानो के लिए बहुत फयदेमंद है इस मशीन से कटाई करने से बहुत कम खर्च आता है और फसल के नुकसान भी नहीं होता।

बड़ी कंबाइन से फसल का बहुत ही नुकसान होता है । लेकिन इस मशीन के इस्तेमाल करने के बहुत से फायदे है जैसे यह बहुत कम जगह लेता है ।साथ में इस कंबाइन से आप गिरी हुई फसल भी फसल को नुकसान पहुंचाए बिना अच्छे तरीके से काट सकते है ।

यह कंबाइन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

अगर जमीन गीली भी है तो भी हल्का होने के कारण यह कंबाइन गीली जमीन पर आसानी से चलती है ज़मीन में धस्ती नहीं । छोटा होने के कारण हर जगह पर पहुँच जाता है ।

यह मशीन 1 घंटे मे 1 बीघा फसल की कटाई करती है और इसमें अनाज का नुकसान भी बहुत कम होता है।इस से आप बाकी की अनाज फसलें जैसे गेहूं ,धान,मक्का अदि भी काट सकते है ।

अब पावर वीडर करेगा खरपतवार की रोकथाम वो भी बहुत कम खर्चे में

एक किसान के लिए खरपतवार की रोकथाम सबसे बड़ी मुसीबत होते है ।अगर वक़्त पर खरपतवार पर नियंत्रण ना क्या जाए तो यह आपकी पूरी फसल ख़राब कर देते है आपकी फसल के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है ।

लेकिन खरपतवार की रोकथाम इतना आसान काम नहीं है अगर हाथ से खरपतवार की रोकथाम की जाए तो बहुत समय और मेहनत लगती है लेकिन अगर नदीननाशक दवाइओं का प्रयोग किया जाए तो बहुत महंगा पड़ जाता है ।

ऐसे में किसानो के लिए एक बहुत ही उपयोगी मशीन का अविष्कार क्या है जिस से आप मिन्टों में खेत से खरपतवार का सफाया कर सकते है । इतना ही नहीं इस मशीन के साथ और भी अटैचमेंट्स आती है।

जिस में एक पावर वीडर (खरपतवार निकलने के लिए ) आता है जिसकी कीमत 4250 रु होती है । एक पैडी कटर आता है जिस से आप धान की कटाई कर सकते है ।जिसकी कीमत 2000 रु है साथ में एक ब्रश कटर आता है जिस से आप घास काट सकते है । जिसकी कीमत 2000 रु है ।

सो इस तरह से आप एक मशीन से अलग अलग अटैचमेंट्स लगा कर अलग अलग तीन काम कर सकते है । इस मशीन को आप किराये पर भी दे सकते है । और अच्छा लाभ कमा सकते है ।

मशीन की जानकारी

इसमें 4 स्ट्रोक 52CC इंजन लगा होता है जो पेट्रोल पर चलता है । एक लीटर पेट्रोल से आप इस मशीन को दो घंटे तक चला सकते है । जिस से आप बहुत सा काम ख़तम कर सकते है ।इस मशीन की कीमत सिर्फ 16000 रु है और इसकी अटैचमेंट्स की कीमत अलग है ।अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो 9830182243 नंबर पर संपर्क कर सकते है ।इसके इलवा आप इस लिंक https://dir.indiamart.com/impcat/power-weeder.html पर क्लिक करके और भी डीलर से संपर्क कर सकते है

पावर वीडर कैसे काम करता है वीडियो देखें

किसान भाई इन तरीकों से बचा सकते है ट्रैक्टर का डीजल…

मंहगाई की इस मार में प्रतिदिन रोजमर्रा की चीजें मंहगी होती जा रही है. मंहगाई की मार से कोई भी तबका बचा नहीं है. डीजल तथा पेट्रोल के दाम भी आसमान छू रहे हैं. कृषि कर्यो में खनिज तेल की खपत बहुत तेजी से हो रही है. ऐसे में किसान भाइयों के लिए भी मुनाफ़ा मिलना बड़ा मुश्किल हो जाता है.

आज हम आपको बताएंगे कि डीजल की खपत को कम करने के लिए वो कौन से प्रमुख बिंदु है, जिनपर अगर आप ध्यान दे तो आप डीजल की खपत को कम कर सकतें है…

1- किसान भाई जब भी ट्रैक्टर खरीदतें है, तो उसके साथ आपको एक निर्देशन पुस्तिका मिलती है. मशीन के उपयोग से पहले आप इस पुस्तिका को एक बार ध्यान से जरूर पढ़ लें और जो निर्देश पुस्तिका में दिए गए, आप उसी के अनुसार मशीन का उपयोग करें.

2- जब आप इंजन को चालू करते है तो अगर टैपित का शोर ज्यादा सुनाई दे रहा है तो आप समझ जाइए इंजन में कम हवा जा रही है, और अगर इंजन में हवा कम मात्रा में जा रही है तो इससे डीजल की खपत बढ़ जाती है. इससे निपटने के लिए आपको टैपित को दोबारा से बंधवाना चाहिए.

3- अगर ट्रैक्टर के इंजन से निकले धुंए का रंग काला ज्यादा है तो यह भी एक कारण है कि डीजल की खपत ज्यादा हो रही है. इसलिए 600 घंटे तक ट्रैक्टर चलाने के बाद एक बार आप इंजेक्टर की जाँच करवाइए और उसे फिर से बंधवाइए.

4- एक बार जब आपने इंजेक्शन पम्प और इंजेक्टर को भी बढ़िया रूप से रखा है, उसके बाद भी काला धुआं लगातार निकलता है तो आप समझ लीजिये यह इंजन पर पड़ रहे बोझ की निशानी है. किसान भाइयों ट्रैक्टर से लेने वाले काम के बोझ को उतना ही रखे जितना उसकी क्षमता है, अन्यथा भार ज्यादा पड़ने पर डीजल की खपत तो ज्यादा होगी है.

5- अगर इंजन ठंडा है और आप उससे काम कर रहें है तो उसके पुर्जों में ज्यादा घिसावट होती है और डीजल की खपत भी जयादा मात्रा में हीनी शुरू हो जाती है. इसलिए जब भी आप काम करें इंजन को गर्म होने का समय होने दें.

6- डीजल की जयादा खपत का एक कारण ट्रैक्टर की पहियों की हवा भी हो सकती है, इसलिए निर्देश पुस्तिका में पहियों की हवा का जो दाब बताया गया है उसी अनुसार हवा को कायम रखे.

किसान भाइयों ये वो बिंदु है जिनपर अगर आप अमल करें तो निश्चित तौर पर डीजल की खपत को काफी हद तक कम कर सकतें है.

इस जानकारी को बाक़ी लोगों के साथ शेयर करें, जिससे खनिज तेल की खपत को कम करके मुनाफे को बढाया जा सके.

कमाल की है ये पत्थर इकट्ठा करने वाली मशीन,यहाँ से खरीदें

पत्थर किसी भी खेत के लिए सबसे बड़ी समस्या होती है । पत्थरों की वजह से कई बार उपजाऊ जमीन पर भी फसल नहीं उगती है । इस लिए इन पथरों को खेत से हटाना बहुत ही जरूरी है । लेकिन अगर एक एक पत्थर चुन कर निकलना पड़े तो ये बहुत ही मेहनत वाला नामुनकिन सा काम लगता है।

लेकिन अब एक ऐसी मशीन आ गई है जो इस काम को बड़ी आसानी से कर सकती है और वो भी तेज़ी के साथ । इस मशीन को स्टोन पिकर बोलते है । इस मशीन को धीमान एग्रो इंडस्ट्रीज द्वारा त्यार किया गया है । इस मशीन की कीमत लगभग 1 लाख 95 हज़ार है । इस कंपनी के इलवा भी और बहुत सारी कंपनी है जो इस तरह की मशीन त्यार करती है ।

इस मशीन को खरीदने के लिए जा किसी और जानकारी के लिए आप इन नंबर पर संपर्क कर सकते है।Contact: 9803610000 , +91 8968650085.

ये कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

बहुत ही कमल का है ये आधुनिक थ्रेशर,वीडियो देखें

फसलों की गहाई में मशीन (थ्रेशर) का बड़ा योगदान है। गहाई मशीनों के उपयोग से समय पर गहाई पूरी करके पैदावार की क्षति को जहां काफी हद तक कम किया जा सका है वहीं गहाई का कार्य जो पारम्परिक तरीके से बहुत श्रमसाध्य हुआ करता था, अब बहुत आसान हो गया है।

महीनों तक चलने वाला गहाई का कार्य अब कुछ दिनों में ही सम्पन्न हो जाता है। देश में गहाई मशीनों की संख्या लगभग 25 लाख से ज्यादा है।

यह थ्रेशर कैसे काम करता है उसके लये वीडियो देखें

यह थ्रेशर बहुत ही आधुनिक है और बड़ी ही सफाई से काम करता है ।यह थ्रेशर GS AUTO FEED MULTI CROP THRESHER ,नंदयाल,आंध्रा प्रदेश द्वारा त्यार किया गया है ।

इस थ्रेशर की सहयता से विभिन्न फसलों जैसे सोयाबीन, मक्का, ज्वार, बाजरा आदि तथा तिलही व दलहनी फसलों जैसे अलसी, सरसों, मूंग, चना, उड़द आदि की गहाई की जाती है।

अगर आप इस मशीन की कीमत और दूसरी जानकारी चाहिए तो निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क करें 9010889900 ,9010801581 ,9849751998

अब जर्मन मशीन से खारा पानी को मीठा कर खारे पानी से होगी सिंचाई

खारेपानी के कारण फसलों का उत्पादन नहीं करने वाले किसानों के लिए ये लिए राहत की खबर है। अब जर्मन तकनीक की वाटर सॉफ्टनर मशीनों से खारे पानी को मीठा कर किसान आसानी से अब अपने खेतों में फसलों का उन्नत उत्पादन कर सकेंगे।

इसके लिए अठियासन रोड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पर लगाए गए वाटर सॉफ्टनर मशीन का प्रयोग सफल रहा है। अब केवीके वैज्ञानिक जिलेभर के किसानों को कृषि प्रशिक्षण के दौरान खारे पानी को मीठा कर फसल उपयोग के लिए जानकारी देंगे। केवीके की ट्यूबवैल पर स्थापित इस मशीन के माध्यम से 5 से 8 हजार टीडीएस तक काम करने का दावा किया जा रहा है।

ऐसे में जिल क्षेत्रों में खारे पानी के कारण किसानों के सामने फसल सिंचाई को लेकर रही परेशानी से भी किसानों को काफी हद तक निजात मिलने की संभावना है। वैज्ञानिकों की माने तो खारे पानी में जो साल्ट बोड रहता है, जिसे ये मशीन अलग कर देती है। ऐसे में ये तकनीक किसानों के लिए खारे पानी को मीठा करने में काफी कारगर साबित हो रही है।

^ केवीके की ट्यूबवैल पर लगाए वाटर सॉफ्टनर संयंत्र से खारे पानी को मीठा कर पहले मूंग बीच उत्पादन, अब बगीचे और 2 हैक्टेयर में जीरे के उत्पादन में पानी काम में लिया जा रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, संगोष्ठी के दौरान इस तकनीक के बारे में बताएंगे।

पाइप लाइन चॉक होने देना, बालों का झड़ना, खाज-खुजली और स्कीन के रुखेपन को दूर करती है। बोरवैल का पानी इस्तेमाल करने वाले लोग भी इस मशीन का उपयोग कर सकते हैैं। डॉ.एसआर कुमावत, सहायक प्राध्यापक

जमीन की उतरी स्तर पर बनने वाली सफेद परत को कम करके, जमीन पर आनेवाली दरारों में सुधार, जमीन मुलायम होकर, उपजाऊ बनती हैं।

  •  फसल और पौधों में पत्ते जलने का प्रमाण कम होकर खेत में हरियाली बढ़ती हैं।
  • नमकीन/खारे पानी से बंद पड़ने वाले ड्रिपर्स और स्प्रिंकलर साफ होकर पहले जैसे काम करना शुरू कर देते है। केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती।
  • कंडिशनर से निकला पानी भौतिक रचना के अनुसार हलका होने से पौधे के जड़ों को आसानी से मिलता है।

कम पानी में अधिक उत्पादन ले सकते है।, यानी पानी की 20 से 30 प्रतिशत तक बचत होती है। फसल की जड़ों पर मूली पर बना नमकीन स्तर कंडिशनर से निकले पानी में घुलकर साफ हो जाता है। मूली की कार्यक्षमता बढ़कर फसल हरीभरी रहने में मदद मिलती हैं।

  • फसल और पौधों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने के साथ पानी का पीएच विकसित होने के कारण फसल का उपयुक्त मूल द्रव्य मिलते है।
  • तीव्र विद्युत लहरी के कारण विषाणु का प्रमाण
  • पानी का कम होकर जैविक दृष्टि से पानी शुद्ध होता हैं।

बहुत कमाल की है यह गन्ना काटने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

भारत में गन्ने की फसल मुख्या फसलों में से एक है इस लिए देश के बहुत सारे किसान गन्ने की खेती पर निर्भर है । लेकिन सब से मुश्किल काम गन्ने की कटाई का होता है। अगर इसको हाथ से करें तो बहुत वक़्त और मेहनत लगती है इस लिए अब एक ऐसी मशीन आ गई है जिस से गन्ने को काटने का काम बहुत आसानी से किया जा सकता है ।

यह मशीन एक घंटे में 900 से 1000 क्विंटल की कटाई कर देती है । यहाँ लेबर का खर्चा प्रति क्विंटल आता है वहीँ इस मशीन से इसका खर्चा सिर्फ 6 रुपये आता है । इस मशीन के साथ सिर्फ ट्रिंच विधि से ही गन्ने की कटाई की जा सकती है । आम तरिके से लगाए गए खेतों में इस मशीन को नहीं चलाया जा सकता ।

शक्तिमान कंपनी द्वारा गन्ना काटने वाली मशीन त्यार की गई है जो गन्ना काटने का काम बहुत तेज़ी से कर सकती है । इस मशीन का इंजन बहुत ही ताकतवर है इसमें 6 सिलिंडर वाला 173 हॉर्स पॉवर का इंजन लगा है ।यह मशीन पूरी तरह से आटोमेटिक है इसके केबिन में डिस्प्ले लगा हुआ है जिस पर हम मशीन की सारी गतिविधि देख सकते है ।

इस मशीन को चलना बहुत ही आसान है । केबिन में AC भी लगा होता है पूरी मशीन को सिर्फ एक लिवर (जॉय स्टिक) से चल्या जाता है ।अगर आप इस मशीन की कीमत जा फिर कोई और जानकारी चाहते है तो निचे दिए नंबर और पते पर संपर्क कर सकते है ।

  • TIRTH AGRO TECHNOLOGY PVT. LTD.
    Dist.: Rajkot.State: Gujarat- INDIA
    Pincode-360311.
  • +91 (2827) 661637 (30 Lines) / +91 (2827) 270 537
  • SMS +91 9925250169 /
  • mail– info@shaktimanagro.com

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो देखें

कि‍सान मशीन खरीदें 80 % पैसे सरकार देगी, पराली प्रबंधन के लि‍ए 1151.80 करोड़ मंजूर

सरकार पराली व अन्‍य एग्रीकल्‍चर वेस्‍ट के बेहतर मैनेजमेट को लेकर गंभीर हो गई है। वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में कहा था कि‍ सरकार पराली व अन्‍य एग्रीकल्‍चर वेस्‍ट को प्रबंधन के लि‍ए योजना लागू करेगी। पराली जलाने की वजह से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लि‍ए सरकार ने नई योजना का एलान कि‍या है।

इसके तहत पराली का प्रबंधन के लि‍ए मशीनें खरीदने के लि‍ए सरकारी की ओर से 80 फीसदी तक की आर्थि‍क मदद दी जाएगी। यही नहीं कृषि अवशेष न जलाने वालों को इनाम भी दि‍या जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पंजाब, हरियाणा , उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में फसल अवशेषों के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी प्रोत्‍साहन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इसके लि‍ए 1151.80 करोड़ रुपये मंजूर कि‍ए गए हैं।

80 फीसदी देगी सरकार

पराली प्रबंधन के लिए मशीनों का बैंक स्थापित जाएगा जहां से इन्हें किराये पर लिया जा सकेगा। इसके लिए किसानों की पंजीकृत सहकारी समितियों ,किसान समूहों,स्वयं सहायता समूहों, कृषि उत्पादनकर्ताओं के संगठनों,निजी उद्यमियों और महिला किसानों के समूहों को परियोजना की लागत का 80 प्रतिशत तथा निजी किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी एवं उपकरणों के वास्ते 50 प्रतिशत की वित्तीय मदद दी जाएगी।

इसके अलावा सरकार कि‍सानों की ट्रेनिंग का भी प्रबंध करेगी ताकि वह फसलों के अवशेषों का बेहतर प्रबंधन सीख सकें। सरकार वि‍ज्ञापन, शि‍वर व अन्‍य गतिवि‍धि‍यों के माध्‍यम से कि‍सानों तक इसकी जानकारी पहुंचाएगी। इसके अलावा कोई भी अवशेष न जलाने के लिए ग्राम/ग्राम पंचायत के लिए पुरस्‍कार भी दि‍या जाएगा। आगे पढ़ें कैसे मि‍लेंगे पैसे

कैसे मि‍लेंगे पैसे संबंधित

राज्‍य सरकारें जिला स्तरीय कार्यकारी समितियों (डीएलईसी) के माध्यम से विभिन्न लाभार्थियों और स्थान- कृषि प्रणाली पर निर्भर विशेष कृषि उपकरण की पहचान करेगी और कस्टम हायरिंग और व्यक्तिगत मालिक स्वामित्व के आधार पर मशीनों की खरीद के लिए कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए लाभार्थियों की पहचान और चयन करेगी ताकि पारदर्शी रूप से समय पर लाभ प्राप्त किए जा सकें।

राज्‍य नोडल विभाग/ डीएलइसी लाभार्थी की ऋण आवश्‍यकता के लिए बैंकों के साथ गठबंधन करेंगे। चयनित लाभार्थियों के नाम एवं विवरण जिला स्‍तर पर दस्‍तावेजों में शामिल किए जायेगें जिसमें उनके आधार/यूआईडी नम्‍बर तथा प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के माध्‍यम से दी गई वित्‍तीय सहायता दिखाई जाएगी। आगे पढ़ें कैसे काम करेगी पूरी व्‍यवस्‍था

कि‍स तरह से होगा काम

कृषि मंत्रालय फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए मशीन और उपकरण निर्माताओं का एक पैनल तैयार करेगा। राज्‍य स्‍तर पर संबंधित राज्‍य सरकारों के कृषि विभाग नोडल कार्यान्‍वयन एजेंसी होंगे। संबंधित राज्‍य सरकारों के प्रमुख सचिव कृषि एवं कृषि उत्‍पादन आयुक्‍त की अध्‍यक्षता में राज्‍य स्‍तरीय कार्यान्‍वयन समितियां नोडल एजेंसियों तथा अन्‍य संबंधित विभागों के साथ नियमित बैठकें करके अपने-अपने राज्‍यों में योजना क्रियान्‍वयन की निगरानी करेंगे।

जिला स्‍तरीय कार्यकारी समिति परियोजना तैयार करने, लागू करने और जिलों में निगरानी के लिए उत्‍तरदायी होगी। पराली जलाने पर निगरानी रखने के लिए एक समिति भी बनायेगी।