किसान के बेटे ने पिता के लिए बनाया Remote से चलने वाला ट्रैक्टर

भारत में प्रतिभाओं की कमी नहीं है, ये बात अक्सर लोग कहते हैं, साथ ही ये भी कहा जाता है कि भारत में प्रतिभाओं को उचित मंच नहीं मिल पाता है। उसके बाद भी अक्सर आप देखते होंगे कि प्रतिभा अपने आप चमक बिखेर देती है।

कुछ बड़ा या फिर नया करने के लिए जरूरी नहीं कि आप किसी बड़े संस्थान में पढ़ाई करें, जो काम आईआईटी के छात्र नहीं कर सकते हैं वो काम एक किसान के बेटे ने कर दिखाया है। उसकी प्रतिभा का डंका आज पूरे देश में बज रहा है।

राजस्थान के बारां जिले के बमोरीकलां गांव में एक किसान के बेटे ने जो कारनामा किया है उस से उसके पिता का सीना गर्व से चौड़ा हो गया है। 19 साल का ये युवक लगातार नए आविष्कार करने में लगा रहता है। उस ने अब जो चीज तैयार की है उस से खेती काफी आसान हो सकती है। छोटी सी उम्र में इस युवक ने अपनी बुद्धि के बल पर 27 से अधिक आविष्कार किए हैं। इस लड़के का नाम योगेश कुमार है। इसके आविष्कार देख कर आईआईटी में पढ़ने वाले लोग भी हैरान हैं। योगेश नागर फिलहाल मैथ्स से बीएससी कर रहा है। वो फर्स्ट ईयर का स्टूडेंट है।

योगेश के पिता राम बाबू नागर 15 बीघा जमीम पर खेती करते हैं. इसी से परिवार का खर्चा चलता है। अपने पिता की मुश्किलों को देख कर योगेश ने कुछ ऐसा करने की ठानी जिस से उनका काम आसान हो जाए, इसके लिए वो लगातार काम कर रहा था। उसके पिता को ट्रैक्टर चलाते समय पीठ में दर्द की शिकायत होती थी। पिता की तकलीफ को दूर करने के लिए योगेश ने रिमोट ऑपरेटिव सिस्टम डेवलप किया है। इससे खेत में एक जगह बैठकर रिमोट से ट्रैक्टर चलाकर जुताई की जा सकती है। बिना ड्राइवर के ट्रैक्टर को चलता देखकर गांव वाले भी हैरान रह जाते हैं।

अब योगेश के पिता का काम काफी आसान हो गया है। वो एक जगह खड़े हो कर ट्रैक्टर चलाते हैं। इस से उनका समय भी बचता है और पीठ दर्द की शिकायत से भी मुक्ति मिल गई है। योगेश के इस आविष्कार से गांव के लोग भी हैरान हैं, उनका कहना है कि योगेश में बहुत प्रतिभा है, उसे सही मार्गदर्शन मिले तो वो भारत का नाम रोशन कर सकता है। अब योगेश की चर्चा पूरे देश में हो रही है। रिमोट से ट्रैक्टर चला कर योगेश ने वो कारनामा किया जिस से भारत के किसानों की काफी मदद हो सकती है।अब योगेश को उम्मीद है कि उनके पिता को खेती के दौरान आने वाली समस्याओं का सामना नहीं करकना पड़ेगा।

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बेलों को बांधने के लिए बहुत ही उपयोगी है यह यंत्र ,यहाँ से खरीदें

फल जैसे अंगूर और ज्यादतर सब्जियां बेल पर ही उगती है । लेकिन पहले की तरह अब खेती करने का तरीका बदल गया है । पहले सब्जी की बेलों को जमीन पर ही बढ़ने दिया जाता था जिस से पैदावार कम होती थी और साथ में जो फल पैदा होता था वो जल्दी ख़राब हो जाता था ।

लेकिन अब इन बेलों को एक डंडे के साथ बांध दिया जाता है जिस से वो बहुत तेज़ी से बढ़ती है और साथ में उनका फल भी ख़राब नहीं होता । इस तकनीक से फल और सब्जी का आकार भी बड़ा होता है और उसे तोड़ने में भी कोई समस्या नहीं आती ।

लेकिन बांधने का काम बहुत मुश्किल भरा और मेहनत वाला होता है । लेकिन अब एक ऐसा यंत्र (Plant Tying Tapetool Tapener Machine) आ गया है जो बेलों को छड़ी के साथ बांधने का काम मिंटो में कर देता है । सिर्फ इतना ही नहीं अगर आप बाग़ बगीचे का शौंक रखते है तो भी यह यंत्र आपके लिए बहुत काम की चीज़ है । इस से आप फूलों की शाखाओं को बांध सकते है ।

इस यंत्र को आप ऑनलाइन खरीद सकते है । इस यंत्र के लिए जरूरी टेप भी आप ऑनलाइन खरीद सकते है । इस यंत्र को खरीदने के लिए निचे दिए हुए लिंक पर क्लिक करें । इस मशीन की कीमत 2400 रुपये है ।

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यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

18000 रूपये की यह मशीन करती है अकेले 100 मजदूरों का काम…

जब बात प्याज की बुआई की आती है, तो यह काफी थका देने वाला काम होता है. बड़ी जोत वाले किसानों के लिए यह काफी दिक्कत का काम हो जाता है. सबसे बड़ा कारन यह भी है कि प्याज की बुआई किसी मशीन से न होकर हांथों से की जाती है, जिसमे काफी मेहनत लगती है और अधिक समय बर्बाद होता है.

इस तरह की समस्या से निपटने के लिए पी एस मोरे नामक एक किसान ने सस्ती और अर्ध स्वचालित मशीन बनायीं है, जिसकी मदद से आप कम समय में प्याज की बुआई कर सकतें हैं.

पी एस मोरे ने किसानों की भलाई के लिए इस मशीन का पेटेंट नही करवाया साथ ही साथ सभी को इसे बनाने और बेचने की अनुमति दे दी, जिससे किसान भाई इसे सस्ती कीमत पर खरीद सके.नेशनल इनोवेशन फाउंडेशन ने भविष्य में इस टेक्नॉलोजी का गलत इस्तेमाल करने से रोकने के लिए 2008 में इसका पेटेंट करा लिया।

4 मजदूरों और 1 ड्राइवर की मदद से ये मशीन प्रतिदिन 2.5 एकड़ में प्याज की बुआई कर देती है। जबकि इस मशीन के बिना पारंपरिक तरीक से बुआई करने पर करीब 100 मजूदरों की जरूरत पड़ती है। यानी मशीन की लागत का पूरा पैसा 1 या 2 दिन की बुआई से ही वसूला जा सकता है। इसके बाद आप इस मशीन को दूसरों को भी किराए पर देकर अतिरिक्त कमाई कर सकते हैं।

इस मशीन के जरिए यांत्रिक निराई भी की जा सकती है, जिससे निराई पर खर्च की बचत होती है।उर्वरक ड्रील के साथ इस मशीन की कीमत 30 हजार रूपये है जबकि बगैर इस ड्रील के ये 18 हजार रूपये तक के खर्च में तैयार हो जाती है।

इस मशीन को 22-35 HP यानी हार्सपावर (Horsepower) के ट्रैक्टर में लगे 3 प्वाइंट के जरिए जोड़ा जा सकता है। खेतों में ट्रेक्टर की गति 1 से 1.5 किलोमीटर प्रति घंटे की रखी जाती है। जब ट्रैक्टर आगे बढ़ता है तो स्कैल सिस्टम (Scale System) यानी मापक प्रणाली के जरीए फर्टीलाइजर को ट्यूब में भेजती है।

इस मशीन में एक जुताई का फ्रेम, फर्टीलाइज़र बॉक्स, उर्वरकों के बहने के लिए नलियां, बीज पौधों को रखने के लिए ट्रे, दो पहिए, खांचा खींचने वाला, बीज पौधों को नीचे ले जाने के लिए फिसलन प्रणाली और चार लोगों तक के बैठने की जगह होती है। मशीन से पौधारोपण करने से पहले खेत की जुताई जरूरी होती है।

एक क्यारी से दूसरी क्यारी के बीच की दूरी 7 इंच की होनी चाहिए। जबकि 2 पौधों के बीच की दूरी 3.5 इंच की दूरी होनी चाहिए।

जुताई से लेकर पिसाई तक सारे काम करेगी यह मशीन

प्रधानमंत्री मोदी के स्टार्टअप योजना के तहत केरल शिवापुरम के ‘सेंट थामस कॉलेज ऑफ इंजीनियरिग’ के छात्रों ने खेतीब़ाडी के कई कामो को एकसाथ अंजाम देने वाली एक ऐसी अद्भभुत मशीन तैयार की है, जो किसानो के लिए और खेतीबाडी के क्षेत्र में वरदान साबित हो सकती है।

छात्रो ने इस मशीन को ‘मन्नीरा’ नाम दिया है। ‘मन्नीरा’ एकसाथ जुताई, रोपाई, सिंचाई, कटाई, सूप, पिसाई यह सारे कार्य कर सकती है।

इस मशीन को बनाने का एकमात्र मकसद लागत को कम करके मुनाफा डबल करना है। हमे उम्मीद है कि यह मशीन कृषि क्षेत्र में एक क्रांति साबित होगी। जब 10 एकड़ की जमीन पर 5 साल के अंतराल में यही सारे कार्य अलग-अलग मशीनो द्वारा किए गए तो लागत लगभग 27,08,500 रुपए रही, वहीं मन्नीरा का उपयोग किया तो यह लागत गिरकर 6,20,500 रुपए आ गई ।

इम मशीन को ब़डी उपल्बधि बताते हुए छात्रों ने कहा कि अगर अंतिम निरीक्षण के बाद इसका चयन हो जाता है। तो हमें 2 लाख का अनुदान मिलेगा। गौर करने वाली बात यह है कि इस मशीन को बनाने की कीमत भी 2 लाख रूपये ही है.

हर पंचायत में होगा कृषि यंत्र बैंक

कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि अभी पंचायत स्तर पर कृषि यंत्र बैंक स्थापित किए जा रहे हैं। आने वाले दिनों में सभी पंचायतों में कृषि यंत्र बैंक होगा। गांव के किसानों के समूह को सामूहिक कृषि यंत्र बैंक पर 80 प्रतिशत अनुदान का प्रावधान किया गया है।

2022 तक किसानों की आय दोगुना हो जाएगी। बिजली से सिंचाई के लिए अलग फीडर की स्थापना की जा रही है। नवंबर 2017 से इसकी शुरुआत नौबतपुर प्रखंड से हो चुकी है। तीन वर्षों में पूरे राज्य में अगल फीडर होगा।

मंत्री ने कहा किसानों को मौसम, वर्षा आदि की जानकारी के लिए प्रखंड स्तर पर टेलीमेट्रिक वेदर स्टेशन और पंचायत स्तर पर वर्षा मापक यंत्र लगाए जा रहे है। 2017-18 में पायलट प्रोजेक्ट से पूर्वी चंपारण, सुपौल, नालंदा, गया और अरवल में स्थापित किया जा रहा है।

बीएयू के तहत एक कृषि व्यवसाय प्रबंधन कॉलेज, एक कृषि अभियांत्रिकी कॉलेज, एक खाद्य विज्ञान व प्रौद्योगिकी महाविद्यालय और एक जैव प्रौद्योगिकी कॉलेज की स्थापना के लिए आवश्यक राशि का भी प्रावधान किया जा रहा है। गया, मुजफ्फरपुर व पूर्वी चंपारण में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित किए जा रहे हैं।

कृषि मंत्री डॉ. प्रेम कुमार ने कहा कि मक्का फसल में दाना नहीं आने की हर शिकायत की जांच होगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर सरकार किसानों के नुकसान की भरपाई करेगी। गुरुवार को वे विधानसभा में भाजपा के तारकिशोर प्रसाद के सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने कहा कि कृषि वैज्ञानिकों ने कुछ जगहों पर जांच में ये पाया है कि समय पर बुआई नहीं होने के कारण मक्का फसल में दाने नहीं आए हैं।

हालांकि पूरे राज्य में इस तरह की समस्या की बात उठाते हुए विपक्ष ने सदन की कमेटी से जांच करने की मांग की जिसे विधानसभा अध्यक्ष ने खारिज कर दिया। वहीं नगर विकास मंत्री सुरेश शर्मा ने भाजपा के विजय कुमार खेमका के प्रश्न पर कहा कि राज्य में कम लागत, कम खर्च और कम प्रदूषण वाले मात्र 100 किलो लकड़ी से ही शव का संस्कार संपन्न कर देने वाली नई तकनीक के शवदाह गृहों की व्यवस्था की जा रही है।

ये है बिजली की तरह चारा काटने वाली मशीन,जाने पूरी जानकारी

हरा चारा काटने वाली मशीने तो आप ने बहुत देखी होंगी लेकिन काटने के बाद चारे का कुतरा(छोटा छोटा काटना ) भी करना पड़ता है । जिस से पशु अच्छी तरह से चारे चारे को खा सकते है । इस लिए आप को पहले चारा काटना पड़ता है फिर कुतरना पड़ता है ।

ये है आधुनिक और छोटी मशीन चारा काटने वाली मशीन ।इसकी खास बात यह है ये मशीन चारा । यह मशीन बिजली की तरह चारा कटती है ।इस लिए यह मशीन डेरी फार्मिंग ,बकरी पालन ,गौशाला आदि जगह पर उपयोग हो सकती है ।

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इस मशीन की कीमत 26000 है। यह मशीन मोटर और इंजन दोनों से चलती है। इस मशीन मे 2 Hp की मोटर लगी है इस मशीन का इंजन 5 Hp का है। यह मशीन एक घंटे में 800 KG हरा चारा और 500 KG सूखा चारा काटती है।

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अब पावर वीडर करेगा खरपतवार की रोकथाम वो भी बहुत कम खर्चे में

एक किसान के लिए खरपतवार की रोकथाम सबसे बड़ी मुसीबत होते है ।अगर वक़्त पर खरपतवार पर नियंत्रण ना क्या जाए तो यह आपकी पूरी फसल ख़राब कर देते है आपकी फसल के उत्पादन में 20 से 30 प्रतिशत तक की कमी आ जाती है ।

लेकिन खरपतवार की रोकथाम इतना आसान काम नहीं है अगर हाथ से खरपतवार की रोकथाम की जाए तो बहुत समय और मेहनत लगती है लेकिन अगर नदीननाशक दवाइओं का प्रयोग किया जाए तो बहुत महंगा पड़ जाता है ।

ऐसे में किसानो के लिए एक बहुत ही उपयोगी मशीन का अविष्कार क्या है जिस से आप मिन्टों में खेत से खरपतवार का सफाया कर सकते है । इतना ही नहीं इस मशीन के साथ और भी अटैचमेंट्स आती है।

जिस में एक पावर वीडर (खरपतवार निकलने के लिए ) आता है जिसकी कीमत 4250 रु होती है । एक पैडी कटर आता है जिस से आप धान की कटाई कर सकते है ।जिसकी कीमत 2000 रु है साथ में एक ब्रश कटर आता है जिस से आप घास काट सकते है । जिसकी कीमत 2000 रु है ।

सो इस तरह से आप एक मशीन से अलग अलग अटैचमेंट्स लगा कर अलग अलग तीन काम कर सकते है । इस मशीन को आप किराये पर भी दे सकते है । और अच्छा लाभ कमा सकते है ।

मशीन की जानकारी

इसमें 4 स्ट्रोक 52CC इंजन लगा होता है जो पेट्रोल पर चलता है । एक लीटर पेट्रोल से आप इस मशीन को दो घंटे तक चला सकते है । जिस से आप बहुत सा काम ख़तम कर सकते है ।इस मशीन की कीमत सिर्फ 16000 रु है और इसकी अटैचमेंट्स की कीमत अलग है ।अगर आप इस मशीन को खरीदना चाहते है तो 9830182243 नंबर पर संपर्क कर सकते है ।इसके इलवा आप इस लिंक https://dir.indiamart.com/impcat/power-weeder.html पर क्लिक करके और भी डीलर से संपर्क कर सकते है

पावर वीडर कैसे काम करता है वीडियो देखें

किसान भाई इन तरीकों से बचा सकते है ट्रैक्टर का डीजल…

मंहगाई की इस मार में प्रतिदिन रोजमर्रा की चीजें मंहगी होती जा रही है. मंहगाई की मार से कोई भी तबका बचा नहीं है. डीजल तथा पेट्रोल के दाम भी आसमान छू रहे हैं. कृषि कर्यो में खनिज तेल की खपत बहुत तेजी से हो रही है. ऐसे में किसान भाइयों के लिए भी मुनाफ़ा मिलना बड़ा मुश्किल हो जाता है.

आज हम आपको बताएंगे कि डीजल की खपत को कम करने के लिए वो कौन से प्रमुख बिंदु है, जिनपर अगर आप ध्यान दे तो आप डीजल की खपत को कम कर सकतें है…

1- किसान भाई जब भी ट्रैक्टर खरीदतें है, तो उसके साथ आपको एक निर्देशन पुस्तिका मिलती है. मशीन के उपयोग से पहले आप इस पुस्तिका को एक बार ध्यान से जरूर पढ़ लें और जो निर्देश पुस्तिका में दिए गए, आप उसी के अनुसार मशीन का उपयोग करें.

2- जब आप इंजन को चालू करते है तो अगर टैपित का शोर ज्यादा सुनाई दे रहा है तो आप समझ जाइए इंजन में कम हवा जा रही है, और अगर इंजन में हवा कम मात्रा में जा रही है तो इससे डीजल की खपत बढ़ जाती है. इससे निपटने के लिए आपको टैपित को दोबारा से बंधवाना चाहिए.

3- अगर ट्रैक्टर के इंजन से निकले धुंए का रंग काला ज्यादा है तो यह भी एक कारण है कि डीजल की खपत ज्यादा हो रही है. इसलिए 600 घंटे तक ट्रैक्टर चलाने के बाद एक बार आप इंजेक्टर की जाँच करवाइए और उसे फिर से बंधवाइए.

4- एक बार जब आपने इंजेक्शन पम्प और इंजेक्टर को भी बढ़िया रूप से रखा है, उसके बाद भी काला धुआं लगातार निकलता है तो आप समझ लीजिये यह इंजन पर पड़ रहे बोझ की निशानी है. किसान भाइयों ट्रैक्टर से लेने वाले काम के बोझ को उतना ही रखे जितना उसकी क्षमता है, अन्यथा भार ज्यादा पड़ने पर डीजल की खपत तो ज्यादा होगी है.

5- अगर इंजन ठंडा है और आप उससे काम कर रहें है तो उसके पुर्जों में ज्यादा घिसावट होती है और डीजल की खपत भी जयादा मात्रा में हीनी शुरू हो जाती है. इसलिए जब भी आप काम करें इंजन को गर्म होने का समय होने दें.

6- डीजल की जयादा खपत का एक कारण ट्रैक्टर की पहियों की हवा भी हो सकती है, इसलिए निर्देश पुस्तिका में पहियों की हवा का जो दाब बताया गया है उसी अनुसार हवा को कायम रखे.

किसान भाइयों ये वो बिंदु है जिनपर अगर आप अमल करें तो निश्चित तौर पर डीजल की खपत को काफी हद तक कम कर सकतें है.

इस जानकारी को बाक़ी लोगों के साथ शेयर करें, जिससे खनिज तेल की खपत को कम करके मुनाफे को बढाया जा सके.

अब जर्मन मशीन से खारा पानी को मीठा कर खारे पानी से होगी सिंचाई

खारेपानी के कारण फसलों का उत्पादन नहीं करने वाले किसानों के लिए ये लिए राहत की खबर है। अब जर्मन तकनीक की वाटर सॉफ्टनर मशीनों से खारे पानी को मीठा कर किसान आसानी से अब अपने खेतों में फसलों का उन्नत उत्पादन कर सकेंगे।

इसके लिए अठियासन रोड स्थित कृषि विज्ञान केंद्र पर लगाए गए वाटर सॉफ्टनर मशीन का प्रयोग सफल रहा है। अब केवीके वैज्ञानिक जिलेभर के किसानों को कृषि प्रशिक्षण के दौरान खारे पानी को मीठा कर फसल उपयोग के लिए जानकारी देंगे। केवीके की ट्यूबवैल पर स्थापित इस मशीन के माध्यम से 5 से 8 हजार टीडीएस तक काम करने का दावा किया जा रहा है।

ऐसे में जिल क्षेत्रों में खारे पानी के कारण किसानों के सामने फसल सिंचाई को लेकर रही परेशानी से भी किसानों को काफी हद तक निजात मिलने की संभावना है। वैज्ञानिकों की माने तो खारे पानी में जो साल्ट बोड रहता है, जिसे ये मशीन अलग कर देती है। ऐसे में ये तकनीक किसानों के लिए खारे पानी को मीठा करने में काफी कारगर साबित हो रही है।

^ केवीके की ट्यूबवैल पर लगाए वाटर सॉफ्टनर संयंत्र से खारे पानी को मीठा कर पहले मूंग बीच उत्पादन, अब बगीचे और 2 हैक्टेयर में जीरे के उत्पादन में पानी काम में लिया जा रहा है। किसानों को प्रशिक्षण, संगोष्ठी के दौरान इस तकनीक के बारे में बताएंगे।

पाइप लाइन चॉक होने देना, बालों का झड़ना, खाज-खुजली और स्कीन के रुखेपन को दूर करती है। बोरवैल का पानी इस्तेमाल करने वाले लोग भी इस मशीन का उपयोग कर सकते हैैं। डॉ.एसआर कुमावत, सहायक प्राध्यापक

जमीन की उतरी स्तर पर बनने वाली सफेद परत को कम करके, जमीन पर आनेवाली दरारों में सुधार, जमीन मुलायम होकर, उपजाऊ बनती हैं।

  •  फसल और पौधों में पत्ते जलने का प्रमाण कम होकर खेत में हरियाली बढ़ती हैं।
  • नमकीन/खारे पानी से बंद पड़ने वाले ड्रिपर्स और स्प्रिंकलर साफ होकर पहले जैसे काम करना शुरू कर देते है। केमिकल ट्रीटमेंट की जरूरत नहीं पड़ती।
  • कंडिशनर से निकला पानी भौतिक रचना के अनुसार हलका होने से पौधे के जड़ों को आसानी से मिलता है।

कम पानी में अधिक उत्पादन ले सकते है।, यानी पानी की 20 से 30 प्रतिशत तक बचत होती है। फसल की जड़ों पर मूली पर बना नमकीन स्तर कंडिशनर से निकले पानी में घुलकर साफ हो जाता है। मूली की कार्यक्षमता बढ़कर फसल हरीभरी रहने में मदद मिलती हैं।

  • फसल और पौधों के उत्पादन में बढ़ोतरी होने के साथ पानी का पीएच विकसित होने के कारण फसल का उपयुक्त मूल द्रव्य मिलते है।
  • तीव्र विद्युत लहरी के कारण विषाणु का प्रमाण
  • पानी का कम होकर जैविक दृष्टि से पानी शुद्ध होता हैं।

कि‍सान मशीन खरीदें 80 % पैसे सरकार देगी, पराली प्रबंधन के लि‍ए 1151.80 करोड़ मंजूर

सरकार पराली व अन्‍य एग्रीकल्‍चर वेस्‍ट के बेहतर मैनेजमेट को लेकर गंभीर हो गई है। वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली ने बजट भाषण में कहा था कि‍ सरकार पराली व अन्‍य एग्रीकल्‍चर वेस्‍ट को प्रबंधन के लि‍ए योजना लागू करेगी। पराली जलाने की वजह से होने वाले वायु प्रदूषण की रोकथाम के लि‍ए सरकार ने नई योजना का एलान कि‍या है।

इसके तहत पराली का प्रबंधन के लि‍ए मशीनें खरीदने के लि‍ए सरकारी की ओर से 80 फीसदी तक की आर्थि‍क मदद दी जाएगी। यही नहीं कृषि अवशेष न जलाने वालों को इनाम भी दि‍या जाएगा। प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अध्‍यक्षता में मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति ने पंजाब, हरियाणा , उत्‍तर प्रदेश और राष्‍ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्‍ली में फसल अवशेषों के यथास्‍थान प्रबंधन के लिए कृषि मशीनरी प्रोत्‍साहन को अपनी स्‍वीकृति दे दी है। इसके लि‍ए 1151.80 करोड़ रुपये मंजूर कि‍ए गए हैं।

80 फीसदी देगी सरकार

पराली प्रबंधन के लिए मशीनों का बैंक स्थापित जाएगा जहां से इन्हें किराये पर लिया जा सकेगा। इसके लिए किसानों की पंजीकृत सहकारी समितियों ,किसान समूहों,स्वयं सहायता समूहों, कृषि उत्पादनकर्ताओं के संगठनों,निजी उद्यमियों और महिला किसानों के समूहों को परियोजना की लागत का 80 प्रतिशत तथा निजी किसानों को पराली प्रबंधन के लिए मशीनरी एवं उपकरणों के वास्ते 50 प्रतिशत की वित्तीय मदद दी जाएगी।

इसके अलावा सरकार कि‍सानों की ट्रेनिंग का भी प्रबंध करेगी ताकि वह फसलों के अवशेषों का बेहतर प्रबंधन सीख सकें। सरकार वि‍ज्ञापन, शि‍वर व अन्‍य गतिवि‍धि‍यों के माध्‍यम से कि‍सानों तक इसकी जानकारी पहुंचाएगी। इसके अलावा कोई भी अवशेष न जलाने के लिए ग्राम/ग्राम पंचायत के लिए पुरस्‍कार भी दि‍या जाएगा। आगे पढ़ें कैसे मि‍लेंगे पैसे

कैसे मि‍लेंगे पैसे संबंधित

राज्‍य सरकारें जिला स्तरीय कार्यकारी समितियों (डीएलईसी) के माध्यम से विभिन्न लाभार्थियों और स्थान- कृषि प्रणाली पर निर्भर विशेष कृषि उपकरण की पहचान करेगी और कस्टम हायरिंग और व्यक्तिगत मालिक स्वामित्व के आधार पर मशीनों की खरीद के लिए कृषि मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए लाभार्थियों की पहचान और चयन करेगी ताकि पारदर्शी रूप से समय पर लाभ प्राप्त किए जा सकें।

राज्‍य नोडल विभाग/ डीएलइसी लाभार्थी की ऋण आवश्‍यकता के लिए बैंकों के साथ गठबंधन करेंगे। चयनित लाभार्थियों के नाम एवं विवरण जिला स्‍तर पर दस्‍तावेजों में शामिल किए जायेगें जिसमें उनके आधार/यूआईडी नम्‍बर तथा प्रत्‍यक्ष लाभ अंतरण के माध्‍यम से दी गई वित्‍तीय सहायता दिखाई जाएगी। आगे पढ़ें कैसे काम करेगी पूरी व्‍यवस्‍था

कि‍स तरह से होगा काम

कृषि मंत्रालय फसल अवशेष के प्रबंधन के लिए मशीन और उपकरण निर्माताओं का एक पैनल तैयार करेगा। राज्‍य स्‍तर पर संबंधित राज्‍य सरकारों के कृषि विभाग नोडल कार्यान्‍वयन एजेंसी होंगे। संबंधित राज्‍य सरकारों के प्रमुख सचिव कृषि एवं कृषि उत्‍पादन आयुक्‍त की अध्‍यक्षता में राज्‍य स्‍तरीय कार्यान्‍वयन समितियां नोडल एजेंसियों तथा अन्‍य संबंधित विभागों के साथ नियमित बैठकें करके अपने-अपने राज्‍यों में योजना क्रियान्‍वयन की निगरानी करेंगे।

जिला स्‍तरीय कार्यकारी समिति परियोजना तैयार करने, लागू करने और जिलों में निगरानी के लिए उत्‍तरदायी होगी। पराली जलाने पर निगरानी रखने के लिए एक समिति भी बनायेगी।