यह है टॉप 5 मिनी ट्रेक्टर जाने कीमत और दूसरी जानकारी

भारत में करीब 85 प्रतिशत परिवार कुल खेती योग्य जमीन के करीब 36 प्रतिशत भाग में खेती करते हैं। छोटे किसानों की औसत जोत एक हेक्टेयर से अधिक की नहीं होती है।

इसलिए औसत किसान के लिए 35 एचपी या इससे अधिक के मानक ट्रैक्टर का इस्तेमाल करते हुए मशीनीकृत खेती करना काफी मुश्किल होता है जिसके कारण खेती में उत्पादकता और खेत की प्रति इकाई उपज प्रभावित होती है।

इस लिए किसानो के लिए 10 से 12 एचपी की क्षमता के ट्रैक्टर ऐसे छोटे और टुकड़ों में बंटे खेतों के लिए उपयुक्त होते हैं । आज हम आपको टॉप ट्रेक्टर कम्पनिओं द्वारा निर्मित कुश मिनी ट्रैक्टरों के बारे में बताएँगे जिसको छोटा किसान आसानी से खरीद सकता है ।

1. स्वराज 717

  • पावर – 17 HP
  • सिलिंडर – 1
  • गेअर – 6 आगे 3 रिवर्स
  • कीमत – 2.50 लाख

2. कप्तान 200DI

  • पावर – 20 HP
  • सिलिंडर – 1
  • गेअर – 8 आगे 2 रिवर्स
  • कीमत – 4 लाख

3. सोनालिका गरडेंटरक 20

 

  • पावर – 20 HP
  • सिलिंडर – 3
  • गेअर – 6 आगे 2 रिवर्स
  • कीमत – 3 लाख

4. महिंद्रा युवराज 215

  • पावर – 15 HP
  • सिलिंडर – 1
  • गेअर – 6 आगे 3 रिवर्स
  • कीमत – 2 लाख

5. EICHER 241 मिनी ट्रेक्टर  

 

  • पावर – 25 HP
  • सिलिंडर – 1
  • गेअर – 5 आगे 1 रिवर्स
  • कीमत – 4.41 लाख

नोट: इन सभी ट्रेक्टर की कीमत की जानकारी इंटरनेट से ली गई है जो आपके इलाके के हिसाब से कम जा ज्यादा हो सकती है

यह मशीन मात्र दो घंटे में करती है 1 एकड़ भूमि में गन्ने की रोपनी

अब गन्ने की खेती और भी आसान हो गई है। पहले गन्ने की खेती करने में जहां गन्ने को खेतों में गिराने, उर्वरक देने, कीटनाशी देने, कुदाल चलाने में अलग-अलग मजदूरों का सहयोग लेना पड़ता था। अब एक एकड़ में मात्र दो मजदूर से ही गन्ने की रोपनी की जा सकती है।

कटर एंड प्लांटर मशीन से यह संभव हो सका है। क्षेत्रीय अनुसंधान केन्द्र माधोपुर में इस मशीन से इस वर्ष गन्ने की खेती फार्म में की गई है। खासकर बड़े किसानों व मध्यमवर्गीय किसानों के लिए यह फायदेमंद साबित हो रहा है।

इस मशीन से एक ही बार में गन्ने को बीज के लिए कटिंग संभव है। खेतों में नाली बनाने, बीज का शोधन करने, कीटनाशी व खरपतवारनाशी दवाओं का छिड़काव, जमीन की जुताई से लेकर मिट्टी को बराबर करने का काम भी एक ही साथ में संभव है।

इससे किसानों को समय की भी बचत हो रही है। एक एकड़ भूमि में गन्ने की रोपनी करने में मात्र दो घंटे का ही समय ही लग रहा है। जबकि मात्र दो मजदूर इसके लिए काफी है। जहां साधारण तरीके से गन्ने की खेती करने में प्रति एकड़ 16 क्वटल गन्ने का बीज लगा करते है वही इस मशीन से चार क्वटल गन्ने की बचत किसानों को हो रही है। जिसका सीधा लाभ किसान उठा रहे है।

बहुत सारी कंपनी यह मशीन त्यार करती है लेकिन हम आप को मोगा इंजीनियरिंग वर्क्स कंपनी की इस मशीन के बारे में बातयेंगे । यह मशीन एक साथ 3 कतरों में एक साथ गन्ना बीज सकते है। इस मशीन की और जानकारी के लिए आप इस नंबर 8285325047 पर संपर्क कर सकते है । यह कंपनी मीरुत, उत्तर प्रदेश की है ।

यह मशीन कैसे काम करती है उसके लिए वीडियो भी देखें

आ गया मेगा टी अब ट्रेक्टर से पांच गुना कम कीमत पर करें ट्रैक्टर के सारे काम

बहुत से किसान हर साल इस लिए खेती करना छोड़ देते है क्यूंकि उनके पास खेती करने के लिए जरूरी साधन नहीं होते । एक किसान के लिए सबसे जरूरी चीज ट्रेक्टर होता है लेकिन ट्रेक्टर महंगा होने के कारण हर किसान इसे खरीद नहीं पता ।

ऐसे किसानो के लिए किर्लोस्कर कंपनी ने मेगा टी पेश क्या है । जिसकी कीमत तो ट्रेक्टर के मुकाबले कम है लेकिन यह ट्रेक्टर वाले सारे काम कर देता है । इस मशीन से आप जुताई ,बिजाई ,निराई गुड़ाई ,भार ढोना,कीटनाशक सप्रे आदि काम कर सकते है ।जो किसानों का काम आसान बना देती है।इसकी कीमत तकरीबन 1 लाख 40 हजार है।

मशीन की जानकारी

  • मॉडल – मेगा-टी (15 HP) हैंडल स्टार्ट
  • लंबाई – 2950 mm. चौड़ाई – 950 mm. ऊंचाई – 1300 mm.
  • इंजन का वजन – 138 किलोग्राम
  • इंजन की ऑयल कैपेसटी – 3.5 लीटर
  • प्रकार- वाटर कूल्ड डीजल इंजन
  • Rated RPM – 2000
  • ब्लेडों की संख्या – 20
  • गिअर – 6 आगे, 2 रिवर्स

यह मशीन कैसे काम करता है इसके लिए वीडियो भी देखें

8 मीटर की ऊंचाई और 10 मीटर की दुरी तक स्प्रे कर सकता है यह कमाल का मिस्ट स्प्रे पंप

सभी फसलों पर कीट तथा बीमारियों का प्रकोप होता है। कभी-कभी इन बीमारियों के प्रकोप से पूरी फसल नष्ट भी हो जाती है। इसके अतिरिक्त पौधे की वृद्धि को खरपतवार से भी नुकसान होता है। कीट, बीमारियों एवं खरपतवार की रोकथाम के लिए विभिन्न प्रकार की दवाईयों का प्रयोग किया जाता है। ये दवाईयाँ पौध संरक्षण यंत्र जिन्हें स्प्रेयर तथा डस्टर के नाम से जानते हैं, के द्वारा फसलों पर छिड़काव के लिए किया जाता हैं।

पौधे में कीड़े-मकोड़े एवं बीमारी नियंत्रित करने के लिए स्प्रेयर से सूक्ष्म ड्राप स्प्रे की आवश्यकता पड़ती है, तथा खरपतवार नियंत्रित करने के लिए बड़े ड्राप स्प्रे की आवश्यकता पड़ती है। विभिन्न प्रकार के स्प्रेयर भिन्न-भिन्न कार्य करने के लिए उपलब्ध हैं। इनकी उपयोगिता अनेक कारकों पर निर्भर है। जैसे- स्प्रे करने का प्रकार, खेत का आकार, फसल का प्रकार, इत्यादि। यहाँ पर कुछ प्रमुख स्प्रेयरों का वर्णन किया जा रहा हैं, जो सभी राज्यों के लिए उपयोगी हैं।

आज हम जिस स्प्रेयर की बात कर रहे है उसे मिस्ट स्प्रेयर बोला जाता है यह बहुत प्रेशर के साथ स्प्रे करता है बहुत प्रेशर के साथ छोटी छोटी बूंदें बन जाती है जिस से ऐसा लगता है जैसे धुंध हो इस लिए इसे मिस्ट जा फोग स्प्रेयर बोला जाता । इसका इस्तमाल से हम 8 मीटर की ऊंचाई तक स्प्रे कर सकते है जो किसी भी बाग़ में स्प्रे करने के लिए उपुक्त है साथ में इस से हम कम से कम 10 मीटर की दुरी तक स्प्रे कर सकते है । जिस से किसी भी फसल के ऊपर स्प्रे करना बहुत ही आसान हो जाता है ।

यह पेट्रोल के इंजन पर चलता है और एक घंटे में सिर्फ आधा लीटर पेट्रोल का इस्तमाल करता है ।इसका वजन 10 किल्लो के करीब होता है और इसमें आप एक वक़्त पर 11 लीटर तक कीटनाशक भर सकते है वैसे तो मार्किट में बहुत से मिस्ट स्प्रेयर मिल जयँगे लेकिन हम जिसकी बात कर रहे है उसका नाम है किसानक्राफ्ट मिस्ट ब्लोअर इसकी कीमत 5,780 रु है।

किसानक्राफ्ट मिस्ट ब्लोअर खरीदना चाहते है तो इस नंबर पर 91-80-22178200 संपर्क कर सकते है और ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो देखें

 

 

 

 

किसान ने बनाई ट्रेक्टर के साथ चलने वाली 5 गुना सस्ती कंबाइन मशीन

भारत की कृषिजोत छोटी है और खेतों तक जाने वाले रास्ते संकरे व पेड़ों से घिरे होते हैं. ऐसे में इन खेतों तक बड़े कृषि यंत्रों को ले जाना मुश्किल होता?है. खेती में काम आने वाले जुताई, बोआई, मड़ाई वगैरह के कृषि यंत्र अलगअलग फसलों के लिए अलगअलग तरह के होते हैं.

मड़ाई के कृषि यंत्र फसल के अनुसार अलगअलग तरह के बने होते हैं, जिन के द्वारा गेहूं, धान, राई वगैरह की मड़ाई की जाती है. छोटे किसानों के लिए अपनी फसल की मड़ाई के लिए महंगे व बड़े यंत्र खरीदना मुश्किल होता है. ऐसे में कभीकभी मड़ाई में देरी हो जाती है और देरी की वजह से कई बार बारिश या अन्य वजहों से फसल खराब भी हो जाती है.

किसानों की इन्हीं परेशानियों को देखते हुए उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले के विकास खंड कप्तानगंज के गांव खरकादेवरी के रहने वाले 12वीं तक पढ़े नवाचारी किसान आज्ञाराम वर्मा ने एक ऐसी कंबाइन मशीन ईजाद की है, जो कई खूबियों के साथ कम लागत से तैयार की जा सकती है. यह विचार उन के दिमाग में तब आया जब साल 2015 में उन की तैयार गेहूं की फसल बरसात की वजह से कई बार भीग गई और वह अपने गेहूं की फसल की मड़ाई नहीं कर पाए. उन्होंने सोचा क्यों न एक ऐसी गेहूं कटाईमड़ाई की मशीन तैयार की जाए जो कटाई व मड़ाई करने के साथसाथ भूसा भी तैयार कर सके.

आज्ञाराम वर्मा ने इन्हीं परेशानियों को ध्यान में रख कर एक ऐसी कंबाइन मशीन का खाका तैयार किया, जो गेहूं की मड़ाई करने के साथसाथ भूसा भी तैयार कर सकती थी. इस के बाद वे इस मशीन को बनाने में जुट गए. इस के लिए उन्होंने लोहे के तमाम पुर्जे व जरूरी सामान खुले बाजार से खरीद कर अपनी एक वर्कशाप तैयार कर के मशीन बनानी शुरू कर दी. 11 नवंबर 2015 को उन्होंने एक ऐसी कंबाइन मशीन बना कर तैयार की, जो छोटी होने के साथसाथ किसी भी संकरे रास्ते से खेतों में पहुंचाई जा सकती थी.

उन के द्वारा तैयार की गई इस कंबाइन मशीन को बनाने में बहुत ही कम खर्च आया. करीब 2 लाख 75 हजार रुपए में बनी इस कंबाइन मशीन का वजन 18 क्विंटल है. यह अन्य कंबाइन मशीनों से करीब 5 गुना सस्ती है. साथ ही इस की खूबियां इसे और भी बेहतर बनाती हैं. इस मशीन को चलाने के लिए किसी तरह की ट्रेनिंग की जरूरत नहीं होती है और मशीन में आने वाली खराबी को किसान खुद ठीक कर सकता है. इस के लिए अधिक पावर के ट्रैक्टर की भी आवश्यकता नहीं होती है. यह कंबाइन मशीन गेहूं की फसल को जड़ के साथ काटती है.

खूबियां बनाती हैं बेहतर : इस कंबाइन मशीन की खूबियां इसे बेहतर साबित करती हैं. इस मशीन द्वारा 1 घंटे में करीब 1 एकड़ खेत की कटाई की जा सकती है. 7 फुट चौड़े कटर वाली इस मशीन में 9 बेल्टों का प्रयोग किया गया है. इस में इस्तेमाल किए गए सभी कलपुर्जे बाजार में आसानी से मिल जाते हैं और मशीन में किसी तरह की खराबी आ जाने से इस को आसानी से ठीक किया जा सकता है. इस मशीन से एकसाथ गेहूं की कटाई व भूसा बनाने का काम किया जा सकता है. इस के लिए मशीन में अलगअलग 2 भंडारण टैंक लगाए गए हैं. मशीन के बगल में मड़ाई के दौरान गेहूं का भंडारण हो जाता है व मड़ाई से निकलने वाला भूसा मशीन के ऊपर लगे टैंक में चला जाता है.

इस मशीन को ट्रैक्टर के आगे या पीछे जोड़ कर चलाया जा सकता है. ट्रैक्टर के पीछे जोड़ने के लिए 20 हजार रुपए खर्च होते हैं व 20 मिनट का समय लगता है व आगे जोड़ने में 20 हजार रुपए खर्च आता है व 1 घंटे का समय लगता है. फसल की मड़ाई के बाद इस कंबाइन मशीन को ट्रैक्टर से अलग कर के ट्रैक्टर को दूसरे इस्तेमाल में भी लाया जा सकता है.

किसान आज्ञाराम वर्मा द्वारा तैयार की गई मशीन को देखने के लिए दूरदूर से लोग आ रहे हैं और उन के द्वारा तैयार की गई इस मशीन की भारी मांग बनी हुई है. बस्ती जिले के सांसद हरीश द्विवेदी ने किसान आज्ञाराम वर्मा के खेतों में जा कर खुद इस मशीन से गेहूं की मड़ाई कर के इस की खूबियों को जांचापरखा. उन का कहना है कि यह मशीन छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित होगी.

कृषि विज्ञान केंद्र बस्ती में कृषि अभियंत्रण के वैज्ञानिक इंजीनियर वरुण कुमार का कहना है कि आज भी खेतीकिसानी में काम में आने वाली मशीनें महंगी हैं, जिस की वजह से सभी किसान उन का फायदा नहीं ले पाते हैं. ऐसे में किसान आज्ञाराम वर्मा द्वारा तैयार की गई कंबाइन मशीन छोटे किसानों को आसानी से मिल सकेगी.

इस के पहले भी किसान आज्ञाराम वर्मा ने खेती से जुड़ी कई खोजों की हैं. उन्होंने जहां अधिक चीनी की परते वाली गन्ने की नई प्रजाति कैप्टन बस्ती के नाम से विकसित की है, वहीं गेहूं की नई किस्म एआर 64 भी विकसित की है. वे वर्तमान में खुशबूदार धान की नई किस्म को तैयार करने पर काम कर रहे हैं. आज्ञाराम वर्मा को उन की खोजों की वजह से राष्ट्रीय नव प्रवर्तन संस्थान द्वारा मार्च में 1 हफ्ते के लिए राष्ट्रपति भवन में अपने गन्ने की नई प्रजाति को प्रदर्शित करने का मौका भी दिया गया था. इसी के साथ ही केंद्रीय कृषि मंत्री द्वारा उन्हें नवाचारी किसान के रूप में सम्मानित भी किया गया है.

आज्ञाराम वर्मा का कहना है कि कोई भी किसान चाहे तो खेती में काम आने वाले नए कृषि यंत्रों व बीज वगैरह को ईजाद कर सकता है, क्योंकि वह खेती के दौरान आने वाली तमाम समस्याओं को महसूस करता है. उस दौरान उस के दिमाग में परेशानियों को दूर करने के लिए तमाम ऐसे खयाल आते?हैं, जो किसी भी नई मशीन या बीजों को जन्म दे सकते हैं.

आज्ञाराम वर्मा द्वारा तैयार यह मशीन छोटे किसानों के लिए फायदेमंद साबित हो रही है. आज्ञाराम ने अपनी इस कंबाइन मशीन का नाम कैप्टन बस्ती रखा है. इस मशीन के बारे में अधिक जानकारी के लिए आज्ञाराम वर्मा के मोबाइल नंबरों 7398349644 व 9721885878 पर संपर्क किया जा सकता है.

यह मशीन कैसे काम करती है जानने के लिए वीडियो देखें

अब प्रिया पावर वीडर पर बैठ कर करें खेत की निराई गुड़ाई

अक्सर आप ने देखा होगा के कपास और दूसरी फसलों में खपतवार बहुत होते है जिनको निकलना बहुत ही जरूरी है अगर इन्हे वक्त पर ना निकला जाये तो सारी फसल ख़राब हो जाती है । बहुत से लोग गुड़ाई के लिए ट्रेक्टर जा फिर बैल का इस्तेमाल करते है  ।

क्योंकि ट्रेक्टर महंगा पड़ता है और बैल से काम बहुत धीरे होता है  । इस लिए दोनों ही विकलप कामयाब नहीं है  । ऐसे किसानो के लिए “प्रिया पावर वीडर” आया है । इसका एक फ़ायदा यह भी है के बाक़ी पावर वीडर की तरह इसे पकड़ कर चलने के जरूरत नहीं होती बल्कि आप इसके ऊपर बैठ कर चला सकते है ।

यह एक आधुनिक पावर मशीन है जो आमतौर पर कपास और गन्ने की फसल में से नदीन निकालने के लिए प्रयोग की जाती है। यह ज़मीन को नर्म करती है और गोडाई का काम भी कम करती है।

यह 2 मॉडल में उपलब्द है एक मॉडल में इसमें पेट्रोल इंजन लगा होता है जिसकी पावर 4.7 HP होती है । दूसरे मॉडल में इसमें डीज़ल इंजन लगा होता है जिसकी पावर 9 HP होती है। अधिक जानकारी के लिए आप निचे दिए हुए नंबर पर संपर्क कर सकते है । कृष्णा गोहिल +91 8347472029, +91 8000935123

इस मशीन की विशेषताएं:

• अंतर फसली उगाने में सहायक मशीन है।
• जोताई के घेरे को आवश्यकतानुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है।
• खर्चा कम करती है।
• फसल को बिना कोई नुकसान पहुंचाए गोडाई करती है।
• इसे चलाना इतना आसान है कि महिलायें भी इसे आसानी से चला सकती हैं।

यह मशीन कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो भी देखें 

यह एक पावर टिलर करता है खेती के 10 तरह के काम

पावर टिलर खेतीबारी की एक ऐसी मशीन है, जिस का इस्तेमाल खेत की जुताई से ले कर फसल की कटाई तक किया जाता है। इस के इस्तेमाल से खेतीबारी के अनेक काम आसानी से किए जा सकते हैं।

तकनीक

इस मशीन से खरपतवार का निबटान, सिंचाई, फसल की कटाई, मड़ाई और ढुलाई का काम भी लिया जाता है। इस के अलावा इस मशीन का बोआई और उस के बाद के कामों में भी खासा इस्तेमाल होता है।

 

इस तरह के कामों के लिए पहले कई मजदूर खेत में लगाने पड़ते थे, लेकिन पावर टिलर के प्रयोग से कम लागत और कम समय में सभी काम आसानी से खत्म हो जाते हैं।

खासतौर से पहाड़ी इलाकों में खेती के काम के लिए यह मशीन काफी कारगर है।आज अनेक कंपनियां पावर टिलर बना रही?हैं। उन्हीं में से एक वीएसटी शक्ति 130 डि पावर टिलर के बारे में जानकारी दी जा रही है :

वीएसटी शक्ति 130 डि – पावर टिलर

यह वीएसटी शक्ति द्वारा बनाया गया पावर टिलर है। इस से खेतों, बागानों व लाइनों में होने वाली फसलों की गुड़ाई आदि की जाती?है। यह पहाड़ी इलाकों में खेतों की जुताई करने वाला खास यंत्र है।

खासीयत : यह काफी हलका और चेन रहित होता है। यह चलने में बेहद आसान है।इसका आकार 2720 ​​x 865 x 1210 मिमी होता है और वजन (इंजन और ट्रांसमिशन रोटरी के साथ) 405 किलोग्राम होता है। इसका 4 स्ट्रोक सिंगल सिलेंडर इंजन 13HP की पावर पैदा करता है।इसमें आगे के लिए 6 गेअर और रिवर्स के लिए 2 गेअर होते है ।

इस मॉडल की कीमत 165000 के करीब है इसके बाकि मॉडल की कीमत मॉडल के हिसाब से कम जा ज्यादा हो सकती है ।

इस से आप क्या-क्या मशीने चला सकते है वो निचे देखें

आज किसान पावर टिलर के साथ अन्य यंत्रों को जोड़ कर खेती के कई काम आसानी से कर रहे?हैं। यह एक ऐसी खास मशीन है, जिस से अन्य यंत्रों को जोड़ कर खेती के तमाम काम लिए जा सकते हैं।

1.पानी का पंप

Water Pump

 

2.थ्रेशर

अक्षीय फ्लो थ्रेशर

3.रीपर

काटनेवाला

4.बैल प्रकार इंटर कल्टीवेटर

Bullock Type Inter Cultivator

4.बीज ड्रिल

ये सभी मशीने इस टिलर के साथ जुड़ सकती है किसान अपनी जरूरत के हिसाब से इन में से कोई भी मशीन खरीद सकता है लेकिन हर मशीन की अलग किमत होती है

अधिक जानकारी के लिए Toll Free फोन नंबर : 18004190136 और मोबाइल नंबरों 080 – 28510805 / 06/ 07 व 080 – 67141111 पर बात कर सकते हैं।

यह पावर टिलर कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो भी देखें

अब पथरीली ज़मीन पर स्प्रींग कल्टीवेटर से करें खेत की जुताई

स्प्रींग टाइन कल्टीवेटर में फ्रेम, टाइन, रिवर्सिबल शावेल, खिंचने वाली प्रणाली, भारी कार्य करने वाला स्प्रिींग इत्यादि भाग होते हैं। स्प्रींग का कार्य टाइन को चलते समय कठोर-वस्तु एवं पत्थर से बचाना है। शावेल हीट ट्रिटेड स्टील का बना होता है।

इसका इस्तेमाल विशेष तोर पर उस भूमि में किया जाता है जहाँ पर बड़े पथर ज्यादा होते है ।
यहाँ पर आम कल्टीवेटर के इस्तमाल से कल्टीवेटर को बहुत नुकसान उठाना पड़ता है और उसके मुड़ने और टूटने का डर रहता है । वहीँ स्प्रिंग कल्टीवेटर में स्प्रिंग लगे होने के कारण ये टूटता नहीं है।

यह कल्टीवेटर माउन्टेड टाइप होता हैं जो ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक प्रणाली द्वारा नियंत्रित होता है। यह यंत्र पशु चालित कल्टीवेटर (डोरा) की तुलना में 50 प्रतिशत मजदूरी की बचत तथा 30-35 प्रतिशत संचालन खर्च में बचत करती है।

उपयोग: इसका मुख्य कार्य सूखा या गीला नर्सरी बेड तैयार करने एवं चौड़ी कतार में निकाई-गुड़ाई करने तथा कादो करने में भी इसका प्रयोग करते हैं।

  • उत्पाद विवरण:
  • फ़्रेम: 75 x 40 मिमी
  • ट्यून्स संख्या : 11
  • ट्यून्स: 50 x 19 मिमी (जाली)
  • एंगल पिन: 50 x 6 मिमी
  • स्प्रिंग: 10 mm
  • लंबाई: 2458 मिमी:
  • पावर की आवश्यकता (एचपी): 50 – 55 एचपी
  • वजन : 260 किलोग्राम

 

अधिक जानकारी के लिए सम्पर्क करे

भारत इंजीनियरिंग कंपनी, शाम नगर, जी .टी. रोड, करनाल , हरियाणा,

MOBILE -+91-0184-2274720 +91 9996915558

यह  कैसे काम करते  है उसके लिए वीडियो भी देखें

ये है पेडल से चलने वाला पंप एक घंटे में निकलता है 5000 लीटर पानी

खेती के लिए जो सबसे ज्यादा जरूरी चीज है वो है पानी ।पानी के बिना खेती की कल्पना करना भी मुश्किल है । लेकिन सिंचाई के लिए जरूरी ईंधन और बिजली हर किसान नहीं खरीद सकता । ऐसे किसानो के लिए बिना खर्चा किये अब आ गया है पेडल पंप जा ट्रेडल पंप (treadle pump)। इस पंप की खसयत यह है के पानी निकलने के लिए आपको बस खड़े होकर पेडल दबाने होते है । जिस से पानी अपने आप निकलना शुरू हो जाता है ।

इस पंप को एक जगह से दूसरी जगह लेकर जाना बहुत आसान है क्योंकि इसका वजन सिर्फ 12 किल्लो है ।एक आदमी जिसका वजन 60 किल्लो है वो इस पंप से 15 फ़ीट गहरे पानी को उठा कर 45 फ़ीट तक सिंचाई कर सकता है । यह मशीन एक घंटे में 2000- 5000 लीटर पानी निकल सकती है ।

सिर्फ खेत में ही नहीं इसे आप अपने घर की छत पर पानी वाली टंकी में पानी पहुंचने के लिए भी इसका इस्तमाल कर सकते है । इसके इलावा आप इसके इस्तमाल से बगीची को भी पानी दे सकते है । इसके साथ हम फवारा सिंचाई भी कर सकते है । इसकी कीमत भी सिर्फ 4050 रुपये से शुरू हो जाती है ।

कहाँ से खरीदें यह ट्रेडल पंप (treadle pump)

यह ट्रेडल पंप (treadle pump) कई कम्पनियों द्वारा त्यार किया जाता है । आप इस लिंक https://dir.indiamart.com/impcat/treadle-pump.html के ऊपर क्लिक करके सभी कम्पनियों के नाम जान सकते है और किसी भी कंपनी से इसे खरीद सकते है । इसके इलावा हम आपको एक कंपनी का नाम और एड्रेस बताएँगे जिस से आप इस मशीन को खरीद सकते है उस कंपनी का नाम है “एकफ्लो ट्रेडले पंप (Ecoflo Treadle Pump)” यह नासिक महाराष्ट्र की कंपनी है । इसको खरीदने के लिए आप इस नंबर 08048402340 पर संपर्क कर सकते है ।

यह पंप कैसे काम करता है उसके लिए वीडियो देखें

इस ट्रेक्टर की खूबियां जान कर रह जाएंगे हैरान

लोगों के शौक भी अजीबोगरीब होते हैं। कोई बीएमडब्ल्यू और मर्सीडिज में लग्जरी ड्राइविंग खोजता है तो कोई टैक्टर में। 1 करोड़ 69 लाख रुपए का यह टैक्टर इसी सपने से जन्मा है। यह साइंस और इनोवेशन के साथ लग्जरी और शौक का अनोखा मिश्रण है। किसी टॉप एसयूवी और इस टैक्टर में कई सारी समानताएं हैं। 24,200 पाउंड वजन के इस टैक्टर की टॉप स्पीड लगभग 50 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो लग्जरी के मामले में कारों को भी मात देती है।

 

एसयूवी से कई समानताएं

महंगी लग्जरी एसयूवी और इस टैक्टर में कई सारी समानताएं हैं। इसमें 6.7 लीटर टर्बो-डीजल इंजन, डूअल-क्लच गीयर-सेट और ऑटोमैटेड लॉकिंग डिफरेंशियल्स लगे हुए हैं। वास्तव में इस ट्रैक्टर को कार जैसा बनाने की कोशिश की गई है। वैसे भी यूरोप के रईस किसान हाई-होर्सपावर की मशीन के साथ टाइटर टर्निंग रेडियस और प्रीमियम डिजाइन के शौकीन हैं। उनका मानना है कि किसानी बेहद कठिन और 24 घंटे तथा सातों दिन होने वाला काम है। ऐसे में टै्रक्टर को थोड़ा लग्जरी होना चाहिए।

धुंआ नहीं निकलता

केस आईएच का नया ऑप्टिम 4 इनटू 4 ट्रैक्टर एक यूरोपीय लग्जरी सामान की तरह है, जो अमीरों के लिए प्राइज्ड पजेशन जैसा है। इसमें यूरोपीय यूनियन के प्रदूषण, कोलाहल और उत्सर्जन संबंधी सभी मानकों और प्रतिबंधों का पूरी तरह से पालन किया गया है। ऑटोमैटेड सिस्टम्स के कारण इससे धुआं न्यूनतम निकलता है। इससे जुड़े बेलर, सीडर, डिस्क कल्टीवेटर, बकेट्स जैसी चीजों का संचालन बेहद स्मूथ है। इसमें कई सारे पावर हाइड्रॉलिक्स लगे हुए हैं।

ये बातें भी हैं खास

  • 24,200 पाउंड वजन का यह खूबसूरत ट्रैक्टर चमचमाती लग्जरी कार को भी देता है मात
  • 50 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से भागती है यह शानदार मशीन
  • 2017 केस आईएच ऑप्टिम को मिला ट्रैक्टर ऑफ द ईयर का खिताब

टैक्टर ऑफ द ईयर

देखने में विशालकाय और डीजल से चलने वाला यह टैक्टर बाहर से बुलडोजर की तरह दिखता है। हालांकि इसका इंटीरियर इतना खूबसूरत और आरामदायक है कि इससे सवारी करना लड़कियों को भी पसंद है। क्योंकि एक तरफ जहां इसकी चारों ओर धूल होती है, वहीं इसके अंदर बैठा आदमी किसी लग्जरी कार में बैठे होने के अहसास में खोया रहता है। इस टैक्टर का नाम है- 2017 केस आईएच ऑप्टिम 270 सीवीएक्स। अपनी खासियतों के कारण ही ट्रैक्शन और आइरिश फार्मर्स जैसी मासिक मैग्जीन के पत्रकारों के एक समूह ने इसे टैक्टर ऑफ द ईयर का खिताब दिया।