23 फरवरी के लिए मौसम विभाग की चेतावनी

भारतीय मौसम विभाग ने दिल्ली, उत्तर प्रदेश, हरियाणा और पंजाब समेत पूरे उत्तर भारत के लिए चेतावनी जारी की है। इसके अलावा मध्य प्रदेश, मध्य महाराष्ट्र, विदर्भ और मराठवाड़ा के लिए भी चेतावनी जारी की गई है।

मौसम विभाग ने उत्तर भारत के पहाड़ी राज्यों में बर्फबारी और ओले गिरने की आशंका जताई है साथ में मैदीनी राज्यों में आंधी तूफ़ान के साथ ओले गिरने की चेतावनी जारी की है।

ज्ञात हो की फिलहाल पंजाब, हरयाणा, राजस्थान और मध्य प्रदेश में मुख्यतः सरसों और गेहूं की फसलों की कटाई जोरों पर है, जबकि महाराष्ट्र में चने के अलावा अन्य रबी दलहनों के साथ-साथ अनाज की कटाई हो रहा है और ऐसे में यदि ओला वृष्टि होती है तो फसलों को नुकसान होने के साथ-साथ कटाई में भी देरी हो सकती है।

23 फरवरी के लिए मौसम विभाग की चेतावनी

मौसम विभाग के मुताबिक 23 फरवरी के दिन पश्चिम मध्य प्रदेश और उत्तर मध्य महाराष्ट्र में कुछेक जगहों पर आंधी तूफ़ान के साथ ओले गिरने की चेतावनी दी है।

24-25 फरवरी को इन राज्यों पर दिखेगा ज्यादा असर

24 फरवरी के दिन जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में पहाड़ी क्षेत्रों में कुछेक जगहों पर बर्फबारी की चेतावनी है। इसके अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, पश्चिम मध्य प्रदेश, मराठवाड़ा में कुछेक जगहों पर गरज के साथ ओले गिर सकते हैं।

सरकार ने जारी की नई “ई-नाम” ऐप,ऐसे करेगी किसानो की मदद

कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह ने किसानों के उत्पादों को बेहतर बाजार मूल्य दिलाने के लिए 6 नए फीचर से युक्त राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) मोबाइल ऐप को बुधवार को यहां जारी किया।

सिंह ने कहा कि इस ऐप को इस प्रकार से तैयार किया गया है जिससे किसान घर बैठे अपने उत्पाद के बाजार मूल्य की नवीनतम जानकारी प्राप्त कर सकेंगे तथा बाजार में पंजीयन भी करा सकेंगे।

उन्होंने कहा कि ई-नाम वैबसाइट हिन्दी, अंग्रेजी, गुजराती, मराठी, तमिल, तेलुगु, बंगला और उडिय़ा भाषा में उपलब्ध है तथा इसमें अन्य क्षेत्रीय भाषाओं को भी जोड़ा जाएगा।

ई-नाम पोर्टल में एम.आई.एस. डैशबोर्ड, व्यापारियों को भीम ऐप द्वारा भुगतान की सुविधा, मोबाइल भुगतान की सुविधा आदि को शामिल किया गया है ।

खेती से जुड़े बिजनेस से करें कमाई, सरकार दे रही है 8000 रुपए में ट्रेनिंग

आप अगर नया बिजनेस शुरू करने की सोच रहे हैं या आपको लगता है कि एग्री प्रोडक्‍ट्स का बिजनेस करना फायदे का सौदा साबित हो सकता है, लेकिन आपको इस बिजनेस के बारे में कोई जानकारी नहीं है तो आपके पास अच्‍छा मौका है कि आप एग्री बिजनेस पर हो रहे एंटरप्रेन्‍योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम में हिस्‍सा ले सकें।

सरकार के मिनिस्‍ट्री ऑफ स्किल डेवलपमेंट के अधीन नेशनल इंस्टिट्यूट फॉर एंटरप्रेन्‍योरशिप एंड स्‍मॉल बिजनेस डेवलपमेंट (निसबड) द्वारा खेती से जुड़े अलग- अलग तरह के बिजनेस के बारे में ट्रेनिंग ले सकें। आप को इस ट्रेनिंग प्रोग्राम के दौरान एग्री बिजनेस से जुड़ी छोटी से छोटी जानकारी दी जाएगी।

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आज हम अपको बताएंगे कि निसबड किस-किस तरह की ट्रेनिंग देगा और आप कैसे इस ट्रेनिंग प्रोग्राम में शामिल हो सकते हैं।

कैसे करें ऑर्गेनिक फार्मिंग

निसबड द्वारा ऑर्गेनिक फार्मिंग के बारे में पूरी जानकारी दी जाएगी, जैसे कि क्‍या है ऑर्गेनिक फार्मिंग, इसके फायदे क्‍या हैं, ऑर्गेनिक फार्मिंग की मार्केट क्‍या है, किस तरह की टैक्‍नोलॉजी का इस्‍तेमाल होता है, न्‍यूट्रेशन मैनेजमेंट क्‍या है, आर्गेनिक फार्मिंग की मैथोलॉजी, क्‍वालिटी अश्‍योरेंस, नेशनल प्रोग्राम ऑन ऑर्गेनिक प्रोडक्‍शन, ऑनलाइन सेल्‍स मॉडल, इको टूरिज्‍म, सरकार की स्‍कीम और सपोर्ट सिस्‍टम, भारत सरकार का असिस्‍टेंस प्रोग्राम आदि की जानकारी दी जाएगी।

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कैसे करें डेयरी बिजनेस

इसी दौरान आपको डेयरी बिजनेस के बारे में भी ट्रेनिंग दी जाएगी। इसमें डेयरी लगाने से लेकर चलाने तक की पूरी गाइडेंस दी जाएगी। साथ ही, आपको सरकार के सपोर्ट सिस्‍टम और स्‍कीम के साथ साथ लोन स्‍कीम की भी जानकारी दी जाएगी। डेयरी बिजनेस में सफल स्‍टार्ट-अप्‍स के बारे में भी केस स्‍टडी के बारे में निसबड द्वारा बताया जाएगा।

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कैसे करें फूड प्रोसेसिंग बिजनेस

निसबड के इस एंटरप्रेन्‍योरशिप डेवलपमेंट प्रोग्राम के दौरान आपको फूड प्रोसेसिंग बिजनेस के अलग-अलग मॉडल के बारे में भी बताया जाएगा। जैसे कि – फूड प्रोसेसिंग के एवेन्‍यू, छोटा फूड प्रोसेसिंग प्‍लांट कैसे लगाएं, फूड प्रोसेसिंग ब्रांड कैसे क्रिएट किया जाए, सरकार की सपोर्ट स्‍कीम, सक्‍सेसफुल स्‍टार्ट अप्‍स की केस स्‍टडी के बारे में जानकारी दी जाएगी।

कैसे खोलें कोल्‍ड स्‍टोरेज चेन

इसके अलावा आपको कोल्‍ड स्‍टोरेज चेन खोलने के फायदे, तरीके और सरकारी स्‍कीम के बारे में भी ट्रेनिंग दी जाएगी। यहां यह उल्‍लेखनीय है कि देश में कोल्‍ड स्‍टोरेज चेन की सख्‍त जरूरत है और सरकार भी प्रमोट कर रही है। आप कोल्‍ड स्‍टोरेज चेन शुरू करने के बारे में सोच सकते हैं।

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इन बिजनेस के भी लें सकेंगे ट्रेनिंग

  • ग्रीन हाउस
  • अरोमेटिक ऑयल
  • फ्लोरीकल्‍चर
  • फ्रूट कल्‍टीवेशन
  • पॉल्‍यूटरी एंड फिशरी

कैसे करें अप्‍लाई

यह दो दिन का ट्रेनिंग प्रोग्राम है। जो 24 व 25 फरवरी को निसबड के नोएडा सेक्‍टर 62 स्थित सेंटर में होगा। इस प्रोग्राम की फीस 8000 रुपए है। अगर आप हिस्‍सा लेना चाहते हैं तो इस लिंक पर क्लिक करके रजिस्‍ट्रेशन फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं।
http://niesbud.nic.in/docs/edp-on-agriculture-business-24-feb-to-25-feb-2018.pdf

मंडी में फसल बेचकर किसान को मिल सकता है ट्रैक्टर और पावर टिलर ,ये है पूरी स्कीम

अक्सर छोटे किसान अपनी उपज को सीधे मंडी में न लाकर गाँव में ही व्यापारियों को सस्ते में बेच देते हैं। गाँव में व्यापारी किसान की उपज की तौल में गड़बड़ी करके और दूसरे तरीकों से किसानों को उनके माल का पूरा पैसा नहीं देते हैं।

किसानों को अपनी उपज को खुद मंडी तक लाने के लिए प्रोत्साहित करने के लिए मंडी परिषद किसानों को ट्रैक्टर, पावर टिलर और साइकिल उपहार के तौर पर दे रहा है।

किसानों खुद मंडी आकर वहां पर अपने सामान का सही दाम व उपज की सही तौल पाने के अलावा मंडी व्यापार का गणित खुद समझें इसके लिए मंडी परिषद , उत्तर प्रदेश ने मंडी आवक किसान उपहार योजना शुरू की है। इस योजना नें किसान अपनी उपज मंडी में बेचकर मंडी कार्यालय की मदद से किमती उपहार जीत सकते हैं।

मंडी आवक किसान उपहार योजना के बारे में नवीन गल्ला मंडी लखनऊ के सचिव डी के वर्मा बताते हैं, ” मंडी में किसान अपनी अपज को व्यापारी को बेचता है, तो व्यापारी उसे एक खरीद पर्ची यानी कि 6R स्लिप देता है।

किसान इस पर्ची को मंडी समिति कार्यालय पर दिखा कर निशुल्क लकी ड्रॉ का कूपन ले सकता है। अगर ड्रॉ में किसान का कूपन चुना जाता है, तो उसे साइकिल, प्रेशर कुकर, पंपिंग सेट, स्प्रेयर ,पंखा जैसे इनाम मिल सकते हैं।

” वो आगे बताते हैं कि हर छठे महीने में मंडी में होने वाले बंपर ड्रॉ में कूपन शामिल होने पर किसानों को पावर टिलर , हार्वेस्टर और 35 हार्स पावर का ट्रैक्टर दिया जाता है।

मंडी में किसान की लाई गई उपज के बिक जाने पर उसे 6R स्लिप मिलती है, जिसमें उसकी बेची गई उपज की कीमत लिखी रहती है। 6R स्लिप पर लिखे हुए रेट के हिसाब से हर 5,000 रुपए की बिक्री होने पर किसान मंडी समिति के कार्यालय पर जाकर एक कूपन ले सकते हैं।

इस कूपन को हर महीने , तीन महीने और छठे महीने पर होने वाले लकी ड्रॉ में शामिल किया जाता है, कूपन चुने जाने पर मंडी की तरफ से किसानों को उपहार दिए जाते हैं। यह लकी ड्रॉ मंडलायुक्त द्वारा निकाला जाता है।

”मंडियों में किसानों को लाने के लिए कृषि में दुर्घटना सहायता, खलिहान आग दुर्घटना सहायता योजना और मंडी आवक किसान उपहार योजना चलाई जा रही हैं और किसान भी इन योजना का फायदा उठा रहे हैं। हाल ही में हुए ड्रॉ में हमने किसान किसानों को साइकिलें और दूसरे उपहार दिए हैं।” मंडी सचिव डी के वर्मा ने बताया।

मंडियों में किसानों के लिए होने वाले लकी ड्रॉ में मिलने वाले उपहार

  • हर महीने होने वाला लकी ड्रॉ-इनाम ( मोबाइल – 10 ,साइकिल -10 , प्रेशर कुकर – 10)
  • हर तीसरे महीने होने वाले लकी ड्रॉ-इनाम (पंपिंग सेट -एक , स्प्रेयर – दो , पंखा – तीन)
  • हर छठे महीने वाले लकी ड्रॉ – इनाम ( ट्रैक्टर – एक, पावर टिलर – दो , थ्रेशर – तीन)

किसान का अनोखा फार्मूला ,फसलों को बुरी नज़र से बचाएगी सनी लियोनी

क्या सनी लियोनी का पोस्टर खेतों में लगी फसलों को बुरी नजर से बचा सकता है? आप सोच रहे होंगे ये बकवास है. लेकिन आन्ध्र प्रदेश के नेल्लोर जिले में एक किसान ने फसलों को बुरी नजर से बचाने के ऐसी ही एक अजीबोगरीब तरकीब अपनाई है.

यहां किसान ने खेत में बॉलीवुड एक्ट्रेस सनी लियोनी के पोस्टर लगाए हैं. ये पोस्टर भी छोटा नहीं है…. दो बड़े पोस्टर में सनी लियोनी लाल बिकनी में नजर आ रही हैं. इस पोस्टर को लगाने में किसान ने 600 रुपये खर्च किए हैं.

ये पोस्टर हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. पोस्टर खेत के दोनों किनारों पर लगाए हैं. इनपर तेलुगू में लिखा है, ‘मुझसे जलना मत’. साथ ही किसान ने दावा किया है कि इसे लगाने के बाद से उनकी फसल की पैदावार भी बढ़ गई है.

रेड्डी ने बताया कि उनके एक दोस्त ने सनी लियोनी के पोस्टर लगाने की सलाह दी. दोस्त के इस सुझाव पर उन्होंने अमल किया और अब हर कोई सिर्फ सनी लियोनी को देखता है न कि उनके फसल को. उन्होंने कहा, “इस साल 10 एकड़ में अच्छी पैदावर हुई है. मेरी फसल की तरफ लोगों की नजर नहीं जाती. अब मेरी फसलें अच्छी हो रही हैं.”

ये कोई पहला मौका नहीं है जब सनी लियोनी के पोस्टर का इस्तेमाल किया गया हो. इससे पहले साल 2016 में भी केरल के कोल्लम जिले में श्री नारायण पॉलिटेक्निक कॉलेज ने नए बैच के स्टूडेंट्स के स्वागत के लिए एडल्ट फिल्म स्टार मिया खलीफा और सनी लियोनी का बैनर लगाया था. बैनर पर मलयालम में लिखा था ‘नए छात्र-छात्राओं का स्वागत है.’

2000 रुपये की दर से गेहूं खरीदेगी यहाँ की सरकार

मध्य प्रदेश में राज्य सरकार गेहूं के साथ ही धान के किसानों को 265 रुपये प्रति क्विंटल का बोनस देगी। मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान की फसल पर किसानों को यह बोनस मिलेगा।

राज्य के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के अनुसार पिछले साल किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से कम कीमतें मिली थी, इसलिए राज्य के किसानों को गेहूं और धान का उचित मूल्य नहीं पाया था। इसलिए हमने फैसला किया है कि मुख्यमंत्री उत्पादकता प्रोत्साहन योजना के अंतर्गत गेहूं और धान पर किसानों को 200 रुपये प्रति क्विंटल का अतिरिक्त बोनस दिया जायेगा।

रबी में गेहूं की खरीद 2,000 रुपये की दर से होगी

किसानों को संबोधित करते हुए सीएम ने कहा कि प्रदेश का किसान कर्जमाफी या खैरात नहीं चाहता। उसे पसीने की कमाई चाहिए। इसलिए उपज का पूरा मूल्य मुख्यमंत्री कृषि उत्पादकता प्रोत्साहन योजना से दिया जाएगा।

इस योजना के तहत गेहूं और धान पर एमएसपी के अतिरिक्त 200 रुपए प्रति क्विंटल प्रोत्साहन राशि दी जाएगी। गेहूं की खरीदी 2,000 रुपए प्रति क्विंटल से कम में नहीं होगी। इसके साथ ही भावांतर योजना जारी रहेगी। ओलावृष्टि से हुए नुकसान की भरपाई राहत और फसल बीमा राशि को मिलाकर की जाएगी।

किसानों को 265 रुपये प्रति क्विंटल अतिरिक्त मिलेंगे

सरकार पर 1670 करोड़ रुपए का अतिरिक्त भार आएगा। गेहूं पर 1340 करोड़ रुपए और धान पर 330 करोड़ रुपए का अतिरिक्त खर्च आएगा। गेहूं का एमएसपी 1735 रुपये प्रति क्विंटल है, इसमें बकाया 265 रु. की राशि राज्य सरकार मिलाएगी। यानी किसान के खाते में 265 रुपये ज्यादा आएंगे।

धान खरीदी में भी यही प्रक्रिया रहेगी। रबी विपणन सीजन 2018-19 के लिए केंद्र सरकार ने गेहूं का एमएसपी 1,735 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है। जबकि केंद्र सरकार ने खरीफ विपणन सीजन 2017-18 के लिए धान कामन ग्रेड का एमएसपी 1,550 रुपये और ए ग्रेड के धान का भाव 1,590 रुपये प्रति क्विंटल तय किया हुआ है।

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और यूपी के कई इलाकों में ओलावृष्टि, अगले दो दिन हो सकती है बारिश

मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश के कई इलाकों में रविवार को भारी बारिश के साथ ओलावृष्टि होने से फसलों को भारी नुकसान पहुंचा है। सरसों, चना और मसूर जैसी फसलों को ओले से नुकसान हुआ है। ओलों और तेज हवाओं से गेहूं की तैयार खड़ी फसल गिर गई है। देश के कई हिस्सों में सोमवार को भी बारिश जारी है।

महाराष्ट्र के कुछ हस्सिों में रविवार को बेमौसम ओलावृष्टि और भारी बारिश होने के चलते दो लोगों की जान चली गई है। और फसलों को नुकसान पहुंचा। राज्य सरकार के अधिकारियों ने बताया कि बारिश संबंधी घटनाओं के कारण दो महिलाएं घायल भी हुयी हैं। उधर मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने ट्वीट कर कहा कि किसानों को परेशान होने की जरुरत नहीं, उनके नुकसान की भरपाई की जाएगी।

जानकारी के अनुसार बारिश और ओलों से सबसे ज्यादा नुकसान मध्य प्रदेश में हुआ है। एमपी में भोपाल समेत हरदा, सीहोर, देवास, बैतुल, शिवपुरी, भिंड, सिवनी, रायसेन, छिंदवाड़ा समेत कई जिलों में भारी बारिश होने के साथ ओलावृष्टि से किसानों की खड़ी फसलें बर्बाद हो गई हैं। खासकर चने, गेहूं और मसूर की फसल को ज्यादा नुकसान पहुंचा है।

मध्य प्रदेश से राष्ट्रीय किसान मजदूर संघ के प्रवक्ता भगवान सिंह मीना ने बताया, “ओलावृष्टि से गेहूं की बालियां पूरी तरह बिखर गई हैं। चने की खड़ी गिल्ठियां भी नीचे गिर गई हैं। पकने वाली फसल भी गिर गई है। कई जगह किसानों को खेत काटने की नौबत नहीं आएगी। मोटे अनुमान के मुताबिक करीब 75 प्रतिशत का नुकसान हुआ है।

” मौसम की मार उत्तर प्रदेश के किसानों पर भी पड़ी है। उत्तर प्रदेश में भी कुछ इलाकों में तेज हवा के साथ भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई है। इस वक्त सरसों पक रही है तो चना और मसूर में फलियां पड़ रही थी, जिन्हें काफी नुकसान पहुंचा है।

औरैया के बीहड पट्टी में यमुना किनारे बसा गाँव खानपुर के किसान अब्दुल रसीद (45 वर्ष) बताते हैं, “मैंने पांच बीघा खेत में चना बोया था, बारिश के साथ ओले गिरने से फसल आधी नष्ट हो गई है। अब तो फसल पर हुआ खर्चा भी निकलना मुश्किल दिखाई दे रहा है।” वहीं, इसी जिले के गाँव पैगंबरपुर के किसान सरोज कुमार (38 वर्ष) ने बताया, “सरसों में फली आ गई थी, जो तेज हवा चलने से गिर गई है।

” उत्तर प्रदेश के ज्यादातर हिस्सों में रविवार को घने बादल छाए रहे। इन घने बादलों को देखकर किसान चिंता में हैं। बाराबंकी जिले के सिद्धौर ब्लॉक के अजमल पट्टी गाँव के किसान जैनेन्द्र अवस्थी बताते है, “हमें डर है कि अगर यहां ओलावृष्टि होती है तो सरसों, गेहूं, चने समेत सभी फसलों को भारी नुकसान होगा।” वहीं, हैदरगढ़ ब्लॉक के तारागंज के किसान नीरज मिश्रा बताते हैं, “इस बरसात से किसान काे सिर्फ नुकसान ही होगा। मौसम को देखते हुए यहां भारी बारिश हो सकती है।

” मध्य प्रदेश में बारिश के साथ जमकर गिरे ओले।

मौसम की बेरुखी का खामियाजा महाराष्ट्र के किसान भी भुगत रहे हैं। महाराष्ट्र के जलाना जिले में काफी नुकसान की खबर है। रविवार सुबह बारिश से जिन किसानों की फसलें बच गई हैं, वो भी डरे हुए हैं। मौसम विभाग ने आऩे वाले 2 दिनों में मौसम बारिश की आशंका जताई है।

आने वाले दिन में बारिश की आशंका

मौसम विभाग के अनुसार, उत्तर भारत में जम्मू-कश्मीर के पास एक पश्चिमी विक्षोभ अधिक सक्रिय है, दूसरी ओर दक्षिणी राजस्थान और गुजरात में चक्रवाती हवाओं का क्षेत्र विकसित हो गया है, ऐसे स्थिति में दोनों के प्रभाव से उत्तर पश्चिम भारत के ज्यादातर इलाकों में बारिश होने की संभावना है।

मौसम विभाग की मानें तो 11 से 14 फरवरी के बीच जम्मू कश्मीर से लेकर मध्य भारत में मध्य प्रदेश और पूर्व में बिहार तक तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि हो सकती है। वहीं, ओडिशा और पश्चिम बंगाल पर हवाओं में एक विपरीत चक्रवाती क्षेत्र बन गया है। ऐसे में छत्तीसगढ़, झारखंड, बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश में तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है। ऐसे में देश के ज्यादातर राज्यों में बारिश की अच्छी संभावना है।

इस तारीख तक है भरी बारिश की संभावना ,ओले भी गिरेंगे

उत्तर भारत के किसानों के लिए संकट के बादल अभी टले नहीं है।आज सारे उत्तर भारत में रुक रुक कर बारिश हो रही है कुश जगह पर ओले भी पड़े। यदि बारिश ऐसे ही होती रही तो किसानों को बहुत नुकसान होगा।

इस बार ठंड जल्दी लोगों का पीछा नहीं छोड़ेगी। मार्च तक ठंड अपना पूरा असर दिखाएगी। मौसम विभाग ने आगामी दिनों में मौसम की अनिश्चितता बरकरार रहने की संभावना जताई है। मौसम विभाग की माने तो में 11 से 15 फरवरी तक मौसम के तेवर कड़े रह सकते है।

इस दौरान जहां आसमान बादलों से घिरा रहेगा, वहीं पहाड़ी क्षेत्रों में भारी बर्फबारी होने की संभावना है साथ है उत्तर भारत के मैदानी इलाकों (जैसे मध्य प्रदेश ,उत्तर प्रदेश ,हरियाणा ,बिहार …) में भारी बारिश,तूफान के साथ ओले गिरने की संभावना बानी रहेगी । सक्रिय हुई पश्चिमी हवा ने प्रदेश की ओर रुख कर लिया है। जिस से ठण्ड और बढ़ सकती है ।

ऐसे में यदि बारिश होती है तो किसानों को खासी परेशानी होगी। क्योंकि फसलें पक चुकी हैं और अधिकांश खेतों में कटाई का दौर चल रहा है। डॉ. तोमर ने बताया कि दो दिन में किसान जितनी अधिक से अधिक फसल को काटकर सुरक्षित रख लें, उतना ठीक है। इसके साथ ही उन्होंने खेतों की सिंचाई के लिए भी मना किया है।

ऐसे करें करेले की खेती, प्रति एकड़ होगी 60 हजार रु की इनकम

खेतीबाड़ी से जुड़े लोगों के लिए अच्छी खबर है। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आई ए आर आई) ने करेले की एक ऐसी कि‍स्‍म तैयार की है, जि‍समें 15 दिन पहले फल लग जाते हैं। यही नहीं, इसका उत्पादन भी 20 से 30 फीसदी अधिक है। इस करेले की नई किस्म का नाम पूसा हाईब्रिड-4 है। वैज्ञानिकों का दावा है कि एक एकड़ में इसकी खेती से 50 से 60 हजार रुपए की इनकम हो सकती है।

क्या खासियत है मेडिकल करेले की

कृषि वैज्ञानिकों ने करेले की एक ऐसी संकर किस्म का विकास किया है जो डायबिटीज को नियंत्रित करने में और अधिक कारगर सिद्ध होगी। पूसा हाईब्रिड -4 में पारांटिन, मोमोडीसीन और सपोनीन जैसे तत्व पाए जाते हैं जो इसे मधुमेहरोधी बनाता है।

15 दिन पहले तैयार होगा फल

आमतौर पर करेले की फसल में 55 से 60 दिनों में फल आने शुरू होते हैं जबकि नयी किस्म में 45 दिन में फल लग जाते हैं। इसके साथ ही इसकी पैदावार भी 20 से 30 प्रतिशत अधिक है। गहरे हरे रंग का यह करेला मध्यम लम्बाई और मोटाई का है जिसका औसत वजन 60 ग्राम होता है। इसकी पैदावार प्रति हेक्टेयर 22 टन से अधिक है।

साल में दो बार लगाएं

नयी किस्म दो बार फरवरी के अंत और मार्च में और अगस्त व सितंबर के दौरान लगायी जाती है। लगभग चार माह तक इसमें फल लगते हैं। करेले की यह एक ऐसी किस्म है जिससे जमीन और मचान पर भी भरपूर पैदावार ली जा सकती है।

किन देशों में होता है एक्सपोर्ट

देश से जिन सब्जियों का एक्सपोर्ट किया जाता है उनमें करेला भी शामिल है। खाड़ी के देशों में भारतीय करेले की अच्छी मांग है। इसके अलावा कुछ अन्य देशों में भी इसकी मांग है। देश के सभी प्रमुख सब्जी उत्पादक राज्यों में करेले की खेती की जाती है।

अब पराली से भी होगी कमाई, 6600 के रेट से खरीदेगी ये कंपनी

कृषि‍ अवशेषों को खेतों में जलाने की समस्‍या पर लंबे समय से बहस हो रही है। कि‍सानों को इसके निपटारे का सबसे आसान रास्‍ता यही नजर आता है कि‍ उसे खेत में ही जला दि‍या जाए। इस वजह से दि‍ल्‍ली-एनसीआर में प्रदूषण का लेवल भी बढ़ता है। हालांकि‍ अब अगर कि‍सान खेत में पराली जलाएगा तो समझें कि‍ वह नोट जला रहा है, क्‍योंकि‍ पराली अब बेकार की चीज नहीं रह गई है। इसका एक बड़ा खरीददार आ गया है।

देश में सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी बिजली उत्पादक कंपनी नेशनल थर्मल पावर कॉरपोरेशन (एनटीपीसी) अब पराली खरीदेगा। इसकी शुरुआत जल्‍द होने वाली है। फि‍लहाल कंपनी अपने दादरी प्‍लांट के लि‍ए रोजाना 1,000 टन कृषि अवशेष खरीदेगी।

कोई भी आ सकता है आगे कंपनी के एक प्रवक्ता ने बताया कि‍ बायोमास आधारित पैलेट्स की टेस्ट फायरिंग के आरंभिक चरण पूरे होने पर एनटीपीसी ने प्रति दिन 1000 मीट्रिक टन कृषि अवशेष आधारित ईंधन यानी बायोमास (500 मीट्रिक टन प्रतिदिन कृषि अवशेष पैलेट्स और 500 मीट्रिक टन प्रतिदिन टॉरेफाइड कृषि अवशेष पैलेटस या ब्रिकेट्स) की खरीद के लिए निविदा आमंत्रित की है।

उन्‍होंने बताया कि‍ हम चाहते हैं कि‍ इस काम में स्‍टार्टअप भी आगे आएं। एनटीपीसी ने एक्‍सपीरिएंस की कोई शर्त नहीं रखी है। अगर पर्याप्‍त संख्‍या में बोली लगाने वाले मि‍ल गए तो एनटीपीसी अपने सभी प्‍लांट के लि‍ए कृषि‍ अवशेष खरीदेगी।

यह होगी कीमत

एनटीपीसी की विज्ञप्ति के अनुसार, निविदा दो वर्षों के लिए मंगाई गई है, जिसमें रोजाना 1000 टन पराली खरीदी जाएगी। इसमें पैलेट्स की कैपिंग कीमत 5500 रुपये टन तय की गई है और ब्रिकेट्स के लि‍ए यह कीमत 6,600 रुपये प्रति टन निर्धारित की गई है।

गौरतलब है कि‍ बजट भाषण के दौरान वि‍त्‍त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि एनसीआर में प्रदूषण की स्‍थि‍ति को देखते हुए सरकार ऐसे कदम उठाएगी जि‍ससे कि‍सान कृषि अवेशेषों को खेत में ही न जलाएं।