1800 रुपये किलो बिकती है काले चावल की यह किसम

मणिपुर में पैदा होने वाले विशेष काले चावल के दाम सुनकर कइयों के होश उड़ जाएंगे। 1800 रुपये प्रति किलो के आसपास के दाम पर बिकने वाले इस विशेष चाक हाओ (सेंटेड काला चावल) में पोषक तत्वों की मात्रा अन्य चावलों से ज्यादा है, इसलिए इसके गुणों को देखकर 1800 रुपये किलो का दाम भी सस्ता लगने लगता है।

राज्य के किसानों को आर्थिक लाभ पहुंचाने और इसमें पाए जाने वाले औषधीय गुणों से अधिकांश लोगों को लाभ प्रदान कराने के मकसद से मणिपुर सरकार का कृषि विभाग इस चावल की ब्रांडिंग में जुटा हुआ है। प्रदेश सरकार का कहना है कि चाक हाओ मणिपुर के संसाधन की आर्थिक थाती बन सकता है। सरकार इस चावल की जोर-शोर से ब्रांडिंग भी कर रही है।

 

मणिपुर में काले धान की पैदावार होती है, जिससे काला चावल निकलता है। मणिपुर सरकार के कृषि विभाग ने इसकी प्रजाति को उन्नत बनाते हुए इसमें औषधीय गुणों और पोषक तत्वों की प्रचुरता वाले काले धान की किस्म ईजाद की है। इससे निकलने वाला चावल सामान्य काले चावलों से ज्यादा गुणी है, इसलिए चाक हाओ की कीमत करीब 1800 रुपए प्रति किलो के आसपास है। अभी इसका व्यवसायिक उत्पादन उतना तेज नहीं हुआ है।

वैसे सामान्य काले चावल की बाजार में कीमत भी 150 से 200 रुपए किलो के आसपास है। मणिपुर कृषि विभाग के अनुसार 2015 के खरीफ सीजन के दौरान 60 से 70 हेक्टेयर खेत पर चाक हाओ की उपज हुई थी। राज्य सरकार ने इसकी खेती का दायरा बढ़ाने का निर्णय लिया है। मिशन ऑर्गेनिक वेल्यू चेन, एनई के तहत वर्ष 2016 के खरीफ सीजन में प्रदेश सरकार ने किसानों को करीब 2000 हेक्टेयर में इसकी पैदावार के लिए प्रेरित किया है। सरकार को उम्मीद है कि इसकी मांग देश-दुनिया के बाजार में तेजी से बढ़ेगी। राज्य के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह ने कहा कि देश-दुनिया में हमारे चावलों की मांग बढ़ रही है।

चाक हाओ है फायदे का सौदा

black rice1

मणिपुर सरकार के कृषि मंत्रालय के जरिए दिए गए आंकड़ों के अनुसार अन्य काले चावलों के मुकाबले चाक हाओ किसान, व्यापारियों से लेकर उपभोक्ता तक के लिए लाभ का सौदा है। इसकी खेती में प्रति हेक्टेयर 60 हजार रुपये की लागत आती है।

इससे करीब 2880 किलो धान का उत्पादन होता है और उस धान से यदि 65 प्रतिशत चावल की रिकवरी मानें तो प्रति हेक्टेयर के धान से 1872 किलो चावल निकलता है। सरकार ने 100 किलो के चावल का बिक्री मूल्य 182720 रुपये निर्धारित किया है। इस हिसाब से देखा जाए तो तो एक  हेक्टेयर से 35 लाख और एक एकड़ से 14 लाख की धान की फसल होगी ।

काले चावल को स्वास्थ्य के लिए सबसे लाभकारी

यूं तो काले चावल को स्वास्थ्य के लिए सबसे लाभकारी माना जाता है। सफेद और भूरे चावल के मुकाबले काले चावल में विटामिन और खनिज तत्वों की प्रचुरता ज्यादा रहती है। एंथोसायनिन पाए जाने की वजह से इस चावल का रंग काला होता है जो कि इसमें एंटी ऑक्सिडेंट को बढ़ाता है। एंटी ऑक्सिडेंट हमारे शरीर से विषाक्त पदार्थों को बाहर करने में मदद करता है।

इस विशेष चावल में एंटीऑक्सिडेंट की मात्रा ज्यादा है। इसके अलावा इसमें विटामिन ई, फाइबर और प्रोटीन की प्रचुरता सामान्य काले चावलों से भी ज्यादा है जबकि सामान्य काले चावल में यह तत्व सफेद और भूरे चावल से ज्यादा है।अगर गुणवत्ता की बात करें तो इसके 100 ग्राम में कार्बोहाइड्रेट-34, प्रोटीन-8.7, आयरन-3.5, फाइबर-4.9 और सर्वाधिक एंटी ऑक्सिडेंट मौजूद रहता है।

मणिपुर सरकार ने दावा किया है कि तमाम शोधों के बाद यह प्रमाणित हुआ है कि इस काले चावल के खाने से गंभीर ऐथिरोस्क्लेरोसिस बीमारी, उच्च रक्तचाप, तनाव, उच्च कोलेस्ट्रॉल, आर्थराइटिस, कैंसर और एलर्जी सरीखी बीमारियों से पीड़ितों को बचाव एवं राहत प्रदान करता है।

 

 

 

ऐसे करे कीवी की खेती , 1 एकड़ से कमाए 8 लाख रुपये


कीवी का उत्पति स्थल चीन है, हालांकि कीवी को चीन के अलावा न्यूजीलैंड, इटली, अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, पाकिस्तान, ईरान,नेपाल, चिली, स्पेन और भारत में भी उगाया जा रहा है.

भारत में इसकी खेती हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, मेघालय , सिक्किम, अरुणाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर के पहाड़ी क्षेत्रों में उगाया जा रहा है. इसकी खेती मैदानी राज्यों जैसे उत्तर प्रदेश, कर्नाटक, केरल में भी की जाने लगी है. इस फल को 1000 मीटर से 2500 मीटर की समुन्द्र तल से ऊँचाई पर उगाया जा सकता है.

किस्में : इसकी प्रचलित किस्मों में अब्बोट, अलिसन, ब्रूनो, हेवर्ड और तोमुरी हैं.

कैसे उगायें :  कीवी का पौधा एक बेल होती है जो 9 मीटर तक बढ़ सकती है और यह 4 से 5 वर्ष के बाद फल देना शुरू कर देती है. फूल आने से फसल पकने तक की अवधि लगभग 100 दिन होती है. यह एकलिंगी पौधा होता है, इसलिए मादा कलमों के साथ नर की जड़ित कलमों को लगाया जाता है ताकि अच्छी तरीके से परागण हो सके और ज्यादा उत्पादन लिया जा सके.

आठ मादा बेलों के लिए एक नर बेल आवश्यक होती है. इसकी कलमों को बसंत ऋतु में लगाया जाता है. इसको अंगूर की तरह ही ढाँचे पर चढ़ाना चाहिए. इसकी कटाई-छटाई गर्मी और सर्दी दोनों मौसम में करनी चाहिए ताकि ज्यादा उत्पादन लिया जा सके. कीवी को पाले से बचाना बहुत जरुरी होता है. इसके फल नवम्बर महीने से पकने शुरू हो जाते हैं. कीवी को काफी पानी की आवश्यकता होती है इसलिए सिंचाई का उचित प्रबंध होना चाहिए.

500 ग्राम एनपीके मिश्रण प्रत्येक वर्ष प्रति बेल 5 साल की उम्र तक देना चाहिए उसके बाद 900 ग्राम नाईट्रोजन, 500 ग्राम फोस्फोरस और 900 ग्राम पोटाश को प्रति वर्ष प्रति बेल देना चाहिए. जड़ गलन से बचाने के लिए बाविस्टिन 2 ग्राम प्रति लीटर पानी के हिसाब से पौधों में देना चाहिए. इसके फल औसतन 80 से 90 ग्राम के होते हैं.

इसके फलों को 0 डिग्री तापमान पर कोल्ड स्टोरेज में 4 से 6 महीने रखा जा सकता है पर सामान्य अवस्था में 8 हफ्ते तक फल ख़राब नहीं होता है. एक बेल से प्रत्येक वर्ष 40 से 60 किलो फल मिलते हैं. इसकी औसतन पैदावार 20 से 25 टन प्रति हेक्टेयर है. फलों को बाजार में भेजने से पहले 3 से 4 किलो की क्षमता वाले कार्ड बोर्ड में पैक करना चाहिए .बाजार के औसत भाव को देखते हुए 1 एकड़ बगीचे से लगभग 8 लाख रुपए प्रति वर्ष कमाये जा सकते हैं.

कलम मिलने के स्थान :

  • डॉ.वाई.एस. परमार यूनिवर्सिटी ऑफ़ हॉर्टिकल्चर एंड फॉरेस्ट्री, नौनी जिला सोलन हिमाचल प्रदेश,01792 252326, 252310
  • शेख गुलज़ार, श्री नगर, जम्मू कश्मीर , 9858986794

कीवी खाने के लाभ :

कीवी में विटामिन सी प्रचुर मात्रा में पाया जाता है. यह अनिंद्रा रोग को दूर करता है और पाचन क्रिया को सही करता है. आयरन का भी बेहतरीन स्त्रोत है.

ईरान ने चावल आयात पर लगी रोक हटाई, 1121 धान में 200 रुपए तक आया उछाल

ईरान ने चावल आयात पर लगी रोक हटा दी है। इससे 1121 धान के रेट में 200 रुपए तक का उछाल आया है। इसका सीधा फायदा चावल निर्यातकों किसानों को होगा। ईरान सीजन में आयात पर अस्थाई रोक लगा देता है, ताकि लोकल किसानों का धान खरीदा जा सके। इस बार वहां लोकल पैदावार कम है और डिमांड ज्यादा है। इसलिए रोक हटा दी गई है।

ईरान ने 22 नवंबर से 22 जुलाई 2018 तक चावल निर्यात खोल दिया है। ईरान में हर साल तीन मिलियन टन चावल की खपत है, जबकि उसका घरेलू उत्पादन 2.2 मिलियन टन है। इसलिए उसे 8 से 10 लाख टन का आयात करना पड़ता है। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स के पूर्व प्रधान विजय सेतिया ने बताया कि देश के लिए यह अच्छी खबर है। इसका राइस एक्सपोर्टर्स को फायदा होगा। एक्सपोर्टर्स को परमिट देना शुरू कर दिया है।

एक लाख टन चावल ईरान के पोर्ट पर पड़ा है, यह भी अब जल्द उठ जाएगा। सेतिया ने बताया कि भारत से 40 लाख टन चावल का निर्यात होता है। इसमें से 25 प्रतिशत निर्यात ईरान में होता है। इस बार चावल निर्यातकों ने महंगे दाम पर धान खरीदी हुई है, अब चावल बाहर जाने से निर्यातकों को फायदा होगा। अगले कुछ दिनों मेें इसका और किसान दोनों को फायदा होगा। पूसा-1121 का चावल ईरान में सबसे ज्यादा जाता है। अरब के देशों में ज्यादातर 1121 की खपत है। यूरोप में सुपर बासमती चावल की डिमांड ज्यादा होती है।

1121 में ऐसे आया उछाल 

ईरानमें चावल का निर्यात खुलते ही 1121 जीरी के भाव में 200 रुपए प्रति क्विंटल का उछाल आया है। पहले 1121 धान 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक बिकी थी, लेकिन गुरुवार को नरवाना मंडी में 1121 जीरी 3390 रुपए प्रति क्विंटल, पिल्लूखेड़ा 3379, जींद 3380, निसिंग 3400, हांसी 3351, चीका मंडी 3350 , कलायत 3411, खन्ना मंडी 3470, अमृतसर 3485, करनाल 3370, कैथल 3380 रुपए प्रति क्विंटल बिकी। बासमती जीरी में 30 से 40 रुपए प्रति क्विंटल का उछाल आया है।

 

किसानों को मिला अच्छा भाव 

इसबार किसानों को धान का भाव सीजन की शुरुआत से ही अच्छा मिल रहा है। पीआर धान समर्थन मूल्य से ज्यादा भाव में बिकी। 1509 किस्म का भाव 2300 रुपए से लेकर 2600 रुपए प्रति क्विंटल मिला। डुप्लीकेट बासमती भी 2800 रुपए, 1121 का रेट 2800 से 3300 रुपए, परंपरागत बासमती का रेट 3500 रुपए से लेकर 4000 रुपए प्रति क्विंटल मिल रहा है। विदेशों में ज्यादा सौदे होते हैं तो रेटों में उछाल सकता है।

अब ट्रैक्टर-ट्राली पर भी लगेगा इतना टोल टैक्स

देश भर के किसान अब यदि अपनी ट्रैक्टर ट्राली के साथ किसी भी टोल प्लाजा से गुजरेंगे तो उन्हें ट्रकों के समान टोल देने पड़ेंगे। केंद्र सरकार किसानों के ट्रैक्टर ट्राली को कामर्शियल वाहनों की श्रेणी में डालने जा रही है। केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय की अधिसूचना के ड्राफ्ट रूल में इस बात का स्पष्ट उल्लेख है कि ट्रैक्टर अब नान ट्रांसपोर्ट व्हीकल (गैर व्यवसायिक वाहनों) की श्रेणी से बाहर माने जाएंगे।

केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध भी शुरू हो गया है। हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री देवीलाल जब देश के उप-प्रधानमंत्री बने, तब उन्होंने सड़क एवं परिवहन विभाग, मोटर व्हीकल अधिनियम तथा एनएचएआइ की नियमावली में संशोधन करवाकर ट्रैक्टर-ट्राली को ‘गड्डे’ का दर्जा दिलाया था। यह 1989 की बात है। इसके बाद से ट्रैक्टर ट्रालियों को टोल संग्र्रहण केंद्रों पर टोल टैक्स नहीं देना पड़ता था।

देवीलाल के प्रयासों से मिली राहत का देश भर के किसानों को फायदा हुआ था। लेकिन अब दुबारा ट्रेक्टर ट्राली पर ट्रकों के समान टैक्स लगेगा । केंद्र सरकार लगातार किसान विरोधी फैसले ले रही है। किसानों को उनकी फसल के वाजिब दाम नहीं दिए जा रहे, उल्टे गलत फैसलों से किसानों की कमर तोड़ी जा रही है। किसानों के ट्रैक्टर ट्राली से टोल वसूल किए जाने का फैसला निहायत ही गलत है।

अब इंटरनेट पर 5 मिंट में निकालें किसी भी खेत का खाता नकल(जमाबंदी)

दोस्तों किसान का हर काम अपने खेत से जुडा हुआ रहता है। इसलिए उसे अपने खेत की पूरी जानकारी होना जरुरी होता है। आज की पोस्ट में में आपको आपके खेत की जानकारी घर बेठे अपने खेतों की जानकारी सिर्फ 5 मिंट में हांसिल कर सकते है ताकि आपको खेत की खसरा नकल नक्शा और किस बेंक का ऋण है।

इस के बारे में जानकारी मील सके।इसके लिए आपके फ़ोन जा कंप्यूटर पर इंटरनेट की सुविधा होना जरूरी है आज हम मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसान के लिए जानकारी लायें है।बाकि राज्य के लिए इस से अगली पोस्ट में जानकारी देंगे

मध्य प्रदेश के किसान ऐसे देखें अपनी जमीन की जानकारी

सबसे पहले आप m.p. govt की website http://landrecords.mp.gov.in/ पर जाये जेसे ही आप इस साइड पर जायेगे आपको मध्यप्रदेश शासन की भूअभिलेख एवं बंदोबस्त के होम पेज दिखेगा।

उसमे साइड के बीचो बिच मध्यप्रदेश का नक्शा दिखेगा जिसमे अलग अलग कलर में mp के सभी जिले दिखेगे अब आप आपका जिला चुने उस जिले पर cilik करे जेसे ही आप अपने जिले पर ok करेगे

आपके सामने उस जिले की जितनी भी तहसील हे वो आपके सामने आ जाएगी उसमे से आप आपकी जो भी तहसील हो उसे सलेक्ट करे।

उसके बाद में आपके सामने हल्का आ जायेगा यानी आप अपने गाव को चुनिये।गाव चुनने के बाद आपके सामने विकल्प ई आयेगे के आप किस तरह देखना चाहेगे

  • खसरा नाम के अनुसार
  • खसरा नंबर के अनुसार
  • खसरा खाते के समस्त
  • किश्त बंदी खेतानी
  • एरया सम्बधित रिपोर्ट
  • भूमि का प्रकार
  • शासकीय नंबर की सुची
  • भूमी का ब्यौरा
  • फसल का ब्यौरा

आप इनमे से जो विकल्प ठीक लगे चुने यदी आपका गाव छोटा है। तो आप खसरा नाम के अनुसार भी आसनी से देख सकते है। फिर आप उसको सलेक्ट करोगे तो आपके सामने फिर सभी खातेदारों की लिस्ट आ जाएगी आप अपना नाम सलेक्ट करे और ओके करे उसके बाद आपके सामने दस्तावेज की जानकारी दिखने लगेगी ।

मध्य प्रदेश राज्य में खेत जमीन की ऑनलाइन नक़ल निकालने के लिए यहाँ क्लिक करे।

और ज्यादा जानकारी के लिए निचे दी हुई वीडियो देखें

राजस्थान के किसान ऐसे देखें अपनी जमीन की जानकारी

राजस्थान में रहने वाले किसान भाई अपनी ज़मींन की जानकरी ऑनलाइन देखेने के लिए ऊपर दी गयी प्रोसिसर को अपनाये वो अपनी जमींन की नकल निकलने के लिए निचे दी गयी लिंक को खोले फिर अपने जिले का चुनाव करे फिर जिले में लगने वाली तहसील को ओके करे बाद में अपने गाव को सलेक्ट करे फिर खसरा अनुसार या अपने नाम के 3 अक्षर हिंदी में टाइप कर के नक़ल को आसानी से ले सकते है।

राजस्थान राज्य में खेत जमीन की ऑनलाइन नक़ल निकालने के लिए यहाँ क्लिक करे।

और ज्यादा जानकारी के लिए निचे दी हुई वीडियो देखें

 

Royal Enfield ने पेश की 650cc वाली दो नई बाइक, जानें खूबियां

ब्रिटिश टू-व्हीलर कंपनी रॉयल एनफील्ड ने लंबे इंतजार के बाद अपनी नई बाइक Interceptor 650 Twin और Continental GT 650 Twin से पर्दा उठाया. इन बाइक्स को इटली में चल रहे EICMA मोटरसाइकिल शो में पेश किया गया. ये पहली दफा है जब कंपनी ने बाइक को पहले पेश किया है, जबकि इनकी लॉन्चिंग बाद में की जाएगी.

पावर बाइक सेगमेंट में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए कंपनी 650cc वाला नया इंजन लेकर आई है. इन दोनों बाइक्स में 650cc पैरेलल ट्विन इंजन दिया गया है. इनमें एक जैसा ही इंजन और चेसिस है, लेकिन एक दूसरे से पूरी तरह अलग हैं. इन दोनों बाइक्स में केवल 5 प्रतिशत ही समानता है.

इन दमदार बाइक्स को सबसे पहले यूरोप में लॉन्च किया जाएगा. साथ ही ऐसी संभावना जताई जा रही है कि इन्हें अगले साल जून-जुलाई के करीब भारत में उतार दिया जाएगा.

कंपनी के मुताबिक, इसका एयर कूल्ड इंजन 7100rpm पर 47Bhp का पावर और 4000rpm पर 52Nm का टॉर्क जेनरेट करेगा. इस इंजन को 6 स्पीड गियरबॉक्स के साथ जोड़ा गया है.

कुदरत का करिश्मा ! किसान के ट्यूबवेल से पानी की जगह निकल रही है आग

सिंचाई के लिए खेत में बोर खुदवाने वाले एक किसान के सामने समस्या खड़ी हो गई है। उसके बोर में ज्वंलनशील गैस निकल रही है। जब भी वह बोर चालू करता है, उससे आइल, डीजल निकलता है। आग के संपर्क में आने से उसमें आग भी लग जाती है।

पिछले एक माह से किसान परेशान है, उसकी समस्या का कोई समाधान नहीं हो पा रहा है। खेत में खड़ी फसल भी सूखने लगी है। यह हकीकत है मध्य प्रदेश के जिला दमोह की तहसील हटा के भरतलाई निवासी किसान बैजनाथ प्रसाद चौधरी की। जिनके खेत में पानी के लिए खुदवाए गए एक बोरिंग में से पानी के साथ-साथ आग की लपटें निकल रही हैं।

यहां पर बता दें कि बेजनाथ प्रसाद चौधरी ने अपने खेत में छह माह पहले एक बोरिंग खुदावाया था। इस बोरिंग से पिछले एक सप्ताह से लगातार खुद-ब-खुद पानी तो निकल ही रहा है, लेकिन पानी के साथ आइल, डीजल जैसा तरल पदार्थ निकल रहा है, जिसके संपर्क में आग की लपटें भी निकल रही है, जो गांव वालों के लिए एक पहेली बना हुआ है। इसे देखने के लिए आसपास के इलाकों से लोगों का जमावड़ा भी लग रहा है।

बोरिंग से आग की लपटें निकलने के सिलसिला के बीच आज इस घटना को चार दिन हो चुके हैं। पंप से निरंतर गैस निकलने से किसान के खेत में आइल और डीजल एकत्रित हो गया है। किसान का कहना है कि बोरिंग हॉल से गैस का रिसाव अभी भी हो रहा है। इससे बोरिंग वाले क्षेत्र में गैस की बदबू आ रही है। विशेषज्ञों की मानें तो बोरिंग में निकली गैस थोड़ी-सी चिंगारी के संपर्क में आते ही आग में बदल जाती है, इसी कारण ये हो रहा है।

बोरिंग के होल में आग तक लग रही है 

अपने खेत में बोरिंग करवाने वाले किसान का कहना है कि, उसने जून में करीब 385 फीट की खुदाई के बाद पानी आ गया था, लेकिन उसमें पंप नहीं लगवाया था। करीब चार दिन पहले उसने पंप लगवाया है, जब से बोरिंग होल में आग की लपटें निकलने लगी। कुछ ही समय में ये बात पूरे क्षेत्र में फैल गई और मौके पर ग्रामीणों का जमघट लगना शरू हो गया।

किसान ने इसकी सूचना अधिकारियों को दी है। किसान का कहना है कि उसकी 5 एकड़ जमीन है। जिसमें सिंचाई के लिए पानी की जरुरत है, लेकिन अब सिंचाई नहीं हो पा रही है। इस संबंध मंे पीएचई के विशेषज्ञ रवि शाह का कहना है कि कहीं कहीं पर प्राकृतिक गैस के स्रोत मिलते हैं। हटा के कुछ क्षेत्र में ऐसी स्थिति है। ओएनजीसी की टीमें भी सर्चिंग में लगी हुईं हैं। मैं भी एक बार मौके का निरीक्षण करके आता हूं।

अद्भुत हुनरः गेहूं के दानों से बनाया 222 किलो का सिक्का

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक किसान के बेटे का अद्भुत हुनर देखने को मिला है। यहां किसान के बेटे ने 222 किलो का गेहूं का सिक्का बनाकर जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस सिक्के को देखने के लिए गांव ही नहीं बल्कि पड़ोसी जनपद के लोगों का हुजूम भी इकठ्ठा हो रहा है।

दरअसल मामला जिले के धरमपुर सराय गांव का है। जहां के रहने वाले शैलेन्द्र कुमार ने 5 फुट उंचाई का 2 क्विंटल, 11 किलो गेहूं के दानों से एक रुपए का सिक्का बनाया है।

यह सिक्का महज 45 दिनों में एक साधारण किसान के बेटे ने बनाकर तैयार किया है। वहीं गांव की युवा पीढ़ी भी शैलेन्द्र के इस कार्यों की प्रशंसा करते हुए गेहूं से तैयार इस एक रुपए के सिक्के को गिनीज बुक में दर्ज कराने की मांग कर रही है।

शैलेन्द्र ने बताया कि एक रुपए के सिक्के में गेहूं की बाली देख कर उसे यह सिक्का बनाने की प्रेरणा मिली। उसका मानना है कि देश में गेहूं नहीं होगा तो किसान खुशहाल नहीं होगा इसीलिए उसने यह सिक्का बनाया है। किसी भी देश की धातुई मुद्रा का गेहूं या अन्य किसी अनाज के दाने से बनाया गया इतना विशाल और अद्भुत प्रतिरूप शायद विश्व में पहली बार बना होगा।

बासमती धान ने खिलाये किसानों के चेहरे। इतने रुपए बढ़े भाव

बासमतीधान ने किसानों के चेहरे को खिला दिया है। पहली ही ढेरी तरावड़ी में 3725 रुपए के भाव में बिकी है। इसका रेट चार हजार रुपए प्रति क्विंटल तक जाने की उम्मीद है। अनाज मंडियां धान से अट चुकी हैं। प्रत्येक वैरायटी के अच्छे भाव से इस बार खेत के ठेके भी बढ़ेंगे और कृषि की तरफ रुझान बढ़ेगा।

जिले में तरावड़ी मंडी में सोमवार को 20 क्विंटल बासमती धान पहुंची। इसका पहला रेट 3725 रुपए लगा। पिछले साल इसका रेट 3100 रुपए तक ही था। इसी तरह 1121 का रेट 3200 और 1509 का रेट 2800 रुपए तक पहुंच गया है। किसानों ने बताया कि इस बार पैदावार भी अच्छी है और भाव में बेहतर मिल रहा है। इस बार की धान पिछले खर्चे भी पूरे करेगी। जिलेभर की मंडियों में धान की आवक जबरदस्त बढ़ रही है।

मंडी में पांव टेकने की जगह नहीं है। लिफ्टिंग की गति तेज की है, ताकि किसानों को धान डालने की जगह मिलती रहे। किसान देसराज, सुरेश कुमार, बलजीत सिंह, सुरेश, मदनलाल, सोमदत्त बताते हैं कि धान फसल ने इस बार खर्चे पूरे कर दिए है। भाव अच्छे मिल रहे हैं। उम्मीद करते हैं बासमती का रेट चार हजार रुपए पार कर जाए। तरावड़ी मंडी धान का कटोरा है। इसी मंडी में सबसे ज्यादा बासमती धान खरीदा जाता है।

बासमती में पैदावार बेहतर होने के कारण उनकी सोमवार को 20 क्विंटल धान 3725 रुपए के भाव लगी है। मंडी में बासमती का आगाज हो गया है। बासमती लेट आने के कारण अब मंडियों में बासमती पर ही फोक्स रहेगा।

^तरावड़ी मंडी में 3725 रुपए के भाव बिकी है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। किसानों को चाहिए कि वह धान को सुखाकर लेकर आए। जल्दबाजी में नमीयुक्त धान कटवाएं। -गौरवआर्य, सेक्रेटरी, अनाज मंडी तरावड़ी।

 

जनवरी से पूरे देश में उर्वरकों पर मिलेगी डायरेक्ट सब्सिडी

सरकार द्वारा उर्वरकों पर दी जाने वाली मदद के सही वितरण के मकसद से सरकार तय समय से 3 महीने पहले ही पूरे देश में डायरैक्ट बैनीफिट ट्रांसफर ऑफ फर्टीलाइजर्स सबसिडी योजना को लागू कर देगी।

सूत्रों के मुताबिक आगामी 1 जनवरी को यह योजना पूरे देश में लागू कर दी जाएगी जबकि इसके लिए मार्च आखिर का समय तय किया गया था।

राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, अंडमान और निकोबार, त्रिपुरा तथा असम में 1 नवम्बर से यह योजना लागू कर दी जाएगी। एक महीने बाद यानी दिसम्बर में इसे हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में लागू किया जाएगा।

बाकी राज्यों में 1 जनवरी से इसे लागू कर दिया जाएगा। नई योजना के तहत उर्वरक की बिक्री हो जाने के बाद कम्पनी को सबसिडी का पैसा मिलेगा। इसके लिए सरकार ने सभी कम्पनियों से पी.ओ.एस. मशीन लगाने को कहा है।

सबसिडी देने का नया सिस्टम अभी 8 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू है। इनमें दिल्ली, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, गोवा, पुड्डुचेरी, दमन व दीव और दादर व नागर हवेली शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक इस योजना को तय समय से 3 महीने पहले इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि 3 महीने में यह देखा जा सके कि इसमें कहां क्या खामियां रह गई हैं।