अब इंटरनेट पर 5 मिंट में निकालें किसी भी खेत का खाता नकल(जमाबंदी)

दोस्तों किसान का हर काम अपने खेत से जुडा हुआ रहता है। इसलिए उसे अपने खेत की पूरी जानकारी होना जरुरी होता है। आज की पोस्ट में में आपको आपके खेत की जानकारी घर बेठे अपने खेतों की जानकारी सिर्फ 5 मिंट में हांसिल कर सकते है ताकि आपको खेत की खसरा नकल नक्शा और किस बेंक का ऋण है।

इस के बारे में जानकारी मील सके।इसके लिए आपके फ़ोन जा कंप्यूटर पर इंटरनेट की सुविधा होना जरूरी है आज हम मध्यप्रदेश और राजस्थान के किसान के लिए जानकारी लायें है।बाकि राज्य के लिए इस से अगली पोस्ट में जानकारी देंगे

मध्य प्रदेश के किसान ऐसे देखें अपनी जमीन की जानकारी

सबसे पहले आप m.p. govt की website http://landrecords.mp.gov.in/ पर जाये जेसे ही आप इस साइड पर जायेगे आपको मध्यप्रदेश शासन की भूअभिलेख एवं बंदोबस्त के होम पेज दिखेगा।

उसमे साइड के बीचो बिच मध्यप्रदेश का नक्शा दिखेगा जिसमे अलग अलग कलर में mp के सभी जिले दिखेगे अब आप आपका जिला चुने उस जिले पर cilik करे जेसे ही आप अपने जिले पर ok करेगे

आपके सामने उस जिले की जितनी भी तहसील हे वो आपके सामने आ जाएगी उसमे से आप आपकी जो भी तहसील हो उसे सलेक्ट करे।

उसके बाद में आपके सामने हल्का आ जायेगा यानी आप अपने गाव को चुनिये।गाव चुनने के बाद आपके सामने विकल्प ई आयेगे के आप किस तरह देखना चाहेगे

  • खसरा नाम के अनुसार
  • खसरा नंबर के अनुसार
  • खसरा खाते के समस्त
  • किश्त बंदी खेतानी
  • एरया सम्बधित रिपोर्ट
  • भूमि का प्रकार
  • शासकीय नंबर की सुची
  • भूमी का ब्यौरा
  • फसल का ब्यौरा

आप इनमे से जो विकल्प ठीक लगे चुने यदी आपका गाव छोटा है। तो आप खसरा नाम के अनुसार भी आसनी से देख सकते है। फिर आप उसको सलेक्ट करोगे तो आपके सामने फिर सभी खातेदारों की लिस्ट आ जाएगी आप अपना नाम सलेक्ट करे और ओके करे उसके बाद आपके सामने दस्तावेज की जानकारी दिखने लगेगी ।

मध्य प्रदेश राज्य में खेत जमीन की ऑनलाइन नक़ल निकालने के लिए यहाँ क्लिक करे।

और ज्यादा जानकारी के लिए निचे दी हुई वीडियो देखें

राजस्थान के किसान ऐसे देखें अपनी जमीन की जानकारी

राजस्थान में रहने वाले किसान भाई अपनी ज़मींन की जानकरी ऑनलाइन देखेने के लिए ऊपर दी गयी प्रोसिसर को अपनाये वो अपनी जमींन की नकल निकलने के लिए निचे दी गयी लिंक को खोले फिर अपने जिले का चुनाव करे फिर जिले में लगने वाली तहसील को ओके करे बाद में अपने गाव को सलेक्ट करे फिर खसरा अनुसार या अपने नाम के 3 अक्षर हिंदी में टाइप कर के नक़ल को आसानी से ले सकते है।

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अद्भुत हुनरः गेहूं के दानों से बनाया 222 किलो का सिक्का

उत्तर प्रदेश के फतेहपुर में एक किसान के बेटे का अद्भुत हुनर देखने को मिला है। यहां किसान के बेटे ने 222 किलो का गेहूं का सिक्का बनाकर जिले व प्रदेश का नाम रोशन किया है। इस सिक्के को देखने के लिए गांव ही नहीं बल्कि पड़ोसी जनपद के लोगों का हुजूम भी इकठ्ठा हो रहा है।

दरअसल मामला जिले के धरमपुर सराय गांव का है। जहां के रहने वाले शैलेन्द्र कुमार ने 5 फुट उंचाई का 2 क्विंटल, 11 किलो गेहूं के दानों से एक रुपए का सिक्का बनाया है।

यह सिक्का महज 45 दिनों में एक साधारण किसान के बेटे ने बनाकर तैयार किया है। वहीं गांव की युवा पीढ़ी भी शैलेन्द्र के इस कार्यों की प्रशंसा करते हुए गेहूं से तैयार इस एक रुपए के सिक्के को गिनीज बुक में दर्ज कराने की मांग कर रही है।

शैलेन्द्र ने बताया कि एक रुपए के सिक्के में गेहूं की बाली देख कर उसे यह सिक्का बनाने की प्रेरणा मिली। उसका मानना है कि देश में गेहूं नहीं होगा तो किसान खुशहाल नहीं होगा इसीलिए उसने यह सिक्का बनाया है। किसी भी देश की धातुई मुद्रा का गेहूं या अन्य किसी अनाज के दाने से बनाया गया इतना विशाल और अद्भुत प्रतिरूप शायद विश्व में पहली बार बना होगा।

बासमती धान ने खिलाये किसानों के चेहरे। इतने रुपए बढ़े भाव

बासमतीधान ने किसानों के चेहरे को खिला दिया है। पहली ही ढेरी तरावड़ी में 3725 रुपए के भाव में बिकी है। इसका रेट चार हजार रुपए प्रति क्विंटल तक जाने की उम्मीद है। अनाज मंडियां धान से अट चुकी हैं। प्रत्येक वैरायटी के अच्छे भाव से इस बार खेत के ठेके भी बढ़ेंगे और कृषि की तरफ रुझान बढ़ेगा।

जिले में तरावड़ी मंडी में सोमवार को 20 क्विंटल बासमती धान पहुंची। इसका पहला रेट 3725 रुपए लगा। पिछले साल इसका रेट 3100 रुपए तक ही था। इसी तरह 1121 का रेट 3200 और 1509 का रेट 2800 रुपए तक पहुंच गया है। किसानों ने बताया कि इस बार पैदावार भी अच्छी है और भाव में बेहतर मिल रहा है। इस बार की धान पिछले खर्चे भी पूरे करेगी। जिलेभर की मंडियों में धान की आवक जबरदस्त बढ़ रही है।

मंडी में पांव टेकने की जगह नहीं है। लिफ्टिंग की गति तेज की है, ताकि किसानों को धान डालने की जगह मिलती रहे। किसान देसराज, सुरेश कुमार, बलजीत सिंह, सुरेश, मदनलाल, सोमदत्त बताते हैं कि धान फसल ने इस बार खर्चे पूरे कर दिए है। भाव अच्छे मिल रहे हैं। उम्मीद करते हैं बासमती का रेट चार हजार रुपए पार कर जाए। तरावड़ी मंडी धान का कटोरा है। इसी मंडी में सबसे ज्यादा बासमती धान खरीदा जाता है।

बासमती में पैदावार बेहतर होने के कारण उनकी सोमवार को 20 क्विंटल धान 3725 रुपए के भाव लगी है। मंडी में बासमती का आगाज हो गया है। बासमती लेट आने के कारण अब मंडियों में बासमती पर ही फोक्स रहेगा।

^तरावड़ी मंडी में 3725 रुपए के भाव बिकी है। किसानों को किसी प्रकार की परेशानी नहीं आने दी जाएगी। किसानों को चाहिए कि वह धान को सुखाकर लेकर आए। जल्दबाजी में नमीयुक्त धान कटवाएं। -गौरवआर्य, सेक्रेटरी, अनाज मंडी तरावड़ी।

 

जनवरी से पूरे देश में उर्वरकों पर मिलेगी डायरेक्ट सब्सिडी

सरकार द्वारा उर्वरकों पर दी जाने वाली मदद के सही वितरण के मकसद से सरकार तय समय से 3 महीने पहले ही पूरे देश में डायरैक्ट बैनीफिट ट्रांसफर ऑफ फर्टीलाइजर्स सबसिडी योजना को लागू कर देगी।

सूत्रों के मुताबिक आगामी 1 जनवरी को यह योजना पूरे देश में लागू कर दी जाएगी जबकि इसके लिए मार्च आखिर का समय तय किया गया था।

राजस्थान, उत्तराखंड, महाराष्ट्र, अंडमान और निकोबार, त्रिपुरा तथा असम में 1 नवम्बर से यह योजना लागू कर दी जाएगी। एक महीने बाद यानी दिसम्बर में इसे हरियाणा, पंजाब, छत्तीसगढ़, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, गुजरात, हिमाचल प्रदेश, आंध्र प्रदेश व तमिलनाडु में लागू किया जाएगा।

बाकी राज्यों में 1 जनवरी से इसे लागू कर दिया जाएगा। नई योजना के तहत उर्वरक की बिक्री हो जाने के बाद कम्पनी को सबसिडी का पैसा मिलेगा। इसके लिए सरकार ने सभी कम्पनियों से पी.ओ.एस. मशीन लगाने को कहा है।

सबसिडी देने का नया सिस्टम अभी 8 राज्यों व केन्द्र शासित प्रदेशों में लागू है। इनमें दिल्ली, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम, गोवा, पुड्डुचेरी, दमन व दीव और दादर व नागर हवेली शामिल हैं। सूत्रों के मुताबिक इस योजना को तय समय से 3 महीने पहले इसलिए लागू किया जा रहा है ताकि 3 महीने में यह देखा जा सके कि इसमें कहां क्या खामियां रह गई हैं।

2017-18 के लिए पूरी रबी की फसल के लिए एमएसपी की मंजूरी

सरकार ने गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आज 110 रुपए बढ़ाकर 1,735 रुपए प्रति कुंतल किया। साथ ही चना और मसूर के एमएसपी में भी 200 रुपए प्रति कुंतल की बढ़ोत्तरी की है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन फसलों का उत्पादन बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने आज 2017-18 के लिए पूरी रबी की फसल के लिए एमएसपी की मंजूरी दी। एमएसपी वह मूल्य होता है जिस पर सरकार किसानों से खाद्यान्न की खरीद करती है।

सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल ने गेहूं का एमएसपी 110 रुपए बढ़ाकर 1,735 रुपए प्रति कुंतल किया है। पिछले साल यह 1,625 रुपए प्रति कुंतल था।देखने में यह भाव ठीक लग रहा है लेकिन आज के खेती खर्चे देखें तो उस हिसाब से कम है ।आज के खेतीबाड़ी खर्चों के हिसाब से गेहूं का भाव कम से कम 2300 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ।

चना और मसूर की खेती को बढावा देने के उद्देश्य से इनके एमएसपी में प्रत्येक में 200 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है और नई कीमत क्रमश: 4,200 और 4,150 रुपए प्रति कुंतल होगी

सूत्रों ने बताया कि तिलहन में रैपसीड, सरसों और सूरजमुखी के बीज के एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। कीमतों में यह वृद्धि कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है।

भूलकर भी ना बोए गेहूं की ये नई किसम ,वरना पड़ेगा पछताना

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) की ओर से बनारस में रिलीज की गई गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूबी-2 के दावे पर विवाद शुरू हो गया है। इसके खिलाफ करनाल स्थित पूसा (इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट) के क्षेत्रीय संस्थान से रिटायर्ड पौध प्रजनन विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने केंद्रीय कृषि मंत्री से शिकायत करके मामले को वैज्ञानिक धोखाधड़ी करार दिया है और इसकी सीबीआई जांच की मांग की है।

केंद्रीय कृषि मंत्री, कृषि सचिव, आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के महानिदेशक आदि से की गई शिकायत में उन्होंने कहा है कि गेहूं की किस्म डब्ल्यूबी-2 को आईआईडब्ल्यूबीआर ने देश की प्रथम जैव पोषित किस्म करार दिया है।उनके मुताबिक यह दावा गलत है, क्योंकि इससे ज्यादा जैव पोषित गेहूं की किस्म डब्ल्यूएच-306 हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने 52 साल पहले वर्ष 1965 में ही बना दी थी। यही नहीं, अपने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए हकृवि ने 25 साल पहले वर्ष 1992 में उससे भी पोषित किस्म डब्ल्यूएच-712 बना दी थी।

अपनी शिकायत के साथ उन्होंने आईआईडब्ल्यूबीआर के पूर्व निदेशक एवं पूसा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एस नागराजन के रिसर्च पेपर की प्रतिलिपि भी लगाई है जिसमें उन्होंने गेहूं की विभिन्न किस्मों के पोषण तत्वों के बारे में भी जानकारी दी है। यहां बता दें कि गेहूं की जिस किस्म को लेकर बवाल शुरू हुआ है, उसके प्रचार के लिए प्रकाशित किए गए पैम्फलेट में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह की फोटो भी लगाई गई है।

यह है कथित गलत दावे का आधारआईआईडब्ल्यूबीआर ने गेहूं की अपनी नई किस्म डब्ल्यूबी-2 में आयरन की मात्रा 35.4 पीपीएम दशाई है जबकि डॉ. एस नागराजन के रिसर्च पेपर में हकृवि की गेहूं की किस्म सी-306 में यह 70 पीपीएम और डब्ल्यूएच 712 में 85 पीपीएम है। इसी प्रकार डब्ल्यूबी-2 में जिंक की मात्रा 42 पीपीएम दर्शाई गई है जबकि सी-306 में यह 80 व डब्ल्यूएच-712 में 105 है।

 

इस सब्जी का दाम सुन लेंगे तो बेशक अपने कानों पर यकीन ही नहीं कर पाएंगे

सब्जी खरीदने जाने वाला हर शख्स इन दिनों एक ही बात कहता मिलता है कि सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। हां अगर वे दुनिया की सबसे महंगी इस सब्जी का दाम सुन लेंगे तो बेशक अपने कानों पर यकीन ही नहीं कर पाएंगे। अमूमन सब्जियां 50 रुपए किलो तक आ जाती हैं, हालांकि सीजन की शुरुआत में जब कोई नई सब्जी आती है तो उसका दाम 100 रुपए किलो तक हो सकता है, बाद में यह दाम गिर जाते हैं।

दुनिया की सबसे महंगी सब्जी गुच्छी का दाम सुनकर आप चौंक ही जाएंगे। बाजार में गुच्छी की कीमत है 25000 से 30000 रुपए प्रति किलो। यह सब्जी हिमाचल, कश्मीर और हिमालय के ऊंचे हिस्सों में पैदा होती है। यह सब्जी पहाड़ों पर बिजली की गडग़ड़ाहट व चमक से बर्फ से निकलती है।यह दुर्लभ सब्जी पहाड़ों पर साधु-संत ढूंढकर इकट्ठा करते हैं और ठंड के मौसम में इसका उपयोग करते हैं।

इसको बनाने की विधि में ड्रायफ्रूट, सब्जियां, घी इस्तेमाल किया जाता है। लजीज पकवानों में गिनी जाने वाली यह सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर होती है और इसका वैज्ञानिक नाम मार्कुला एस्क्यूपलेंटा है। इसे हिंदी में स्पंज मशरूम भी कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाली गुच्छी फरवरी से अप्रेल के बीच मिलती है। बड़ी बड़ी कंपनियां और होटल इसे हाथोंहाथ खरीद लेते हैं। इस कारण इन इलाकों में रहने वाले लोग सीजन के समय जंगलों में ही डेरा डालकर गुच्छी इकट्ठा करते हैं।

इन लोगों से गुच्छी बड़ी कंपनियां 10 से 15 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदते हैं, जबकि बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो है।गुच्छी की डिमांड भारत में ही नहीं बल्कि अमरीका, यूरोप, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड तक भी है। इसमें विटामिन बी और डी के अलावा सी और के प्रचुर मात्रा में होता है। इसे नियमित खाने से दिल की बीमारी नहीं होती।

किसानो के लिए खुशखबरी ! इतने रुपये तक बढ़ सकता है गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य

गेहूं की एमएसपी पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है। मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ाने के लिए सरकार ने तैयारियां शुरु कर दी हैं। जानकारी मिली है कि गेहूं के इंपोर्ट पर भी ड्यूटी बढ़ाने की योजना फिलहाल नहीं है।

इसी बीच किसानों के लिए खुशखबरी यह है, कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज यानी सीएसीपी ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की सिफारिश की है। सीएसीपी ने गेहूं की एमएसपी 115 रुपये प्रति क्विंटल और दालों की एमएसपी 225 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की सिफारिश की है। कृषि मंत्रालय ने कैबिनेट को ये प्रस्ताव भेजा है।

कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला लेगी। बता दें कि कैबिनेट की बैठक अगले बुधवार को होगी।अगर इस बार गेहूं के एमएसपी 115 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ती है तो गेहूं की समर्थन मूल्य पिछले साल (2016 -2017) के एमएसपी 1625 रुपये प्रति क्विंटल में जोड़ने पर 1625 +115 =1740 प्रति क्विंटल तक हो सकती है । देखने में यह भाव ठीक लग रहा है लेकिन आज के खेती खर्चे देखें तो उस हिसाब से कम है ।आज के खेतीबाड़ी खर्चों के हिसाब से गेहूं का भाव कम से कम 2300 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ।

आपको बता दें इस महीने से गेहूं की बुआई शुरु हो जाएगी। इस बीच सरकार ने गेहूं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से भी इनकार किया है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की मांगों पर बाद में विचार किया जाएगा।

जाने सोयाबीन के आज के भाव

बुधवार को किसानों की दिवाली मन गई। मध्यप्रदेश की झाबुआ मंडी में सोयाबीन 2801 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिका। ये इस बार की सर्वाधिक कीमत है। दिनभर में करीब 800 बोरी सोयाबीन की आवक हुई। गौरतलब है कि 16 अक्टूबर से भावांतर योजना लागू होने के बाद से अनाज की खरीदी-बिक्री पूरी तरह से मंडी में हो रही है।

वर्तमान में सोयाबीन के भाव 2650 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे थे लेकिन बुधवार को दाम 2801 रुपए पर पहुंच गए। जिससे किसानों का त्योहार मन गया। किसान बारिया भीलू व दतिया ने कहा सोयाबीन के भाव अच्छे मिले हैं इससे त्योहार अच्छा मन जाएगा।

जानकारों के मुताबिक बीते खरीफ सत्र के दौरान भावों में गिरावट के चलते किसानों को सोयाबीन की फसल निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे बेचनी पड़ी थी । इस कारण परंपरागत रूप से सोयाबीन उगाने वाले कई किसानों ने उपज के बेहतर भावों की आशा में मौजूदा खरीफ सत्र में खासकर तुअर (अरहर), मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुवाई मुनासिब समझी. इससे सोयाबीन के रकबे में जाहिर तौर पर गिरावट आई।

जानकारों ने बताया कि अगस्त के पहले पखवाड़े में मध्यप्रदेश और देश के अन्य प्रमुख सोयाबीन उत्पादक इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस तिलहन फसल की उत्पादकता पर बुरा असर पड़ा। कुछ इलाकों में सोयाबीन कटाई से पहले भारी बारिश से भी फसल की पैदावार प्रभावित हुई. इस लिए आने वाले समय में सोयाबीन के भाव और भी बढ़ने के आसार है ।

पिछले साल के मुकाबले 2000 तक बढ़े बासमती के भाव

बासमती-1509। धान की वही वैरायटी, जिसने दो साल पहले सरकार की नींद हराम कर दी थी। दाम गिरने से किसान सड़कों पर थे, जाम लगाकर प्रदर्शन हो रहा था, कोई खेतों में धान जला रहा था तो कोई मंडियों में छोड़कर जा रहा था।

तब सरकार झुकी और 1509 का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1550 रुपए तय किया। इस पर भी किसानों की कमाई 70 प्रतिशत तक घट गई थी। लेकिन इस बार इसी 1509 ने किसानों को दिवाली धमाका ऑफर दिया है। ईरान में डिमांड बढ़ने और एक्सपोर्टर्स के पास स्टॉक न होने के कारण 1509 की डिमांड बढ़ गई है।

तीन साल बाद 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं। पिछले साल यह धान 1800 रुपए तक में बिकी थी, उससे पहले इसकी कीमत 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक रह गई थी। इस बार औसतन 2000 रुपए प्रति क्विंटल का फायदा हो रहा है।

इस हिसाब से 7 लाख किसानों को एक लाख हेक्टेयर में बोई गई इस धान से करीब 450 करोड़ रुपए का लाभ होने जा रहा है। हालांकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार रकबा कम है।जिसमें एक लाख हेक्टेयर में 1509 है। ज्यादातर 1121 की रोपाई की हुई है। सुपर बासमती भी कम है। इसलिए इस बार एक्सपोर्टर्स ज्यादा भाव में बासमती धान की खरीद कर रहे हैं।

वैट हटा, डिमांड बढ़ी: राइस एक्सपोर्टर्स के पास बासमती और 1509 के चावल का पुराना स्टॉक नहीं है। इसलिए वह ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। डिमांड पूरी करने के लिए एक्सपोर्टर्स किसानों को अच्छा भाव दे रहे हैं। चावल से वैट हटा दिया है।

ईरान का बाजार खुला : वर्ष 2013-14 में ईरान ने भारत से 14,40,445 टन बासमती खरीदा था। ईरान की मांग को देखते हुए एक्सपोर्टर्स ने 2014-15 में ओवर स्टॉक कर लिया था। लेकिन वहां मांग घट गई थी। अब फिर बाजार खुला है।पिछले दो साल से ईरान से ज्यादा डिमांड न होने के कारण मिलर्स को समय से भुगतान नहीं हो पाया। इस कारण किसानों का भी पैसा फंसा हुआ था। इस बार भुगतान हो रहा है।