किसानो के लिए खुशखबरी ! इतने रुपये तक बढ़ सकता है गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य

गेहूं की एमएसपी पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है। मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ाने के लिए सरकार ने तैयारियां शुरु कर दी हैं। जानकारी मिली है कि गेहूं के इंपोर्ट पर भी ड्यूटी बढ़ाने की योजना फिलहाल नहीं है।

इसी बीच किसानों के लिए खुशखबरी यह है, कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज यानी सीएसीपी ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की सिफारिश की है। सीएसीपी ने गेहूं की एमएसपी 115 रुपये प्रति क्विंटल और दालों की एमएसपी 225 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की सिफारिश की है। कृषि मंत्रालय ने कैबिनेट को ये प्रस्ताव भेजा है।

कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला लेगी। बता दें कि कैबिनेट की बैठक अगले बुधवार को होगी।अगर इस बार गेहूं के एमएसपी 115 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ती है तो गेहूं की समर्थन मूल्य पिछले साल (2016 -2017) के एमएसपी 1625 रुपये प्रति क्विंटल में जोड़ने पर 1625 +115 =1740 प्रति क्विंटल तक हो सकती है । देखने में यह भाव ठीक लग रहा है लेकिन आज के खेती खर्चे देखें तो उस हिसाब से कम है ।आज के खेतीबाड़ी खर्चों के हिसाब से गेहूं का भाव कम से कम 2300 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ।

आपको बता दें इस महीने से गेहूं की बुआई शुरु हो जाएगी। इस बीच सरकार ने गेहूं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से भी इनकार किया है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की मांगों पर बाद में विचार किया जाएगा।

जाने सोयाबीन के आज के भाव

बुधवार को किसानों की दिवाली मन गई। मध्यप्रदेश की झाबुआ मंडी में सोयाबीन 2801 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिका। ये इस बार की सर्वाधिक कीमत है। दिनभर में करीब 800 बोरी सोयाबीन की आवक हुई। गौरतलब है कि 16 अक्टूबर से भावांतर योजना लागू होने के बाद से अनाज की खरीदी-बिक्री पूरी तरह से मंडी में हो रही है।

वर्तमान में सोयाबीन के भाव 2650 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे थे लेकिन बुधवार को दाम 2801 रुपए पर पहुंच गए। जिससे किसानों का त्योहार मन गया। किसान बारिया भीलू व दतिया ने कहा सोयाबीन के भाव अच्छे मिले हैं इससे त्योहार अच्छा मन जाएगा।

जानकारों के मुताबिक बीते खरीफ सत्र के दौरान भावों में गिरावट के चलते किसानों को सोयाबीन की फसल निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे बेचनी पड़ी थी । इस कारण परंपरागत रूप से सोयाबीन उगाने वाले कई किसानों ने उपज के बेहतर भावों की आशा में मौजूदा खरीफ सत्र में खासकर तुअर (अरहर), मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुवाई मुनासिब समझी. इससे सोयाबीन के रकबे में जाहिर तौर पर गिरावट आई।

जानकारों ने बताया कि अगस्त के पहले पखवाड़े में मध्यप्रदेश और देश के अन्य प्रमुख सोयाबीन उत्पादक इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस तिलहन फसल की उत्पादकता पर बुरा असर पड़ा। कुछ इलाकों में सोयाबीन कटाई से पहले भारी बारिश से भी फसल की पैदावार प्रभावित हुई. इस लिए आने वाले समय में सोयाबीन के भाव और भी बढ़ने के आसार है ।

पिछले साल के मुकाबले 2000 तक बढ़े बासमती के भाव

बासमती-1509। धान की वही वैरायटी, जिसने दो साल पहले सरकार की नींद हराम कर दी थी। दाम गिरने से किसान सड़कों पर थे, जाम लगाकर प्रदर्शन हो रहा था, कोई खेतों में धान जला रहा था तो कोई मंडियों में छोड़कर जा रहा था।

तब सरकार झुकी और 1509 का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1550 रुपए तय किया। इस पर भी किसानों की कमाई 70 प्रतिशत तक घट गई थी। लेकिन इस बार इसी 1509 ने किसानों को दिवाली धमाका ऑफर दिया है। ईरान में डिमांड बढ़ने और एक्सपोर्टर्स के पास स्टॉक न होने के कारण 1509 की डिमांड बढ़ गई है।

तीन साल बाद 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं। पिछले साल यह धान 1800 रुपए तक में बिकी थी, उससे पहले इसकी कीमत 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक रह गई थी। इस बार औसतन 2000 रुपए प्रति क्विंटल का फायदा हो रहा है।

इस हिसाब से 7 लाख किसानों को एक लाख हेक्टेयर में बोई गई इस धान से करीब 450 करोड़ रुपए का लाभ होने जा रहा है। हालांकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार रकबा कम है।जिसमें एक लाख हेक्टेयर में 1509 है। ज्यादातर 1121 की रोपाई की हुई है। सुपर बासमती भी कम है। इसलिए इस बार एक्सपोर्टर्स ज्यादा भाव में बासमती धान की खरीद कर रहे हैं।

वैट हटा, डिमांड बढ़ी: राइस एक्सपोर्टर्स के पास बासमती और 1509 के चावल का पुराना स्टॉक नहीं है। इसलिए वह ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। डिमांड पूरी करने के लिए एक्सपोर्टर्स किसानों को अच्छा भाव दे रहे हैं। चावल से वैट हटा दिया है।

ईरान का बाजार खुला : वर्ष 2013-14 में ईरान ने भारत से 14,40,445 टन बासमती खरीदा था। ईरान की मांग को देखते हुए एक्सपोर्टर्स ने 2014-15 में ओवर स्टॉक कर लिया था। लेकिन वहां मांग घट गई थी। अब फिर बाजार खुला है।पिछले दो साल से ईरान से ज्यादा डिमांड न होने के कारण मिलर्स को समय से भुगतान नहीं हो पाया। इस कारण किसानों का भी पैसा फंसा हुआ था। इस बार भुगतान हो रहा है।

भारत का ये शहर, जहां आलू-प्याज से भी सस्ते बिकते हैं काजू !

काजू खाने या खिलाने की बात आते ही आमतौर पर लोग जेब टटोलने लगते हैं. ऐसे में कोई कहे कि काजू की कीमत आलू-प्याज से भी कम है तो आप शायद ही विश्वास करेंगे. यानी अगर आप दिल्ली में 800 रुपए किलो काजू खरीदते हैं तो यहां से 12 सौ किलोमीटर दूर झारखंड में काजू बेहद सस्ते हैं. जामताड़ा जिले में काजू 10 से 20 रुपये प्रति किलो बिकते हैं.

जामताड़ा के नाला में करीब 49 एकड़ इलाके में काजू के बागान हैं. बागान में काम करने वाले बच्चे और महिलाएं काजू को बेहद सस्ते दाम में बेच देते हैं. काजू की फसल में फायदा होने के चलते इलाके के काफी लोगों का रुझान इस ओर हो रहा है. ये बागान जामताड़ा ब्लॉक मुख्यालय से चार किलोमीटर की दूरी हैं.

बागान बनने के पीछे है दिलचस्प कहानी

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जामताड़ा में काजू की इतनी बड़ी पैदावार चंद साल की मेहनत के बाद शुरू हुई है. इलाके के लोग बताते हैं जामताड़ा के पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा को काजू खाना बेहद पसंद था. इसी वजह वह चाहते थे कि जामताड़ा में काजू के बागान बन जाए तो वे ताजी और सस्ती काजू खा सकेंगे.

इसी वजह से कृपानंद झा ने ओडिशा में काजू की खेती करने वालों से मिले. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से जामताड़ा की भौगोलिक स्थिति का पता किया. इसके बाद यहां काजू की बागवानी शुरू कराई. देखते ही देखते चंद साल में यहां काजू की बड़े पैमाने पर खेती होने लगी

कृपानंद झा के यहां से जाने के बाद निमाई चन्द्र घोष एंड कंपनी को केवल तीन लाख रुपए भुगतान पर तीन साल के लिए बागान की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया. एक अनुमान के मुताबिक बागान में हर साल हजारों क्विंटल काजू फलते हैं. देखरेख के अभाव में स्थानीय लोग और यहां से गुजरने वाले काजू तोड़कर ले जाते हैं.

इस बार बासमती करेगी किसानों के वारे-न्‍यारे

बासमती 1509 ने इस बार किसानों को खूब साथ निभाया है। 1509 का भाव 3100 रुपए तक हो गया है। अभी इसमें और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कुछ दिन बाद ही बाजार में आने वाली 1121 वैरायटी के भी भरपूर दाम मिलने की प्रबंल संभावना इस बार नजर आ रही है।

3400 से शुरू हो सकते हैं भाव

बासमती चावल के घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय बाजार पर पैनी नजर रखने वाले अमृतसर के चावल विशेषज्ञ नीरज शर्मा का कहना है कि इस बार बासमती की तेजी हवा हवाई नहीं है। इसके फंडामैंटल मजबूत हैं। नीरज का कहना है कि इस बार बासमती 1121 की नई फसल की शुरूआत 3400 रुपए क्विंटल से हो सकती है।

ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार 1121 का कैरी आवर स्‍टॉक नहीं है। दूसरा, 1121 धान की बुआई बहुत कम हुई है। इसलिए मांग ज्‍यादा होगी और आपूर्ति कम। यह स्थिति भाव को बढ़ाएगी। फिलहाल पुराना 1121 धान 3200 रुपए तक बिक रहा है।

नीरज शर्मा ने बताया कि अगर 1509 के दाम अगर अब और बढते हैं तो इसका असर भी 1121 के भाव पर पड़ेगा। अगर 1509 की तेजी बरकरार रही तो 1121 के भावों को भी पंख लग सकते हैं।गौरतलब है कि नीरज शर्मा ने दो सितंबर को दावा किया था कि इस बार 1509 के दाम शुरूआत में 2200-2300 रुपए रहेंगे और ज्‍यों ही आवक बढ़ेगी तो दामों में इजाफा होता जाएगा। नीरज का यह दावा सही साबित हुआ और अब 1509 बासमती 3200 रुपए तक पहुंच चुका है।

आठ फीसदी कम बुआई

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल बासमती धान की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 8 फीसदी कम हुई है, जबकि धान की कुल बुआई करीब तीन फीसदी कम हुई है। वर्ष 2016 में बसमाती उत्पादक प्रमुख राज्यों में बासमती का कुल रकबा 16.89 लाख हेक्टेयर था जो इस साल यानी 2017 में घटकर 15.55 लाख हेक्टेयर रह गया।

सरकार ने भी माना कम होगा उत्‍पादन

सरकार द्वारा जारी खरीफ फसलों के पहले पूर्वानुमान में कहा गया है कि खरीफ चावल का कुल उत्‍पादन 94.48 मिलियन टन तक अनुमानित है। यह विगत वर्ष के 96.39 मिलियन टन रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 1.91 मिलियन टन कम है। हालांकि यह आंकड़ा सभी तरह के चावल का है। विशेषज्ञों का मानना है इस 1.91 लाख टन की कमी में बड़ा हिस्‍सा बासमती का है।

एक ट्रिक ने बदली नौवीं पास दिव्यांग की किस्मत

पुणे/सोलापुर: कभी दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करने वाला दिव्यांग लड़का मुनगा की खेती कर अपनी चार साल की मेहनत से करोड़पति बना है। वहीं उसने लाखों किसानों को मार्गदर्शन किया है। उसकी सफलता देख देश भर से लाखों किसान उसके खेत पर पहुंच रहे हैं। वहीं उसके मार्गदर्शन से महाराष्ट्र खासकर सूखा पीड़ित मराठवाड़ा के हजारों किसानों कर्ज से मुक्त हुए हैं। हर साल एेसे कमाता है 15 लाख….

  • सोलापुर के माढा तहसील के तहत उपलाई गांव में रहने वाले किसान बालासाहब पाटिल (30) की माली हालत चार साल पहले ठीक नहीं थी।
  • बालासाहेब अपने अपने भाई के साथ दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करते थे। सिर्फ नौंवी तक पढ़ाई होने से उन्हें दूसरी जगह कोई काम भी नहीं देता था।
  • घर की हालत इतनी खराब थी कि, घर के लोगों को दिन में सिर्फ एक वक्त का खाना मिलता था। यहां तक उनकी आर्थिक हालत की वजह से लोग उधार भी नहीं देते थे।

एेसे बदली किस्मत

  • एक दिन गांव के किसान गणेश कुलकर्णी ने बालासाहब की हालत देख उन्हें अपने पास बुलाया और मुनगा की खेत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • बालासाहब के पास मुनगा के बीज के लिए पैसे भी नहीं थे, तो गणेश कुलकर्णी ने उन्हें चार हजार रुपए दिए और यहीं उनकी किस्मत बदली।
  • बालासाहब को पहली बार मुनगा की खेती से 50 हजार का मुनाफा हुआ इसके बाद उन्होंने चार एकड़ में इसकी बुआई की।
  • अब उन्होंने पौधों की नर्सरी भी शुरू की है। यहां से वे किसानों को ज़रुरत के अनुसार पौधों की सप्लाई करते हैं।
  • कभी एक टाइम की रोटी के लिए मोहताज बालासाहब अब इसी खेत से हर साल 15 लाख रुपए कमा रहे हैं।
  • जिस जगह उनकी झोपड़ी थी, उसी जगह पर उन्होंने अच्छा सा बंगला बनवाया है। बंगले पर मुनगा हाथ में लिए किसान का पुतला बनाया है।
  • उनका कहना है कि जिस मुनगा की फसल से मुझे करोड़पति बनाया है, उसे मैं कैसे भूल सकता हूं। बालासाहब आगे भी खेती में और नई टेक्नीक का इस्तेमाल करना चाहते हैं।

हो चुका है सम्मान

  • महाराष्ट्र में मुनगा का खेती करने वाले और भी कई किसान हैं, लेकिन राज्य में कम उम्र में अच्छे मुनाफे की खेती करने का कारनामा बालासाहेब पाटिल ने किया है।
  • उनके इस कारनामे के लिए उन्हें वसंतराव नाईक प्रतिष्ठान के अलावा ड्रीम फाउंडेशन द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  • वहीं महाराष्ट्र में कई जगहों पर वे किसानों को मुनगा खेती से मुनाफा कमाने को लेकर मार्गदर्शन करते रहते हैं।
  • बालासाहब सम्मान को आगे बढ़ने का रास्ता मानते हैं। अब उनसे उन्नत बीज तैयार करने का तरीका सीखने कृषि विशेषज्ञ भी गांव पहुंच रहे हैं।
  • उन्होंने तीन किताबें भी लिखी है, जिसमें करोड़पति बनवेल शेवगा ( करोड़पति बनाएगा मुनगा), अमरुद और सिताफल पर लिखी किताब शामिल है।

News Source: Dainik Bhaskar

बासमती 1509 के भाव में आया 300 प्रति क्विंटल तक का उछाल,ये हुआ भाव

हरियाणा की अलेवा अनाज मंडी में पिछले सप्ताह से धान की किस्म 1509 की फसल आवक तेज हो गई है। धान की आवक शुरू होने के साथ ही पिछले सप्ताह के मुकाबले गुरुवार को धान की किस्म 1590 के भाव में प्रति क्विंटल 300 रुपए तक का उछाल आया है। गुरुवार को परचेजरों ने धान की किस्म 1509 की 500 क्विंटल धान की की खरीददारी की गई है।

परचेजरों द्वारा हाथ से कटाई वाली धान की किस्म 1509 को प्रति क्विंटल 2729 रुपए और कंबाइन से काटी गई फसल 2550 प्रति क्विंटल तक खरीद की गई। धान की किस्म 1509 के भाव अच्छे होने से मंडी में फसल बेचने आए विभिन्न गांवों के किसान खुश दिखाई दिए।

अलेवा अनाज मंडी व्यापारी एसोसिएशन के प्रधान रामदिया लोहान ने बताया कि धान की पीआर किस्म की सरकारी खरीद सरकार द्वारा एक अक्टूबर से शुरू करने की हिदायत दी गई है, लेकिन धान की किस्म 1509, बासमती 1121 समेत सभी किस्मों की अनाज मंडी विभिन्न शहरों से आए परचेजरों द्वारा खरीद की जा रही है। धान की किस्म 1509 के भाव पिछले वर्ष की अपेक्षा अधिक मिल रहे है।

जाने भारत में खेत नापने के लिए प्रयोग होने वाले खेती के नाप

भारत के अधिकांश भागो में खेती के नाप के लिए गज, हाथ,गट्ठा, जरीब, बिस्‍सा, बिस्‍वॉनसी, उनवांनसी, कचवानसी,बीधा, किल्‍ला, एकड, हेक्‍टेअर, मरला, कनाल आदि मात्रकों का प्रयोग होता हैं।

नापने का पैमाना सम्‍बधित जानकारी-

 1 Gaz (एक गज)

= 1 Yard (एक यार्ड)
= 0.91 Meters (0.91 मीटर)
= 36 Inch (36 इंच)
= 3×3 Feet (9 वर्ग फीट)

1 Hath (एक हाथ)

=½ Yards (आधा गज)
= 18 Inch (18 इंच)

1 Gattha (एक गट्ठा)

= 5 ½ Hath (साढे पांच हाथ)
= 2.75 Yards (पौने तीन गज)
= 99 Inch (99 इंच)

1 furlong(फर्लांग)

=220 Yards (गज)
=660 Feet (फुट)

1 Jareeb (जरीब)

= 55 Yards (55 गज) (जरीब आमतौर पर 10 करमों की होती
है पर 66 इंच करम वाली जरीब में 8 कड़ियां होती हैं)

1 Karm (एक करम)(करम को कहीं-कहीं
सरसाही भी कहते हैं)

= साढ़े 5 फुट गुना साढ़े 5 फुट (5′.6″ X 5′.6″)
= 30.25 वर्गफुट
= 1.6764 मीटर

= दो कदम

= देश के अलग-अलग हिस्सों में करम का साइज़
भी अलग है, एक करम 57.157, 57.5, 60 और
66 इंच का माना गया है यहाँ सारी गणना 66 इंच
मान कर की गयी हैI

1 Marala (एक मरला)

= साढ़े 16 फुट गुना साढ़े 16 फुट (16′.6″ X 16′.6″)
= 272.25 वर्गफुट
= 9 करम= 25.2929 वर्ग मीटर

क्षेत्रफल मापने के मात्रक

1 Unwansi (एक उनवांसी)

=24.5025 Sq Inch (24.5025वर्ग इंच)

1 Kachwansi (एक कचवांसी)

=20 Unwansi (20 उनवांसी)

1 Biswansi ( एक बिसवांसी)

=20 Kachwansi (20 कचवांसी)
= 1 Sq. Gattha (एक वर्ग गट्ठा)
= 7.5625 Sq.Yard (7.5625 वर्ग गज)
= 9801 Sq Inch (9801 वर्ग इंच)

1 Bissa (एक बिस्‍सा)

=20 Biswansi (20 बिस्‍वांसी)
= 20 Sq.Gattha (20 वर्ग गट्ठा)

1 Kaccha Bigha (एक कच्‍चा बीघा)

= 6 2/3 Bissa (6 2/3 बिस्‍से)
= 1008 Sq.Yard and 3Sq Feet (1008 वर्ग गज और 3वर्गफुट)
= 843 Sq. Meters (843 वर्ग मीटर)

1 Pakka Bigha (एक पक्‍का बीघा)

= 1 sq. Jareeb (एक वर्ग जरीब)
= 3 Kaccha Bigha (तीन कच्‍चे बीघे)
=20 Bissa (20 बिस्‍सें)
= 3025 Sq. Yard (3025 वर्ग गज)
= 2529 Sq. Meters 2529 वर्ग मीटर)
= 27225 Sq. Feet (27225 वर्ग फुट)
=165×165 Feet
=55×55 यार्ड
= 0.625 Acre (0.625 एकड)
= 0.253 Hectare (0.253हेक्‍टेअर)
= 5 कनाल (एक कनाल में 20 मरला)
= 100 मरला

1 Acre (एक एकड)

= 4840 Sq. Yard (4840 वर्ग गज)
= 4046.8 Sq.Meters (4046.8वर्ग मीटर)
= 43560 Sq. Feet (43560 वर्ग फुट)
= 0.4047 Hectare (0.4047हेक्‍टेअर)
= 1.6 बीघा
= 8 कनाल
= 160 मरला

1 Hectare (एकहेक्‍टेअर)

= 2.4711 Acre (2.4711 एकड)
= 3.95 बीघा
= 11960 यार्ड
= 10000 Sq meters ( 10000वर्ग मीटर)

सिर्फ 43 रुपए में मिलेगा 1 लीटर पेट्रोल, अगर सरकार उठाए ये कदम

पेट्रोल-डीजल के दाम लगातार बढ़ते ही जा रहे हैं. दिल्ली में गुरुवार को पेट्रोल 70.39 रुपए प्रति लीटर मिल रहा है. वहीं, मुंबई में पेट्रोल की कीमतें 79.50 रुपए प्रति लीटर पहुंच चुकी है. डीजल की स्थ‍िति भी कुछ ऐसी ही है. पेट्रोल-डीजल की कीमतें पिछले तीन सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें घटने के बाद भी देश में पेट्रोल-डीजल की कीमतें नहीं घट रही हैं.

अगर केंद्र सरकार पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बदलाव के लिए एक कदम उठाए, तो इनकी कीमतें मौजूदा कीमतों से सीधे आधी हो सकती हैं. अगर सरकार ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान की बात मान लेती है, तो 1 लीटर पेट्रोल सिर्फ 43 रुपए में मिलेगा और एक लीटर डीजल महज 41 रुपए में.

दरअसल पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को लेकर ऑयल मिनिस्टर धर्मेंद्र प्रधान ने कहा है कि कीमतों पर काबू पाने के लिए जीएसटी से ही रास्ता निकल सकता है. उन्होंने बताया कि जीएसटी परिषद से पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाने को लेकर विचार करने को कहा है. अगर सरकार इस काम को कर दे, तो आम आदमी को काफी फायदा हो सकता है. हम आपको बता रहे हैं कि अगर पेट्रोल-डीजल नई टैक्स नीति के तहत आते हैं, तो कीमतों में कितना बदलाव आएगा.

अगर पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के दायरे में लाया जाता है, तो इस पर ज्यादा से ज्यादा 28 फीसदी टैक्स लगाया जा सकता है. क्योंकि जीएसटी में यही सबसे ज्यादा टैक्स स्लैब है. 28 फीसदी टैक्स वसूले जाने पर एक लीटर पेट्रोल आपको दिल्ली में करीब 43 रुपए में पड़ेगा. जोकि पेट्रोल की मौजूदा कीमतों से लगभग आधा है. आगे समझिए कैसे.

पहले जानें कैसे मौजूदा व्यवस्था में पेट्रोल-डीजल के लिए आपको दिल्ली में 70 रुपए तक भुगतान करना पड़ रहा है और मुंबई में 80 रुपए तक.

पहले बात करते हैं पेट्रोल की. पेट्रोलियम प्लानिंग एंड एनालिसिस सेल (पीपीएसी) के मुताबिक ऑयल कंपनियां 30.42 रुपए में एक लीटर पेट्रोल डीलर्स को बेचती हैं. डीलर इसमें 3.24 रुपए अपना कमीशन जोड़ते हैं. इसके बाद एक लीटर की कीमत 33.66 रुपए हो जाती है. अब इसमें केंद्र 21.48 रुपए एक्साइज ड्यूटी वसूलता है. दिल्ली में 14.48 रुपए वैट लगता है. इस तरह आपको एक लीटर के लिए करीबन 70 रुपए दिल्ली में देने पड़ते हैं.

डीजल की बात करें, तो ऑयल कंपनियां डीलर्स को 1 लीटर पेट्रोल 29.98 रुपए में बेचती हैं. इसमें 2.17 रुपए डीलर का कमीशन जुड़ता है. इस पर अब केंद्र 17.33 रुपए एक्साइज ड्यूटी लगाता है. दिल्ली में 8.58 रुपए का वैट लगता है. इस तरह 1 लीटर डीजल आप तक पहुंचते-पहुंचते 58.06 रुपए (9 सितंबर तक के आंकड़े) पहुंच जाता है.

अगर पेट्रोल जीएसटी के तहत आ जाता है, तो एक्साइज ड्यूटी और राज्यों की तरफ से लगने वाला वैट खत्म हो जाएगा. नई टैक्स नीति के तहत डीलर कमीशन जुड़ने के बाद एक लीटर पेट्रोल की कीमत 33.66 रुपए हो जाती है. इसमें 28 फीसदी जीएसटी जोड़ने पर आपको 9.42 रुपए ओर देने होंगे. इस तरह 1 लीटर पेट्रोल दिल्ली में आपको 43.08 रुपए में मिलेगा.

डीजल की बात करें, तो डीलर कमीशन के जुड़ने के बाद यह 32.15 रुपए हो जाता है. इसमें 28 फीसदी जीएसटी जोड़ा जाए, तो 9.02 रुपए और जुड़ेगा. इस तरह 1 लीटर डीजल आपको महज 41.17 रुपए में पड़ेगा.

हम देख सकते हैं कि अगर पेट्रोल और डीजल जीएसटी के तहत आ जाएंगे, तो उनकी कीमत मौजूदा कीमतों से सीधे आधी हो जाएंगी. इससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कीमतों में बदलाव होने पर भी आम आदमी की जेब पर ज्यादा दबाव नहीं पड़ेगा.

हालांकि पेट्रोल-डीजल को जीएसटी के तहत लाने का फिलहाल सरकार का कोई प्लान नहीं है. धर्मेंद्र प्रधान ने जीएसटी परिषद से जीएसटी के जरिए कोई रास्ता निकालने का सुझाव जरूर दिया है, लेकिन ये जल्द होता नहीं दिख रहा है.

मुफत में अपने फ़ोन पर SMS के जरिए मौसम की जानकारी लेने के लिए ऐसे करें रजिस्टर

मौसम की सूचना देने वाले देश के भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने लोगों के लिए एक एसएमएस अलर्ट की सेवा शुरू की है। इससे न केवल मौसम के बारे में अलर्ट मिलेंगे, बल्कि चक्रवात, बाढ़ और भारी बारिश के बारे में भी पता चल सकेगा।

इस सेवा के तहत आईएमडी हर उस व्यक्ति को मौसम के बारे में एसएमएस भेजेगा, जो भी इसके साथ रजिस्टर होंगे। इसके रजिस्ट्रेशन के लिए आपको आईएमडी की वेबसाइट http://imdagrimet.gov.in/  पर जाना पड़ेगा और खुद को रजिस्टर करना पड़ेगा।

इसके जरिए सरकारी विभागों और लोगों को न केवल प्राकृतिक आपदाओं के बारे में बताया जाएगा, बल्कि यह भी बताया जाएगा कि उससे कैसे निपटा जा सकता है। यह सुविधा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की ‘मोबाइल सेवा’ का इस्तेमाल करके लोगों तक पहुंचाई जाएगी।

ऐसे करें रजिस्टर

इस सुविधा का फ़ायदा लेने के लिए सबसे पहले इस लिंक http://imdagrimet.gov.in/farmer/Form_Hindi.php पर क्लिक करें । उसके बाद एक (ऊपर दी हुई फोटो जैसा) फार्म खुलेगा जिसमे आप को अपना फ़ोन नंबर , अपना स्टेट ,अपना जिला ,और फसल के सम्बंधित बाकि जानकारी भरनी होगी एक बार सारी जानकारी भरने के बाद इस फार्म को सबमिट करें । उसके बाद आपके फ़ोन पर SMS सेवा शुरू कर दी जाएगी और आप को मौसम की जानकारी फ़ोन के जरिए मिलनी शुरू हो जयेगी ।

इस जरूरी जानकारी को ज्यादा से ज्यादा शेयर करें ताकि बाकि किसान भी इसका फ़ायदा उठा सकें ।