2017-18 के लिए पूरी रबी की फसल के लिए एमएसपी की मंजूरी

सरकार ने गेहूं के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) आज 110 रुपए बढ़ाकर 1,735 रुपए प्रति कुंतल किया। साथ ही चना और मसूर के एमएसपी में भी 200 रुपए प्रति कुंतल की बढ़ोत्तरी की है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इन फसलों का उत्पादन बढ़ाने और कीमतों पर नियंत्रण रखने के लिए सरकार ने यह फैसला किया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने आज 2017-18 के लिए पूरी रबी की फसल के लिए एमएसपी की मंजूरी दी। एमएसपी वह मूल्य होता है जिस पर सरकार किसानों से खाद्यान्न की खरीद करती है।

सूत्रों के अनुसार मंत्रिमंडल ने गेहूं का एमएसपी 110 रुपए बढ़ाकर 1,735 रुपए प्रति कुंतल किया है। पिछले साल यह 1,625 रुपए प्रति कुंतल था।देखने में यह भाव ठीक लग रहा है लेकिन आज के खेती खर्चे देखें तो उस हिसाब से कम है ।आज के खेतीबाड़ी खर्चों के हिसाब से गेहूं का भाव कम से कम 2300 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ।

चना और मसूर की खेती को बढावा देने के उद्देश्य से इनके एमएसपी में प्रत्येक में 200 रुपए की बढ़ोत्तरी की गई है और नई कीमत क्रमश: 4,200 और 4,150 रुपए प्रति कुंतल होगी

सूत्रों ने बताया कि तिलहन में रैपसीड, सरसों और सूरजमुखी के बीज के एमएसपी में उल्लेखनीय वृद्धि की गई है। कीमतों में यह वृद्धि कृषि मूल्य एवं लागत आयोग की सिफारिशों के अनुरूप है।

भूलकर भी ना बोए गेहूं की ये नई किसम ,वरना पड़ेगा पछताना

भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) की ओर से बनारस में रिलीज की गई गेहूं की नई किस्म डब्ल्यूबी-2 के दावे पर विवाद शुरू हो गया है। इसके खिलाफ करनाल स्थित पूसा (इंडियन एग्रीकल्चर रिसर्च इंस्टीट्यूट) के क्षेत्रीय संस्थान से रिटायर्ड पौध प्रजनन विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. वीरेंद्र लाठर ने केंद्रीय कृषि मंत्री से शिकायत करके मामले को वैज्ञानिक धोखाधड़ी करार दिया है और इसकी सीबीआई जांच की मांग की है।

केंद्रीय कृषि मंत्री, कृषि सचिव, आईसीएआर (भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद) के महानिदेशक आदि से की गई शिकायत में उन्होंने कहा है कि गेहूं की किस्म डब्ल्यूबी-2 को आईआईडब्ल्यूबीआर ने देश की प्रथम जैव पोषित किस्म करार दिया है।उनके मुताबिक यह दावा गलत है, क्योंकि इससे ज्यादा जैव पोषित गेहूं की किस्म डब्ल्यूएच-306 हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय (हकृवि) ने 52 साल पहले वर्ष 1965 में ही बना दी थी। यही नहीं, अपने रिकॉर्ड को तोड़ते हुए हकृवि ने 25 साल पहले वर्ष 1992 में उससे भी पोषित किस्म डब्ल्यूएच-712 बना दी थी।

अपनी शिकायत के साथ उन्होंने आईआईडब्ल्यूबीआर के पूर्व निदेशक एवं पूसा इंस्टीट्यूट के पूर्व निदेशक प्रोफेसर एस नागराजन के रिसर्च पेपर की प्रतिलिपि भी लगाई है जिसमें उन्होंने गेहूं की विभिन्न किस्मों के पोषण तत्वों के बारे में भी जानकारी दी है। यहां बता दें कि गेहूं की जिस किस्म को लेकर बवाल शुरू हुआ है, उसके प्रचार के लिए प्रकाशित किए गए पैम्फलेट में केंद्रीय कृषि मंत्री राधा मोहन सिंह की फोटो भी लगाई गई है।

यह है कथित गलत दावे का आधारआईआईडब्ल्यूबीआर ने गेहूं की अपनी नई किस्म डब्ल्यूबी-2 में आयरन की मात्रा 35.4 पीपीएम दशाई है जबकि डॉ. एस नागराजन के रिसर्च पेपर में हकृवि की गेहूं की किस्म सी-306 में यह 70 पीपीएम और डब्ल्यूएच 712 में 85 पीपीएम है। इसी प्रकार डब्ल्यूबी-2 में जिंक की मात्रा 42 पीपीएम दर्शाई गई है जबकि सी-306 में यह 80 व डब्ल्यूएच-712 में 105 है।

 

गुजरात सरकार देगी कपास पर इतने रुपये का बोनस

गुजरात सरकार कपास के किसानों को बोनस देने का फैसला किया है। कॉटन की गिरती कीमतों से किसानों को सपोर्ट के लिए राज्य सरकार ने एमएसपी पर 500 रुपये प्रति क्विंटल बोनस देगी। अगले महीने से राज्य में कपास की सरकारी खरीद भी शुरू हो जाएगी।

आपको बता दें कपास की कीमतें तेजी से नीचे आ रही थीं। ऐसे में किसानों को लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा था। राज्य में नई फसल की आवक शुरू हो गई है और आने वाले दिनों में इसकी आवक और जोर पकड़ सकती है।

गुजरात में जैसे-जैसे चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं, किसानों के लिये जैसे सरकारी योजनाओं की बारिश सी होने लगी है. शायद किसानों को पहली बार इन पांच सालों में लग रहा है कि उन्हें किसान होने का कुछ तो फायदा हुआ है. लेकिन किसानों की हालत उस हिरन के जैसी है जिन्हें महसूस हो रहा है कि दूर कहीं पानी है जबकि वह उनका सिर्फ एक भ्रम है.

आप भी सोचते होंगे कि गुजरात में किसान को 3 लाख तक के लोन बिना ब्याज के मिलने वाली सरकार की घोषणा का फायदा तो किसान को ही मिलेगा. लेकिन अर्थशास्त्री हेमंत शाह की मानें तो सरकार के जरीये ये एक व्यूह रचा जा रहा है, जिसके जरिए किसान और शहर में रहने वाले मध्यम वर्ग को एक दूसरे के सामने खड़ा किया जा रहा है. मध्यम वर्ग के लोगों को लगता है कि यहां सबकुछ किसान के लिये ही किया जा रहा है.

इस सब्जी का दाम सुन लेंगे तो बेशक अपने कानों पर यकीन ही नहीं कर पाएंगे

सब्जी खरीदने जाने वाला हर शख्स इन दिनों एक ही बात कहता मिलता है कि सब्जियों के दाम आसमान छू रहे हैं। हां अगर वे दुनिया की सबसे महंगी इस सब्जी का दाम सुन लेंगे तो बेशक अपने कानों पर यकीन ही नहीं कर पाएंगे। अमूमन सब्जियां 50 रुपए किलो तक आ जाती हैं, हालांकि सीजन की शुरुआत में जब कोई नई सब्जी आती है तो उसका दाम 100 रुपए किलो तक हो सकता है, बाद में यह दाम गिर जाते हैं।

दुनिया की सबसे महंगी सब्जी गुच्छी का दाम सुनकर आप चौंक ही जाएंगे। बाजार में गुच्छी की कीमत है 25000 से 30000 रुपए प्रति किलो। यह सब्जी हिमाचल, कश्मीर और हिमालय के ऊंचे हिस्सों में पैदा होती है। यह सब्जी पहाड़ों पर बिजली की गडग़ड़ाहट व चमक से बर्फ से निकलती है।यह दुर्लभ सब्जी पहाड़ों पर साधु-संत ढूंढकर इकट्ठा करते हैं और ठंड के मौसम में इसका उपयोग करते हैं।

इसको बनाने की विधि में ड्रायफ्रूट, सब्जियां, घी इस्तेमाल किया जाता है। लजीज पकवानों में गिनी जाने वाली यह सब्जी औषधीय गुणों से भरपूर होती है और इसका वैज्ञानिक नाम मार्कुला एस्क्यूपलेंटा है। इसे हिंदी में स्पंज मशरूम भी कहा जाता है। प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगने वाली गुच्छी फरवरी से अप्रेल के बीच मिलती है। बड़ी बड़ी कंपनियां और होटल इसे हाथोंहाथ खरीद लेते हैं। इस कारण इन इलाकों में रहने वाले लोग सीजन के समय जंगलों में ही डेरा डालकर गुच्छी इकट्ठा करते हैं।

इन लोगों से गुच्छी बड़ी कंपनियां 10 से 15 हजार रुपए प्रति किलो के हिसाब से खरीदते हैं, जबकि बाजार में इसकी कीमत 25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो है।गुच्छी की डिमांड भारत में ही नहीं बल्कि अमरीका, यूरोप, फ्रांस, इटली और स्विट्जरलैंड तक भी है। इसमें विटामिन बी और डी के अलावा सी और के प्रचुर मात्रा में होता है। इसे नियमित खाने से दिल की बीमारी नहीं होती।

किसानो के लिए खुशखबरी ! इतने रुपये तक बढ़ सकता है गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य

गेहूं की एमएसपी पर सरकार जल्द फैसला ले सकती है। मिनिमम सपोर्ट प्राइस बढ़ाने के लिए सरकार ने तैयारियां शुरु कर दी हैं। जानकारी मिली है कि गेहूं के इंपोर्ट पर भी ड्यूटी बढ़ाने की योजना फिलहाल नहीं है।

इसी बीच किसानों के लिए खुशखबरी यह है, कमीशन फॉर एग्रीकल्चर कॉस्ट एंड प्राइसेज यानी सीएसीपी ने रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य बढ़ाने की सिफारिश की है। सीएसीपी ने गेहूं की एमएसपी 115 रुपये प्रति क्विंटल और दालों की एमएसपी 225 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ाने की सिफारिश की है। कृषि मंत्रालय ने कैबिनेट को ये प्रस्ताव भेजा है।

कैबिनेट इस पर अंतिम फैसला लेगी। बता दें कि कैबिनेट की बैठक अगले बुधवार को होगी।अगर इस बार गेहूं के एमएसपी 115 रुपये प्रति क्विंटल बढ़ती है तो गेहूं की समर्थन मूल्य पिछले साल (2016 -2017) के एमएसपी 1625 रुपये प्रति क्विंटल में जोड़ने पर 1625 +115 =1740 प्रति क्विंटल तक हो सकती है । देखने में यह भाव ठीक लग रहा है लेकिन आज के खेती खर्चे देखें तो उस हिसाब से कम है ।आज के खेतीबाड़ी खर्चों के हिसाब से गेहूं का भाव कम से कम 2300 रुपये प्रति क्विंटल होना चाहिए ।

आपको बता दें इस महीने से गेहूं की बुआई शुरु हो जाएगी। इस बीच सरकार ने गेहूं पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ाने से भी इनकार किया है। कृषि मंत्रालय के मुताबिक फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं है और इस तरह की मांगों पर बाद में विचार किया जाएगा।

जाने सोयाबीन के आज के भाव

बुधवार को किसानों की दिवाली मन गई। मध्यप्रदेश की झाबुआ मंडी में सोयाबीन 2801 रुपए प्रति क्विंटल के भाव से बिका। ये इस बार की सर्वाधिक कीमत है। दिनभर में करीब 800 बोरी सोयाबीन की आवक हुई। गौरतलब है कि 16 अक्टूबर से भावांतर योजना लागू होने के बाद से अनाज की खरीदी-बिक्री पूरी तरह से मंडी में हो रही है।

वर्तमान में सोयाबीन के भाव 2650 रुपए प्रति क्विंटल चल रहे थे लेकिन बुधवार को दाम 2801 रुपए पर पहुंच गए। जिससे किसानों का त्योहार मन गया। किसान बारिया भीलू व दतिया ने कहा सोयाबीन के भाव अच्छे मिले हैं इससे त्योहार अच्छा मन जाएगा।

जानकारों के मुताबिक बीते खरीफ सत्र के दौरान भावों में गिरावट के चलते किसानों को सोयाबीन की फसल निर्धारित न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से भी नीचे बेचनी पड़ी थी । इस कारण परंपरागत रूप से सोयाबीन उगाने वाले कई किसानों ने उपज के बेहतर भावों की आशा में मौजूदा खरीफ सत्र में खासकर तुअर (अरहर), मूंग और उड़द जैसी दलहनी फसलों की बुवाई मुनासिब समझी. इससे सोयाबीन के रकबे में जाहिर तौर पर गिरावट आई।

जानकारों ने बताया कि अगस्त के पहले पखवाड़े में मध्यप्रदेश और देश के अन्य प्रमुख सोयाबीन उत्पादक इलाकों में पर्याप्त बारिश नहीं होने से इस तिलहन फसल की उत्पादकता पर बुरा असर पड़ा। कुछ इलाकों में सोयाबीन कटाई से पहले भारी बारिश से भी फसल की पैदावार प्रभावित हुई. इस लिए आने वाले समय में सोयाबीन के भाव और भी बढ़ने के आसार है ।

पिछले साल के मुकाबले 2000 तक बढ़े बासमती के भाव

बासमती-1509। धान की वही वैरायटी, जिसने दो साल पहले सरकार की नींद हराम कर दी थी। दाम गिरने से किसान सड़कों पर थे, जाम लगाकर प्रदर्शन हो रहा था, कोई खेतों में धान जला रहा था तो कोई मंडियों में छोड़कर जा रहा था।

तब सरकार झुकी और 1509 का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1550 रुपए तय किया। इस पर भी किसानों की कमाई 70 प्रतिशत तक घट गई थी। लेकिन इस बार इसी 1509 ने किसानों को दिवाली धमाका ऑफर दिया है। ईरान में डिमांड बढ़ने और एक्सपोर्टर्स के पास स्टॉक न होने के कारण 1509 की डिमांड बढ़ गई है।

तीन साल बाद 3200 रुपए प्रति क्विंटल तक के भाव मिल रहे हैं। पिछले साल यह धान 1800 रुपए तक में बिकी थी, उससे पहले इसकी कीमत 1200 रुपए प्रति क्विंटल तक रह गई थी। इस बार औसतन 2000 रुपए प्रति क्विंटल का फायदा हो रहा है।

इस हिसाब से 7 लाख किसानों को एक लाख हेक्टेयर में बोई गई इस धान से करीब 450 करोड़ रुपए का लाभ होने जा रहा है। हालांकि पिछली बार की अपेक्षा इस बार रकबा कम है।जिसमें एक लाख हेक्टेयर में 1509 है। ज्यादातर 1121 की रोपाई की हुई है। सुपर बासमती भी कम है। इसलिए इस बार एक्सपोर्टर्स ज्यादा भाव में बासमती धान की खरीद कर रहे हैं।

वैट हटा, डिमांड बढ़ी: राइस एक्सपोर्टर्स के पास बासमती और 1509 के चावल का पुराना स्टॉक नहीं है। इसलिए वह ज्यादा खरीदारी कर रहे हैं। डिमांड पूरी करने के लिए एक्सपोर्टर्स किसानों को अच्छा भाव दे रहे हैं। चावल से वैट हटा दिया है।

ईरान का बाजार खुला : वर्ष 2013-14 में ईरान ने भारत से 14,40,445 टन बासमती खरीदा था। ईरान की मांग को देखते हुए एक्सपोर्टर्स ने 2014-15 में ओवर स्टॉक कर लिया था। लेकिन वहां मांग घट गई थी। अब फिर बाजार खुला है।पिछले दो साल से ईरान से ज्यादा डिमांड न होने के कारण मिलर्स को समय से भुगतान नहीं हो पाया। इस कारण किसानों का भी पैसा फंसा हुआ था। इस बार भुगतान हो रहा है।

भारत का ये शहर, जहां आलू-प्याज से भी सस्ते बिकते हैं काजू !

काजू खाने या खिलाने की बात आते ही आमतौर पर लोग जेब टटोलने लगते हैं. ऐसे में कोई कहे कि काजू की कीमत आलू-प्याज से भी कम है तो आप शायद ही विश्वास करेंगे. यानी अगर आप दिल्ली में 800 रुपए किलो काजू खरीदते हैं तो यहां से 12 सौ किलोमीटर दूर झारखंड में काजू बेहद सस्ते हैं. जामताड़ा जिले में काजू 10 से 20 रुपये प्रति किलो बिकते हैं.

जामताड़ा के नाला में करीब 49 एकड़ इलाके में काजू के बागान हैं. बागान में काम करने वाले बच्चे और महिलाएं काजू को बेहद सस्ते दाम में बेच देते हैं. काजू की फसल में फायदा होने के चलते इलाके के काफी लोगों का रुझान इस ओर हो रहा है. ये बागान जामताड़ा ब्लॉक मुख्यालय से चार किलोमीटर की दूरी हैं.

बागान बनने के पीछे है दिलचस्प कहानी

सबसे दिलचस्प बात यह है कि जामताड़ा में काजू की इतनी बड़ी पैदावार चंद साल की मेहनत के बाद शुरू हुई है. इलाके के लोग बताते हैं जामताड़ा के पूर्व उपायुक्त कृपानंद झा को काजू खाना बेहद पसंद था. इसी वजह वह चाहते थे कि जामताड़ा में काजू के बागान बन जाए तो वे ताजी और सस्ती काजू खा सकेंगे.

इसी वजह से कृपानंद झा ने ओडिशा में काजू की खेती करने वालों से मिले. उन्होंने कृषि वैज्ञानिकों से जामताड़ा की भौगोलिक स्थिति का पता किया. इसके बाद यहां काजू की बागवानी शुरू कराई. देखते ही देखते चंद साल में यहां काजू की बड़े पैमाने पर खेती होने लगी

कृपानंद झा के यहां से जाने के बाद निमाई चन्द्र घोष एंड कंपनी को केवल तीन लाख रुपए भुगतान पर तीन साल के लिए बागान की निगरानी का जिम्मा सौंपा गया. एक अनुमान के मुताबिक बागान में हर साल हजारों क्विंटल काजू फलते हैं. देखरेख के अभाव में स्थानीय लोग और यहां से गुजरने वाले काजू तोड़कर ले जाते हैं.

इस बार बासमती करेगी किसानों के वारे-न्‍यारे

बासमती 1509 ने इस बार किसानों को खूब साथ निभाया है। 1509 का भाव 3100 रुपए तक हो गया है। अभी इसमें और तेजी आने की संभावना जताई जा रही है। वहीं कुछ दिन बाद ही बाजार में आने वाली 1121 वैरायटी के भी भरपूर दाम मिलने की प्रबंल संभावना इस बार नजर आ रही है।

3400 से शुरू हो सकते हैं भाव

बासमती चावल के घरेलू और अंतरराष्‍ट्रीय बाजार पर पैनी नजर रखने वाले अमृतसर के चावल विशेषज्ञ नीरज शर्मा का कहना है कि इस बार बासमती की तेजी हवा हवाई नहीं है। इसके फंडामैंटल मजबूत हैं। नीरज का कहना है कि इस बार बासमती 1121 की नई फसल की शुरूआत 3400 रुपए क्विंटल से हो सकती है।

ऐसा इसलिए है क्‍योंकि इस बार 1121 का कैरी आवर स्‍टॉक नहीं है। दूसरा, 1121 धान की बुआई बहुत कम हुई है। इसलिए मांग ज्‍यादा होगी और आपूर्ति कम। यह स्थिति भाव को बढ़ाएगी। फिलहाल पुराना 1121 धान 3200 रुपए तक बिक रहा है।

नीरज शर्मा ने बताया कि अगर 1509 के दाम अगर अब और बढते हैं तो इसका असर भी 1121 के भाव पर पड़ेगा। अगर 1509 की तेजी बरकरार रही तो 1121 के भावों को भी पंख लग सकते हैं।गौरतलब है कि नीरज शर्मा ने दो सितंबर को दावा किया था कि इस बार 1509 के दाम शुरूआत में 2200-2300 रुपए रहेंगे और ज्‍यों ही आवक बढ़ेगी तो दामों में इजाफा होता जाएगा। नीरज का यह दावा सही साबित हुआ और अब 1509 बासमती 3200 रुपए तक पहुंच चुका है।

आठ फीसदी कम बुआई

भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) की रिपोर्ट के मुताबिक इस साल बासमती धान की बुआई पिछले साल की तुलना में करीब 8 फीसदी कम हुई है, जबकि धान की कुल बुआई करीब तीन फीसदी कम हुई है। वर्ष 2016 में बसमाती उत्पादक प्रमुख राज्यों में बासमती का कुल रकबा 16.89 लाख हेक्टेयर था जो इस साल यानी 2017 में घटकर 15.55 लाख हेक्टेयर रह गया।

सरकार ने भी माना कम होगा उत्‍पादन

सरकार द्वारा जारी खरीफ फसलों के पहले पूर्वानुमान में कहा गया है कि खरीफ चावल का कुल उत्‍पादन 94.48 मिलियन टन तक अनुमानित है। यह विगत वर्ष के 96.39 मिलियन टन रिकार्ड उत्‍पादन की तुलना में 1.91 मिलियन टन कम है। हालांकि यह आंकड़ा सभी तरह के चावल का है। विशेषज्ञों का मानना है इस 1.91 लाख टन की कमी में बड़ा हिस्‍सा बासमती का है।

एक ट्रिक ने बदली नौवीं पास दिव्यांग की किस्मत

पुणे/सोलापुर: कभी दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करने वाला दिव्यांग लड़का मुनगा की खेती कर अपनी चार साल की मेहनत से करोड़पति बना है। वहीं उसने लाखों किसानों को मार्गदर्शन किया है। उसकी सफलता देख देश भर से लाखों किसान उसके खेत पर पहुंच रहे हैं। वहीं उसके मार्गदर्शन से महाराष्ट्र खासकर सूखा पीड़ित मराठवाड़ा के हजारों किसानों कर्ज से मुक्त हुए हैं। हर साल एेसे कमाता है 15 लाख….

  • सोलापुर के माढा तहसील के तहत उपलाई गांव में रहने वाले किसान बालासाहब पाटिल (30) की माली हालत चार साल पहले ठीक नहीं थी।
  • बालासाहेब अपने अपने भाई के साथ दूसरे किसानों के खेतों में मजदूरी करते थे। सिर्फ नौंवी तक पढ़ाई होने से उन्हें दूसरी जगह कोई काम भी नहीं देता था।
  • घर की हालत इतनी खराब थी कि, घर के लोगों को दिन में सिर्फ एक वक्त का खाना मिलता था। यहां तक उनकी आर्थिक हालत की वजह से लोग उधार भी नहीं देते थे।

एेसे बदली किस्मत

  • एक दिन गांव के किसान गणेश कुलकर्णी ने बालासाहब की हालत देख उन्हें अपने पास बुलाया और मुनगा की खेत करने के लिए प्रोत्साहित किया।
  • बालासाहब के पास मुनगा के बीज के लिए पैसे भी नहीं थे, तो गणेश कुलकर्णी ने उन्हें चार हजार रुपए दिए और यहीं उनकी किस्मत बदली।
  • बालासाहब को पहली बार मुनगा की खेती से 50 हजार का मुनाफा हुआ इसके बाद उन्होंने चार एकड़ में इसकी बुआई की।
  • अब उन्होंने पौधों की नर्सरी भी शुरू की है। यहां से वे किसानों को ज़रुरत के अनुसार पौधों की सप्लाई करते हैं।
  • कभी एक टाइम की रोटी के लिए मोहताज बालासाहब अब इसी खेत से हर साल 15 लाख रुपए कमा रहे हैं।
  • जिस जगह उनकी झोपड़ी थी, उसी जगह पर उन्होंने अच्छा सा बंगला बनवाया है। बंगले पर मुनगा हाथ में लिए किसान का पुतला बनाया है।
  • उनका कहना है कि जिस मुनगा की फसल से मुझे करोड़पति बनाया है, उसे मैं कैसे भूल सकता हूं। बालासाहब आगे भी खेती में और नई टेक्नीक का इस्तेमाल करना चाहते हैं।

हो चुका है सम्मान

  • महाराष्ट्र में मुनगा का खेती करने वाले और भी कई किसान हैं, लेकिन राज्य में कम उम्र में अच्छे मुनाफे की खेती करने का कारनामा बालासाहेब पाटिल ने किया है।
  • उनके इस कारनामे के लिए उन्हें वसंतराव नाईक प्रतिष्ठान के अलावा ड्रीम फाउंडेशन द्वारा पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
  • वहीं महाराष्ट्र में कई जगहों पर वे किसानों को मुनगा खेती से मुनाफा कमाने को लेकर मार्गदर्शन करते रहते हैं।
  • बालासाहब सम्मान को आगे बढ़ने का रास्ता मानते हैं। अब उनसे उन्नत बीज तैयार करने का तरीका सीखने कृषि विशेषज्ञ भी गांव पहुंच रहे हैं।
  • उन्होंने तीन किताबें भी लिखी है, जिसमें करोड़पति बनवेल शेवगा ( करोड़पति बनाएगा मुनगा), अमरुद और सिताफल पर लिखी किताब शामिल है।

News Source: Dainik Bhaskar