किसान एग्री ऐप पर लाइव कर सकेंगे कृषि वैज्ञानिकों से सवाल

मोबाइल फोन ऐप्लीकेशन का उपयोग कर अब किसान चैटबोट का इस्तेमाल कर अपनी फसलों से संबंधित सवाल सीधा वैज्ञानिकों से पूछ सकेंगे और वैज्ञानिक उनके सवालों का जवाब देने के लिए लाइव उपलब्ध होंगे।

मुंबई के विवेकानंद एजुकेशन सोसायटी के इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के 6 विद्यार्थियों ने 30-31 मार्च को आयोजित हेकाथन में ‘अहम’ नामक मोबाइल ऐप बनाया है।

अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद की ओर से 28 नोडल सेंटर्स पर आयोजित प्रतियोगिता में विद्यार्थियों को उनके दिए गए विषय पर 36 घंटों के भीतर ऐप बनाना था।

इस ऐप टीम की सदस्य दीपा नारायणन बताती हैं, “हमारा ऐप मूल रूप से सुगंधित और औषधीय पौधों की जानकारी देने के लिए है। लोगों को कपास, दलहन जैसी फसलों की जानकारी है, लेकिन सुगंधित और औषधीय पौधों के बारे में उन्हें ज्यादा जानकारी नहीं है।”

ऐप पर खास फसलों के लिए उपयुक्त जमीन के प्रकार, मौसम, जलवायु और समय के बारे में जानकारी है। ऐप पर बाजार की भी जानकारी है, जिससे किसान बीते व आने वाले समय में फसल की मांग के बारे में जान सकते हैं।

पुलिस जवानों ने जान जोखिम में डालकर गेहूं में लगी आग बुझाई

फतेहाबाद में पुलिस जवानों ने मानवता की मिसाल कायम की। जवानों ने अपनी जान जोखिम में डालकर गेहूं में लगी आग बुझाई। इस पूरे घटनाक्रम का एक वीडियो भी वायरल हो रहा है। इस से यह मैसज जा रहा है के पुलिस अपनी जान पर खेल क्र लोगों की मदद करती है ।

दरअसल भूना कुलां रो़ड पर गेहूं के खेतों में आग लग गई। जिससे दर्जनों एकड़ गेहूं की खड़ी फसल जलकर राख हो गई। आग पर काबू पाने के लिए फायरब्रिगेड बुलाने का वक़्त नहीं था अगर वो उसी वक़्त आग नहीं बुझाते तो फसलों का बहुत नुक्सान हो जाता ।

इस लिए फायरब्रिगेड ने नहीं बल्कि खुद भूना शहर पुलिस के जवानों ने काबू पाया। जवानों ने हाथ में वृक्ष की टहनियां लेकर खुद खेतों में उतरे अौर आग पर तुरंत काबू पाया। एेसी मानवता देख किसानों के भी होंसले बुलंद हो गए।

आग बुझाने वाले पुलिसकर्मियों के लिए बहुत सारे इनाम ही मिल रहे है ।डीजीपी बीएस संधू के बाद ओपी धनखड़ ने 11-11 हजार का इनाम देने की घोषणा की है । इस से पहले डीजीपी ने 10-10 हजार के इनाम की घोषणा की थी ।

खाद, बीज और लोन के लिए इस नंबर पर कॉल करें…

अक्सर यह देखा गया है कि किसी भी क्षेत्र की अधूरी जानकारी रखने पर हम उस क्षेत्र में तरक्की नहीं कर पातें है. इसलिए पूरी जानकारी का होना बहुत ही अनिवार्य है. किसान भाइयों के लिए राज्य सरकार कई सारी योजनाएं निकालती है लेकिन उस योजना की जानकारी ना होने के कारन किसान भाई उसका लाभ नही उठा पाते.

किसानों की खाद-बीज और पानी से लेकर लोन सहित अन्य समस्याओं की सुनवाई टोल फ्री नंबर 18002331850 पर होगी। किसान मितान केन्द्र के लिए सरकार ने यह टोल फ्री नंबर जारी किया है। इसके साथ ही किसानों की समस्या सुनने के लिए कृषि विभाग के अफसरों की जिम्मेदारी भी तय कर दी गई है।

विभाग ने बाकायदा ड्यूटी पर रहने वाले अफसरों का मोबाइल नंबर जारी किया है। किसान उनके नंबर पर सीधे कॉल कर सकते हैं। कृषि विभाग के उप संचालक ने बताया कि किसान खेती-किसानी के साथ ही राजस्व, सहकारिता, ऊर्जा एवं जल संसाधन विभाग से संबंधित जानकारी भी मितान केन्द्र के माध्यम से प्राप्त कर सकते हैं।

मितान केन्द्र में आने वाले किसानों की समस्या धौर्य से सुनने की नसीहत अफसरों को दी गई है। कहा गया है कि उपलब्ध योजनाओं के आधार पर उनकी समस्याओं के निराकरण के लिए आश्वस्त करते हुए जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई की जाए। आने वाले किसानों और उनकी समस्याओं का रिकॉर्ड रखने और उनकी समस्याओं की जानकारी संबंधित विभाग के जिला स्तर के प्रमुख अधिकारी को भेजने के निर्देश दिए गए हैं।

किसान मितान केन्द्र के अफसरों के नंबर

नोडल अफसर

  • आरके परगनिया सहायक संचालक- 9827104237
  • बीआर धृतलहरे विकास अधिकारी- 9009539911
  • बीके टिकरिहा कृषि अधिकारी- 9300834514

बुधवार व गुरुवार

  • पूनम चौहान कृषि विस्तार अधिकारी- 9755042526
  • आरके साहू कृषि विस्तार अधिकारी- 9754867078

शुक्रवार

  • बीके श्रीवास्तव कृषि विस्तार अधिकारी- 8305225653
  • कमला गंधर्व कृषि विस्तार अधिकारी- 7804027751

शनिवार

  • हिमाचल मोटघरे व श्री नवनीत मिश्रा- 9828654060

सभी दिन

  • विजय ठाकुर कृषि विस्तार अधिकारी- 9406405551

आखिरकार मानसून ने दी किसानो को एक और अच्छी खबर

गर्मी के सख्त तेवर के बीच में भारतीयों के लिए एक राहत भरी खबर आयी है, मौसम विभाग के मुताबिक इस साल जून से सितंबर के बीच दक्षिण-पश्चिम मानसून सक्रिय रहेगा जिसके चलते औसत के मुकाबले 97 फ़ीसदी बारिश होने के आसार हैं, जो किसानों के लिए खुश होने वाली खबर है।

आपको बता दें कि पिछले साल अक्टूबर से दिसंबर के बीच भारत में औसत से कम बारिश हुई थी जिसका असर देश के कई हिस्सों में सूखे की स्थिति पैदा हो गई थी लेकिन इस बार मौसम विभाग का कहना है कि ऐसा कुछ नहीं होगा।

देश में 97 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद

सोमवार को एक प्रेस वार्ता के दौरान भारतीय मौसम विभाग के महानिदेशक के जे रमेश ने कहा कि आईएमडी को इस साल देश में 97 प्रतिशत बारिश होने की उम्मीद है, हालांकि बारिश में पांच प्रतिशत तक की कमी या बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

मौसम विभाग ने उम्मीद जताई है कि मई के आखिरी या फिर जून के पहले हफ्ते तक केरल में मॉनसून दस्तक दे देगा। इससे पहले मौसम की सूचना देने वाली एक निजी एजेंसी स्काईमेट ने भी कहा था कि इस बार पर्याप्त बारिश होगी और देश मे सूखे के आसार ना के बराबर है।

देश के हर इलाके में अच्छी बारिश का अनुमान

मौसम विभाग का कहना है कि इस साल देश के हर इलाके में अच्छी बारिश का अनुमान है। मानसून की चाल पर आईएमडी 15 मई को अनुमान बताएगा आएगा, वहीं मानसून पर अगला अपडेट जून में आएगा।

एक एकड मे होता है 10 लाख का मुनाफा एकड

स्टीविया (कुदरती शूगर फ्री फसल) शूगर के मरीजों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। इस स्वीटेस्ट गिफ्ट ऑफ नेचर के नाम से भी जाना जाता है। स्टीविया के पत्ते चीनी से करीबन 40 गुना ज्यादा मीठे होते हैं। पत्तों को पाउडर बना कर भी इस्तेमाल किया जाता है।

कंपनियों द्वारा पाउडर बनाने के लिए प्रोसेसिंग यूनिट लगाया जाता है। पाउडर में चीनी से करीब 400 गुना ज्यादा मिठास होती है। चाय के एक कप में 6 पत्ते डाल कर पी जा सकती है। जिससे सेहत को बिलकुल भी नुकसान नहीं होता और मिठास उतनी ही होती है। स्टीविया के पत्ते केमिकल, कॉलेस्ट्रोल व कैलोरी मुक्त होते हैं।

खालसा कॉलेज पटियाला के एमएससी एग्रीकलचर सेकेंड ईयर के लवप्रीत सिंह ने गांव धबलान स्थित कॉलेज कैंपस में स्टीविया का ट्रायल लगाया। उन्होंने बताया कि लुधियाना की एग्री नेचुरल कंपनी 3 रुपए प्रति पनीरी के हिसाब से देते हैं। एक पौधा 5 साल तक चल सकता है।

साल दर साल बढ़ता है उत्पादन

हर तीन महीने बाद इसके पत्ते तोड़े जा सकते हैं यानि कि साल में 4 बार 1 एकड़ में 35 हजार के करीब पौधे लग सकते हैं। स्टीविया की फल्ड (Flood), स्प्रिंकल (Sprinkle) और ड्रिप (Drip) तरीके से सिंचाई होती है।

पहले साल 10, दूसरे 15, 3 साल बाद 22, 4 साल बाद 15 और 5वें साल 10 क्विंटल सूखे पत्ते होते हैं। यह 150 रुपए प्रति किलो के हिसाब से बिकते हैं। जो लोग एग्री नेचुरल कंपनी से स्टीविया की पनीरी खरीदते हैं, कंपनी उनसे कॉन्ट्रेक्ट करके मार्किट रेट से थोड़ा कम में पत्तों को खरीद लेती है।

स्टीविया में नहीं लगती कोई बीमारी

3 रुपए के हिसाब से स्टीविया के 35 हजार पौधे 1 लाख 5 हजार रुपए के हैं। 150 रुपए किलो के हिसाब से बेचा जाए तो पहले साल में 10 क्विंटल पत्तों से डेढ़ लाख रुपए कमाए जा सकते हैं। अगले 4 साल में कुल 9 लाख 30 रुपए का मुनाफा हो सकता है। स्टीविया को कोई बीमारी नहीं लगती।

क्या कहता है मौसम का पूर्वानुमान

पंजाब, हरियाणा व उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आने वाले दिनों में गरज-चमक के साथ बारिश के आसार हैं। अनुमान के मुताबिक इस हफ्ते जहाँ एक ओर पश्चिम बंगाल व हिमालयी क्षेत्र जैसे सिक्किम व हिमाचल में बारिश व गरज-चमक के आसार हैं तो वहीं पश्चिमी राजस्थान, महाराष्ट्र और उड़ीसा राज्यों में भी बारिश की संभावना है।

इसके अतिरिक्त राजधानी दिल्ली समेत हरियाणा व चंडीगढ़ में भी बारिश, धूल भरी आंधी की संभावना व्यक्त की गई है।

इस मौसम में वैज्ञानिक सलाह के तौर पर अनाज के भंडारण का विशेष ध्यान देने का सुझाव दिया गया है। भंडारगृहों में नमी आदि पर खास नजर रखनी होगी। इस समय भंडारण किए गए अनाज को रखने से पूर्व उसके पूरी तरह से सूखा होना जरूरी है। गेहूँ की जिस फसल में बाली में दूध आने की अवस्था है उसमें सिंचाईं करना आवश्यक है।

इसके साथ-साथ इन दिनों हरा चना की बुवाई करना जरूरी है। इसके लिए पूसा विशाल, पूसा रत्ना, पूसा 5931, पूसा बैसाखी, पीडीएम-11, SML-32, SML-668 हायब्रिड किस्मों की बुवाई की जा सकती है।

खीरे की बुवाई के लिए पूसा उदय व भिंडी की A-4, परबनी क्रांति, अर्का अनामिका संकर किस्मों की बुवाई कर देनी चाहिए। भिंडी की फसल में माइट के प्रकोप पर निगरानी करने की आवश्यकता है। इथियान की 1.5 मिलि./लिटर पानी के साथ उपयोग करने की जरूरत है। रबी की फसल की कटाई के बाद खेत की गहरी जुताई करने की सलाह दी जाती है। साथ ही उन फसलों की बुवाई की जा सकती है जो हरी खाद बनाती है।

मानसून की यह भविष्यवाणी सुनकर हर किसान का मन झूमने लगेगा

किसानों और खेती से जुड़े लोगों के लिए अच्छी खबर है. इस साल देश में मानसून सामान्य रहेगा. मौसम की जानकारी देने वाली निजी एजेंसी स्काईमेंट ने मॉनसून का पहला अनुमान जारी कर दिया है. स्काईमेट को मुताबिक, इस साल देश में मॉनसून सामान्य रहने की संभावना है.

स्काईमेट के मुताबिक, इस साल जून-सितंबर के बीच 100 फीसदी मॉनसून का अनुमान है. यही नहीं इस बार बारिश की शुरुआत भी समय पर होगी. वहीं, सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना 20 फीसदी है. स्काईमेट की वेबसाइट पर जारी रिपोर्ट के मुताबिक, इस बार सूखा पड़ने की संभावना भी जीरो फीसदी है.

क्या है स्काईमेट की रिपोर्ट में

स्काईमेट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि इस साल सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सिर्फ 20 फीसदी है. वहीं, सामान्य से ज्यादा बारिश होने की संभावना भी 20 फीसदी और भारी बारिश की संभावना 5 फीसदी है. स्काईमेट के मुताबिक इस साल सूखा पड़ने की आशंका नहीं है.

96 फीसदी से 104% बारिश

स्काईमेट के मुताबिक इस साल जून-सितंबर के बीच 100 फीसदी मॉनसून का अनुमान है. पूरे सीजन के लिए 96 से 104 फीसदी बारिश होने की संभावना 55 फीसदी है. रिपोर्ट के अनुसार पूरे सीजन में भारी बारिश की संभावना महज 5 फीसदी है.

उत्तर भारत में कैसी होगी बारिश

उत्तर भारत की बात करें तो वाराणसी, गोरखपुर, लखनऊ, शिमला, मनाली, देहरादून, श्रीनगर सहित पूर्वी यूपी, उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू एंड कश्‍मीर के इलाकों में सामान्य से ज्यादा बारिश की उम्मीद है. यहां भारी बारिश की भी संभावना है. वहीं, दिल्ली, अमृतसर, चंडीगढ़, आगरा, जयपुर और जोधपुर के इलाकों में सामान्य बारिश की ही उम्मीद है.

यहां हो सकती है भारी बारिश

मध्य भारत में मुंबई, पुणे, नागपुर, नासिक, इंदौर, जबलपुर, रायपुर और आस-पास के इलाकों में भारी बारिश की उम्मीद है. वहीं, अहमदाबाद, वडोदरा, राजकोट और सूरत जैसे शहरों में सामान्य बारिश हो सकती है.

दक्षिण भारत में कम होगी बारिश

दक्षिण भारत की बात करें तो चेन्नई, बंग्लुरु, तिरुवनन्तपुरम, कोन्नूर, कोझिकोड, हैदराबाद, कर्नाटक के तटीय इलाकों में विजयवाड़ा, विशाखापत्तनम में इस बार मानसून सामान्य या सामान्य से कुछ कम रह सकता है.

किस महीने कितनी बारिश

  • जून 2018: जून में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 111 फीसदी रह सकता है. इस दौरान 164 एमएम बारिश हो सकती है.
  • जुलाई 2018 में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 97 फीसदी रह सकता है. इस दौरान 289 एमएम बारिश होने की उम्मीद है.
  • अगस्त 2018 में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 96 फीसदी रह सकता है. इस दौरान 261 एमएम बारिश होने की उम्मीद है.
  • सितंबर 2018 में लॉन्ग पीरियड एवरेज (LPA) 101 फीसदी रह सकता है. इस दौरान 173 एमएम बारिश होने की उम्मीद है.

जानिए इस समय बढ़ते तापमान के साथ किस फसल की बुवाई की जाए,

किसान भाइयों इस हफ्ते तापमान के आधार पर आपको केंद्रीय कृषि अनुसंधान संस्थान नई दिल्ली के सुझाव के अनुसार कुछ फसलों की बुवाई कर देनी चाहिए। इसमें चारा के लिए कुछ प्रमुख फसलें जैसे मक्का सौर्गम, बाजरा लोबिया आदि हैं। लेकिन इनकी बुवाई के लिए पर्याप्त मात्रा में नमी सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। बेबीकार्न की संकर किस्म HM-4 की बुवाई के लिए मौसम अनुकूल है।

तो वहीं सब्जी की फसलों में भिंडी की फसल की बुवाई कर सकते हैं जिसके लिए आपको खेत में नमी बरकारार रखनी होगी साथ ही इसकी कुछ किस्में हैं जो कि इस समय की बुवाई के लिए ठीक रहेंगी जैसे- A-4, बरबनी क्रांति, हिसार उनत, पंजाब पद्मिनी, अर्क अनामिका। इस फसल की बुवाई के लिए 8 से 10 किलोग्राम बीज प्रति एकड़ की दर से बोना चाहिए। बीज बोने से पहले खेत में डीकम्पोज़र एफवाईएम का इस्तेमाल करना चाहिए।

टमाटर की फसल में फल-बेधक के प्रकोप के चलते खराब फल को हाथ से तोड़कर उसे अलग कर देने का सुझाव दिया जाता है साथ ही फेरोमैन ट्रैप 2 से 3 एकड़ की दर से इस्तेमाल कर आप फल-बेधक की पहचान कर सकते हैं। प्याज की समय के अनुरूप की बोई गयी फसल में थ्राइप्स का खतरा बना रहता है जिसके लिए इमिडाक्लोप्रिड की 0.5 मिलीलिटर मात्रा को एक लिटर पानी में 1 ग्राम टाइपोल प्रति लिटर पानी के साथ घोलकर नियंत्रित किया जा सकता है।

आम की फसल में मैंगो मिली बग व आम में लगने वाला फुदका का प्रकोप बढ़ सकता है जिसके नियंत्रण का प्रबंध करना चाहिए। इसके अतिरिक्त काला चना व हरा चने की बुवाई के लिए इस समय का मौसम अनुकूल है जिसके लिए आपको हरा चना के लिए पूसा विसाल, पूसा 9531, पीडीएम-11, एसएमएल- 668 जबकि काला चना के लिए पंत उर्द-19, पंत उर्द-30 व 35 किस्मों की बुवाई का सुझाव दिया गया है।

सब्जी की खेती में बढ़ते तापमान के आधार पर किसान भाइयों को सिंचाईं करने की सलाह है जिसके फलस्वरूप नमी बरकरार रखी जा सके।

इस साल मौसम लेकर आएगा किसानों के चेहरों पर रौनक,

देश में खेती किसानी से जुड़े लोगों के लिए राहत की खबर है। मौसम विभाग के अनुसार इस साल मानसून सामान्य रहेगा। जिसके चलते अधिकतर राज्यों में अच्छी वर्षा की संभावना है। इस बार मानसून पर अल नीनो का कोई भी प्रभाव नहीं होगा। मौसम विभाग के मुताबिक इस साल अगस्त तक अल नीनो का असर मानसून पर होते नहीं दिख रहा है।

अल-नीनो प्रशांत महासागर के भूमध्यीय क्षेत्र की उस समुद्री घटना का नाम है जो दक्षिण अमेरिका के पश्चिमी तट पर स्थित इक्वाडोर और पेरू देश के तटीय समुद्री जल में कुछ सालों के अंतराल पर घटित होती है। इसके तहत समुद्र की सतह के तापमान में असामान्‍य तौर पर इजाफा हो जाता है। यह मानसून को कमजोर कर देती है।

मानसून पर किसी भी तरह का कोई नकारात्मक फैक्टर नहीं दिख रहा है

एजेंसी के अधिकारियों ने बताया कि अभी तक अवलोकन के आधार पर मानसून पर किसी भी तरह का कोई नकारात्मक फैक्टर नहीं दिख रहा है। आईएमडी के निदेशक के जे रमेश ने कहा कि, इस समय इस पर कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी।

इस पर हम दो सप्ताह पर ही कुछ कहने की स्थिति में होंगे। मानसून पर पहली मौसम रिपोर्ट मध्य अप्रैल तक आएगी। आपको बता दें कि इससे पहले ला नीना कमजोर रहने के चलते अनुमान जताया जा रहा था कि अल नीनो पहले ही सक्रिय हो सकता है।

अल नीनो का सीधा असर भारत की फसलों पर पड़ता है

निजी अमेरिकी संस्था रेडिएंट सॉल्यूशंस ने अनुमान जताया था कि इस बार अल नीनो की वजह से मानसून कमजोर रह सकता है। अगर मानसून कमजोर रहता है तो इसका सीधा असर भारत में सोयाबीन, मूंगफली और कपास की फसलें पड़ेगा।

आईएमडी की रिपोर्ट में मार्च-मई अवधि के दौरान तापमान में एक उदार ला नीना का भी उल्लेख है। एपिसोड समुद्र तल के नीचे के औसत तापमान का प्रतिनिधित्व करते हैं। ला नीनो प्रभाव अल नीनो के एकदम उलट होता है। ला नीनो सामान्य या उससे अधिक सामान्य वर्षा से संबंधित है।

4 महीनों में साल भर होने वाली बारिश की 70 फीसदी बारिश होती

अमेरिकी राष्ट्रीय महासागर और वायुमंडलीय प्रशासन (एनओएए) की टिप्पणी में शुरुआती मार्च में भारतीय मानसून के लेकर अच्छी खबर दी थी। मानसून सीजन के 4 महीनों में साल भर होने वाली बारिश की 70 फीसदी बारिश होती है। अगर मानसून बेहतर रहता है तो यश्रल एरिया में सरकार अपनी योजनाओं को सही से लागू कराने में भी सफल होगी। वहीं बेहतर मानसून से रूरल इकोनॉमी को बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

मौसम ने फिर बढ़ाई किसानो की चिंता ,

देश के अनेक राज्यों में आगामी घंटो मै मौसम बदल सकता है. खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर में तो बाशि के आसार प्रबल हो गए हैं. मौसम विभाग के मुताबिक, 20 व 21 मार्च को दिल्ली-एनसीआर के शहरों में बारिश का पूर्वानुमान है.

इससे तापमान में गिरावट आएगी. गुजरात में अहमदाबाद समेत उत्तर और मध्य गुजरात में कई स्थानों पर बादलयुक्त मौसम और कुछ स्थानों पर बूंदा-बांदी और हल्की वर्षा के लिए दक्षिणी पाकिस्तान के ऊपर मौजूद एक पश्चिमी विक्षोभ के कारण पैदा हुई चक्रवाती प्रणाली जिम्मेदार है.

स्थानीय मौसम केंद्र के निदेशक तथा वरिष्ठ मौसम विज्ञानी जयंत सरकार ने बताया कि बादल कल तक पूरी तरह छंट जायेंगे. वर्षा की भी ज्यादा संभावना इसलिए नहीं है क्योंकि ऊपरी वातावरण में नमी नहीं है.

ज्ञातव्य है कि मौसम में बदलाव के चलते अहमदाबाद के अलावा उत्तर गुजरात के साबरकांठा, पाटन, अरावल्ली जिलों तथा कुछ अन्य स्थानों पर बादल छा गये. कुछ स्थानों पर बूंदाबांदी अथवा हल्की वर्षा भी हुई. दिल्ली में रविवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो सामान्य से एक डिग्री अधिक था. न्यूनतम तापमान 14.6 डिग्री दर्ज किया गया.

जो सामान्य से लगभग दो डिग्री कम था. मौसम विभाग के मुताबिक, पश्चिमी विक्षोभ के चलते हिमालयन रेंज के साथ उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में मौसम बदलेगा. पहाड़ों पर बारिश होगी. इसका असर यह होगा कि 20 मार्च यानी मंगलवार को दिल्ली, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान में कहीं-कहीं तो 21 मार्च को इन राज्यों में ज्यादातर हिस्सों में बारिश होगी. इससे तापमान में गिरावट दर्ज की जाएगी.

मौसम विशेषज्ञ महेश पालावत के अनुसार पंजाब और हरियाणा में 21 मार्च को बारिश की गतिविधियां अधिक होंगी। पंजाब के तराई क्षेत्रों में 22 मार्च को भी एक-दो बार बारिश हो सकती है। हरियाणा में 22 मार्च से जबकि पंजाब में 23 मार्च से बादल विदा हो जाएंगे और बारिश बंद हो जाएगी।