अब दिल्ली शहर के अंदर होगी खेती

क्या दिल्ली में रहते हुए आप अपने घर में खेती करने में बारे में सोचते हैं? आपको भले ही यह कल्पना लगे, लेकिन यह मुमकिन है। खेती को तकनीक से जोड़ने में मिसाल कायम कर चुके देश इजरायल में शहरी खेती की विशेषज्ञ गैलिआ क्यूकीरमान पिछले दिनों दिल्ली में थीं।

उन्होंने दिल्ली को शहरी खेती के लिए बहुत मुफीद बताते हुए कहा कि यहां इसका इस्तेमाल न होना क्राइम है। हिब्रू यूनिवर्सिटी में लेक्चरर गैलिया ने शहरी खेती के कई और पहलुओं के बारे में बताया।

शहरी खेती का कॉन्सेप्ट क्या है और ग्रामीण खेती से किस तरह अलग है?

शहर का चाहे कोई भी कोना क्यों न हो, खेती मुमकिन है। छतों पर, दीवारों पर, सार्वजनिक भवनों (स्कूलों, थिअटर आदि) और यहां तक कि सड़कों के बीच और रेलवे पटरियों की बगल में। शहरी खेती किसी तरह से परंपरागत खेती की जगह नहीं ले सकती, लेकिन इसकी पूरक बन सकती है।

परंपरागत खेती की तुलना में शहरी खेती बहुत कम जगह लेती है। फसलों के विकास में कम समय लगता है। भारी उपकरणों के साथ काम की जरूरत नहीं है। इसकी उपज में वजन कम और मात्रा ज्यादा होती है।

क्या दिल्ली जैसे बिजी शहर में खेती मुमकिन है?

बेशक! ऐसे कई गरीब लोग हैं जिन्हें खाद्य सुरक्षा की जरूरत है। शहर में हर जगह शहरी खेती विकसित नहीं करना वास्तव में एक अपराध है। आप किसी भी प्रकार के भारतीय भोजन को विकसित कर सकते हैं, जिसका बढ़ना आसान हो। शहरी कृषि का सबसे अच्छा उत्पादन हरी पत्तियों का है, जिसका विकास चक्र छोटा है। यहां तक कि किराये पर रहने वाले भी यह काम कर सकते हैं। हर कोई एक छोटे कंटेनर में भोजन उगा सकता है, जिसे एक अपार्टमेंट से दूसरे में ले जाया जा सकता है।

शहरी खेती के कॉन्सेप्ट में इजरायल के पास क्या नया है?

इजरायल खेती में अगुआ देश है और यह स्टार्ट-अप नेशन के रूप में भी जाना जाता है। खेती में वहां जो ज्ञान विकसित किया गया है, उसे तकनीक के साथ जोड़ा गया है। इससे आप ऑटोमेशन के जरिए खुद बेहद आसानी के साथ भोजन उगा सकेंगे। इस तरह के सिस्टम हैं कि परंपरागत खेती के मुकाबले महज 10 फीसदी पानी का इस्तेमाल कर खेती की जा सके।

यहां तक कि खारे पानी में भी खेती का इंतजाम है। तकनीक के जरिए उपज की ऑटोमैटिक देखभाल और विकास के लिए संकेत मिलते हैं। उन चिंताओं को मिटाया जा सकता है कि पौधा किस माध्यम (पानी या मिट्टी) में रखा जाए।

अपने घर में खेती के लिए जानकारी कैसे हासिल की जा सकती है? क्या इंटरनेट मददगार होगा?
हर कोई कैसे भोजन उगा सकता है, इसे समझाने के लिए शॉर्ट कोर्सेज हैं। इंटरनेट कोर्स की जानकारी या सवालों के जवाब ढूंढने में मदद कर सकता है।

आप रेडी टु यूज सिस्टम खरीद सकते हैं या अपना सिस्टम भी बना सकते हैं। तकनीकें ऑटोमैटिक हैं, सेमी ऑटोमैटिक भी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि 200 साल पहले औद्योगिक क्रांति से पहले, ज्यादातर लोग किसान थे, और भोजन उगाने का ज्ञान आम था। शहरी खेती नया काम नहीं, बल्कि जड़ों की ओर लौटना है।

शहरी खेती के फायदे

शहर की आबादी के आसपास के क्षेत्र में फसलें उगाने से इसके उपयोग पर असर पड़ता है। ताजा फल और सब्जियों से ज्यादा पोषक तत्व मिलते हैं, आबादी की सेहत बेहतर होती है। खान-पान की आदतों में भी बदलाव होता है।

जो आबादी हरी पत्तेदार सब्जियां ज्यादा उगाएगी, वहां के बच्चे ये सब्जियां ज्यादा खाएंगे। भोजन की बर्बादी भी कम होगी। परंपरागत खेती की उपज और इसके उपभोग करने वालों में दूरी के कारण भावनात्मक जुड़ाव नहीं होता। किसानों की मेहनत की इज्जत नहीं होती। भोजन की बर्बादी भी होती है। पश्चिमी यूरोप में परिवारों में 40% से अधिक भोजन फेंक दिया जाता है।

शहरी खेती में कुछ ही घंटों में भोजन खेत से लेकर प्लेट तक की दूरी तय कर लेगा। जनता भोजन को अपने पास ज्यादा समय तक रख सकेगी। इसे मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन चेन से नहीं गुजरना होगा। ट्रांसपोर्टेशन कम होने से वायुप्रदूषण घटेगा।

प्लांट्स की मौजूदगी से शहर के क्लाइमेट में भी बदलाव आएगा। शहरी खेतों के आस-पास की प्रॉपर्टी के दाम बढ़ते देखे गए हैं। न्यू यॉर्क शहर में एक औद्योगिक इमारत में 30% ऑक्यपेंसी थी, लेकिन छत पर खेत बनते ही वेटिंग लिस्ट हो गई। बिल्डिंग के सामने रेस्तरां भी खुल गया, जहां छत की खेती का उत्पाद इस्तेमाल होता था।

अर्थी में इस्तेमाल होने के बाद भी चिता में  क्यों नहीं जलाई जाती बांस की लकड़ी ?

मृत्यु संस्कार कार्यों में लाश को रखने के लिए “अर्थी”  में तो इस लकड़ी को प्रयोग किया जाता है  लेकिन जलाते समय उसे हटा दिया जाता है। यकीन मानिए इसका वैज्ञानिक कारण बेहद भयभीत करने वाला है, जो शायद ही कभी आपने सोचा हो। शास्त्रों में भी वृक्षों की रक्षा को विशेष महत्व दिया गया है।
 
वृक्षों की पूजा इसका उदाहरण है, लेकिन चंदन आदि सुगंधित वृक्षों की लकड़ियां  कुछ विशेष कार्यों या मतलब से जलाने की बात कही गई है। यहां यह विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि शास्त्रानुसार बांस की लकड़ी जलाना विशेष रूप से वर्जित है। ऐसा करना भारी पितृ दोष देने वाला माना गया है।
 
बांस की लकड़ी पर्यावरण संतुलन में आम वृक्षों की तरह ही उपयोगी है। मजबूत होने के कारण इसे फर्नीचर तथा कई प्रकार के सजावटी सामानों में भी उपयोग किया जाता है। इसे जलाना आम पेड़ों से ज्यादा खतरनाक क्यों है?
 
आपको जानकर हैरानी होगी कि बांस की लकड़ी में “लेड”  और कई प्रकार के भारी धातु होते हैं जो जलने के बाद ऑक्साइड बनाते हैं। “लेड” जलकर “लेड ऑक्साइड” बनाते हैं जो न सिर्फ वातावरण को दूषित करता है बल्कि यह इतना खतरनाक है कि आपकी सांसों में जाकर लिवर और न्यूरो संबंधित परेशानियां भी दे सकता है।
 
लाश भारी होती है, इसके अलावा बांस की पतली कमानियों से शैय्या तैयार करना भी आसान होता है, इसलिए अर्थी में इसका इस्तेमाल किया जाता है  लेकिन जलाने की मनाही है। संभवत: इसके ये वैज्ञानिक दुष्परिणाम ही इसका कारण रहे हों।
 
आपको जानकर हैरानी होगी कि बांस को भले ही आप समान्य रूप में जलाने में इस्तेमाल नहीं करते, लेकिन आज लगभग हर दिन लोग इसका प्रयोग घरों में जलाने में कर रहे हैं जिसका आपको पता भी नहीं है।
 
अगरबत्ती में जो स्टिक प्रयोग की जाती है वह बांस ही होता है। इसके अलावा इसे बनाने में “फेथलेट केमिकल” का प्रयोग किया जाता है जो फेथलिक एसिड का ईस्टर होता है। इसलिए अगरबत्ती का धुआं न्यूरोटॉक्सिक और हेप्टोटॉक्सिक होता है जो मस्तिष्क आघात और कैंसर का बड़ा कारण बनता है। हेप्टोटॉक्सिक लीवर को भी बुरी तरह प्रभावित करता है।
 
शास्त्रों में भी अगरबत्ती के इस्तेमाल का कोई भी जिक्र नहीं है, बल्कि धूप और दिया जलाने की बात कही गई है। तो मित्रों अब आप जान ही गए होंगे कि बांस को जलाना कितना हानिकारक है। अच्छा लगे तो इसे अपने दोस्तों और परिवारजनों के साथ शेयर कीजियेगा और हमें कमेंट में जरुर बताइएगा।

ऐसे शुरू करें अगरबत्ती बनाने का उद्योग

अगरबत्ती एक बत्ती (स्टिक) है जिसे जलाने पर सुगंधित धुँआ निकलता है।अगरबत्ती का उपयोग लगभगप्रत्येक भारतीय घर, दुकान तथा पूजा-अर्चना के स्थान पर अनिवार्य रूप से किया जाता है। सुबह की दिनचर्या प्रारंभ करने से पहले प्रत्येक घर में अगरबत्ती जलाई जाती है, जो स्वतः ही इस उत्पाद की व्यापक खपत को दर्शाता है।

अगरबत्तियां विभिन्न सुगंधों जैसे चंदन, केवड़ा, गुलाब आदि में बनाई जाती हैं। अधिकांशतः उपभोक्ताओं को इनकी किसी विशेष सुगंध के प्रति आकर्षण बन जाता है तथा वे प्रायः उसी सुगंध वाली अगरबत्ती को ही खरीदते हैं।इसके अलावा विदेशो जैसे लंदन, मलेशिया, नेपाल, भूटान, वर्मा, मारीशस, श्रीलंका इत्यादि देशो में भी अगरबत्ती का उपयोग किया जाता है |

इसलिए अगरबत्ती बनाने का बिज़नेस निरंतर चलने वाला व्यवसाय है | क्योकि इसकी मांग सिर्फ हमारे ही देश में नहीं, अपितु विदेशों में भी बराबर बनी रहती है | यही कारण है की, कोई भी व्यक्ति इस business में अपना लघु उद्योग, कुटीर उद्योग/ गृह उद्योग आदि स्थापित करके अपनी कमाई कर सकता है |

अगरबत्ती बनाने के लिए क्या सामान चाहिए

बड़े पैमाने पर अगरबत्ती का प्रोडक्शन करने के लिए निम्नलिखित सामग्री का भी उपयोग किया जाता है |

  • चारकोल पाउडर
  • जीगत पाउडर (Gigatu)
  • वाइट चिप्स पाउडर
  • कुप्पम डस्ट
  • DEP (DI Ethyl Phthalate)

अगरबत्ती कैसे बनायें (How to make):

  1. ऊपर उल्लेखित Material को दी हुई मात्रा के हिसाब से, पूर्ण रूप से अच्छी तरह मिलाकर इसका मिश्रण तैयार किया जाता है
  2. उसके बाद इस मिश्रण में से पानी की मात्रा को कम करने के लिए छान लिया जाता है |
  3. मिश्रण से पानी की मात्रा कम होने के बाद मिश्रण का जो अवशेष शेष बचता है | उसको अच्छी तरह गूँथ लिया जाता है, ताकि वह एक लसादार मिश्रण बनकर Sticks में आसानी से चिपक सके |
  4. फिर मिश्रण को फुल्ली आटोमेटिक मशीन के अंदर डाल दिए जाता है और एक तरफ स्टिक रख दी जाती है|
  5. उसके बाद मशीन बड़ी तेज़ी से अपने आप ही सारी स्टिक्स पर अगरबत्ती का मिश्रण लगते जाती है|

उपर्युक्त agarbatti making विधि से आपको idea हो गया होगा, की अगरबत्ती किस तरह से बनायीं जाती है | और जो इस विधि में सामग्री दी गई है यह जरुरी नहीं है की अगरबत्ती बनाने में सिर्फ इसी सामग्री का उपयोग होता है | चूँकि अगरबत्ती का उद्देश्य सुगंध फैलाना होता है | इसलिए कोई भी व्यक्ति Agarbatti Making Process में अन्य सुगन्धित ingredients का भी उपयोग कर सकता है |

और जानकारी के लिए वीडियो भी देखें

डिजिटल पेमेंट सर्विस सेंटर खोलें और हर महीने कमाएं 50 से 60 हजार रूपए

नोटबंदी के बाद भारत सरकार द्वारा कैशलेस पेमेंट को बढ़ावा दे रही है .इसी लिए वो भारत के लोगों के लिए डिजिटल पेमेंट सेंटर की सुविधा ले के आ रही है जिस से आम लोग भी ऑनलाइन पेमेंट कर सकेंगे . इस लिए आज कल डिजिटल पेमेंट सेंटर से कमाई के बहुत रास्ते खुल गए हैं, आप डिजिटल पेमेंट सेंटर को खोल कर हर महीने 50 से 60 हजार महिना कमा सकतें है.

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CSC सेंटर में होने वाले कार्य

आप अपने CSC सेंटर में पैन कार्ड, आधार कार्ड, इलेक्शन कार्ड, मतदाता सूचि में नाम डलवाना, पासपोर्ट बनाना आदि सुबिधाएं दे सकतें है. इस के अलावा भी आप मोबाइल रिचार्ज, मोबाइल बिल पेमेंट, DTH रिचार्ज डाटा कार्ड रिचार्ज, LIC प्रीमियम जैसी और भी बहुत सी सेवाए उपलब्ध करवा सकतें हैं. जादा जानकारी के लिए पूरा विडियो देखें,

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ऐसे शुरू करें अपना पेपर नैपकिन बनाने का बिज़नेस

पेपर नैपकिन बनाने का बिज़नेस की बात करें, तो शुरू में इसे 2-5 लोगों द्वारा छोटे लेवल पर आसानी से शुरू किया जा सकता है | टिश्यू पेपर यानिकी नैपकिन्स वर्तमान में एक ऐसी वस्तु बन गई है जिसका उपयोग सर्वत्र जैसे रेस्टोरेंट, ढाबा, रेहड़ी, ऑफिस कैंटीन, वाशरूम लगभग सभी जगहों पर होने लगा है |

पेपर नैपकिन बिज़नेस स्टार्ट करने के लिए अन्य बिज़नेस के मुकाबले लेबर की भी कम आवश्यकता होती है | जहाँ तक पेपर नैपकिन बनाने वाली मशीन का सवाल है यह 4-5 लाख तक की कीमत में बाज़ार में आसानी से उपलब्ध है, जो की इस Business को Start करने में आने वाला मुख्य और सबसे बड़ा खर्चा है |

लागत खर्चा

अगर आप पेपर नेपकिन बनाने की यूनिट लगाना चाहते हैं तो सबसे पहले लगभग 3.50 लाख रुपए का इंतजाम करना होगा। इतना पैसे का इंतजाम होते ही आप किसी भी बैंक के पास मुद्रा स्‍कीम के तहत लोन के लिए अप्‍लाई कर सकते हैं। 3.50 लाख रुपए आपके पास होने के कारण बैंक आपको लगभग टर्म लोन के तौर पर लगभग 3 लाख 10 हजार रुपए और वर्किंग कैपिटल लोन 5 लाख 30 हजार रुपए तक मिल जाएगा।

कमाई 

आप साल में लगभग 1 लाख 50 हजार किलोग्राम पेपर नेपकिन का प्रोडक्‍शन कर सकते हैं। यह नेपकिन लगभग 65 रुपए प्रति किलोग्राम की दर से बेच सकते हैं। यानी कि आप साल भर में लगभग 97 लाख 50 हजार रुपए का टर्न ओवर कर सकते हैं।

ऐसे में यदि आप सारे खर्च को जोड़ दें तो लगभग 92 लाख 50 हजार रुपए खर्च होंगे। यानी कि आप पहले साल में 5 लाख रुपए बचा सकते हैं। यानी कि आप लगभग 42 हजार रुपए महीना का प्रॉफिट होगा।

और ज्यादा जानकारी के लिए वीडियो देखें

अपने घर में ऐसे त्यार करें LED बल्ब और कमाइए 20 से 25000 रुपया महीना

दोस्तों आज हम आप को घर पर LED बल्ब त्यार करने का तरीका बताएँगे आप को पता ही है की जो बल्ब बाजार से मिलते है वो बहुत ही महंगे होते है । लेकिन आप इसको घर में ही बना सकते है वो भी बिना कोई ट्रेनिंग लिए ।

इसके लिए बस आपको LED बल्ब का सामान लाना है जो बाजार या ऑनलाइन आसानी से मिल जाता है और उसके बाद सारे सामान को आसानी से जोड़ा जा सकता है ।

इस तरह से आप को एक बल्ब के पीछे कम से कम 20 – 30 रुपए बच जाते है । और महीने में 20000 रुपए तक कमा सकते है । इसकी सारी जानकारी नीचे दिए हुए वीडियो में दी गई है ।

घर बैठे LED बल्ब बनाने का काम कैसे शुरू करें

घर में LED बल्ब ऐसे त्यार करें