बंपर फसल के लिए ऐसे करें बेड विधि से चने की खेती

रबी फसलों का सीजन चल रहा है। इस सीजन में चने की बुवाई की जाती है। और आज हम आपको चने की खेती करने की एक ऐसी विधि के बारे में बताने जा रहे हैं जिससे न सिर्फ किसानों की लागत कम होगी बल्कि उसके साथ ही उत्पादन भी बढ़ेगा। मैं बात कर रहा हूं बेड विधि से चने की खेती के बारे में। मध्य प्रदेश के बुत से किसान इस विधि से खेती कर रहे हैं।

चना रबी ऋतु ने उगायी जाने वाली महत्वपूर्ण दलहन फसल है। विश्व के कुल चना उत्पादन का 70 प्रतिशत भारत में होता है। देश में कुल उगायी जाने वाली दलहन फसलों का उत्पादन लगभग 17.00 मिलियन टन प्रति वर्ष होता है। चने का उत्पादन कुल दलहन फसलों के उत्पादन का लगभग 45 प्रतिशत होता है।

मध्य प्रदेश के हरदा जिले के खिरकिया गाँव के किसान आशीष वर्मा ने बताया, ”बेड़ विधि से चने की खेती करने से कई तरह के फायदे होते हैं। बेड पर बोया गया चना नर्म जमीन पर रहता है जिससे पौधे का विकास अच्छे से होता है।

” उन्होंने बताया, ”इस विधि से खेती करने से अगर बारिश हो भी जाती है तो कोई नुकसान नहीं होता है। इसके साथ ही सिंचाई करने के लिए कम पानी की ज़रूरत पड़ती है। खरपतवार भी कम होता है।” चने की बुवाई अक्टूबर से नवंबर महीने में की जाती है, लेकिन चने की बिटकी किस्म की बुवाई अभी भी की जा सकती है।

देश में चने का सबसे अधिक उत्पादन मध्य प्रदेश में होता है। जो कुल चना उत्पादन का 25.3 प्रतिशत पैदा करता है।

”साधारण तरीके से चने की खेती करने से एक एकड़ में जहां 10 से 12 कुंतल उत्पादन होता है तो वहीं बेड़ विधि से खेती करने से प्रति एकड़ उत्पादन 14 से 16 कुंतल होता है,” आशीष ने बताया, ”बेड विधि से खेती करने के लिए सबसे पहले कल्टीवेटर की सहायता से खेत की जुताई करें फिर उसके बाद पाटा लगाकर खेत को बराबर कर दे।

इसके बाद पलेवा कर दें और फिर जब खेत बुवाई करने के लायक हो जाए तो चने की बुवाई कर दें।” आशीष 30 एकड़ जमीन पर खेती करते हैं, जिसमें से 7 एकड़ पर चने की खेती करते हैं। उन्होंने बताया कि बेड विधि से बुवाई करने से खरपतवार कम होता हैं और निराई गुड़ाई की जरूरत कम होती है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *