क्या अब धान की फसल लेने वाले किसान जाएंगे जेल?

मध्यप्रदेश की शिवराज सरकार में किसानों के लगातार प्रदर्शन की खबरें तो आपने पढ़ी होंगी लेकिन प्रदेश सरकार अब ऐसा कदम उठाने जा रही है जिससे शिवराज सरकार फिर सुर्खियों में आ सकती है। राज्य प्रशासन ने गर्मी के मौसम में धान की फसल लेने वाले किसानों को उनकी जगह दिखा दी है।

दरअसल शुक्रवार को यहां संभागायुक्त टीसी महावर की अध्यक्षा में जल उपयोगिता समिति की बैठक हुई। जिसमें राज्य शासन के निर्देशों का हवाला देते हुए प्रशासनिक अमले से दो टूक कहा कि जलाशयों में उपलब्ध पानी सबसे पहले उद्योगों को दें। मनाही के बाद भी अगर किसान धान की फसल लेते हैं तो उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जिले में इस बार बहुत कम बारिश के कारण बांधों व जलाशयों में पानी की उपलब्धता बीते वर्ष की तुलना में कम है। राज्य शासन की चिंता इस इस बात को लेकर है कि जिले में संचालित होने वाले उद्योगों को अगले बारिश के मौसम में पानी की आपूर्ति हो पाएगी या नहीं शुक्रवार को बैठक के दौरान राज्य सरकार की चिंता की झलक दिखाई दी।

बैठक के दौरान पूरे समय इसी बात को लेकर चर्चा होती रही कि किस जलाशय में कितना पानी है। जिले में स्थापित उद्योगों को उनकी मांग के अनुसार पूरे गर्मी भर पानी दे पाएंगे या नहीं। जल भराव का आंकलन करने के बाद कमिश्नर ने कहा कि बांधों व जलाशयों में पानी का पहला उपयोग उद्योगों का होगा। इसके बाद पेयजल आपूर्ति के लिए रिजर्व वाटर रखा जाएगा। रिजर्व वाटर के बाद अगर जलाशयों व बांधों में पानी बच पाता है तो रबी फसल के रुप में दलहन व तिलहन की खेती करने वाले किसानों को जल आपूर्ति की जाएगी।

बैठक में कमिश्नर ने साफ कहा कि जल्द ही कृषि, सिंचाई व पीएचई विभाग के अधिकारियों की बैठक कर स्थिति के अनुसार जल भराव क्षेत्र घोषित करने और भूजल स्तर के दोहन को रोकने के लिए कड़े कानून बनाए जाए।

संभाग के चार वृहद जलाशयों मिनीमाता हसदेव बांगों, खारंग जलाशय, मनियारी जलाशय और केलो परियोजना तथा मध्यम जलाशय घोंघा, मांड, केदार, पुटका, किंकारी और ख्महार पाकुट जलाशयों में वर्तमान में 64.23 प्रतिशत जल उपलब्ध है तथा 337 लघु जलाशयों में 25.9 प्रतिशत जल भराव स्थिति है।

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