जापान के इस वैज्ञानिक के फार्मूले से आप कर सकते है सूखे खेत में धान की खेती

अगर आप सोचते है के धान की खेती के लिए बहुत ज्यादा पानी की जरूरत होती है तो आप गलत सोच रहे है ।आप सूखे खेत में भी धान की खेती कर सकते है । ऐसा संभव किया था जापान के शिकोकु द्वीप पर रहने वाले मासानोबू फुकुओका (1913-2008) एक किसान और दार्शनिक ने अपने जीवन के अगले पैंसठ सालों तक उन्होंने प्राकृतिक खेती को समृद्ध बनाने में लगा दिए।

वो अपने खेत की जुताई नहीं करते, कोई रासायनिक उर्वरक या खाद का इस्तेमाल नहीं करते, और एशिया के तकरीबन सभी भागों में धान की खेती करने वाले किसानों की तरह वो अपने धान के खेत में पानी भी नहीं भरते और तब भी उनके खेतों का उत्पादन जापान के इसी तरह के अन्य खेतों के उत्पादन से ज्यादा या तकरीबन बराबर होता था।

मासानोबू ने कहते थे की उनके पड़ोसी के खेत में चावल के पौधे की ऊंचाई अगस्त के महीने में उनकी कमर तक या उससे ऊफर तक आ जाती थी। जबकि उनके खुद के खेत में ये ऊंचाई करीब आधी ही रहती थी। लेकिन फिर भी वो खुश रहते थे क्योंकि उनको मालूम होता था कि उनका कम ऊंचाई वाला पौधा बाकियों के बराबर या ज्यादा पैदावार देगा।

मासानोबू के मुताबिक आमतौर पर साइज में बड़े पौधे से अगर 1 हजार किलो पुआल निकलता है तो करीब 500 से 600 किलो चावल का उत्पादन होता है। जबकि मासानोबू की तकनीक में 1 हजार किलो पुआल से 1 हजार किलो ही चावल निकलता है। फसल अच्छी रहने पर ये 1200 किलो तक चला जाता है।

क्या है फार्मूला

  • दरअसल, अगर आप चावल के पौधे को सूखे खेत में उगाते हैं तो ये ज्यादा ऊंचे नहीं हो पाते। कम ऊंचाई का फायदा मिलता है। इससे सूरज की रोशनी पौधे के हर हिस्से पर पड़ती है। पौधे के पत्ते से लेकर जड़ तक सूरज की रोशनी जाती है।
  • 1 वर्ग इंच की पत्ती से 6 दाने पैदा होने की संभावता ज्यादा बन जाती है। जबकि पौधे के सबसे ऊपरी हिस्से पर आने 3-4 वाली पत्तियों से ही करीब 100 दाने आ जाते हैं।
  • मासानोबू बीज को थोड़ी ज्यादा गहराई में बोते थे, जिससे 1 वर्ग गज में करीब 20 से 25 पौधे उगते हैं।
  • इनसे करीब 250 से लेकर 300 तक दानों का उत्पादन हो जाता है।
  • खेत में पानी नहीं भरने से पौधे की जड़ ज्यादा मजबूत होती है। इससे बिमारियों और कीड़ों से लड़ने में पौधे को काफी मदद मिलती है।
  • जून महीने में मासानोबू करीब 1 हफ्ते के लिए खेत में पानी को जाने से रोक देते हैं। इसका फायदा ये मिलता है कि खेत के खतरपतवार पानी की कमी की वजह से जल्दी मर जाते हैं। इसका फायदा ये होता है कि इससे चावल के अंकुर ज्यादा अच्छे से स्थापित हो पाते हैं।
  • मासानोबू, मौसम के शुरु में सिंचाई नहीं करते। अगस्त के महीने में थोड़ा थोड़ा पानी जरूर देते हैं लेकिन उस पानी को वो खेत में रूकने नहीं देते।
  • इस सबसे बावजूद उनकी इस तकनीक से चावल की पैदावार कम नहीं होती।

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