खेती के वक़्त इन चंद बातों का ध्यान रख कर आप बचा सकते हैं ट्रेक्टर का बहुत सारा डीज़ल

खेतोंमें खनिज तेल की बहुत ज्यादा खपत है। तेल के दाम दिन प्रतिदिन बढ़ते जा रहे हैं। इइसका प्रयोग किफायत के साथ किया जाए। किसान भाइयों को ट्रैक्टर और इंजनों में डीजल की खपत कम करने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना चाहिए।

आईसीएआर आरसीइआर पटना के वैज्ञानिक प्रेम कुमार सुंदरम, विकास सरकार विक्रम ज्योति का कहना है कि कुछ सावधानी बरतने के बाद किसान भाई काफी डीजल की बचत कर सकते हैं।

} हर ट्रैक्टर इंजन का निर्माता नए मशीन के साथ निर्देश पुस्तिका देता है। उपयोग से पहले यह पुस्तिका ध्यान से पढ़ें और उसमें लिखी सलाह के अनुसार ही मशीन का प्रयोग करें।

} इंजन चालू करने पर यदि टैपित का शोर सुनाई देता है तो इसका मतलब है इंजन में हवा कम जा रही है, इससे डीजल खपत बढ़ जाएगी। इसलिए टैपित को फिर से बंधवाना चाहिए।

} इंजन से काला धुंआ निकलने का मतलब है कि ज्यादा डीजल खर्च हो रहा है। अत: ट्रैक्टरों में 600 घंटे के प्रयोग के बाद इंजेक्टर की जांच कराकर उसे फिर से बंधवाएं।

} यदि इंजेक्टर और इंजेक्शन पंप ठीक होने पर भी काला धुआं लगातार निकल रहा हो तो यह इंजन पर पड़े बोझ की निशानी है। काम के बोझ को उतना ही रखें जिससे इंजन काला धुआं दे और डीजल भी ज्यादा फूंके।

} ठंडे इंजन से काम लेने से उसके पुर्जों में घिसावट अधिक होती है और डीजल भी अधिक खर्च होता है। अत: इंजन चालू करने के बाद तुरंत ही उससे काम लेना शुरू करें।

} ट्रैक्टर के पहियों में हवा कम होने से डीजल की खपत बढ़ती है। पहियों में हवा का सही दबाव रखें। निर्देश पुस्तिका में दिए गए सुझाव के अनुसार ही पहियों में हवा का दबाव रखें।

} ट्रैक्टर ऐसे चलाएं, जिससे खेत में किनारों पर घूमने में कम समय लगे। चौड़ाई की बजाए लंबाई में कार्य करने से ट्रैक्टर का खाली घूमना कम होता है और डीजल की खपत कम होगी।