ये है बैंगन नई किसम ‘डॉक्‍टर बैंगन’, एक सीज़न में देगी 1.5 लाख का मुनाफा

कृषि वैज्ञानिकों ने बैंगन की ऐसी किस्म विकसित की है जो न केवल बीमारियों से बचाएगी बल्कि बुढ़ापे को भी रोकेगी। भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान पूसा ने बैंगन की एक नई किस्म पूसा हरा बैंगन-एक का विकास किया है, जिसमें भारी मात्रा में क्यूप्रेक, फ्रेक और फिनोर जैसे पोषक तत्व हैं जो इसे एंटीऑक्सीडेंट बनाते हैं।

इसके चलते यह बीमारियों से बचाने और बुढ़ापा रोकने में मददगार है।एंटीऑक्सीडेंट वह तत्व हैं जो हमारे शरीर को विषैले पदार्थों से बचाता है और यह ऊर्जा प्रदान करने के साथ ही कई प्रकार की बीमारियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

संस्थान के सब्जी अनुसंधान से जुड़े वैज्ञानिक तुषार कांति बेहरा ने बताया कि नई किस्म में पूर्व की किस्मों की तुलना में रोग प्रतिरोधक क्षमता अधिक है, जिसके कारण इसमें कीटनाशकों का कम छिड़काव किया जाता है।

खरीफ के मौसम में हो सकती है खेती

हरे रंग के अंडाकार गोल बैंगन की यह पहली प्रजाति है, जिसकी खेती खरीफ मौसम में उत्तर भारत के मैदानी क्षेत्र में की जा सकती है। इसकी एक विशेषता यह भी है कि इसे गमले में लगाया जा सकता है।

गोल हरे रंग के इसके फल पर हल्के बैंगनी रंग के धब्बे होते हैं और बाह्य दलपूंज कांटे रहित होते हैं । डॉक्‍टर बेहरा ने बताया कि बैंगन की नयी किस्म रोपायी के 55 से 60 दिनों में फलने लगता है।

खरीफ मौसम के दौरान बैंगन की इस किस्म की खेती से किसान प्रति हेक्टेयर एक से डेढ़ लाख रुपये तक कमा सकते हैं। इसमें बीमारियां कम लगती हैं जिसके कारण इसमें कीटनाशकों का कम इस्तेमाल किया जाता है। आगे पढ़ें कि‍तनी पैदावार हो सकती है

45 टन तक पैदावार

बिहार, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, कर्नाटक,मध्य प्रदेश तथा आन्ध्र प्रदेश में बैंगन की व्यावसायिक पैमाने पर खेती की जाती है और किसान सालों भर इसकी फसल लेते हैं। खाड़ी तथा कुछ अन्य देशों को बैंगन का निर्यात भी किया जाता है।

देश में तीन लाख हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में बैंगन की खेती की जाती है और इसका सालाना करीब 50 लाख टन उत्पादन होता है। इस बैंगन पैदावार काफी अधिक है। इसकी प्रति हेक्टेयर 45 टन तक पैदावार ली जा सकती है। इसके एक फल का औसत वजन 220 ग्राम है।

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