किसान बेटे ने की खुदकुशी, अब पोते को पढाने के लिए धो रही है गंदी बोतलें

एक 62 साल की बूढ़ी महिला जिसका नाम बलबीर कौर है, उसके हंसते-खेलते परिवार को बेटे के एक्सीडेंट ने तोड़कर रख दिया। पांच एकड़ जमीन, एक ट्रैक्टर आैर कार की मालकिन के पास आज कुछ भी नहीं है। बेटे के इलाज के लिए कर्ज लिया था, फिर भी वो ठीक नहीं हुआ।

ठीक नहीं होने से तंग आकर 2016 में घर में ही फंदा लगाकर उसने मौत को गले लगा लिया। इतना सब होते हुए भी उसने हौसला रखा आैर सोचा कि कर्ज देने वाले तंग न करें इसलिए जमीन, ट्रैक्टर, कार सब बेच दिया आैर लोगों का कर्ज चुका दिया।

  • घर की खराब आर्थिक हालत को देखते हुए बहू भी 3 जुलाई 2016 को 10 साल के बेटे को छोड़कर चली गई। अब बुजुर्ग बलबीर गंदी बोतलें धोकर जो पैसे मिलते हैं उससे पोते को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं।
  • उसे उम्मीद है कि पोता पढ़-लिखकर फिर से अच्छे दिन लाएगा, भले ही वो दिन देखने के लिए वह जिंदा रहे या नहीं। पोता भी उम्मीदों पर खरा उतर रहा है। हाल ही में पांचवीं क्लास उसने 97% नंबरों के साथ पास की है आैर दादी के साथ खाली समय में बोतलें भी साफ करवाता है।

गेहूं, धान से भरे रहने वाले बरामदे में आज गंदी बोतलों के क्रेट

  • बुजुर्ग बलबीर कौर ने पुराने दिन याद करते हुए बताया कि उसका हंसता-खेलता परिवार था। बेटा केसर सिंह पिता के साथ अपनी पांच एकड़ जमीन पर आम किसानों तरह खेती करता और खुशहाल जिंदगी व्यतीत कर रहा था। खेती के लिए ट्रैक्टर समेत हर सामान अपना था। घर में कार भी थी। 2011 में परिवार पर मुसीबतों का कहर टूट पड़ा।
  • बेटे केसर का एक्सीडेंट हुआ और कई साल चले इलाज में आमदनी बंद हो गई। उल्टा सिर पर काफी कर्ज चढ़ गया। बेबस होकर बेटे सुसाइड कर लिया। बहू 10 साल का पोता हमारी झोली में डालकर चली गई। कभी घर के इस बरामदे में जहां गेहूं, धान के बोरे और ट्रैक्टर होता था, वहां गंदी बोतलों के ढेर लगे हैं। इतना कहते ही बलबीर कौर की आंखें आंसुओं से भर जाती हैं।

कमाई का नहीं है कोई साधन

  • वे बताती हैं कि कमाई का कोई साधन नहीं है। गंदी बोतलें साफ करने बदले प्रति क्रेट पांच रुपए मिलते हैं। अब काम भी नहीं होता। बहुत कोशिश करने पर कभी 60 तो कभी पोते के हाथ बंटाने से 75 रुपए दिहाड़ी बन जाती है। इसी से परिवार का गुजारा चला रही हूं।
  • मन में दुख है कि किसी सरकार ने परिवार की सुध नहीं ली और न ही किसी योजना के तहत मदद की। आैर कुछ नहीं तो पोते की आगे की पढ़ाई का ही कुछ इंतजाम हो जाए तो सुकून मिल सके। बलबीर कौर के पति अजैब सिंह भी बीमार रहते हैं।

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